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इमरान खान ने बढ़ाया टैक्स: सड़कों पर आए पाकिस्तानी व्यापारी

इमरान खानपाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (इंटरनेशनल मोनेटरी फंड, आईएमएफ) के इशारे पर अपने देश में बिक्री कर (सेल्स टैक्स) बढ़ाया तो बिफरे हुए पाकिस्तानी व्यापारी सड़क पर उतर आए हैं। पाकिस्तान में सारी व्यापार संबंधी गतिविधियाँ ठप पड़ गईं हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी माँगें माने जाने तक हालात ऐसे ही बने रहेंगे। वे सेल्स टैक्स में कमी के अलावा पाकिस्तान में सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों में छूट की माँग भी कर रहे हैं।
पकिस्तान के लिए ऐसी हड़ताल का इससे बुरा समय हो नहीं सकता। एक तरफ़ पाकिस्तान टेरर फाइनेंसिंग पर नज़र रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे सूची से डार्क ग्रे में डाले जाने के बाद ब्लैक लिस्ट किए जाने से बचने के लिए जद्दोजहद कर रहा है, दूसरी ओर तेज़ी से बढ़ती पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले डॉलर की कीमतों के साथ वह 3.3% पर दम तोड़ती अर्थव्यवस्था का शिकार बना हुआ है।
इस बीच हड़तालियों के नेताओं में से एक और ऑल कराची ट्रेडर्स अलायंस के अध्यक्ष अतिक मीर के मुताबिक यह नया टैक्स सिस्टम व्यापारियों को मार देगा। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इसी साल के मध्य में (जुलाई 2019) हुए प्रदर्शनों के बाद यह दूसरा विरोध प्रदर्शन है। इसमें पाकिस्तान के ज्यादातर दुकानें, मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बंद रहे।

जिन टैक्स नियमों के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है, वे पाकिस्तान को आईएमएफ से मिले 6 अरब डॉलर के कर्ज के बदले में लादे गए नियमों में से एक है। आईएमएफ ने जिन शर्तों पर पाकिस्तान को कर्ज दिया था, उनमें से एक थी कि इमरान खान सरकार अपना टैक्स राजस्व बढ़ाने के उपाय करे। इसी के चलते इमरान खान ने सेल्स टैक्स बढ़ाया था। गौरतलब है कि यह अंदेशा पहले से ही जताया जा रहा था कि आईएमएफ से कर्ज लेने के बाद पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था इस एजेंसी के नियमों और शर्तों के इशारों पर नाचने के लिए मजबूर हो जाएगी।
इसके अलावा इमरान खान के सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों से भी वहाँ के व्यापारी परेशान हैं। नियमों के अनुसार 50 हजार पाकिस्तानी रुपए से ऊपर की किसी भी खरीददारी पर पहचान पत्र ज़रूरी होगा। व्यापारी इसे बढ़ाकर 1 लाख पाकिस्तानी रुपए किए जाने की माँग कर रहे हैं।

जनसंख्या पर काबू नहीं होने से मंदी: कॉन्ग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने मनमोहन की ‘चिंता’ की निकाली हवा

जितिन प्रसाद
अर्थव्यवस्था पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ‘चिंता’ की हवा उनकी ही पार्टी के एक युवा नेता जितिन प्रसाद ने निकाल दी है। ​मनमोहन की कैबिनेट में रह चुके जितिन ने मंदी और बेरोजगारी का कारण बढ़ती जनसंख्या को बताया है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री ने इसे ‘मानव रचित संकट’ बताते हुए मोदी सरकार से बदले की राजनीति छोड़ अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए कदम उठाने को कहा था।
जितिन प्रसाद ने कहा, “जनसंख्या नियंत्रण पर देशभर में व्यापक बहस होनी चाहिए। इस पर क़ानून भी बनाया जाना चाहिए। अगर देश को आगे बढ़ना है तो ठोस क़दम उठाने होंगे। मैं सरकार से माँग करता हूँ कि इस मुद्दे पर जो भी क़ानून लाना है, वह लाए।”
उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था डूब रही है, बेरोज़गारी बढ़ रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आबादी को नियंत्रित नहीं किया गया। पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ रहा। जल संकट, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भारत में आबादी बढ़ने के कारण हैं।”
जितिन प्रसाद ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें जनसंख्या नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दे पर एकसाथ खड़े होना चाहिए। बता दें कि इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंख्या का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग छोटा परिवार रख रहे हैं, वे भी एक तरह से देशभक्ति कर रहे हैं।


लाल किले की प्राचीर से जनसंख्या विस्फोट को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से छोटे परिवार की अपील की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताते हुए कहा था कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए नयी चुनौतियाँ पेश करता है। इससे निपटने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को क़दम उठाने चाहिए।