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पूर्व पत्नी पर लगे धोखाधड़ी के आरोप तो भूतपूर्व CM कुमारस्वामी ने किया पहचानने से इनकार

                                       कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पत्नी राधिका
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और साउथ सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री राधिका कुमारस्वामी इन दिनों धोखाधड़ी के मामले को लेकर सुर्खियों में है। केंद्रीय अपराध शाखा पुलिस उनपर शिकंजा कसते हुए लगातार मामले की पूछताछ में जुटी है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीसीबी ने राधिका कुमारस्वामी से बुधवार को करीब चार घंटे तक पूछताछ की थी। इसी बीच खबर आ रही है कि राधिका के पति पूर्व CM कुमारस्वामी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया है।

कुमारस्वामी रविवार को मंड्या जिले श्रीरंगा पटना तालुक के नेरलेकेरे गाँव के दौरे पर थे, उसी दौरान मीडिया के सामने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि राधिका कौन है!। दरअसल, मीडिया उनसे राधिका कुमारस्वामी को मिले CCB (सेंट्रल क्राइम ब्यूरो) के नोटिस के बारे में जानना चाहती थी।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व कर्नाटक सीएम ने कहा, “कौन है राधिका… मुझे नहीं पता कि वो कौन है… मुझे उन लोगों के बारे में क्यों परेशान होना चाहिए, जिनके बारे में मुझे कुछ नहीं पता। मुझे उन लोगों के बारे में मत पूछो जिन्हें मैं नहीं जानता।” खबरों की माने तो 2006 में एचडी कुमारस्वामी ने राधिका से शादी की थी। दोनों की एक बेटी भी है जिसका नाम शमिका कुमारस्वामी है।

राधिक पर युवराज नाम के शख्स के साथ मिलकर एक रियल एस्टेट कारोबारी से धोखाधड़ी कर 75 लाख रुपए लेने का आरोप है। कथिततौर पर युवराज ने अभिनेत्री के एकाउंट में 75 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। इसी सिलसिले में पूर्व सीएम की पत्नी इस वक्त जाँच एजेंसी के सवालों के घेरे में है और शुक्रवार को केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) के सामने पेश हुई थी। बता दें युवराज पहले से ही राजनेताओं और सरकारी कर्मचारियों सहित कई लोगों को धोखा देने के आरोप में गिरफ्तार हैं।

सीसीबी ने पिछले साल दिसंबर में युवराज को गिरफ्तार किया था। एक रियल एस्टेट कारोबारी ने उसके खिलाफ चुनाव में टिकट देने के नाम पर 10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने की शिकायत दर्ज कराई है। युवराज के घर पर छापेमारी के दौरान 26 लाख रुपए बरामद हुआ था।

राधिका कुमारस्वामी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी हैं। साथ ही कन्नड़ फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री भी हैं। उन्होंने मसाला, गुड लक, जनपाड़ा, रुद्र तांडव सहित साउथ सिनेमा की कई फिल्मों में अभिनय किया है और फिल्मी पर्दे पर अपनी खास पहचान छोड़ी है। 

चिन्तन : कर्नाटक में फिर शुरू हुई 'रिसॉर्ट की राजनीति' क्या काले धन का खेल है ?

कर्नाटक में फिर शुरू हुई 'रिसॉर्ट की राजनीति', विश्वास मत से पहले विधायकों को रिसॉर्ट में ले जाया गया
आर.बी.एल निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कर्नाटक में जारी सियासी उठा-पटक के बीच राज्य में 'रिसॉर्ट की राजनीति' की वापसी हो गई है। यह सत्ताधारी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और विपक्षी दल भाजपा विधानसभा में संभावित विश्वास मत के पहले अपने विधायकों पर नजर रखे हुए हैं। उन्हें विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका है। कांग्रेस के 79 विधायकों में से 13 विधायकों ने विधानसभा से अपना इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस ने अपने करीब 50 विधायकों को नगर के बाहरी इलाके स्थित क्लार्क एक्जॉटिका कन्वेंशन रिसॉर्ट भेज दिया है। वहीं, सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और अन्य मंत्री नगर स्थित अपने आवास में ठहरे हुए हैं। बेंगलुरू के बाहर और आसपास के इलाके के विधानसभा क्षेत्रों से आने वाले विधायकों को रिसॉर्ट भेजा गया है हालांकि कई विधायक विधानसभा भवन के पीछे सिटी सेंटर स्थित विधान सौध में ठहरे हुए हैं।  
कांग्रेस प्रवक्ता रवि गौड़ा ने बताया, 'भारतीय जनता पार्टी ने अपने ऑपरेशन कमल के तहत गठबंधन सरकार को अस्थिर करने के लिए पहले ही करीब एक दर्जन विधायकों पर डोरा डाल रखा है। हमने पार्टी के करीब 50 विधायकों को नगर के बाहर क्लार्क एक्जॉटिका कन्वेंशन रिसॉर्ट भेज दिया है।' 
दूसरी तरफ, जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) भी नंदी पहाड़ी के समीप गोल्फशायर रिसॉर्ट में अपने करीब 30 विधायकों पर नजर बनाए हुए है। जेडीएस के तीन विधायकों के इस्तीफा देकर छह जुलाई को मुंबई चले जाने के बाद सात जुलाई से ये विधायक रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं। 
दूसरी तरफ, भाजपा ने भी अपने सभी विधायकों को बेंगलुरू के नजदीक स्थित एक रिसॉर्ट में रखने का फैसला किया है। भाजपा प्रवक्ता जी. मधुसूदन ने बताया, "हमें अपने विधायकों को एक रिसॉर्ट भेजने को बाध्य होना पड़ा है ताकि उनसे एक जगह परामर्श व विचार-विमर्श किया जा सके और उन्हें कांग्रेस व जेडीएस के किसी नेता से बातचीत करने से रोका जा सके।" 
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी एस येदियुरप्पा ने संवाददाताओं को एक सवाल के जवाब में कहा कि हर एक (भाजपा विधायक) को लगता है कि उन्हें एक साथ होना चाहिए और एक साथ विधानसभा में आना चाहिए... मैंने कहा ठीक है। रिसॉर्ट की राजनीति कर्नाटक के लिए कोई नई बात नहीं है। सत्तारूढ़ गठबंधन ने इससे पहले भी संकट के दौरान अपने विधायकों को शहर के बाहरी इलाके के एक रिसॉर्ट में रखा था। आपको बता दें कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि वह सदन में विश्वासमत हासिल करना चाहते हैं और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के. आर. रमेश कुमार से इसके लिये समय तय करने का अनुरोध किया है
इस समस्त प्रकरण में एक बात उजागर होती है जिस पर भारत के हर मतदाता को गंभीर मंथन करना होगा कि जब एक नेता को दूसरे नेता से डर सता रहा और पार्टी को अपने ही विधायकों पर ही भरोसा नहीं, जनता किस आधार पर इन नेताओं और पार्टियों पर विश्वास करे? त्रिशंकु सदन की स्थिति में किस निर्वाचित तथाकथित नेता को कौन खरीद ले, कुछ नहीं पता, यदि कल कोई देश का दुश्मन इन्हे इनकी मुँह-माँगी कीमत में खरीद कर अपनी तरफ कर, जनता का अहित करने को कहे, शायद ये नेता उस अहित को करने में क्षण भर की भी देरी नहीं करेंगे। रिसोर्ट पर हो रहे खर्चे की वसूली टैक्स के रूप में जनता से ही होगी। पार्टी कोई भी सत्ता में आए, वसूलेगी जनता से। यदि रिसोर्ट पर करोड़ों में खर्च हुआ धन जनहित में खर्च किया होता, प्रदेश के विकास से जनता का ही लाभ होता, लेकिन हर पार्टी अपने राजनीतिक स्वार्थ पर धन की बर्बादी कर रही है। दूसरे, तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने राजे-रजवाड़ों का प्रिवीपर्स बंद किया था, लेकिन ये जनता सेवा के नाम पर निर्वाचित इन तथाकथित जनसेवकों को पेंशन भी चाहिए। जो अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ है, कोई नेता अथवा पार्टी नहीं बोलेगी। यदि यह आरोप गलत है, फिर किस आधार पर रिसोर्ट में शरण ले रहे हैं? 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार बुरे समय में साया भी साथ छोड़ देता है, सदियों से चली आ रही कहावत कांग्रेस के साथ घटित हो .....

क्या कहते हैं आंकड़े : 
विधानसभा के 11 दिवसीय सत्र के पहले दिन सदन की बैठक में मुख्यमंत्री ने सत्तारूढ़ गठबंधन के 16 विधायकों के इस्तीफा देने की पृष्ठभूमि में यह अप्रत्याशित घोषणा की। विधायकों के इस्तीफे की वजह से सरकार का अस्तित्व खतरे में है। अध्यक्ष के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन का कुल संख्याबल 116 (कांग्रेस-78, जद(एस)-37 और बसपा-1) है। दो निर्दलीय उम्मीदवारों का भी सरकार को समर्थन प्राप्त था, लेकिन, उन्होंने सोमवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उधर, भाजपा के पास 107 विधायक हैं।224 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 113 विधायकों का समर्थन जरूरी है। अगर 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो गठबंधन का संख्याबल घटकर 100 रह जाएगा। 

क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने : 
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष के आर रमेश कुमार से कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन के 10 बागी विधायकों के इस्तीफों और उनकी अयोग्यता के मसले पर जुलाई 16 तक कोई भी निर्णय नहीं लिया जाये। कांग्रेस के 13 और जदएस के तीन विधायकों समेत 16 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। उन दो निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है, जिन्हें हाल में मंत्री बनाया गया था। (इनपुट-एजेंसियां) 

कर्नाटक: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बागी विधायकों ने की स्पीकर से मुलाकात

'वोट आपने नरेंद्र मोदी को दिया, और मुझसे...' -- कुमारस्वामी, कर्नाटक मुख्यमंत्री

'वोट आपने नरेंद्र मोदी को दिया, और मुझसे...' : लोगों पर भड़कते कैमरे में कैद हुए CM कुमारस्वामीकर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी जून 26 को रायचूर जिले में प्रदर्शन कर रहे लोगों के सामने अपना आपा खोते दिखे। कुमारस्वामी उन पर गुस्सा हो गए और भड़कते हुए यह कहते दिखे कि वह मदद नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दिया है स्थानीय चैनल द्वारा प्रसारित किए गए वीडियो में देखा गया कि मुख्यमन्त्री अपने एक प्रोग्राम के तहत यात्रा पर थे, तभी लोगों के एक समूह से बातचीत करने के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी की खिड़की खोली लोगों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और चिल्लाने लगे, इसके साथ ही उन्होंने नारे लगाए इस पर मुख्यमंत्री को गुस्से में यह कहते हुए सुना जा सकता है 'आप लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दिया है'
आगे कुमारस्वामी ने क्या कहा, यह स्पष्ट नहीं है लेकिन स्थानीय चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, 'क्या मुझे आपका सम्मान करना चाहिए? क्या आपको लाठीचार्ज की जरूरत है? आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दिया और आप चाहते हैं कि मैं आपकी मदद करूं' भाजपा ने कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया की आलोचना की, इसे आक्रामक और हताशा बताया
भाजपा कर्नाटक के महासचिव रविकुमार ने कहा, 'आज रायचूर में हमारे मुख्यमंत्री ने जो कहा, उन्होंने बहुत आक्रामक और सख्त शब्दों में लोगों से कहा कि क्या मैं लाठीचार्ज के लिए पुलिस को बुलाऊं? कुमारस्वामी अपना आपा खो बैठे और कहा कि- आपने नरेंद्र मोदी को वोट दिया। मैं आपका समर्थन नहीं करूंगा'
रविकुमार ने साथ ही कहा, 'जैसे उन्होंने अपना आपा खो दिया और बहुत गुस्से में थे, वह एक एक आम इंसान की तरह व्यवहार कर रहे थे यह अच्छा नहीं है। यदि आप सीएम के पद पर नहीं रहना चाहते, तो अच्छा होगा कि इस्तीफा देकर घर पर बैठ जाएं'
दूसरी बात यह है कि जब राज्य के मुख्यमन्त्री की ऐसी गिरी हुई मानसिकता हो, प्रशासन का क्या रवैया होगा, आसानी से समझा जा सकता है। 
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