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कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम : जितना JDS को नुकसान उतना ही कांग्रेस को फायदा, 1% भी नहीं घटा भाजपा का वोट शेयर

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम लगभग साफ़ हो गए हैं और कांग्रेस पार्टी ने पूर्ण बहुमत प्राप्त कर के सत्ता में वापसी की है। भले ही अति-उत्साह में पार्टी के समर्थक ये दावा कर रहे हों कि 2024 के लोकसभा चुनाव पर इसका असर पड़ेगा, लेकिन इतिहास देख कर ऐसा लगता नहीं है। 2018 विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उसने सरकार बनाई थी।

लेकिन, 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बदतर ही रहा। 2023 विधानसभा चुनाव में कर्नाटक चुनाव परिणाम की बात करें तो जहाँ कांग्रेस को 135 सीटें मिलती हुई दिख रही है, वहीं भाजपा 65 और JDS 20 सीटें प्राप्त करती हुई दिख रही है। वोट प्रतिशत की बात करें तो कांग्रेस को 43.1%, वहीं भाजपा को 35.6% वोट मिले हैं। जेडीएस का वोट शेयर 13.3% है। आइए, 2018 विधानसभा चुनाव परिणाम से इसकी तुलना कर के देखते हैं।

उस चुनाव में भाजपा 104 सीटें पा कर सबसे बड़े दल में उभरी थी, वहीं दूसरे नंबर पर आई कांग्रेस को 80 सीटें मिली थीं। वहीं जेडीएस के 37 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस तरह से देखें तो इस बार भाजपा को 39 सीटों का और JDS को 17 सीटों का नुकसान हुआ है। वोट प्रतिशत की बात करें तो 5 साल पहले हुए चुनाव में भाजपा के खाते में जहाँ 36.35% वोट आए थे, वहीं कांग्रेस को 38.14% और जेडीएस को 18.3% वोट मिले थे।

देखते हैं कि कर्नाटक में किसे कितना नुकसान और फायदा हुआ है, मत प्रतिशत के मामले में। कांग्रेस का वोट प्रतिशत लगभग 5% बढ़ा है, वहीं जेडीएस को 5% वोटों का नुकसान झेलना पड़ा है। यानी, जेडीएस का जितना नुकसान हुआ है कांग्रेस को उतना ही फायदा मिला है। भाजपा के वोट शेयर में कोई ऐसी गिरावट नहीं दर्ज की गई है, जिससे इसे सत्ता विरोधी लहर कहा जा सके। भाजपा का वोट शेयर 1% भी नहीं घटा है। दूसरे, भाजपा की हार का मुख्य कारण था कर्नाटक भाजपा में बढ़ता भ्रष्टाचार, जिसे पार्टी के ही एक नेता ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि 'कर्नाटक में 40%कमीशन का राज है।' वही भाजपा की हार का मुख्या कारण भी रहा।  

कर्नाटक चुनाव : BJP आगे, दूसरे नंबर पर कांग्रेस : जन की बात+सुवर्णा न्यूज का ओपिनियन पोल, ‘बजरंग दल’ इफेक्ट से BJP को लाभ

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले ओपिनियन पोल के जरिए कयास लगने लगे हैं कि इस बार राज्य में कौन सी पार्टी की सरकार आने वाली है। इसी क्रम में प्रदीप भंडारी के ‘जन की बात’ ने अपने सर्वे के आधार पर कुछ नंबर्स को जारी किया है। इसके मुताबिक इस बार कर्नाटक में भी भाजपा को कांग्रेस  और जेडीएस से ज्यादा वोट मिलने की उम्मीद है। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए सोनिया और परिवार को चुनाव से दूर रहना होगा। वैसे भी बजरंग दल का मुद्दा उछाल कर कांग्रेस को वैसे भी बहुत नुकसान हो गया है। अन्य चुनावों की भांति इस बार भी कांग्रेस और अन्य भाजपा विरोधी जनता की नब्ज पढ़ने में असफल रहे हैं। आज हिन्दुत्व और सनातन विरोधियों को जनता ने नकारना शुरू कर दिया है। जबकि मुस्लिम वोट समस्त भाजपा विरोधियों में बंट रहा है। 

1 मई तक के डेटा के आधार पर ‘जन की बात कर्नाटक पोल’ कहता है कि भाजपा को 100-114 तक सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस को 86-98, जेडीएस को 20-26 सीटें मिल सकती हैं। पोल के अनुसार, भाजपा को जहाँ  मोदी फैक्टर का फायदा होगा। वहीं कांग्रेस और जेडीएस को मुस्लिम वोट ज्यादा मिल सकते हैं।

जन की बात के दूसरे पोल में 70% लिंगयात और 70% मराठा भाजपा का ही साथ देंगे। वहीं 86% मुस्लिम और 83% कुर्बा कांग्रेस के साथ रहेंगे। क्षेत्रवार बात करें तो भाजपा कर्नाटक, कित्तूर में लीड करेगी और कांग्रेस से उन्हें कल्याण समेत बेंगलुरु के इलाकों में टक्कर मिलेगी।

वीआईपी सीट की बात करें तो पोल कहता है कि शिगाँव से बसवराज बोम्मई लीड करेंगे, कनकपुर से डीके शिवकुमार, चिकमंगलूर से सीटी रवि, हुबली धरवाड़ से जगदीश शेटर और शिकारी पुरा से बीवाई वीजेंद्र आगे रहेंगे।

‘जन की बात’ का पोल एशियानेट सुवर्णा न्यूज पर आया है। इससे पहले कई और चैनलों के ओपिनियन पोल जारी हो चुके हैं। जैसे 30 अप्रैल को जारी किए गए एबीपी के सी वोटर ने बताया कि इस बार 224 विधानसभा वाली सीटों में भाजपा का बहुमत पाना मुश्किल है और उन्हें 74 से 86 सीटों पर ही संतोष करना पड़ेगा। वहीं कांग्रेस को 107 से 119 सीटें मिल सकती हैं। इसी तरह जेडीएस पर 23 से 35 सीट मिलेगी।

इसके बाद जी न्यूज के मैटरीज ओपिनियन पोल भी 1 मई को आ चुका है। इसके अनुसार भाजपा इस बार राज्य में अपने खाते में 103 से 115 सीटें पाएगी और अन्य पार्टियों से ऊपर रहेगी। इस पोल के अनुसार कांग्रेस को 79 से 91 सीटें मिल सकती हैं और जेडीएस को 26 से 36 सीटें मिलेंगी। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा पर 42% वोट शेयर होगा और कांग्रेस को  40 फीसदी।

इसके अलावा इंडिया टुडे के सी वोटर ने कर्नाटक में किसकी सरकार आएगी ये अनुमान लगाया है। इंडिया टुडे के सी वोटर के अनुसार इस बार कांग्रेस बाजी मार सकती है। इस पोल की मानें तो भाजपा को सिर्फ 74 से 86 सीट आएँगी और कांग्रेस को 107 से 119 सीटें। इसी तरह जेडीएस को 23-55 सीट मिल सकती है। सर्वे में कांग्रेस के पास वोट शेयर 40% दिखाया गया है और बीजेपी के पास 35 फीसद।

कर्नाटक की 224 विधानसभा सीट पर इस बार 10 मई को चुनाव होने वाले हैं। नतीजे 13 मई को आएँगे। साल 2018 के चुनावों में यहाँ भाजपा को 104 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 80 सीट आई थी। वहीं जेडीएस के हिस्से 37 सीट आई थी। इस बार भी भाजपा-कांग्रेस को लेकर इतनी ही सीटों के अनुमान लगाए जा रहे हैं। हर पोल में जो एक बात सामान्य है वो यह कि उनके मुताबिक भाजपा के लिए मोदी फैक्टर बहुत काम आने वाला है और कांग्रेस के काम मुस्लिमों वोट आएँगे।

गौर करने वाली बात यह है कि ये ओपिनियन पोल कर्नाटक चुनाव में बजरंग दल के मुद्दा बनने से पहले के हैं। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल की तुलना पीएफआई से करते हुए प्रतिबंध का वादा किया था। इसका देशभर में विरोध हो रहा है। इससे कांग्रेस बैकफुट पर है। डैमेज कंट्रोल की कोशिश में पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने बजरंग दल पर प्रतिबंध से इनकार किया। उसके बाद कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सत्ता में आने पर राज्य के सभी जिलों में हनुमान मंदिर बनाने का वादा किया है।

क्या कर्नाटक में आएगी भाजपा सरकार? : विधानसभा चुनाव से पहले ‘जन की बात’ का ओपिनियन पोल; कांग्रेस दूसरे नंबर पर

कर्नाटक में 10 मई 2023 को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी जबकि 13 मई को वोटों की गिनती होगी। इसके पहले एशियानेट-जन की बात ने अपना ओपिनियन पोल जारी किया है। इस ओपिनियन पोल में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। हालाँकि भारतीय जनता पार्टी 98-109 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है। 225 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 113 सीटों की आवश्यकता है।

एशियानेट-जन की बात ओपिनियन पोल के अनुसार कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। पोल के अनुसार जहाँ बीजेपी के खाते में 98-109 सीटें जाती दिख रही हैं वहीं कांग्रेस को 89-97 सीटों पर कामयाब रहने का अनुमान लगाया गया है। ओपिनियन पोल के अनुसार 25-29 सीटें जीतकर जनता दल सेक्युलर (JDS) तीसरे नंबर पर रह सकती है।

ओपिनियन पोल के अनुसार ओल्ड मैसूर क्षेत्र की 57 सीटों में से भाजपा को सिर्फ 12 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। वहीं कांग्रेस को 23 और जेडीएस के खाते में 22 सीटें जा सकती हैं। कोस्टल कर्नाटका की 19 सीटों में से 16 भारतीय जनता पार्टी को मिल सकती हैं जबकि सिर्फ 3 सीटें कांग्रेस को मिलती नजर आ रही हैं। यहाँ जेडीएस और अन्य का खाता खुलना भी मुश्किल है।  

उसी तरह बेंगलुरु क्षेत्र की 32 सीटों में से 15 भाजपा को तो 14 कांग्रेस को मिलने का अनुमान है। यहाँ जेडीएस को 3 सीटें मिल सकती हैं। कर्नाटक के हैदराबाद क्षेत्र जिसे अब कल्याण कर्नाटक के नाम से जाना जाता है में कांग्रेस को 23 सीटें मिलने का अनुमान है। जबकि भाजपा को यहाँ 16 सीटें मिल सकती हैं। जेडीएस को सिर्फ 1 सीट पर संतोष करना पड़ सकता है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 में भी किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हो सका था। बीजेपी ने 2018 में 104 सीटें हासिल की थीं। कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें प्राप्त हुई थीं। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना ली थी। 2019 में विधायकों के पार्टी बदलने की वजह से सरकार गिर गई थी और बीजेपी ने सत्ता में वापसी की थी।

Karnataka Bypolls 2019 Results: उपचुनाव में मिली करारी हार से कांग्रेस में खलबली, सिद्धारमैया ने दिया इस्तीफा

Siddaramaiah resigns as Leader of Congress Legislature Party
कर्नाटक विधानसभा के उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस खेमे में खलबली मची हुई है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कांग्रेस के विधायक दल के नेता (सीएलपी) पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया से बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, 'विधायक दल के नेता के रूप में, मुझे लोकतंत्र का सम्मान करने की जरूरत है। मैंने कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद से इस्तीफा दे दिया है। मैंने अपना इस्तीफा सोनिया गांधी जी को सौंप दिया है।' साथ ही उन्होंने नेता विपक्ष के पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
भाजपा ने कांग्रेस को कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव में करारी शिकस्त दी है। पार्टी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि 2 सीटों पर अभी वह आगे चल रही है। इससे पहले इन सीटों पर कांग्रेस और कुमारस्वामी की जेडीएस का कब्जा था। कांग्रेस नेता डी शिवकुमार ने भी पार्टी की हार स्वीकार करते हुए कहा था कि इन चुनावों में मिले जनादेश को स्वीकार करते हैं और जनता के मुद्दों को हमेशा उठाते रहेंगे।
इन चुनावों में एचडी कुमारस्वामी की जेडीएस को बड़ा झटका लगा है। उनकी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) को एक भी सीट पर जीत नहीं नसीब हुई और उनके खाते में महज 12.1 फीसदी मत मिला है। वहीं बीजेपी मत प्रतिशत भी इस चुनाव में बढ़ा है और पार्टी को 50.2 फीसदी वोट मिले हैं। कांग्रेस 31 प्रतिशत से अधिक मत मिले हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने इस जीत पर खुशी जताई है। मुख्यमंत्री ने कहा, मैं लोगों के जनादेश से खुश हूं। अब बिना किसी समस्या के हम एक स्थायी सरकार बना सकते हैं। कर्नाटक में मिली जीत पर पीएम मोदी ने भी खुशी जताई है। पीएम ने झारखंड में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कर्नाटक में उसने जिसे मुख्यमंत्री बनाया, उन्हें सुबह-शाम बहुमत की बंदूक दिखाती रही थी, और वह जनता के बीच रोते थे, लेकिन आज जनता ने उन्हें करारा जवाब दिया है।

JDS को नहीं BJP कार्यकर्ताओं को कहा था वेश्या: कांग्रेस सिद्धारमैया की सफाई

सिद्धारमैयाकर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। जेडीएस कार्यकर्ताओं को वेश्या बताने वाले अपने बयान पर मचे बवाल के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि उनका संदर्भ बीजेपी से था।
अगर सिद्दारमैया ने बीजेपी पर निशाना साधा था, तो क्या "बीजेपी वैश्या है?"आखिर इतनी ओछी बात बोलकर सिद्दरामैया क्या सिद्ध करना चाहते हैं? 
असल में, सिद्धारमैया से पूछा गया था कि राज्य में गठबंधन सरकार के गिरने के लिए जेडीएस उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहा है। जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने एक कन्नड़ के एक कहावत का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब होता है कि जो वेश्याएँ नाच नहीं सकती वे डॉंस फ्लोर का रोना रोती हैं। एएनआई के अनुसार बाद में सफाई देते हुए उन्होंने इस बयान को बीजेपी से जोड़ दिया।

14 महीने पुरानी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार इसी साल 22 जुलाई को अपने ही विधायकों की बगावत के कारण गिर गई थी। जेडीएस कार्यकर्ताओं ने सरकार गिरने का सीधा आरोप सिद्धारमैया पर लगाया था। उनका कहना था कि एसटी सोमशेखर, ब्यारथी बासवाराज, एमटीबी नागराज, के सुधाकर जैसे कांग्रेस के बागी विधायक सिद्धारमैया के इशारे पर ही काम कर रहे थे।

'वोट आपने नरेंद्र मोदी को दिया, और मुझसे...' -- कुमारस्वामी, कर्नाटक मुख्यमंत्री

'वोट आपने नरेंद्र मोदी को दिया, और मुझसे...' : लोगों पर भड़कते कैमरे में कैद हुए CM कुमारस्वामीकर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी जून 26 को रायचूर जिले में प्रदर्शन कर रहे लोगों के सामने अपना आपा खोते दिखे। कुमारस्वामी उन पर गुस्सा हो गए और भड़कते हुए यह कहते दिखे कि वह मदद नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दिया है स्थानीय चैनल द्वारा प्रसारित किए गए वीडियो में देखा गया कि मुख्यमन्त्री अपने एक प्रोग्राम के तहत यात्रा पर थे, तभी लोगों के एक समूह से बातचीत करने के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी की खिड़की खोली लोगों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और चिल्लाने लगे, इसके साथ ही उन्होंने नारे लगाए इस पर मुख्यमंत्री को गुस्से में यह कहते हुए सुना जा सकता है 'आप लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दिया है'
आगे कुमारस्वामी ने क्या कहा, यह स्पष्ट नहीं है लेकिन स्थानीय चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, 'क्या मुझे आपका सम्मान करना चाहिए? क्या आपको लाठीचार्ज की जरूरत है? आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दिया और आप चाहते हैं कि मैं आपकी मदद करूं' भाजपा ने कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया की आलोचना की, इसे आक्रामक और हताशा बताया
भाजपा कर्नाटक के महासचिव रविकुमार ने कहा, 'आज रायचूर में हमारे मुख्यमंत्री ने जो कहा, उन्होंने बहुत आक्रामक और सख्त शब्दों में लोगों से कहा कि क्या मैं लाठीचार्ज के लिए पुलिस को बुलाऊं? कुमारस्वामी अपना आपा खो बैठे और कहा कि- आपने नरेंद्र मोदी को वोट दिया। मैं आपका समर्थन नहीं करूंगा'
रविकुमार ने साथ ही कहा, 'जैसे उन्होंने अपना आपा खो दिया और बहुत गुस्से में थे, वह एक एक आम इंसान की तरह व्यवहार कर रहे थे यह अच्छा नहीं है। यदि आप सीएम के पद पर नहीं रहना चाहते, तो अच्छा होगा कि इस्तीफा देकर घर पर बैठ जाएं'
दूसरी बात यह है कि जब राज्य के मुख्यमन्त्री की ऐसी गिरी हुई मानसिकता हो, प्रशासन का क्या रवैया होगा, आसानी से समझा जा सकता है। 
Video: देवगौड़ा परिवार के खिलाफ लिखने पर कार्रवाई

कर्नाटक की राजनीति में उठापठक ; सरकार बचाने की कवायद शुरू

कर्नाटक में सियासी 'नाटक' एक बार फिर शुरू हो गया है। यहां कि सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडी (एस) सरकार से दो निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। यह एचडी कुमारस्वामी सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। सरकार से समर्थन वापस लेने वाले विधायकों के नाम एच नागेश और आर शंकर हैं। 
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस बीच कांग्रेस के कुछ विधायकों ने मुंबई में कथित रूप से भाजपा नेताओं से मुलाकात की है। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने जनवरी 15 को गुरुग्राम में अपने विधायकों के साथ बैठक की। कर्नाटक में सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का आरोप है कि भाजपा कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिराने के लिए उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। 
विधायक एच नागेश ने कहा, 'राज्य में अच्छी एवं स्थाई सरकार के लिए मैंने अपना समर्थन दिया था लेकिन यह सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। गठबंधन के साथियों के बीच कोई तालमेल नहीं है। इसलिए मैंने स्थाई सरकार के गठन के लिए भाजपा के साथ जाने का फैसला किया है।'View image on Twitter
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Independent MLA, R Shankar: Today is Makar Sankranti, on this day we want a change in the govt. The govt should be efficient, so I am withdrawing my support (to the Karnataka govt) today.
निर्दलीय विधायक आर शंकर ने कहा, 'आज मकर संक्रांति है। आज के दिन हम सरकार में बदलाव चाहते हैं। सरकार सक्षम होनी चाहिए। मैं कर्नाटक सरकार से समर्थन वापस ले रहा हूं।' इस बीच कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह सरकार गिराने के लिए उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कहा है कि दो विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद भी उसकी सरकार को अभी कोई खतरा नहीं है। 
कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार गिरने की अटकलों पर सीएम एचडी कुमारस्वामी ने खुद विराम लगा दिया है। सीएम कुमारस्वामी ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा है कि, ‘कांग्रेस के जिन तीन विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की बात हो रही है, वे हमारे संपर्क में हैं।  
कुमारस्वामी ने कहा कि ये विधायक मुझे बताकर मुंबई गए हैं। मेरी सरकार को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। मैं जानता हूं कि भाजपा हमारे विधायकों को लुभा रही हैं, लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। मैं सरकार संभालने में पूरी तरह सक्षम हूं, मीडिया को इसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए
इससे पहले जनवरी 13 को मीडिया में खबर आने के बाद ये अटकलें तेज हो गई थी कि कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की गठबंधन सरकार 17 जनवरी से पहले गिर सकती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि भाजपा, कर्नाटक की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन वो इस प्रयास में कभी कामयाब नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के तीन विधायक मुंबई की एक होटल में भाजपा नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं। 

क्या ये समाजसेवी नेता हैं या सफ़ेदपोशी गुंडे ?


उत्तराखंड में कांग्रेस पार्षद द्वारा युवकों की पिटाई, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी देवगौड़ा द्वारा जेडीयू कार्यकर्ता की मृत्यु पर आरोपियों को बेरहमी से गोली से मारने के आदेश और मध्य प्रदेश भाजपा नेत्री द्वारा धमकी देख ऐसा आभास होता है, कि आज राजनीति जनसेवा नहीं बल्कि सफेदपोशी गुंडागर्दी का अखाडा बन गयी है। और हम मतदाता ऐसे ही सफेदपोश गुंडों को अपना हितैषी मान वोट दे आते हैं। जब ऐसे सफेदपोश गुंडे जनता के साथ इस तरह व्यवहार करेंगे, फिर इनसे प्रदेश अथवा देशहित की कल्पना करना ही बेकार है। वोट लेते समय ये नेता भोले-भाले शरीफ बन पेश आते हैं, लेकिन चुनाव बाद अपने असली जामा ओढ़ लेते हैं। 
उत्तराखंड : कांग्रेस पार्षद ने युवकों को क्यों दौड़ा-दौड़ाकर पीटा! 
कांग्रेस पार्षद राजीव भार्गव ने अपने समर्थकों के साथ चार युवकों को दौड़ा-दौड़ाकर लाठी-डंडों से पीटा। दिसंबर 24 देर शाम पुलिस ने राजीव भार्गव समेत 30 अन्य पर मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। राजीव वार्ड नंबर ग्यारह से पार्षद हैं। घटना रविवार(दिसंबर 23) रात करीब सवा दस बजे की है, जब बिल्वकेश्वर कालोनी निवासी आकाश सचदेवा, गगनदीप, प्रभजोत, अभिजीत नगर कोतवाली क्षेत्र की चित्रा टॉकिज की गली में कार से आ रहे थे। युवकों के अनुसार तभी कांग्रेसी पार्षद कार से आ रहे थे। दोनों की गाड़ियां आमने-सामने फंस गई। युवकों का कहना है कि पार्षद ने कार को पीछे करने के लिए कहा। दोनों पक्ष कार को पीछे करने के लिए राजी नहीं हुए। दोनों के बीच गहमागहमी हुई और आसपड़ोस वालों ने मामला सुलटा दिया।  आरोप है कि तभी पार्षद अपने समर्थकों के साथ रेलवे स्टेशन स्थित एक होटल के पास पहुंचे। जहां पार्षद ने चारों युवकों को पकड़ लिया। आरोप है कि पार्षद ने अपने समर्थकों के साथ चारों युवकों की जमकर धुनाई की। आरोप है करीब 30 लोगों ने चारों युवकों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। मारपीट में एक युवक के सिर पर गंभीर चोट भी आई, जबकि तीन अन्य के सिर के अलावा हाथ-पैर में भी चोट लगी है। उधर मारपीट के बाद पार्षद ने भी अपना मेडिकल जिला अस्पताल में कराया है। दोनों पक्षों से करीब आठ लोगों का मेडिकल हुआ है।
अवलोकन करें:--
आतंकवादियों को मारे जाने पर fake encounter के नाम पर जनता को भ्रमित करने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्ष शोर मचाते दिखते दिखाई देते हैं, अदालतों में मुकदमें दर्ज़ कर आतंकवादियों की सहायता करते हैं, और अक्ल से पैदल जनता इनकी बातों से भ्रमित होकर सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाने से नहीं चूकते, अब कर्णाटक मुख्यमंत्री के बदले की भावना से ओतप्रोत आदेश पर सबको साँप सूंघ गया है। दूसरों को राजधर्म का पाठ पठाने वाले ही जब कानून का अपमान कर रहे हों, उस स्थिति में उन्हें वास्तविक एनकाउंटर fake लगना स्वाभाविक है।

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कहते हैं सत्ता का लोभ आ जाता है तो इसका नशा सिर चढ़ कर बोलने लगता है। इसी को साकार किया है उत्तर प्रदेश के आगरा के भाज...
वहीं, पार्षद राजीव भार्गव का कहना है कि वह बाइक पर वहां पहुंचे थे और वहां पहले से झगड़ा चल रहा था। बीचबचाव करने के दौरान चारों युवकों ने पहले उन पर हमला किया था। हमले से उनकी उंगली की हड्डी भी टूट गई है। नगर कोतवाली प्रभारी नवीन सेमवाल ने बताया कि प्रभजोत के पिता देवेंद्र की शिकायत पर पार्षद समेत अन्य पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
अस्पताल में हंगामा 
मारपीट के बाद दोनों पक्ष अस्पताल में पहुंच गए। पहले मेडिकल परीक्षण कराने के लिए दोनों पक्ष आमने-सामने दोबारा आ गए और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। हंगामे की सूचना मिलते ही कोतवाल नवीन सेमवाल मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को फटकार लगाई। कोतवाल की फटकार के बाद ही दोनों पक्षों ने बारी-बारी मेडिकल कराया।

कांग्रेसी नेता पहुंचे 
मारपीट की सूचना मिलते ही पूर्व पार्षद, पूर्व सभासद समेत तमाम कांग्रेसी नेताओं का जमावड़ा अस्पताल में लग गया। सोमवार को कांग्रेसी पार्षद से जब संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पार्षद ने अपना नंबर बंद कर लिया।