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अडानी की हुंकार : ‘हमारे शेयर्स गिरा कर कमाई की, भारतीय बाजार को अस्थिर करने के लिए किया टार्गेट’: कच्छ से लेकर केरल तक कई बड़े प्रोजेक्ट्स ट्रैक पर

हिंडेनबर्ग की एक एक रिपोर्ट के बाद अडानी समूह की कई कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए थे और भारत में भी विपक्षी दलों ने उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ खूब माहौल बनाया था। हालाँकि, अब निवेशकों और कर्मचारियों को अडानी समूह की वार्षिक जनरल मीटिंग में गौतम अडानी ने आश्वस्त किया है कि कंपनी में सब ठीक है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट की एक एक बिंदु पर बारीकी से जवाब दिया और उसे काटा। उन्होंने कहा कि कइयों ने अपना हित साधने के लिए हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट को प्रमोट किया।

उन्होंने इस दौरान हिंडेनबर्ग को ‘शॉर्ट सेलर’ करार दिया, अर्थात जो कंपनियों के शेयर्स गिरने पर कमाई करते हों। गौतम अडानी ने इस दौरान याद दिलाया कि कैसे इन तत्वों ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से कई झूठे नैरेटिव चलाए। उन्होंने बताया कि मामले को देखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमिटी बनाई और मई 2023 में रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमिटी ने पाया कि कोई अनियमितता नहीं थी।

उन्होंने ये जानकारी भी दी कि एक्सपर्ट कमिटी ने यह टिप्पणी भी की कि भारतीय बाजार को अस्थिर करने के लिए जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे सफर के दौरान हमारी कठिनाइयों से उबरने की जो क्षमता है उसने हमें परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि हमारी मातृभूमि में हमारा विश्वास और सपनों को लक्ष्य बना कर चलने में भी यही क्षमता हमारे काम आती है। उन्होंने कहा कि इस साल अमेरिकी शॉर्ट सेलर ने हमारी कंपनियों के शेयर्स को शॉर्ट करने के लिए रिपोर्ट प्रकाशित किया।

उन्होंने इस रिपोर्ट को जानबूझकर फैलाई गई गलत सूचना और निशाना बना कर अविश्वसनीय आरोपों के जरिए तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा कर और शेयर्स को शॉर्ट कर के कमाने के लिए ये रिपोर्ट बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि कैसे निवेशों के हितों की रक्षा के लिए अडानी समूह ने पूरी तरह सब्स्क्राइब किए गए FPO को वापस ले लिया। उन्होंने बताया कि अभी SEBI की रिपोर्ट आनी बाकी है, लेकिन हम हर एक दिन खुद को बेहतर बनाते रहेंगे।

उन्होंने निवेशकों और अन्य हितधारकों का शुक्रिया अदा किया, जो इस संघर्ष में कंपनी के साथ रहे। उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भी अडानी समूह में भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि आज के युग में दुनिया के सामने कई चुनौतियाँ हैं। उन्होंने कहा कि हमें वैश्विक परिस्थितियों और उसमें भारत की स्थिति का अवलोकन करना चाहिए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि भारत 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2050 में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी।

उन्होंने कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था में नीतियों को लागू करना और विकास की आधारशिला रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत में बढ़ती इंटरनल डिमांड की बात करते हुए कहा कि इससे विकास दर बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि 2050 में भी भारत की औसत उम्र 38 साल होगी और जनसंख्या 1.6 बिलियन हो जाएगी। लेकिन, पर कैपिटा इनकम 700% बढ़ जाएगी और ये 16,000 डॉलर हो जाएगी। इस दौरान उन्होंने अडानी समूह के कई प्रोजेक्ट्स की भी बात की।

उन्होंने जानकारी दी कि नवी मुंबई का एयरपोर्ट दिसंबर 2024 तक चालू हो जाएगा। इसी तरह गुजरात में 8600 करोड़ रुपए की लागत से कॉपर प्लांट भी बन रहा है। उन्होंने 2030 तक 45GW रिन्यूएबल इनर्जी प्रोडक्शन के लक्ष्य को भी दोहराया। कच्छ के खावडा में 20GW का हाइब्रिड रिन्यूएबल पार्क बन रहा है। तिरुवनंतपुरम के विझिंजम में देश का सबसे बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब बन रहा है। मध्य प्रदेश के महन में एक बड़ी बिजली परियोजना पर काम चल रहा है।

अडानी-अडानी चिल्ला रहे राहुल और कांग्रेस की शरद पवार ने तीन मिनट में निकाल दी हवा, जेपीसी से जांच की मांग को किया खारिज

आम चुनाव से पहले कांग्रेस जनता को गुमराह करने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाती रहती है। 2019 के आम चुनाव से पहले राफेल डील और उद्योगपति अनिल अंबानी निशाने पर थे। इसकी भी शुरुआत विदेश में प्रकाशित एक रिपोर्ट से हुई थी। चुनाव खत्म होते ही राफेल डील और अनिल अंबानी का मुद्दा गायब हो गया। अब कांग्रेस इसका नाम तक नहीं लेती। इसी तरह 2024 के आम चुनाव से पहले जनता को फिर मूर्ख बनाने के लिए कांग्रेस एक नया मुद्दा लेकर आई है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद अब राहुल गांधी के निशाने पर उद्योगपति गौतम अडानी है। करीब तीन महीने से राहुल गांधी और कांग्रेस के तमाम नेता सुनियोजित तरीके से अडानी का मुद्दा उठाकर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को घेरने की कोशिश रहे हैं। इसी बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है। अब कांग्रेस अपने ही बुने जाल में उलझती नजर आ रही है।

अडानी मामले की जेपीसी से जांच की मांग गलत- शरद पवार

8 अप्रैल,2023 को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने फिर दोहराया कि अडानी मामले की जेपीसी से जांच की मांग गलत है। उन्होंने कांग्रेस को जोरदार झटका देते हुए कहा कि एक जमाना ऐसा था जब सत्ताधारी पार्टी की आलोचना करनी होती थी तो हम टाटा-बिड़ला का नाम लेते थे। टाटा का देश में योगदान है। आजकल अंबानी-अडानी का नाम लेते हैं, उनका देश में क्या योगदान है, इस बारे में सोचने की आवश्यकता है। हमारे सामने दूसरे मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीटीवी को दिया गया उनका इंटरव्यू अडानी को लेकर नहीं था, वह कई और मुद्दों को लेकर था, जिसमें मुझसे अडानी को लेकर भी सवाल पूछे गए थे।

“एक उद्योग समहू को टारगेट कर हमला किया गया है”

इससे पहले एनडीटीवी के एडिटर इन चीफ संजय पुगलिया से खास बातचीत करते हुए शरद पवार ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर देश में हंगामा करने पर सवाल उठाया। उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि विदेश में किसी व्यक्ति ने बयान दिया और भारत में हंगामा शुरू हो गया। जिस मुद्दे को लेकर हंगामा शुरू हुआ, उसे सामने लाने वाले कौन हैं। उनके बारे में जानने की जरूरत थी। हमने कभी उसका (हिंडनबर्ग) नाम भी नहीं सुना था। जिसने ये बयान दिया उसकी पृष्टभूमि क्या है? शरद पवार ने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति कोई मुद्दा उठाता है तो उसपर देश में हंगामा होता है, इसकी कीमत पूरे देश को चुकानी पड़ती है। अर्थव्यवस्था को कितना झेलना पड़ता है। इसको हम नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं। ऐसा लगता है कि यह पूरी तरह टार्गेटेड है। एक उद्योग समहू को टारगेट कर हमला किया गया है।

अडानी मामले में जेपीसी जांच की जरूरत नहीं

एनडीटीवी से बात करते हुए शरद पवार ने जो बयान दिया, उसे सुनकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को गहरा सदमा लगा होगा। पिछले तीन महीने से राहुल गांधी और उनके तमाम सरपरस्त अडानी मामले को तूल देकर प्रधानमंत्री मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन शरद पवार ने कांग्रेस की जेपीसी से जांच की मांग को एकतरफा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया अडानी मामले में जेपीसी जांच की जरूरत नहीं है। जेपीसी की कोई भी जांच प्रभावी तरीके से नहीं हो सकती, क्योंकि जब जेपीसी बनेगी उसमें बीजेपी का बहुमत रहेगा और अन्य दलों को अधिकतम एक या दो सदस्यों का ही प्रतिनिधित्व मिल पाएगा और ऐसे में वही निष्कर्ष निकाला जाएगा जो सत्ता पक्ष को चाहिए होगा। जब सुप्रीम कोर्ट ने जांच करने की घोषणा कर दी है, उसके बाद जेपीसी का महत्व नहीं रहा। जब कांग्रेस के इरादे को लेकर सवाल पूछा गया तो शरद पवार ने कहा कि कांग्रेस का इरादा क्या है मालूम नहीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज द्वारा अपॉइंट की गई कमेटी की ही इम्पोर्टेंस है ये मालूम है।