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पाकिस्तान के पास कश्मीर के अलावा कोई राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा ही नहीं

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
विश्व बिरादरी के बीच अलग-थलग पड़ चुका पाकिस्तान अब भी कश्मीर का राग अलापने से बाज नहीं आ रहा। ये हालत तब है, जब इस्लामी देशों के सम्मेलन आईओसी में पाकिस्तान को इस बार भी बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी। सऊदी अरब के मक्का में आईओसी का 14वां सम्मेलन था, जिसके दो सत्र थे। पहले सत्र में इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने आपसी संबंधों के बारे में अपना नज़रिया रखा, जिसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर के मुद्दे पर भी प्रमुखता से चर्चा की, मगर इसमें उनके भाषण को खास तवज्जो नहीं दी गई।
अगले सत्र में सम्मेलन को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने संबोधित किया, जिसमें उन्होंने फिलिस्तीन में इज़रायली ज़्यादतियों के साथ-साथ कश्मीर का बेसुरा राग छेड़ दिया, मगर इसका नतीजा भी शून्य ही रहा। इमरान के भाषण को सुना तो गया, लेकिन इसके बाद जो प्रस्ताव पारित हुआ, उसमें कश्मीर का कोई ज़िक्र नहीं था। साफ है कि इस्लामी देशों ने कश्मीर पर इमरान की बात को कोई तवज्जो नहीं दी। इस सम्मेलन के बाद बार-बार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान की घनघोर बेइज्जती हुई है।
Image result for शिमला समझौताशिमला समझौता 
पाकिस्तान नेताओं को इतना भी ज्ञान नहीं कि 1972 में हुए समझौते के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच किसी तीसरे देश की दखलंदाजी स्वीकार नहीं होगी। वर्तमान सरकार को उसे पढ़ने तक का समय नहीं। हकीकत में पाकिस्तान के किसी भी नेता के पास कश्मीर के अलावा कोई और मुद्दा ही नहीं है। न उनको जनता के सुखसाधन, देश का मनोबल और न ही देश में चल रहे आतंकी कारखानों को बंद कर विश्व में पाकिस्तान को सम्मानित करने की चिन्ता है। 
कहते है "किसी की फटी में टाँग फंसाना" पाकिस्तान का भी वही हाल है। सिन्ध, बलोचिस्तान, पख्तून और कब्जाए कश्मीर के हिस्से तक को संभाल नहीं पा रहा, बात पुरे कश्मीर की कर रहा है। ये सब प्रान्त पाकिस्तान फौज के ज़ुल्मों से दुखी होकर, अलग होने को तैयार हैं। लेकिन सत्ता और विपक्ष सभी आतंकवाद के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, क्योकि जिसने भी आतंकवादी सरगनों पर सख्ती की बात की, उसे फौज के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।  
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पाकिस्तान से ईस्ट पाकिस्तान अलग होकर, बांग्लादेश क्यों बना? किसी भी पाकिस्तान नेता ने इस ओर कभी नहीं सोंचा और न ही कोई जरुरत। पाकिस्तान नेता कभी अपनी फौज के दिशा-निर्देश के विरुद्ध जाने का दुस्साहस नहीं कर सकते। सरकार चुनती जनता है, लेकिन चलती है फौज के दिशा-निर्देश से।  
इमरान के रहते बेइज्जत होता पाकिस्तान 
अंतराष्ट्रीय मंच पर हुई इस बेइज्जती के चलते पाकिस्तान में इमरान की भारी आलोचना हो रही है मीडिया में इस बात की चर्चा गर्म है। पाकिस्तानी मीडिया गहरे सदमे में है कि इस्लामी सहयोग संगठन का हिस्सा होने के बावजूद पाकिस्तान की ऐसी भद्द क्यों पिट रही है? विश्व में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से जो जितनी बेइज्जती पाकिस्तान की हो रही है, किसी अन्य प्रधानमंत्री तो क्या फौजी शासक के कार्यकाल में नहीं हुई। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और जियो टीवी के संपादक हामिद मीर ने तो ट्वीट किया, जिसका मज़मून था कि "मक्का में पाकिस्तान की शिकस्त। उन्होंने तो यहां तक लिखा कि इतनी बेइज्जती को देखकर मैं चुपचाप सम्मेलन से निकल गया।"
इस सम्मेलन में भारतीय पत्रकारों को भी कवरेज के लिए बुलाया गया, जिसके चलते भी पाकिस्तान काफी खफा है। लंदन में रह रहीं पाकिस्तान की महिला एक्टिविस्ट शमाँ जुनेजो ने तो इसे इमरान और पाकिस्तान की विदेश नीति की विफलता करार दिया है। असल में इस्लामी देशों के सहयोग संगठन की स्थापना 25 सितंबर 1969 में मोरक्कों में हुई थी। स्मरण हो, कि इस्लामिक सहयोग संगठन का मूल मुद्देश्य फिलिस्तीन की आज़ादी और इस्लामी देशों के बीच परस्पर सहयोग करना था, लेकिन दुनिया में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव और अपने नफे-नुकसान को साधने के चक्कर में ये संगठन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया।
अमेरिका के इशारे पर इस्लामिक देश 
आज हालत यह है कि अगर टर्की और ईरान को छोड़ दें तो बाकी इस्लामी देश अमेरिका के पिठ्ठू बने हुए हैं और सऊदी अरब इन पिट्ठुओं में सबसे ऊपर है, मगर पाकिस्तान को असली दिक्कत भारत से इसलिए है कि पिछले 1 और 2 मार्च को जेद्दा में हुए इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक में अरब देशों की ओर से भारत को भी शामिल होने का निमंत्रण मिला था। इस सम्मेलन की टाइमिंग ऐसी थी कि पाकिस्तान इससे बौखला गया। क्योंकि 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में पाकिस्तानपरस्त आतंकी तंजीम जैश-ए-मोहम्मद ने आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था। इसलिए पाकिस्तान नहीं चाहता था कि भारत को इस सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए मगर हुआ एकदम उल्टा।
इस सम्मेलन में भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बहुत ही सारगर्भित भाषण दिया और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की कड़ी निंदा की,  जिससे पाकिस्तान बुरी तरह चिढ़ गया। हालत यहां तक पहुंच गई थी कि पाकिस्तान ने सुषमा जी को आमंत्रित करने का सख्त विरोध किया और यहां तक कह दिया कि वे सम्मेलन में शामिल नहीं होगा। हालांकि, इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसमें शिरकत की, लेकिन उन्होंने सुषमा स्वराज के भाषण का बायकॉट किया। सम्मेलन में सुषमा जी की शिरकत को पाकिस्तान ने अपना अपमान माना।
इस्लामी देशों के सम्मेलन में भारत को निमंत्रण मिलना मोदी सरकार की सशक्त विदेश नीति की कामयाबी है। इसी का असर है कि खुद को इस्लामी बिरादरी का ठेकेदार मानने वाला पाकिस्तान भारत से चिढ़ा हुआ है। इस्लामी देशों के संगठन की इस बेरुखी को पाकिस्तान अभी भूल नहीं पाया था कि एक बार फिर उसे करारी शिकस्त मिली है। पाकिस्तान में इमरान की सख्त आलोचना हो रही है, इसके बावजूद इमरान सऊदी अरब को अपना दोस्त सिर्फ इसलिए मानते हैं क्योंकि ये देश पाकिस्तान की जब-तब थोड़ी बहुत मदद करता रहा है।
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सऊदी अरब में पाकिस्तान की बेइज्जती 
पिछले दिनों सऊदी अरब पहुंचते ही इमरान जब वहां के किंग से मिले तो उन्होंने उनका अपमान भी किया। असल में मक्का में ओआईसी के सम्मेलन में सऊदी अरब के किंग से मुलाक़ात के दौरान इमरान ख़ान का एक विडियो सामने आया, जिसमें वो रेड कार्पेट पर चलते हुए सऊदी अरब के बादशाह सलमान तक पहुंचते हैं और उनसे हाथ मिलाने के बाद कुछ बात करते हैं। हालांकि, जो विडियो फुटेज सामने आया है, उसमें पाकिस्तानी पीएम किंग से सीधे बात न कर ट्रांसलेटर से बात कर रहे हैं। पता चला है कि इसके बाद सऊदी किंग काफी नाराज हैं। इमरान ख़ान हाथ तो किंग सलमान से मिला रहे हैं, लेकिन बात ट्रांसलेटर से कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए विडियो में इमरान ख़ान किंग सलमान की तरफ़ देख भी नहीं रहे हैं। यहां तक कि इमरान ख़ान ने किंग सलमान को प्रतिक्रिया में कुछ कहने का भी वक़्त नहीं दिया और वहां से अचानक निकल गए। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि इमरान ख़ान ने किंग सलमान का सरासर अपमान किया है और उन्हें राजनयिक शिष्टाचार भी नहीं आता। कई लोग तो सलाह दे रहे हैं कि पाकिस्तान के नेताओं को राजनयिक व्यवहार सीखने की ज़रूरत है। इस घटना से ये माना जा रहा है कि अब सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच दूरियां बढ़ सकती हैं।
असल में सऊदी अरब एक कारोबारी देश है। उसने अगले डेढ़ साल तक पाकिस्तान को कच्चा तेल उधार देने का वादा किया है। पाकिस्तान को अपने मित्र देशों से मदद की जरूरत है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था का पूरी तरह जनाजा निकल चुका है। पाकिस्तान को डर है कि इस्लामी देशों से रिश्ते अगर खराब हुए तो उसे भारी नुकसान भुगतना पड़ेगा। वर्तमान में ईरान से उसके रिश्ते बहुत नाज़ुक दौर में हैं और ईरान तो पाकिस्तान का बिरादर मुल्क है। पाकिस्तान से उसकी सीमा सटी हुई है। इमरान घरेलू मोर्चे पर भी बुरी तरह घिरे हुए हैं।
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बिश्केक में पाकिस्तान का अपमान किया 
किसी भी देश का प्रधानमंत्री विश्व में अपने देश के स्वाभिमान और गौरव का सम्मान करने का कोई अवसर नहीं खोना चाहता, लेकिन पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान पाकिस्तान को बेइज्जत करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। अभी बिश्केक सम्मलेन में आयोजक में सम्मान में सब खड़े हुए, लेकिन बेचारे इमरान खान इतने थके हुए थे कि खड़े होने की चेष्टा तक नहीं की, और जब खड़े भी हुए तो लगता है शायद पैरों को सीधा कर तुरन्त बैठ गए, जबकि समस्त मेहमान खड़े हुए थे। दूसरे अर्थों में यही कहा जा सकता है कि इन्हे शिष्टाचार का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं। 
इमरान के खिलाफ मोर्चा 
पाकिस्तान की सियासी जमात मुस्लिम लीग (नून) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी इमरान के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। कराची, बलूचिस्तान और उत्तरी वजीरिस्तान के कबाइली इलाकों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं। पश्तूनों पर पाकिस्तानी फौज जुल्म ढा रही है। पिछले दिनों पाकिस्तानी फौज की फायरिंग में 20 पश्तून आंदोलनकारियों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। भारत की सख्त कूटनीति के कारण कश्मीर पर भी पाकिस्तान को लगातार पटखनी मिल रही है। जल्द ही पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में सालाना बजट पास किया जाएगा, जिसके बाद उम्मीद है कि महंगाई और बढ़ेगी और फिर वहां की अवाम सड़कों पर उतरेगी। पाकिस्तान में सिविल वॉर के हालात बन रहे हैं। ऐसे में क्या इतिहास खुद को दोहराएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कोई भी सरकार 5 साल पूरे नहीं नहीं कर सकी है।

पाकिस्तान : इमरान खान ने SCO समिट में तोड़ा प्रोटोकॉल

IMRAN KHAN IN SCO SUMMIT
एससीओ समिट में इमरान खान  |  तस्वीर साभार: Twitter
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO)की बैठक आयोजित की गई है जहां पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी शामिल हुए। यहां पर पाक पीएम इमरान खान ने शिखर सम्मेलन के प्रोटोकॉल की किस तरह से अनदेखी की इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। गुरुवार को बिश्केक में एससीओ समिट का शुभारंभ समारोह था इस दौरान इमरान खान समिट के रणनीतिक प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए पाए गए। 
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया गया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि समिट हॉल में जब एससीओ सदस्य देशों के प्रमुख एक-एक करके अंदर प्रवेश कर रहे थे तब हॉल में मौजूद अन्य उनके सम्मान में अपनी सीट से उठ खड़े हुए लेकिन इस दौरान वहां मौजूद पीएम इमरान खान अपनी सीट पर ही बैठे रहे।

Embedded video

Prime Minister of @ImranKhanPTI's Arrival with other World Leaders at Invitation of President of Kyrgyzstan for Opening Ceremony 19th Meeting of the Council of the Heads of State of the Shanghai Cooperation Organization in Bishkek Kyrgyzstan (13.06.19)
जब उन्हें एहसास हुआ कि वे हॉल में अकेले ऐसे हैं जो अपनी सीट पर बैठे हुए हैं, तो वे फौरन उठ खड़े हुए। लेकिन इसके बाद भी सारे नेताओं के वापस अपनी सीट पर बैठने के पहले इमरान खान अपनी सीट पर बैठ गए। यहां एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जिसे वीडियो में देखने पर पता लगता है कि वे अपनी सीट पर उठक-बैठक कर रहे हैं। वीडियो देखकर आपको उनकी मूर्खता पर हंसी आ जाएगी।  
ऐसा पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी पीएम इमरान खान इस तरह अंतरराष्ट्रीय बैठकों में प्रोटोकॉल तोड़ते नजर आए हों। इसके पहले भी इसी महीने सऊदी अरब में आयोजित 14वें ओआईसी (OIC) समिट में भी वे डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल तोड़ते हुए नजर आए थे। 
अवलोकन करें:-

खान यहां सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुलाजीज के साथ बातचीत कर रहे थे। यहां पर सऊदी किंग का अनुवादक पीएम इमरान खान की बातों को ट्रांसलेट कर रहा था। इस दौरान देखा गया कि उनका अनुवाद खत्म हुए बिना ही इमरान खान वहां से निकल गए। सोशल मीडिया पर इस वाक्ये का भी वीडियो बड़ा वायरल हुआ था जिसमें सऊदी किंग के तिरस्कार के लिए इमरान खान की खूब किरकिरी हुई थी।  
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित दो दिवसीय एससीओ समिट में पीएम नरेंद्र मोदी और इमरान खान समेत एससीओ के सदस्य देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। 

बिश्केक में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को घेरा, आतंकवाद पर वैश्विक सम्मेलन बुलाने की मांग की

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के बाद सम्मेलन के दूसरे दिन आतंकवाद पर उसे घेर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर एक वैश्विक सम्मेलन बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि एससीओ के सदस्य देशों को एकजुट होकर आतंकवाद से लड़ने की जरूरत है। आतंकवाद को मानवता का अभिशाप बताते हुए पीएम ने कहा कि एससीओ को अपने संकीर्ण दायरे से निकलकर इसके खिलाफ खड़ा होने की आवश्यकता है। एससीओ सम्मेलन के दूसरे दिन महाधिवेशन को संबोधित करते हुए पीएम ने यह बात कही।
मोदी ने आतंकवाद के क्रूर चेहरे का जिक्र करने के लिए अपने हाल की श्रीलंका यात्रा का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने हाल ही में श्रीलंका का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान मैं उस चर्च में गया जहां आतंकियों ने खूनी खेल खेला। आतंकवाद किसी का भला नहीं कर सकता। आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए एससीओ के सदस्यों को अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना चाहिए।' 
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PM Modi addressing leaders of member states at the SCO summit in Bishkek: India has been a permanent SCO member for 2 yrs now, we've given a positive contribution in all activities of SCO. We've continued engagements to enhance SCO's role & credibility on the international stage.
पीएम ने कहा कि भारत पिछले दो वर्षों से एससीओ का स्थायी सदस्य रहा है और इस दौरान एससीओ के सभी कार्यों में हमने सकारात्मक योगदान दिया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एससीओ की भूमिका एवं विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए अन्य देशों के साथ बातचीत के अलावा भारत ने हर संभव कदम उठाए हैं। पीएम ने कहा कि एससीओ देशों के बीच वित्तीय मामलों में सहयोग मजबूत बनाने के लिए भारत डिजिटल संसाधनों की दिशा में कदम उठाएगा। इसके साथ ही ऊर्जा के वैकल्पक स्रोतों को विकसित करने के लिए भारत अपने अनुभवों को साझा करने के लिए तैयार है।
 शी जिनपिंग से मिलकर पीएम मोदी ने उठाया आतंकवाद का मसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए किर्गिस्‍तान की राजधानी बिश्‍केक में हैं, जहां गुरुवार को उन्‍होंने चीन और रूस के राष्‍ट्रपतियों से मुलाकात की। चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के साथ पीएम मोदी की प्रतिनिधिमंडल स्‍तर की वार्ता को भारत-चीन और भारत-रूस के संबंध में काफी अहम माना जा रहा है।
शी से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने परोक्ष रूप से पाकिस्‍तान पर निशाना साधा। उन्‍होंने आतंकवाद का मसला उठाते हुए दो टूक कहा कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, बातचीत का माहौल तैयार नहीं होगा। पीएम मोदी ने इस दौरान भारत और चीन के बीच पिछले कुछ समय में बेहतर हुए सामरिक संवाद और कई लंबित मुद्दों के सुलझने का भी जिक्र किया, जिनमें भारत में बैंक ऑफ चाइना की शाखा खोले जाने और पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का मुद्दा खास तौर पर शामिल रहा।
चीन के अड़ंगे की वजह से मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का मुद्दा पिछले काफी समय से लंबित था। भारत को इस दिशा में हाल ही में उस वक्‍त बड़ी कामयाबी मिली जब चीन ने इस पर अपनी आपत्ति हटा ली और मसूद को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्‍ताव पारित कर वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने चीन के राष्‍ट्रपति को दूसरी अनौपचारिक वार्ता के लिए भारत दौरे का न्यौता दिया, जिस पर उन्‍होंने सहमति जताई। चीन के राष्‍ट्रपति ने कहा कि वह इसी साल भारत दौरे के लिए तैयार हैं। हालांकि अभी इस संबंध में समय तय नहीं हुआ है। यह चीन के शहर वुहान में हुई पीएम मोदी और शी की अनौपचारिक वार्ता का दूसरा चरण होगा।
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Had an extremely fruitful meeting with President Xi Jinping. Our talks included the full spectrum of India-China relations.

We shall continue working together to improve economic and cultural ties between our nations.
मोदी की बिश्‍केक में रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की, जिसके बाद दोनों नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल स्‍तर की वार्ता की। रूस के राष्‍ट्रपति ने पीएम मोदी को ईस्‍टर्न इकोनॉमिक फोरम में मुख्‍य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया, जिसका आयोजन रूसी शहर व्‍लादिवोस्‍तोक में सितंबर में होने वाला है। पीएम मोदी ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी। इस दौरान पीएम मोदी ने यूपी के अमेठी का भी जिक्र किया और वहां राइफल मैन्‍युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में सहयोग के लिए रूस को धन्‍यवाद दिया। रूस और चीन, दोनों देशों के साथ प्रतिनिधिमंडल स्‍तर की वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने हिन्‍दी में अपनी बात रखी।
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A special partner, a privileged relationship!

PM @narendramodi met with @KremlinRussia_E Vladimir Putin on the sidelines of in . Reviewed all aspects of bilateral relations to further strengthen the strategic relationship.
मोदी ने जिस तरह शी से मुलाकात कर आतंकवाद और मसूद अजहर का जिक्र किया और चीन के राष्‍ट्रपति को दूसरी अनौचारिक वार्ता के लिए भारत आमंत्रित किया, जिसे उन्‍होंने स्‍वीकार भी कर लिया, उसे पाकिस्‍तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की दिशा में भारत की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। चीन कई अवसरों पर पाकिस्‍तान का गाहे-बगाहे पक्ष लेता रहा है और ऐसे में भारत के मौजूदा कदमों को काफी अहम माना जा रहा है।