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चीन : ध्वस्त किए जा रहे हैं मस्जिदों के गुंबद: मुस्लिम मज़हबी स्थलों को ‘शौचालय’ में बदलने के बाद नया अभियान जारी

                                                          नष्ट किया गया मस्जिद का गुंबद
पिछले कुछ वर्षों में चीन के भीतर उइगर मुस्लिम समुदाय के लोगों पर होने वाला अत्याचार काफी बड़े पैमाने पर बढ़ा है। इसी कड़ी में चीन वहाँ पर स्थित उनके धार्मिक स्थल भी नष्ट करता रहा है। हाल ही में चीन के शिनजियांग प्रांत के आतुश नामक स्थान पर स्थित एक मस्जिद को नष्ट किया गया था और वहाँ शौचालय का निर्माण कराया गया था। ताज़ा मामला चीन के ही यिनचुआन प्रांत का है जहाँ अरब शैली में निर्मित मस्जिदों के गुंबद को तोड़ा गया है।

टेलीग्राफ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार पूरे चीन में इस तरह की गतिविधियाँ एक अभियान के तहत हो रही हैं। चीन के निगज़िया प्रांत की राजधानी यिनचुआन ऐसा क्षेत्र है जहाँ चीन के हूई जातीय अल्पसंख्यक रहते हैं, इस जगह की एक मुख्य मस्जिद के बुनियादी ढाँचे में परिवर्तन देखा गया है। इस क्षेत्र की नुआंगन मस्जिद जो देखने में सुनहरे रंग की थी, उसके ठीक ऊपर प्याज के रंग का गुंबद था जिसे फ़िलहाल नष्ट कर दिया गया है। इतना ही नहीं, मस्जिद के भीतर सजावटी मेहराब, इस्लामी शैली की फिजरी और अरबी लिपि में उकेरे गए शब्दों को भी मिटा दिया गया है।

 फ़िलहाल इस मस्जिद की स्थिति कुछ ऐसी है कि इनकी पहचान करना तक मुश्किल है और यह तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। दरअसल, चीन में ब्रिटेन मिशन के उप प्रमुख क्रिस्टीना स्कॉट ने चीन द्वारा मस्जिदों पर चलाए जा रहे इस अभियान की तस्वीरें साझा की। इन तस्वीरों में इस बात की पहचान कर पाना तक मुश्किल है कि नया ढाँचा ‘मस्जिद’ है। स्कॉट ने इस घटना पर ट्वीट करते हुए लिखा, “यात्रा सलाहकार ने सुझाव दिया कि यिनचुआन में नुआंगन मस्जिद का भ्रमण किया जा सकता है।” इसके बाद तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, “वहाँ जितना नज़र आता है वह केवल इतना ही है। गुंबद समेत इस तरह के सभी आकार नष्ट किए जा रहे हैं, किसी भी आगंतुक को यहाँ आने की अनुमति नहीं है। यह कितना निराशाजनक है।” 

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने भी इस संबंध में ट्वीट करते हुए जानकारी दी। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, “चीन में जिस तरह इस्लाम और अन्य धर्म पर पाबंदी लगाई जा रही है, हम इस बात से बेहद चिंतित हैं। हमारा इस मुद्दे पर चीन से इतना कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था को अपने संविधान और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार बनाए रखें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लिनेक्सिया में स्थित ‘लिटिल मक्का’ नाम से मौजूद इस्लामी धरोहरों को भी लगातार नष्ट किया जा रहा है।

चीन में इस तरह के धार्मिक अत्याचार और सामाजिक उत्पीड़न की ख़बरें बिलकुल नई नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन के शिनजियांग प्रांत में लाखों मुसलमानों को डिटेंशन कैम्प (कैद शिविर) में रखा जाता है। वहाँ उन पर तमाम तरह के अत्याचार किए जाते हैं, उनको शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। इसके अलावा वहाँ लोगों को अपनी धार्मिक मान्यताओं का अनुसरण करने पर कड़ी कार्रवाई से गुज़रना पड़ता है।

चीन के इस्लाम विरोधी रवैये पर लोगों की प्रक्रियाएं, जिन्हें हर तुष्टिकरण पुजारी, छद्दम सेक्युलरिस्ट और हिन्दुत्व को अपमानित करने वालों को आंख खोलकर देखना चाहिए:- 

वहाँ दाढ़ी बढ़ाना, रोज़ा रखना और यहाँ तक कुरान पढ़ना सभी को संदिग्ध गतिविधि के दायरे में रखा गया है। इस मुद्दे पर अलग-अलग जानकारों के अपने मत हैं, कुछ का मानना है कि चीन की जिनपिंग सरकार का यह रवैया बेहद नकारात्मक है, इसका लोगों पर भयावह प्रभाव पड़ रहा। इससे चीन का एक वर्ग कट्टरपंथ की ओर आगे बढ़ेगा। 

क्या था 7 अगस्त 2008 को कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच हुआ 'गुप्त' समझौता?

कॉन्ग्रेस पार्टी और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टीभारत और चीन सेना के बीच हुई आपसी झड़प में भारत के 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। वहीं चीन ने भी कमांडिग ऑफिसर समेत अपने 40 से ज्यादा सैनिकों को खोया। इस बीच भारत सरकार लगातार तनाव को खत्म करने की कोशिशों में जुटी रही। लेकिन विपक्ष ने राष्ट्रीय सुरक्षा मामले पर केवल राजनीति खेली और चीन पर बिलकुल मौन रहीं। ऐसा क्यों?
पूरे मामले पर यदि गौर करें। तो पता चलता है वह कांग्रेस पार्टी जो भारत-चीन मामले पर लगातार मोदी सरकार की आलोचना कर रही थी। उसी कांग्रेस पार्टी के चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के साथ गहरे संबंध हैं। जो स्पष्ट बताते हैं कि कांग्रेस ने आखिर हमेशा चीन के प्रति अपना रवैया इतना नरम क्यों रखा? और क्यों भारतीय सेना पर हमला करने के बावजूद कांग्रेस ने कभी चीन को लेकर एक शब्द नहीं बोला? जबकि दूसरी ओर अपने देश की सरकार पर सवाल उठाते रहे।
भारत की चीन और पाकिस्तान से कोई मतभेद नहीं, मतभेद हैं प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर 2014 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में इन दोनों देशों द्वारा हड़पी भारतीय ज़मीन को लेकर है। यही कारण है कांग्रेस इन देशों के विरुद्ध की जाने वाली हर सख्ती का विरोध कर अप्रयत्क्ष रूप से इन दोनों देशों की बोली बोलती रहती है। 
महत्वपूर्ण मुद्दों पर परामर्श के लिए CCP के साथ समझौते पर कांग्रेस के हस्ताक्षर 
7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कांग्रेस और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। शायद आज वही वजह है कि कांग्रेस चीन की नापाक हरकतों पर भी चुप्पी साधे हुए है। यूपीए के अपने पहले कार्यकाल के दौरान कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने उच्च स्तरीय सूचनाओं और उनके बीच सहयोग करने के लिए बीजिंग में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 
इस समझौता ज्ञापन ने दोनों पक्षों को महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर एक-दूसरे से परामर्श करने का अवसर प्रदान किया। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि 2008 में CCP और कांग्रेस के बीच समझौता ज्ञापन उस समय आया जब भारत में वामपंथी दलों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA-1 सरकार में विश्वास की कमी व्यक्त की थी।
इस समझौता ज्ञापन को तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के मुख्य सचिव राहुल गाँधी ने सोनिया गाँधी की उपस्थिति में साइन किया था। जबकि चीन की ओर से इसे स्वयं वहाँ के वर्तमान प्रधानमंत्री शी जिनपिंग ने हस्ताक्षर किया था। उस समय जिनपिंग पार्टी के उपाध्यक्ष थे। 
इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने से पहले सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की शी जिंनपिंग के साथ आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए लंबी बैठक हुई थी।
साल 2008 में सोनिया गाँधी अपने बेटे राहुल, बेटी प्रियंका, दामाद रॉबर्ट वाड्रा और दोनों के बच्चों को साथ लेकर ओलंपिक खेल देखने पहुँची थीं। इसके अलावा उन्होंने और राहुल गाँधी ने चीन में कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया था।
Ambassador Luo Zhaohui meets Congress Vice President Rahul Gandhiराहुल गाँधी के चीन के साथ सम्बन्ध 
बात सिर्फ़ इस समझौते ज्ञापन की नहीं है। राहुल के संबंध चीन के साथ कुछ समय पहले डोकलाम विवाद पर भी उजागर हुए थे। जब उन्होंने चीन के साथ एक नहीं दो बार गुप्त बैठकें की थी।
पहली मीटिंग 2017 में हुई थी, जब उन्होंने चीनी राजदूत लुओ झाओहुई के साथ उस समय बैठक की थी, जब भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद छिड़ा था।
इस बैठक के संबंध में पहले तो कांग्रेस ने साफ इंकार कर दिया था। लेकिन जब चीन की एंबेसी ने खुद इसका खुलासा किया, तो कांग्रेस को इस मुद्दे पर काफी जिल्लत झेलनी पड़ी थी। यह बैठक विशेष रूप से संदिग्ध इसलिए भी थी, क्योंकि उस समय कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी, चीन के साथ चल रहे सैन्य गतिरोध पर अपने रुख पर कायम रहते हुए भारत सरकार पर तीखे हमले कर रहे थे।
इसके बाद कैलाश मानसरोवर मामले पर चीन के नेताओं से हुई गुप्त बैठक के बारे में तो राहुल गाँधी ने खुद ही खुलासा कर दिया था। राहुल उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। जिसके कारण उनका इस तरह चीन अधिकारियों व नेताओं से बैठक करने ने कई सवाल खड़े कर दिए थे।
एक अन्य दिलचस्प कोण कांग्रेस और चीन के बीच का और देखिए। LAC पर भारतीय सेना पर आक्रमक रवैया रखने के कारण पार्टी नेता अधीर रंजन चौधरी ने चीन को लेकर लोकसभा में अपना गुस्सा जाहिर किया था। साथ ही भारतीय नेताओं को सराहते हुए चीन को चुनौती भी दी थी।
कुछ समय बाद अधीर रंजन चौधरी को चीन के ख़िलाफ़ अपने रवैया हल्का करना पड़ा और चीन पर किया अपना ट्वीट भी डिलीट करना पड़ा। ये शायद इसलिए हुआ क्योंकि चीन के ख़िलाफ़ अपने नेता के बोल कांग्रेस पार्टी को ही नहीं पसंद आए। जिसके मद्देनजर  राज्य सभा सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया पर यह सफाई तक दी।
उन्होंने लिखा, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत और चीन के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मान्यता और महत्व देती है। दुनिया की दो प्राचीन सभ्यताओं और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, दोनों देशों को 21वीं शताब्दी में एक महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए नियत किया गया है।”
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भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच जारी विवाद के बीच चीनी सेना के साथ झड़प में भारत क...
कांग्रेस नेता ने आगे सफाई में लिखा, “चीन के बारे में कांग्रेस के लोकसभा नेता अधीर रंजन चौधरी के विचार उनके अपने हैं और पार्टी की स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।”

शी जिनपिंग और पीएम मोदी की मुलाकात से जल रहा है पाकिस्तान

हर मंच पर मात खाने के बाद पाकिस्तान अब ट्वीटर पर फर्जी ट्रेंड चलाकर अपनी भड़ास निकाल रहा है। शी जिनपिंग की भारत यात्रा पाकिस्तान को किस तरह की तकलीफ दे रही है इसका बात का अंदाजा Go Back Modi हैशटेग से लगा सकते है। मैदान में मात खाने के बाद अब ट्विटर पाकिस्तान का अगला हथियार है। पाकिस्तान के लोग फर्जी ट्वीट कर शी जिनपिंग की इस यात्रा का विरोध कर रहे हैं, पर इस यात्रा की पूरी दुनिया में जबरदस्त चर्चा हो रही है।


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चीनी मीडिया में छाई पीएम मोदी और जिंगपिंग की बैठक, कहा 21वीं सदी एशिया की होगी
जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग के भारत के दौरे के बीच चीनी मीडिया में भारत को लेकर खूब चर्चा हो रही है, इसके साथ ही चीनी मीडिया ने भारत के साथ दोस्ती को भी अहम बताया है। चीनी मीडिया के मुताबिक भारत और चीन मिलकर 21वीं सदी को एशिया के नाम कर सकते हैं। एशिया के कई नेता और रणनीतिकारों का कहना है कि 19वीं सदी यूरोप और 20वीं सदी अमेरिका की रही है, अब 21वीं सदी एशिया की होगी। एशिया की होगी 21वीं सदी एशिया के कई नेता और रणनीतिकारों की माने तो 19वीं सदी यूरोप और 20वीं सदी अमेरिका की रही है, अब 21वीं सदी एशिया की होगी। चीनी मीडिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की दूसरी अनौपचारिक बैठक को अहम बताते हुए कहा है कि इससे संबंध नए आयाम पर पहुंचेंगे। मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया से मिला लाभ चीनी मीडिया ने भारत के साथ आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि चीनी कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में भारत के मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए निवेश में इजाफा किया है। वहीं भारतीय कंपनियों का भी चीन में निवेश बढ़ा है। बैठक से दोनों देशों के संबंधों को मिलेगी मजबूती पीएम मोदी और शी जिंगपिंग की मुलाकात को अहम बताते हुए चीनी मिडिया में बताया जा रहा है कि ये बैठक दोनों देशों के संबंधों को एक नई मजबूती देगी। इसके साथ ही चीन के अखबारों ने आर्थिक मोर्चे पर भारत-चीन के सहयोग की भी सराहना की।

नेहरु की गलती से हुआ था कश्मीर पर चीन का कब्ज़ा : मनीष तिवारी, कांग्रेस सांसद

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहते हैं, सुबह भुला अगर शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नहीं कहते", जो कांग्रेस पर चरितार्थ होती नज़र आ रही है। अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस ने भी स्वीकारना शुरू कर दिया है कि जवाहर लाल नेहरू द्वारा की गयी गलतियों को आज तक देश को भुगतना पड़ रहा है।   
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने चीन के मसले पर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को चीन से बात कर भारत के आतंरिक मामलों में दखल न देने की बात कहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को यह साफ़ कर देना चाहिए कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है।
अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि यदि चीन यह कहता है कि उसकी नज़र कश्मीर पर है तो उसे यह भी याद दिला दिया जाना चाहिए कि हमारी (भारत की) नज़र हॉन्ग-कॉन्ग पर है।
हॉन्ग-कॉन्ग में मानवाधिकारों के उल्लंघन और लोकतान्त्रिक मूल्यों के पतन का हवाला देते हुए अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि तिब्बत में चीन का अत्याचार हम न जाने कब से देखते आ रहे हैं, साथ ही उन्होंने अपने इसी ट्वीट में दक्षिणी चीन सागर (साऊथ चाइना सी) का भी ज़िक्र किया। मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत क्यों सवाल नहीं उठाता?


कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने यह बयान उस वक़्त दिया है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर आने वाले हैं। इतना ही नहीं, मनीष तिवारी ने यहाँ तक कह दिया कि मोदी को चीन से अक्साई चीन के मुद्दे पर बात करनी चाहिए जिसे अनधिकृत रूप से चीन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था और मौजूदा वक़्त में उसने वह पकिस्तान को सौंपा हुआ है।
स्मरण हो, सन् 1962 में पंडित नेहरु के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार की बेहद लाचार रक्षा नीतियों के चलते भारत को चीन से युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा था जिसके बाद कश्मीर का एक हिस्सा चीन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था जिसे आज हम अक्साई-चिन के नाम से जानते हैं।

बिश्केक में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को घेरा, आतंकवाद पर वैश्विक सम्मेलन बुलाने की मांग की

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के बाद सम्मेलन के दूसरे दिन आतंकवाद पर उसे घेर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर एक वैश्विक सम्मेलन बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि एससीओ के सदस्य देशों को एकजुट होकर आतंकवाद से लड़ने की जरूरत है। आतंकवाद को मानवता का अभिशाप बताते हुए पीएम ने कहा कि एससीओ को अपने संकीर्ण दायरे से निकलकर इसके खिलाफ खड़ा होने की आवश्यकता है। एससीओ सम्मेलन के दूसरे दिन महाधिवेशन को संबोधित करते हुए पीएम ने यह बात कही।
मोदी ने आतंकवाद के क्रूर चेहरे का जिक्र करने के लिए अपने हाल की श्रीलंका यात्रा का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने हाल ही में श्रीलंका का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान मैं उस चर्च में गया जहां आतंकियों ने खूनी खेल खेला। आतंकवाद किसी का भला नहीं कर सकता। आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए एससीओ के सदस्यों को अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना चाहिए।' 
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PM Modi addressing leaders of member states at the SCO summit in Bishkek: India has been a permanent SCO member for 2 yrs now, we've given a positive contribution in all activities of SCO. We've continued engagements to enhance SCO's role & credibility on the international stage.
पीएम ने कहा कि भारत पिछले दो वर्षों से एससीओ का स्थायी सदस्य रहा है और इस दौरान एससीओ के सभी कार्यों में हमने सकारात्मक योगदान दिया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एससीओ की भूमिका एवं विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए अन्य देशों के साथ बातचीत के अलावा भारत ने हर संभव कदम उठाए हैं। पीएम ने कहा कि एससीओ देशों के बीच वित्तीय मामलों में सहयोग मजबूत बनाने के लिए भारत डिजिटल संसाधनों की दिशा में कदम उठाएगा। इसके साथ ही ऊर्जा के वैकल्पक स्रोतों को विकसित करने के लिए भारत अपने अनुभवों को साझा करने के लिए तैयार है।
 शी जिनपिंग से मिलकर पीएम मोदी ने उठाया आतंकवाद का मसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए किर्गिस्‍तान की राजधानी बिश्‍केक में हैं, जहां गुरुवार को उन्‍होंने चीन और रूस के राष्‍ट्रपतियों से मुलाकात की। चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के साथ पीएम मोदी की प्रतिनिधिमंडल स्‍तर की वार्ता को भारत-चीन और भारत-रूस के संबंध में काफी अहम माना जा रहा है।
शी से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने परोक्ष रूप से पाकिस्‍तान पर निशाना साधा। उन्‍होंने आतंकवाद का मसला उठाते हुए दो टूक कहा कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, बातचीत का माहौल तैयार नहीं होगा। पीएम मोदी ने इस दौरान भारत और चीन के बीच पिछले कुछ समय में बेहतर हुए सामरिक संवाद और कई लंबित मुद्दों के सुलझने का भी जिक्र किया, जिनमें भारत में बैंक ऑफ चाइना की शाखा खोले जाने और पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का मुद्दा खास तौर पर शामिल रहा।
चीन के अड़ंगे की वजह से मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का मुद्दा पिछले काफी समय से लंबित था। भारत को इस दिशा में हाल ही में उस वक्‍त बड़ी कामयाबी मिली जब चीन ने इस पर अपनी आपत्ति हटा ली और मसूद को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्‍ताव पारित कर वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने चीन के राष्‍ट्रपति को दूसरी अनौपचारिक वार्ता के लिए भारत दौरे का न्यौता दिया, जिस पर उन्‍होंने सहमति जताई। चीन के राष्‍ट्रपति ने कहा कि वह इसी साल भारत दौरे के लिए तैयार हैं। हालांकि अभी इस संबंध में समय तय नहीं हुआ है। यह चीन के शहर वुहान में हुई पीएम मोदी और शी की अनौपचारिक वार्ता का दूसरा चरण होगा।
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Had an extremely fruitful meeting with President Xi Jinping. Our talks included the full spectrum of India-China relations.

We shall continue working together to improve economic and cultural ties between our nations.
मोदी की बिश्‍केक में रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की, जिसके बाद दोनों नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल स्‍तर की वार्ता की। रूस के राष्‍ट्रपति ने पीएम मोदी को ईस्‍टर्न इकोनॉमिक फोरम में मुख्‍य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया, जिसका आयोजन रूसी शहर व्‍लादिवोस्‍तोक में सितंबर में होने वाला है। पीएम मोदी ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी। इस दौरान पीएम मोदी ने यूपी के अमेठी का भी जिक्र किया और वहां राइफल मैन्‍युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में सहयोग के लिए रूस को धन्‍यवाद दिया। रूस और चीन, दोनों देशों के साथ प्रतिनिधिमंडल स्‍तर की वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने हिन्‍दी में अपनी बात रखी।
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A special partner, a privileged relationship!

PM @narendramodi met with @KremlinRussia_E Vladimir Putin on the sidelines of in . Reviewed all aspects of bilateral relations to further strengthen the strategic relationship.
मोदी ने जिस तरह शी से मुलाकात कर आतंकवाद और मसूद अजहर का जिक्र किया और चीन के राष्‍ट्रपति को दूसरी अनौचारिक वार्ता के लिए भारत आमंत्रित किया, जिसे उन्‍होंने स्‍वीकार भी कर लिया, उसे पाकिस्‍तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की दिशा में भारत की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। चीन कई अवसरों पर पाकिस्‍तान का गाहे-बगाहे पक्ष लेता रहा है और ऐसे में भारत के मौजूदा कदमों को काफी अहम माना जा रहा है।