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शिवसेना का शरद पवार से प्रश्न - 'स्वाभिमान का मतलब क्या होता है पवार साहब?'

शिवसेना ने शरद पवार से पूछा- 'स्वाभिमान का मतलब क्या होता है पवार साहब?'शिवसेना के मुखपत्र सामना में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार पर निशाना साधा हैं. सामना मे लिखा है, 'शरद पवार ने कहा है कि मतदाता भगोड़ों को सबक सिखाएंगे. पवार ने सच कहा है. शिवसेना, कांग्रेस या राष्ट्रवादी से समय-समय पर जो लोग निकले हैं उनकी समय-समय पर हार हुई है. छगन भुजबल शिवसेना छोड़कर गए तब वे मझगांव से हारे. नासिक के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने उन्हें धूल चटाई. नारायण राणे का कोकण में पराभव हुआ और नई मुंबई में गणेश नाईक हारे. पवार ने पुन: पार्टी को मजबूत करने के लिए महाराष्ट्रभर में दौरा शुरू किया है. उनके काम करने का जोश ज्यादा है.'
सामना ने आगे लिखा है, 'महाराष्ट्र के मेगा रिसाव का सबसे बड़ा फटका पवार की राष्ट्रवादी को पड़ा है. शरद पवार कहते हैं कि जो कोई छोड़कर गया उसकी चिंता मत करो. पार्टी छोड़कर जानेवालों ने अपना स्वाभिमान गिरवी रख दिया है. स्वाभिमान का मतलब क्या होता है पवार साहब? खुद पवार साहब ने स्वाभिमान के मुद्दे पर सोनिया से विवाद किया. कांग्रेस में बगावत की. आज उसी सोनिया के साथ गत डेढ़-दो दशकों से उनकी राजनीतिक ‘गुफ्तगू’ शुरू है.
शिवसेना ने अपने मुखपत्र में लिखा है, 'शिवसेना या बीजेपी के कुछ लोगों को जब कांग्रेस और राष्ट्रवादी ने अपनी पार्टी में शामिल किया था तब उन लोगों ने स्वाभिमान के कौन-से शिखर को फतह किया था? उस दौरान भी उन्होंने स्वाभिमान आदि शब्द की ऐसी-तैसी कर डाली थी. शिवसेना छोड़ते वक्त उन्हें स्वाभिमान का अजीर्ण नहीं हुआ था और आज भी पार्टी बदलते हुए उन्हें स्वाभिमान की डकार नहीं आती...
...पवार साहब का कहना है कि ‘मैं अपने 52 वर्षों के राजनीति जीवन में 27 वर्ष सत्ता से बाहर था. सत्ता के बाहर रहकर मैंने ज्यादा काम किया. अब पार्टी बदलने वाले जब कहते हैं कि वे विकास के लिए जा रहे हैं तब हंसी आती है!’ पवार को ये बात मजाक लगे यही सबसे बड़ा मजाक है.'
सामना में आगे लिखा हैं, 'आदमी और उसकी ताकत देखकर विकास के काम और स्वाभिमान के तार मिलाए जाते हैं. पवार साहब, आज आप जिन्हें भगोड़ा कह रहे हैं वे कल कहीं से भागकर या फूटकर आपके तंबू में घुसे थे.अब आपका तंबू जमींदोज हो गया. स्वाभिमान का नाम क्यों लेते हो? घुमाव से निकला जल फिर वहीं पहुंच गया.'(एजेंसीज इनपुट्स)

कश्मीर : 'अब आतंकियों के सामने दबने वाली सरकार नहीं रही' :शिवसेना

शिवसेना ने की PM मोदी-अमित शाह की तारीफ, 'अब आतंकियों के सामने दबने वाली सरकार नहीं रही'जम्मू और कश्मीर में भारी मात्रा में सेना की मौजूदगी को लेकर ना सिर्फ कश्मीरी और राजनीतिक पार्टियां बल्कि पूरा देश की जिज्ञासा में है. इसी जिज्ञासा के बीच मोदी सरकार की प्रमुख सहयोगी शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जमकर तारीफ की है. शिवसेना ने ने सामना के संपादकीय में लिखा है,'आतंकवादियों के डर से सरकार ने अमरनाथ यात्रियों को रोक दिया है और यह फैसला क्यों लिया गया इसका पता भविष्य में पता चलेगा. '
अमित शाह की तारीफ करते हुए सामना ने लिखा है, 'जब भी कोई गृहमंत्री कश्मीर जाता है तो उसे विरोध झेलना पड़ता है पर इस बार जब अमित शाह कश्मीर गए तो सभी अलगाववादी और आतंकवादियों ने दुम दबा ली.'
पिछली कांग्रेस सरकार को खरी सुनते हुए सामना ने लिखा, 'अब केंद्र में हिन्दू विरोधी और आतंकियों के सामने दबने वाली सरकार नहीं रही. सरकार कौन सा कदम उठाएगी ये हमेशा कि तरह गोपनीय है, नोटबंदी कि तरह. सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि अगर सरकार आतंकवादियों के विरोध में कोई भी कदम उठा रही है तो उससे निसन्देह आगे बढ़ना चाहिए और पूरा देश उनके साथ है. कश्मीर का मुद्दा चर्चा से हाल होगा इस भ्रम को मिटाना होगा ये मुद्दा अब सेना की कार्रवाई से ही दूर होगा. ' 
महबूबा मुफ्ती पर सवाल करते हुए शिवसेना ने लिखा है, 'उन्हें लगता है कि आर्टिकल 35A हटाने के लिए सरकार ने सेना भेजी है, इस धारा को हटाना मोदी का कर्तव्य है. महबूबा मुफ्ती और अलगाववादियों कि भाषा आतंकवादियों कि तरह है शाह को इसे सहन नहीं करना चाहिए.' 

प्राप्त सूचना के अनुसार, महबूबा, उमर और अन्य कश्मीरी नेताओं को नज़र बंद कर कश्मीर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। चर्चा यह भी है कि उन कश्मीरियों पर, जो कश्मीर से बाहर दिल्ली और अन्य स्थानों पर होटल अथवा ढाबा आदि पर निगाह रख किसी अनहोनी से सतर्क किया जा रहा है। 
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जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकी हमले की आशंका के बाद सरकार की एडवाइजरी के बाद हालात तनावपूर्ण हैं. रविवार(अगस्त 4) रात को श.....

मुफ्ती पर दंगे भड़काने के आरोप लगते हुए सामना ने UAPA कानून का समर्थन किया और इससे मुफ्ती पर इस्तेमाल करने की सलाह दी है. शिवसेन ने लिखा है, 'आने वाली 15 तारिक को कश्मीर में लगे सभी हरे झंडे को निकालकर तिरंगा फहराना है, साथ है इस बात पार नजर होगी कि इस बार मोदी लाल किले से क्या घोषणा करते हैं.'