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कर्नाटक : हलाल बैन करने वाला पहला राज्य हो सकता है : बिल लाने की तैयारी, विधानसभा में सावरकर की तस्वीर से कांग्रेस चिढ़ी

                                    सीएम बोम्मई, हलाल और सावरकर (साभार: हिंदुस्तान और ANI)
कर्नाटक की भाजपा ने राज्य में हलाल मांस (Anti Halal Bill) की प्रतिबंधित करने के लिए विधानसभा में बिल लाने का निर्णय किया है। अगर यह बिल सदन में पास हो जाता है और कानून लागू हो जाता है तो कर्नाटक भारत का पहला राज्य बन जाएगा, जो हलाल मीट पर प्रतिबंध लागू करेगा। हालाँकि, इस बिल को लेकर हंगामा होने के आसार हैं, क्योंकि कांग्रेस ने इसका विरोध किया है।

दूसरी ओर, विधानसभा में विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) के चित्र के अनावरण को लेकर कांग्रेस ने बसवराज बोम्मई सरकार (Basavaraj Bommai Government) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। चित्र का अनावरण कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने किया।

भाजपा के विधान पार्षद एन रविकुमार ने इस बिल को सदन में लाने की पहल की है। इसमें भारतीय खाद्य सुरक्षा और सुरक्षा संघ (FSSAI) के अलावा किसी अन्य संस्था के खाद्य प्रमाणन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इस संबंध में रविकुमार ने इस संबंध में राज्यपाल थावरचंद गहलोत को लिखा था।

रविकुमार ने इसे निजी विधेयक के रूप में पेश की का विचार किया था, लेकिन अब वे इसे सरकारी विधेयक के रूप में पेश कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व के समर्थन और सहयोग के बाद उन्होंने इसे सरकारी विधेयक के रूप में पेश करने की योजना बनाई है।

रविकुमार ने कहा कि बाजार को अवैध रूप से नियंत्रित करने के लिए कुछ अनधिकृत संस्थाएँ खाद्य प्रमाणन के काम जुटी हुई हैं। इसको खत्म करने के प्रयास के तहत इस विधेयक को सदन में पेश किया जाएगा। वहीं, कांग्रेस ने इस प्रस्तावित विधेयक का विरोध किया है।

परिषद में कांग्रेस के विपक्ष के नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी ने सदन के अध्यक्ष से इस बिल को मंजूर नहीं करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा की एक रणनीति है। इसके आधार पर वह मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रही है।

इस साल अप्रैल में भी हलाल मीट को लेकर कर्नाटक में बवाल हुआ था। हिन्दू संगठनों ने उगादी उत्सव के दौरान हलाल मांस का बहिष्कार करने की अपील की थी। बता दें कि हलाल मीट को लेकर देश भर में बहस होती रही है और इसे जानवरों के प्रति क्रूरता कहा जाता है।

हलाल अरबी भाषा का शब्द है। हलाल प्रक्रिया में जानवर के श्वसन नली को थोड़ा सा काट कर छोड़ दिया जाता है। इससे वह लंबे समय तक तड़पता रहता है। इस्लाम में जानवरों के हलाल करने के बाद ही उसे खाने की बात कही गई है। इसलिए मुस्लिम समुदाय हलाल पर जोर देता है।

हलाल में जानवर को मारने की क्रूर प्रक्रिया के कारण नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, साइप्रस, ऑस्ट्रिया, ग्रीस और बेल्जियम में इस पर बैन लगाया गया है। साल 2021 में बेल्जियम ने हलाल पर प्रतिबंध लगाते हुए नियम कहा था जानवरों को मारने से पहले अनिवार्य रूप से उसे पहले बेहोश किया जाए। इससे हलाल मांस पर अपने आप रोक लग जाए।

‘एक ने अंग्रेजों के सामने सिर झुका दिया, दूसरे ने चाइना के सामने’ – झूठ फैलाने पर AAP नेता पर FIR

मोदी चीन के आगे झुका
पहले भारत के वास्तविक इतिहास से छेड़खानी का जो काम कांग्रेस और वामपंथी कर रहे थे, अब उस काम को आम आदमी पार्टी अंजाम देने में लग गयी है। आम आदमी पार्टी ने समझा कि जनता को भ्रमित कर कांग्रेस और वामपंथियों ने इतने वर्ष राज किया, क्यों ना उसी रास्ते को अपनाकर दिल्ली से बाहर भी अपना राज स्थापित किया जाए। शायद, केजरीवाल पार्टी यह भूल रही है कि दिल्ली और पंजाब से बाहर कोई उनकी पार्टी को घास तक डालने वाला नहीं। दूसरे, यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जैसे-जैसे जनता को देश के वास्तविक इतिहास की जानकारी होनी शुरू हुई देश की दोनों सबसे पुरानी पार्टियां अब पाताललोक में स्थान पाने को लालायित है। केजरीवाल पार्टी को बने हुए अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ है, और दिल्ली और पंजाब से बाहर इस पार्टी के अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने के आलावा कई क्षेत्रों में तो NOTA से भी कम वोट मिलते हैं। दिल्ली और पंजाब से बाहर कोई केजरीवाल द्वारा मुफ्त में दी जाने वाली हड्डी के पीछे नहीं भागता। 
जिस तरह तुष्टिकरण पुजारी और पाकिस्तान समर्थक नाथूराम गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को प्रतिबंधित कर आरोपी सिद्ध करने में लगे हुए हैं, उसी तर्ज पर विनायक दामोदर सावरकर की क़ुरबानी को नजरअंदाज कर झूठे आरोपों से कलंकित किया जाने वाली नीति केजरीवाल पार्टी ने अपना ली, जो पार्टी के बहुत घातक सिद्ध होने वाली है। जिस दिन गोडसे, सावरकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अन्य क्रांतिकारियों की वास्तविकता जगजाहिर होगी, इन्हे कलंकित किए जाने वाले मुंह छुपाये भागते नज़र आएंगे।  
प्रधानमंत्री मोदी, सुरक्षाबलों और वीर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पदाधिकारी अमित मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर बीजेपी के प्रवक्ता सुरेश नखुआ की शिकायत पर मुंबई में दर्ज कराई गई।
आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी अमित मिश्रा ने 20 जून, 2020 को अपने ट्विटर एकाउंट से एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को चीन के प्रधानमंत्री के सामने सिर झुकाते हुए वाला फोटो (जबकि यह फोटो ही फेक है, फोटोशॉप्ड है) लगाया था। साथ ही उन्होंने वीर सावरकर की फ़ोटो को भी लगाया। यह ट्वीट उन्होंने तब किया जब चीन के साथ हुए हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

बीजेपी के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने अपनी शिकायत में कहा कि अमित मिश्रा ने ऐसा ट्वीट कर न सिर्फ पीएम की गरिमा को बदनाम किया है बल्कि उन्होंने वीर सावरकर को मानने वाले लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुँचाया है। प्रधानमंत्री की फ़ोटो को फोटोशॉप करके चीन के प्रधानमंत्री के सामने झुका कर उन्होंने भारतीय सेना का सम्मान करने वाले लोगों के भावनाओं को भी तकलीफ पहुँचाने का काम किया है।
नखुआ ने कहा कि मिश्रा द्वारा पोस्ट किए गए ऐसे ट्वीट के लिए उनके एकाउंट को सस्पेंड किया जाए। और इस पर संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई हो।
दरअसल इस ट्वीट ने न सिर्फ उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को बदनाम किया बल्कि सैनिकों द्वारा देश की रक्षा में बलिदान हुए सैनिकों का भी अपमान किया है। इस ट्वीट में उन्होंने वीर सावरकर और प्रधानमंत्री के लिए लिखा, “एक ने अंग्रेजों के सामने सर झुका दिया था और दूसरे ने चाइना के सामने…” इस विवादित ट्वीट पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
अमित मिश्रा आम आदमी पार्टी में 2008 से आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। और यह उनका कोई पहला विवादित ट्वीट नहीं है। आए दिन वे इस तरह कई विवादित टिप्पणियाँ अपने एकाउंट पर पोस्ट करते रहते हैं।
जहाँ एक तरफ पूरा देश सैनिकों के बलिदान को पर गम और गुस्से में है, वहीं AAP के पदाधिकारी द्वारा इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरक़त से उन्होंने सिर्फ़ घटिया राजनीति ही नहीं की बल्कि देश के सम्मान को भी ठेस पहुँचाया है।

JNU में मार्ग का नाम वीर सावरकर के नाम पर रखा गया

वीर सावरकर मार्ग

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारत की महान विभूतियों के नाम पर भवनों के अथवा मार्गों के नाम रखने की शृंखला में एक और नाम जुड़ गया है स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर मार्ग। इससे पूर्व भारतरत्न बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी के नाम पर पुस्तकालय का नाम रखा जाना हो या महान गणितज्ञ आर्यभट्ट, महान शल्य चिकित्सक सुश्रुत, भारत की समन्वयवादी परम्परा के आचार्य अभिनव गुप्त जी एवं भारतरत्न पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी जैसे भारत के गौरवों के नाम पर मार्गों का नामकरण हो। निसन्देह स्तुत्य एवं सराहनीय कार्य है। ऐसा पुनीत कार्य भारत के विश्वविद्यालयों में जहाँ भारत के भविष्य की पटकथा लिखी जाती हो, संस्कार निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व के अन्य शीर्ष विश्वविद्यालयों के नाम भी उस देश विशेष के किसी न किसी व्यक्ति, स्थान अथवा परम्परा को ही द्योतित करते हैं। वस्तुतः भारतीय परम्परा में नामकरण केवल अभिधान के लिए नहीं होते अपितु जिस नाम पर सम्बन्धित व्यक्ति का नाम रखा जाता है, उसमें उस नाम के गुण, वैशिष्ट्य की भी साकार अभिव्यक्ति की अपेक्षा रहती है। यथा नाम तथा गुण:।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक लंबे समय तक कम्यूनिस्ट विचारधारा का प्रभाव रहा। कॉन्ग्रेस ने खुद को सत्ता में बनाए रखने के लिए कम्यूनिस्टों को शिक्षा का दारोमदार सौंप दिया। इसके बाद शुरु हुई भारतीयता को अपमानित करने की प्रथा। जिन कम्यूनिस्टों ने स्वाधीनता आंदोलन के दौरान भारत की वादा खिलाफी की, भारतीय महापुरुषों को अपमानित करने का कार्य किया, कभी सुभाष बाबू को तोजो का कुत्ता तो कभी कवींद्र रवींद्र को माघीर दलाल जैसे अपशब्दों से सम्बोधित किया, जो स्वतंत्रता आंदोलन के नायक महात्मा गाँधी जी तक को अपशब्द कहने से नही चूके, उन कम्यूनिस्टों के हाथों में भारत की शिक्षा व्यवस्था वास्तव में भारतीयता को समाप्त करने का ही कुचक्र था।
कम्यूनिस्टों द्वारा भारतीय महापुरुषों को अपमानित करने का ताजा उदाहरण दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में स्वाधीनता सेनानियों को ‘आतंकवादी’ कहने का ही दुस्साहस था, जो कि बाद में अभाविप एवं देश के प्रबुद्ध नागरिकों की आपत्ति व न्यायिक लड़ाई के बाद सुधारना पड़ा। ऐसे ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विवेकानंद जी की प्रतिमा को नष्ट करने का प्रयास भी कम्यूनिस्टों की इसी गर्हित मानसिकता को प्रकट करता है।
यह एक विडंबना ही कही जाएगी कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ कार्यालय में भी भारतीय महापुरुष विवेकानंद आदि जी का चित्र भी तभी लगाया जाता है, जब ABVP JNUSU में चुनकर आती है। उससे पूर्व वहाँ मार्क्स, लेनिन, स्टालिन आदि मानवता के हत्यारों को स्थान दिया जाता है, किंतु भारतीयता के अग्रदूतों को नहीं।
यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि मानवता का हत्यारा एवं अनेकों महिलाओं के साथ बर्बरता करने वाला चे ग्वेरा तो कम्यूनिस्टों का रोल मॉडल बनता है किन्तु राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए जीवन में दो बार आजीवन कारावास की सजा पाने वाले एवं समरस भारत के स्वप्नद्रष्टा वीर सावरकर इनकी कुंठा के शिकार।
स्वाधीनता के उपरांत अपने ही देश में जितना अपमान वीर विनायक दामोदर सावरकर जी को झेलना पड़ा शायद ही किसी अन्य महापुरुष को ऐसा अपमान झेलना पड़ा हो। एक ऐसे महापुरुष जिनका सम्पूर्ण परिवार ही स्वाधीनता आन्दोलन के लिए समर्पित रहा।
आज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक मार्ग का नाम सावरकर जी के नाम पर रखा जाना निसन्देह एक दूरदर्शितापूर्ण कदम है। यह कदम उस स्थान पर अत्यावश्यक हो जाता है, जहाँ बैठकर स्वतन्त्रता उपरांत एक खास इतिहासकारों के वर्ग ने भारतीय मूल्यों को धूलि-धूसरित करने का कार्य करते हुए इतिहास की मनगंढ़त व्याख्या हमारे समक्ष रखी। जहाँ बैठकर औरंगजेब का महिमामंडन एवं दाराशिकोह को नेपथ्य में रखा गया। जहाँ फिदेल कास्त्रो का तो गुणगान किया गया किन्तु महामना, स्वामी दयानंद, स्वामी श्रद्धानंद एवं तिलक आदि के स्वाधीनता आन्दोलन के प्रयासों को भुला दिया गया। ये वही कम्यूनिस्ट थे जिन्होनें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना के उपरांत वहाँ दशकों तक संस्कृत केंद्र तक नही खुलने दिया।
संस्कृत केंद्र जब अभाविप के दीर्घकालिक संघर्ष के फलस्वरूप अटल जी के नेतृत्व वाली NDA सरकार में बन गया तो उसे स्कूल में परिवर्तित नहीं होने दिया। योग-संस्कृति और आयुर्वेद को JNU से कम्यूनिस्टों द्वारा धक्का मारने की बात की गई। ऐसे में भारत की महान विभूतियों के नाम पर विश्वविद्यालय के भवन अथवा मार्गों का नामकरण निश्चय ही भारत के भविष्य के कर्णधारों में भारतीयता के गौरव की चेतना विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन साधुवाद का पात्र है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की यह वर्षों पूर्व माँग थी, जो सफल हुई। अभी भी सावरकर जी के नाम पर विश्वविद्यालय में चेयर की स्थापना के प्रयास हों या विश्वविद्यालय में सावरकर जी की प्रतिमा लगवाने की बात हो, विद्यार्थी परिषद इस सकारात्मक वैचारिक आन्दोलन को निरंतर जारी रखेगी।

रहस्योघाटन : ‘कांग्रेस की अनुमति से हुई गाँधी की हत्या और कांग्रेस ने ही उठाया सबसे ज्यादा फायदा’-- रणजीत सावरकर

रणजीत सावरकर
वीर सावरकर के पौत्र रणजीत सावरकर 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले वाले बयान माफी माँग ली है। प्रज्ञा ठाकुर के द्वारा महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले वक्तव्य पर विपक्ष ने भारी हंगामा किया था। शुक्रवार (नवंबर 29, 2019) को लोकसभा में उन्होंने कहा माफी माँगते हुए कहा कि उन्होंने नाथूराम गोडसे को देशभक्त नहीं कहा, फिर भी अगर किसी को ठेस पहुँचती है तो क्षमा माँगती है। उनका कहना था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। 
इस मुद्दे पर कांग्रेस जमकर राजनीति कर रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जहाँ प्रज्ञा ठाकुर को आतंकवादी कहा, वहीं मध्य प्रदेश के एक कांग्रेस विधायक ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जिंदा जलाने की धमकी दी है। कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर राज्य में प्रवेश करेंगी तो उन्हें ज़िंदा जला दिया जाएगा।
अब इस पर स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्त वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) के पौत्र रणजीत सावरकर ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि महात्मा गाँधी की हत्या कॉन्ग्रेस की अनुमति से हुई थी और इसका सबसे ज्यादा फायदा भी कांग्रेस ने ही उठाया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस गाँधी की हत्या का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती रही है।    
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Hw News के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने कई बातों का ज़िक्र किया है. उन्होंने यह बताया की ...

रणजीत सावरकर यहीं पर नहीं रूके। उन्होंने आगे कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस की अपनी कोई नीति ही नहीं है। वो सत्ता सुख के लिए कुछ भी कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिवसेना अपने हिन्दुवादी छवि से नहीं हटेगी। उनका मानना है कि वो सावरकर के लिए भारत रत्न की माँग उठाती रहेगी। रणजीत सावरकर ने कहा कि शिवसेना नही बदलेगी, बल्कि कांग्रेस में बदलाव आएगा। कांग्रेस पहले ही सॉफ्ट हिन्दुत्व की ओर बढ़ चुकी है।
रणजीत सावरकर ने वीर सावरकर को कथित रूप से ‘राष्ट्रदोही’ कहने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है। इसमें राहुल गाँधी के साथ ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पार्टी को भी नामजद किया गया है। मुंबई की एक अदालत ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं।
अक्टूबर में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल ने कहा था कि सावरकर वीर नहीं थे, बल्कि उन्होंने जेल से रिहा होने के लिए ब्रिटिश सरकार को लिखित प्रार्थना की थी। साथ ही अंग्रेजों से अपनी गतिविधियों के लिए माफी भी माँगी थी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान रणजीत सावरकर ने कहा था कि यह सरासर गलत तथ्य है। उन्होंने कहा था कि वीर सावरकर को अंग्रेजों ने 27 साल जेल में रखा था। रणजीत सावरकर ने शिकायत में कहा है कि राहुल गाँधी और उनकी पार्टी ने स्वतंत्रता सेनानी के ‘‘नैतिक और बौद्धिक चरित्र को नीचा दिखाने’’ की कोशिश की।
रणजीत के इन आरोपों में वजन दिखाई पड़ता है, जो सन्देह को गहरा देता है: एक, दुर्घटना में किसी की मृत्यु होने पर लाश का पोस्टमॉर्टम करवाया जाता है, जो कानूनी प्रक्रिया भी है, जो नहीं हुई, क्यों? यदि पोस्टमॉर्टेम होता निश्चित रूप से चार गोलियां प्रकाश में आती; दो, अक्सर गाँधी हत्या पर अक्सर एक बात मुखरित होती रही है कि नाथूराम गोडसे ने केवल 3 गोलियां चलाईं थी, लेकिन गाँधी पर चौथी गोली किसने चलाई? इस बात को कई बार भाजपा सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कई बार उठाया, परन्तु आज तक किसी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया; तीन, गोडसे ने भी अपने बयान में स्पष्ट कहा कि "मैंने गाँधी पर तीन गोलियां दागी थीं, हाथ में रिवॉल्वर होने के वजह से कोई मेरे पास आने से डर रहा था, मेरे बार-बार कहने पर पहले मेरी रिवॉल्वर ली गयी, और जब रिवॉल्वर लेने वाले द्वारा गलत तरीके से रिवाल्वर को पकडे जाने पर कहा ' ठीक से पकड़ो, इसमें गोलियां हैं, कहीं किसी के न लग जाए'।"; चार, क्या गोडसे की रिवाल्वर पर किसी अन्य के हाथों के निशानों की पुष्टि की गयी अथवा नहीं; पांच, गाँधी की हिन्दू विरोधी और पाकिस्तान के प्रति प्रेम नीति से कांग्रेस में ही बहुत मतभेद थे; छः, गाँधी हिन्दुओं के बीच बैठ 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम...' कहने की हिम्मत कर सकते थे, लेकिन मस्जिद में बैठकर नहीं; सात, गाँधी के अधिकतर आन्दोलन नेताजी सुभाषचंद्र बोस, पंडित चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा आज़ादी आंदोलन से जनता को भटकाने के लिए किए जाते थे, जो कांग्रेस में ही कुछ नेताओं को नागवार गुजरता था; आठ, गाँधी हत्या के बाद हुए चितपावन ब्राह्मणों के हुए 1984 में सिखों से कहीं अधिक भयंकर नरसंहार पर आज तक किसी ने जाँच की मांग नहीं की, क्यों? आदि आदि।  
ऐसे में यह भी प्रश्न होता है कि गाँधी देशहित में कार्यरत थे, फिर वो क्या कारण थे, जिनके चलते कांग्रेस ने महात्मा गाँधी परिवार को सत्ता से दूर रखा? शायद इसलिए कहीं गाँधी परिवार भी उसी नीतियों पर चला भारत में हिन्दुओं का जीना दूबर हो जायेगा। कांग्रेस से यह भी पूछा जाना चाहिए कि "नाथूराम को आतंकी कहने से पहले राष्ट्र को बताओ, नाथूराम गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को सार्वजनिक होने पर प्रतिबन्ध लगाया?" इन्हीं अनसुलझे प्रश्नों से वीर सावरकर के पौत्र द्वारा किये रहस्योघाटन पर पंचायत से लेकर संसद तक चर्चा की जरुरत है। 
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भारतीय मानसिकता भी क्या मानसिकता है समझ नहीं आता? हमारे छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता भी अपने मीडिया सहयोगियों से साठग....

वर्तमान मोदी सरकार को चाहिए कि इस विवाद से पटाक्षेप करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाकर  खुलकर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए। चर्चा में गाँधी के अलावा सबसे ज्यादा गाज कांग्रेस पर ही गिरेगी। उसमे इस बात पर भी चर्चा होनी चाहिए कि "मोतीलाल नेहरू से लेकर महात्मा गाँधी तक को ब्रिटिश सरकार किस श्रेणी में रखती थी और स्वतन्त्रता सेनानियों को किस श्रेणी में?"   

सावरकर होते PM तो नहीं होता पाकिस्तान, मणिशंकर अय्यर को चप्पल से मारता: उद्धव ठाकरे



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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सितम्बर 17 को कश्मीर मुद्दे पर एक न्यूज़ चैनल पर चर्चा के दौरान एक इतिहासकार ने वामपंथी सुनील चोपड़ा को अड़े हाथों लेते कहा, "तुम कम्युनिस्टों ने कांग्रेस से साठगांठ कर भारत के इतिहास का नाश कर दिया।" ये वही कटु सच्चाई है जिसका वर्णन अक्सर अपने ब्लॉग पर करता रहता हूँ। आज देश का दुर्भाग्य है कि वास्तविक इतिहास के विषय में बोलने वालों को साम्प्रदायिक, फिरकापरस्त, गंगा-यमुना तहजीब के दुश्मन और देश का सौहार्द बिगाड़ने वाले आदि आदि नामों से बदनामी की जाती है। मुग़ल जिन्होंने इतने वर्ष देश को लूटा, हिन्दू सम्राटों के महलों और हिन्दू मन्दिरों को तोडने, हिन्दू पर जजिया, हिन्दू महिलाओं का बलात्कार आदि करने वालों को महान बता दिया और देश के महान हिन्दू सम्राटों की वीरगाथाओं को धूमिल कर दिया। 
वीर सावरकर और सिख गुरुओं ने हिन्दू धर्म की रक्षा के क्या-क्या नहीं सहा, लेकिन कांग्रेस और वामपंथियों ने इन्ही लोगों को इतिहास में निम्न स्थान दिया। नाथूराम गोडसे जिसने देश के एक और विभाजन होने से बचाने के लिए महात्मा गाँधी का वध किया। गोडसे के 150 बयानों पर प्रतिबन्ध लगा, गोडसे को खलनायक और गाँधी को महान बना दिया। क्यों नहीं गोडसे के बयानों को सार्वजनिक होने दिया? अगर होने देते आज महात्मा गाँधी का नाम लेवा कोई नहीं होता।   
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि यदि वीर सावरकर देश के प्रधानमंत्री होते तो पाकिस्तान पैदा ही नहीं होता। साथ ही सावरकर पर कॉन्ग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर की एक पुरानी टिप्पणी को लेकर कहा कि यदि अय्यर सामने होते तो उन्हें चप्पल से मारता। ठाकरे ने मंगलवार (सितंबर 17, 2019) को ‘सावरकर: इकोज फ्राम अ फॉरगाटेन पास्ट” के विमोचन के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए ये बातें कही।
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार हिंदुत्व सरकार है और आज मैं उनसे वीर सावरकर के लिए भारत रत्न की भी माँग करता हूँ।” ठाकरे ने कहा, “सावरकर को भारत रत्न सम्मान से नवाजा जाना चाहिए। हम गांधी और नेहरू द्वारा किए गए काम से इनकार नहीं करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी और ने राष्ट्र के विकास में योगदान नहीं दिया।”

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा, “मुझे नेहरू को वीर कहने में गुरेज नहीं होता यदि वह 14 मिनट भी जेल के भीतर सावरकर की तरह रहे होते। सावरकर 14 वर्षों तक जेल में रहे थे।” ठाकरे ने दुख व्यक्त करते हुए ये भी कहा कि सावरकर को जिस जेल में रखा गया था, उसे ‘पिकनिक स्पॉट’ में बदल दिया गया है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जेल लोगों के लिए एक पिकनिक स्थल बन गया है। लेकिन, लोगों को यह नहीं पता है कि सावरकर को जेल में अपने दिनों के दौरान क्या दर्द हुआ था।”
इस दौरान शिवसेना प्रमुख राहुल गाँधी पर भी कटाक्ष करने से नहीं चूँके। उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान जब राहुल गाँधी ने सावरकर के खिलाफ बयान दिया, तो मैं पहला व्यक्ति था, जो यह कहता था कि राहुल गाँधी बेकार हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गाँधी को इस किताब की प्रति दी जानी चाहिए और उन्हें इसे पढ़ने के लिए कहा जाना चाहिए।”
कॉन्ग्रेस नेता अय्यर पर भी इस दौरान ठाकरे ने तीखे हमले किए। असल में, 2018 में अय्यर ने आरोप लगाया था कि सावरकर ने हिंदुत्व शब्द को उछालकर समाज को धर्म के आधार पर बॉंटने का काम किया था। अय्यर ने कहा था कि देश का बॅंटवारा मोहम्मद अली जिन्ना ने नहीं बल्कि सावरकर की वजह से हुआ था, उन्होंने टू स्टेट थ्योरी दी थी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहल शिवसेना प्रमुख राम मंदिर के मद्देनजर भी बड़ा बयान दे चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा था कि जैसे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया है, उसी प्रकार अयोध्या में राम मंदिर को बनाने का भी साहस दिखाएँ, क्योंकि राम मंदिर के लिए इंतजार करने का अब कोई मतलब नहीं बनता।