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कानपुर हिंसा : मुंह ढक दंगा क्यों? क्या है इसके पीछे राज?

                                                                                    साभार: इंडिया टुडे

पत्थरबाज चाहे कश्मीर में हो, दिल्ली में हो या फिर उत्तर प्रदेश या अन्य कोई राज्य, लेकिन सभी जगह इन मासूम, डरे हुए, भटके हुए दंगाइयों में एक हरकत समान है, वह है मुंह का ढंकना। अल्लाह के अलावा किसी से न डरने वाले मुंह ढंक कर क्यों दंगा करते हैं? इस दोहरे मापदंड का क्या है राज? कानून विशेषज्ञों को इस बात पर गंभीरता से विचार कर, ऐसे दोहरे मापदंड वालों यानि बहरूपियों के विरुद्ध कठोर से कठोर कानून बनाना चाहिए। सरकार को चाहिए कि जहाँ भी दंगाई मुंह ढक कर अशांति फैला रहे हों, वहां अश्नु गैस या लाठीचार्ज के स्थान पर shoot at sight या रबर बुलेट चलाने के आदेश देने चाहिए, ताकि इन बहरूपियों की पहचान हो सके। जब तक इन दंगाइयों से सख्ती से निपटा नहीं जाएगा, ये देश का माहौल ख़राब करते रहेंगे। इन्हे और इनके परिवार को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से हमेशा के लिए वंचित किया जाए। 

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 जून को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के दौरान पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया था। इसको लेकर अब खुलासा हुआ है कि घटना के 48 घंटे पहले ही चरमपंथियों ने सुनियोजित तरीके से बोतलों में पेट्रोल इकट्ठा किया था। हिंसा के दैरान कानपुर में दंगाइयों ने करीब 50 धमाके किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथियों ने शहर के डिप्टी पड़ाव स्थित भारत पेट्रोलियम के पंप से बोतलों में पेट्रोल भरवाया था। सीसीटीवी फुटेज से इसका खुलासा होने के बाद कानपुर के जिलाधिकारी ने पेट्रोल पंप का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है। इसके साथ ही सभी 37 पंपों की जाँच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित कर दिया है।

सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि 2 जून को 4 लड़के बोतलें लेकर पेट्रोल भरवाने के लिए आए। उन्होंने बाइक में पेट्रोल भरवाने की जगह बोतलों में पेट्रोल भरवाया। अब जब पुलिस इनके घरों में पहुँची तो ये वहाँ से गायब रहे। घरवालों ने कहा कि वो तो 3 जून से लौटे ही नहीं।

इस बीच डीसीपी रवीना त्यागी को फील्ड से हटाकर कमिश्नर के मुख्यालय भेज दिया गया है और उनकी जगह मुख्यालय से डीसीपी संजीव त्यागी को फील्ड पोस्टिंग मिली है।

कानपुर में दंगाइयों ने 3 जून को ही क्यों चुना

रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर हिंसा के मास्टर माइंड हयात जफर हाशमी के व्हाट्सएप चैट से ये चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पता चला है कि हयात ने पुलिस को गुमराह करने के लिए बाजार बंदी को वापस लिया था। 3 जून को जुमा था और उसी दिन देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहर में थे। इसी को ध्यान में रखते हुए उस दिन को हिंसा के लिए चुना गया।

इसी क्रम में 4 जून 2022 को बड़ा एक्शन लेते हुए 36 दंगाइयों की लिस्ट जारी की। इन दंगाइयों में से एक सपा का नेता निकला। नाम है निजाम कुरैशी (Nizam Quraishi)। इस मामले में पुलिस ने अब तक 29 आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया है।

वहीं निजाम कुरैशी को गिरफ्तार किए जाने के बाद कानपुर के सपा के जिलाध्यक्ष इमरान ने पार्टी की तरफ से सफाई पेश करते हुए कहा कि उसे 20 मई 2022 को ही एक्टिव नहीं होने के कारण पार्टी से बाहर कर दिया गया था। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में इसका मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी, जावेद अहमद खान, मोहम्मद राहिल और मोहम्मद सुफियान शामिल है। पुलिस की लिस्ट में निजाम कुरैशी का नाम टॉप फाइव में है।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को हुई हिंसा के मामले में शनिवार को यूपी पुलिस ने 500 दंगाइयों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

हयात जफर हाशमी के व्हाट्सएप पर 141 ग्रुप बनाए गए थे। इसमें से 14 में बहुत ही अधिक एक्टिव था। इस हिंसा के जरिए दंगाई संदेश देना चाहते थे कि उनका मकसद पूरा हो गया है। दरअसल, वो देश के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचना चाहते थे।

कौन है निजाम कुरैशी

कानपुर में हुई हिंसा के मामले में जौहर फैंस एसोसिएशन के अलावा ऑल इंडिया जमीअतुल कुरैशी एक्शन कमेटी का नाम भी सामने आया था। निजाम कुरैशी इसी संस्था का जिलाध्यक्ष है। इसके अलावा वो सपा का महानगर सचिव भी है। उसके सपा के ही तीन विधायकों के साथ घनिष्ठ संबंध है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संस्था का नाम CAA और NRC के समय हुए दंगे में भी इस कमेटी का नाम सामने आया था। यह सब इसलिए हुआ, क्योंकि समाजवदी पार्टी के विधायकों का हाथ निजाम कुरैशी पर था।