साभार: Narendra Modi/Xदेश की सैन्य आत्मनिर्भरता ना केवल देश की आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है बल्कि बाह्य सुरक्षा की नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। किसी भी देश का खुद के हथियार बनाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। भारत हथियारों के मामले में दुनिया के आत्मनिर्भर देशों में शामिल हो गया है।यह परिवर्तन 2014 के बाद सामने आया है। 2014 से पहले भारत का रक्षा निर्यात काफी बदहाली के दौर से गुजर रहा था और हम आयात पर निर्भर थे। लेकिन इस निर्भरता को आत्मनिर्भरता में बदलने का काम 2014 के बाद आई मोदी सरकार ने किया।
सैन्य आयात पर निर्भर था भारत
स्कॉटहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, 2009 से 2013 तक भारत पूरे दुनिया केहथियारों का 13% आयात किया करता था। इसका परिणाम यह हुआ कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य क्षमताओं वाला देश हथियारों की आपूर्ति के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर होता चला गया।
विदेशी सप्लायर भारत के घरेलू उत्पादन उद्योग को कमजोर करते चले गए। रक्षा निर्यात की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2004-2005 से 2013-14 तक रक्षा निर्यात की कुल राशि ₹4,312 करोड़ थी जो अब बढ़ कर ₹23,622 करोड़ हो गई है।
सेना के पूर्व अफसर ने खोली कॉन्ग्रेस की पोल पट्टी
रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि किस तरह कॉन्ग्रेस ने देश की सुरक्षा को हाशिये पर रख दिया। रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में उत्तरी सेवा के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस पनाग ने इस रिपोर्ट में बताया है कि 2013-14 तक हमारा निर्यात मात्र 110 मिलियन डॉलर था।
उन्होने बताया कि हमारे देश की रक्षा निर्यात का कोई अस्तित्व ही नहीं था। उनके अनुसार, पहले की सरकार में रक्षा मंत्रालय से एनओसी लेने के बाद व्यापार करने की व्यवस्था थी, उस वक्त भी सरकार ने रक्षा निर्यात पर गंभीरता से विचार नहीं किया। यही कारण है कि 2014 के बाद भी एनडीए सरकार के गंभीर प्रयासों के बावजूद रक्षा निर्यात इतना कम है।
कॉन्ग्रेस सरकार में DRDO की भी टूट चुकी थी कमर
DRDO जो भारत की रक्षा प्रणाली को सशक्त करने के लिए जानी जाती है, उसकी हालत कॉन्ग्रेस सरकार में बद से बदतर हो चुकी थी। रिपोर्ट के अनुसार 6000 वैज्ञानिकों में केवल 3% वैज्ञानिक ही ऐसे थे जिन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रखी थी।
यह बात खुद इस रिपोर्ट में विज्ञान और प्रद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पी.रामा राव की अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति ने कही है। अन्य कई देश अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए अपने देश में उत्पादन और नौकरी को बढ़ावा दे रहे थे। उसी वक्त भारत एक खरीदार के रूप में फंसा हुआ था और आयात पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा था।
बोफोर्स जैसे घोटालों से कमजोर होता गया देश
रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में 2014 से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार में हुए लूट और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 1980 का बोफोर्स घोटाला में 64 करोड़ की रिश्वत का मामला सीधे राजीव गाँधी से जाकर जुड़ता है।
इसका खुलासा खुद स्वीडिश रेडियो कार्यक्रम में किया गया जिसमें खुद बोफोर्स के कर्मचारियों ने कहा कि इसके लिए रिश्वत दी गई थी। बयान के अनुसार उस वक्त कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ सदस्यों और राजनेताओं को 8.2 बिलियन की रिश्वत दी गई थी।
इसके अलावा अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में भी कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं के शामिल होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में शामिल टाट्रा ट्रक और बाराक मिसाइल स्कैम ने भी कांग्रेस की बकिय उधेर कर रख दी है। उस वक्त कॉन्ग्रेस के द्वारा किए गए इस सुरक्षा खिलवाड़ के नतीजे ने भारत की सैन्य ताकत को भीतर से कमजोर कर दिया था।
2014 के बाद रक्षा जगत में आया सकारात्मक परिवर्तन
रक्षा निर्यात रिपोर्ट के अनुसार 2014 के बाद भारत सरकार ने आयात निर्भरता में लगातार कमी लाई। भारतीय कंपनियों को निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया गया और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया गया।
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरू ‘मेक इन इंडिया’ ने भारत में निर्मित डिजाइन को विकसित करने में काफी मदद पहुंचाई। इसके अलावा DAP(रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया) के तहत खरीदी में भी बदलाव किया गया। 500 से अधिक हथियारों के आयात पर रोक दी लगा दी गई जिसमें टैंक, आर्टिलरी मशीन और रडार भी शामिल है।
देश के रक्षा उत्पादन का मूल्य 174% की वृद्धि के साथ ₹1,27,434 करोड़ तक पहुँच गया जो 2014-15 में 46,429 करोड़ था। सरकार के द्वारा सैन्य प्लेटफार्म का विकास किया गया। नौसेना को सशक्त बनाने के लिए स्वदेशी विमान वाहक, पनडुब्बी और फास्ट अटैक क्राफ्ट आदि के निर्माण पर जोड़ दिया गया। यह सब मेक इन इंडिया की पहल के सकारात्मक परिणाम का स्वरूप है।
निजी कंपनियों को भी सरकार द्वारा दिया गया प्रोत्साहन
कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में हाशिये पर पहुँच चुकी निजी कंपनियां को मोदी सरकार में बल मिला। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पी.रामा राव के अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कॉन्ग्रेस की सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण प्राइवेट कंपनियों को रक्षा तकनीक के उत्पादन से दूर रखा गया था।
लेकिन अब ऐसा नहीं है। सैन्य सुरक्षा के विकास को देखते हुए सरकार ने निजी कंपनियों से सहयोग लिया ताकि देश की रक्षा प्रणाली को ज्यादा से ज्यादा मजबूत बनाया जा सके। सरकार के इस निर्णायक बदलाव के फलस्वरूप रक्षा क्षेत्र के जगत में कई बड़ी कंपनियों का प्रवेश हुआ।
टाटा, एलएनटी डिफेंस, भारत फोर्ज, कल्याणी ग्रुप और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियां आर्टिलरी सिस्टम, बख्तर बंद वाहन, रडार सिस्टम, पनडुब्बी विमान के पुर्जे और ड्रोन सहित कई रक्षा सामग्रियों का निर्माण कर रही हैं।
इसका नतीजा यह हुआ कि वित्त वर्ष 2024-25 में निजी क्षेत्र में ₹15,233 करोड़ का रक्षा निर्यात किया जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कहा जाना गलत नहीं है।
लड़ाकू विमान तेजस बना घरेलू क्षमता का प्रतीक
देश के रक्षा उत्पादन और तकनीक का सार्थक उदाहरण, स्व-निर्मित लड़ाकू विमान तेजस भारत की शान बना। विश्व के कई देशों से इसकी माँग और तेज हो गई। दरअसल तेजस एक भारतीय फाइटर जेट है जो सिंगल इंजन, डेल्टा विंग और मल्टी रोल लाइट फाइटर जेट है।
सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों की श्रेणी में सबसे यह छोटा और हल्का है। इसकी मारक क्षमता को देखते हुए विश्व के कई देश इसे खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
100+ देशों को हथियार निर्यात करने वाला देश बना भारत
भारतीय रक्षा प्रणाली और सैनिक उपकरणों का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। यही कारण है कि आज भारत 100 से ज्यादा देशों को हथियार निर्यात करता है। इसी के साथ भारत विश्व के रक्षा निर्यातक देशों में 25वें स्थान पर पहुँच चुका है।
रक्षा निर्यात रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का दूसरा बेंच फिलिपींस को भेजा। इसके अलावा आर्मेनिया, ब्राजील और इंडोनेशिया भी भारत के साथ रक्षा सौदा कर रहे हैं।
म्यांमार गोला-बारूद, इसराइल ड्रोन और आर्मेनिया आर्टिलरी सिस्टम हमसे खरीद रहा है। भारत में आर्मेनिया को 6 एडवांस्ड आर्टिलरी गन सिस्टम निर्यात किए हैं। रिपोर्ट से यह साफ है कि भारत का कद रक्षा निर्यातकों में विश्व के जाने-माने देशों तक बढ़ चुका है।
ऑपरेशन सिंदूर ने भी भारतीय हथियारों की बढ़ाई माँग
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को और ज्यादा मजबूती दी है। भारत की लगभग 100 कंपनियां रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। मोदी सरकार 2019 तक रक्षा निर्यात को दुगना करके 6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की तैयारी में है।
केंद्र सरकार ने साल 2024-25 के रक्षा बजट के लिए ₹6.21 लाख करोड़ आवंटित किए हैं। यह पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित ₹5.94 लाख करोड़ रुपये से 4.3% अधिक है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पिनाका, तेजस और ब्रह्मोस मिसाइल की माँग में काफी तेजी आई है।
भारत अपने रक्षा उत्पादों का विस्तार अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका तक करने की तैयारी में है। यह मोदी सरकार की सफलता ही है कि विश्व गुरु बनने की राह में भारत अब वैश्विक हथियार के बाजार में भी एक भरोसेमंद निर्यातक बनकर उभरा है।
प्रयागराज महाकुंभ (साभार: Leonardo AI) प्रयागराज महाकुंभ 2025 को लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे अपनी दुकान चलाने की खातिर माथा टेक चुकी पार्टियों की चीखा-चिल्ली स्वाभाविक है। ऑप इंडिया की निम्न रपट इन सभी पर बहुत जबरदस्त प्रहार है। सरकार और दूसरे व्यवसायिक संस्थानों की आय में हो रहे उछाल ने इन सभी सनातन विरोधियों की नींद और रोटी-पानी तक हराम हो चुकी है। इस कटु सच्चाई सनातन विरोधियों की गुलाम मीडिया भी सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं कर पा रही। हिन्दुओं को नहीं भूलना चाहिए कि अयोध्या में राममन्दिर का कितने सालों तक विरोध हुआ। लेकिन राममन्दिर बनने के बाद जितनी जनता पुरुषोत्तम श्रीराम के दर्शन करने जाती है, ताज महल घूमने जाने वालों की संख्या में बहुत गिरावट आ चुकी है। काशी विश्वनाथ और उज्जैन में महाकाल धामों के विकास होने से श्रद्धालुओं की जो वृद्धि हुई है उससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। और यह इजाफा राज्य सरकारों का ही नहीं होटल और अन्य व्यवसायिक में भी हुआ है। इन सभी को देखते हुए इन मुस्लिम तुष्टिकरण करने वालों का चीखना-चिल्लाने से परेशान नहीं होना चाहिए। जितना ज्यादा ये सनातन विरोधी चीखे-चिल्लाने से हिन्दू एकजुट होकर अपनी वोट से इन्हे धूल चटा रहा है।
इन मुस्लिम तुष्टिकरण करने वालों को नहीं भूलना चाहिए कि समय कालचक्र घूम रहा है। अब जितना ज्यादा सनातन विरोध होगा उतना ही इन सनातन विरोधियों को नुकसान हो रहा है। याद रखिए वह दिन भी ज्यादा दूर नहीं जब इन सनातन विरोधियों को इनका परिवार ही अलग-थलग कर देखा, क्योकि हिन्दुओं में एक बात अच्छी तरह घर करने लगी है कि जब मुस्लिम सनातन को पराजित करने एकजुट हो सकता है तो सनातन को बचाने हिन्दू क्यों नहीं। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोई गलत नहीं कहा कि "बटोगे तो कटोगे"। देखिए ऑप इंडिया की रपट:-
प्रयागराज महाकुंभ 2025 में प्रशंसा हर तरफ हो रही है। कुंभ ना सिर्फ सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी निखारने का काम कर रहा है। महाकुंभ के आयोजन के दौरान भारत के कई व्यवसायिक क्षेत्रों में भारी उछाल देखने को मिला है। इनमें सबसे अधिक उछाल होटल इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है। इससे प्रयागराज के व्यवसायी काफी खुश हैं।
महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज के कारोबार में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। होटलों में अगले कई दिनों तक कमरे खाली नहीं हैं। होटल के साथ-साथ खान-पान के सामान, स्थानीय उत्पाद, कंबल, ऊनी कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री में वृद्धि देखी जा रही है। प्रयागराज में फ्लाइट्स की बुकिंग में 162 प्रतिशत का उछाल देखने को मिल रहा है।
फ्लाइट्स के अलावा रेलवे, बसों, टैक्सियों आदि की कमाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ट्रेनों से लेकर बसों एवं टैक्सियों तक में लोग खचाखच भर करके कुंभ नहाने के लिए प्रयागराज पहुँच रहे हैं। छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट और ऑनलाइन बुकिंग का काम करने वाली कंपनियाँ भी इस बूम से काफी खुश हैं। कुंभ खत्म होने तक यानी 45 दिनों में उन्हें भारी मुनाफा होने की उम्मीद है।
प्रयागराज होटल एंड रेस्टोरेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि श्रद्धालु और पर्यटकों द्वारा बुकिंग कराने के कारण होटल इंडस्ट्री को 30 से 40 फीसदी तक का मुनाफा हो रहा है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुनाफा बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है। थोक और खुदरा व्यापारी भी कुछ ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल का मानना है कि महाकुंभ के अवसर पर सिर्फ होटल और टेंट सिटी का कारोबार 2,500 से लेकर 3,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है। केंद्रीय व्यापार मंडल के महामंत्री शिवशंकर सिंह का मानना है कि एफएमसीजी उत्पाद, ऑटोमोबाइल, सीसीटीवी कैमरा, केबल और खाने-पीने के सामान की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है।
शिवशंकर सिंह का कहना है कि मकर संक्रांति के स्नान तक खुदरा व्यापार में भी 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है। व्यापारियों को उम्मीद है कि कुंभ स्नान में विशेष स्थान रखने वाले मौनी अमावस्या पर यह बिक्री और भी अधिक बढ़ने की उम्मीद है। हस्तशिल्पी इस बार 35 करोड़ रुपए तक का कारोबार कर सकते हैं। व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद कादिर का भी ऐसा ही मानना है।
मोहम्मद कादिर का कहना है कि महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज में खाद्य सामग्री, अनाज, पूजा सामग्री, कपड़े, कंबल, गद्दे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेंट के कपड़े आदि के व्यापार में दोगुना की बढ़ोतरी हुई है। मोहम्मद कादिर का कहना है कि मेले में जैसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी वैसे-वैसे वृद्धि में और भी अधिक वृद्धि होगी और व्यापारियों को फायदा होगा।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, सिर्फ होटलों, धर्मशालाओं और टेंट से ही 40,000 करोड़ रुपए के व्यापार की संभावना है। पैक खाद्य सामग्री, पानी, बिस्किट, जूस, और भोजन से जुड़ा 20,000 करोड़ रुपया का कारोबार होगा। वहीं तेल, दीपक, गंगाजल, मूर्तियाँ, अगरबत्ती, धार्मिक पुस्तकों आदि की बिक्री से 20,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा।
इसी तरह परिवहन यानी रेलवे-टैक्सी आदि से 10,000 करोड़ रुपए का व्यवसाय होने का अनुमान है। टूर गाइड, ट्रैवल पैकेज और पर्यटक सेवाओं से 10,000 करोड़ रुपए का व्यापार अनुमानित है। वहीं, विज्ञापन और प्रचार गतिविधियों से 10,000 करोड़ रुपए के व्यापार का अनुमान है। स्थानीय उत्पादों, कपड़ों, गहनों और स्मृति चिन्हों से 5,000 करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है।
CAIT ने अनुमान लगाया है कि अस्थायी मेडिकल कैंप, आयुर्वेदिक उत्पाद और दवाइयों से 3,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा। इसी तरह डिजिटल भुगतान सेवा, वाई-फाई सेवा और ऑनलाइन टिकटिंग बुकिंग यानी ई-टिकटिंग से 1,000 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि इस महाकुंभ में डाबर, मदर डेयरी और आईटीसी जैसे बड़े ब्रांडों ने 3,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
इस तरह 26 फरवरी तक चलने वाले 45 दिनों के इस महाकुंभ मेले में 2 लाख करोड़ रुपए का बिजनेस होने का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि, इंडस्ट्री के जानकार इस व्यापार को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बता रहे हैं। वहीं, सरकार का अनुमान है कि मेले से उसे 25,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने कुंभ मेले में करीब 6,900 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
दरअसल, कुंभ मेले में दुनिया भर से 40 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का अनुमान है। अगर हर पर्यटक औसतन 5000 रुपए खर्च करता है तो महाकुंभ से 2 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है। वहीं, इंडस्ट्री का अनुमान है कि मेले में औसतन प्रति व्यक्ति खर्च 10,000 रुपए हो तो यह आँकड़ा 4 लाख करोड़ रुपए को पार सकता है। इससे देश की जीडीपी एक फीसदी से भी अधिक बढ़ सकती है।