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चीनी माल के बहिष्कार करने से चीन को नुकसान नहीं होगा : पी. चिदंबरम, कांग्रेस नेता

पी चिदंबरम
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज भारत को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो गए, परन्तु आत्मनिर्भर नहीं बन पाया, क्यों? पहले सोने की चिड़िया से चर्चित देश कृषिप्रधान देश बना और अब घोटालाप्रधान देश, क्यों? इसका मुख्य कारण है भारत में जयचन्दों यानि स्लीपर सैल्स का होना। 1962 में हुए चीन से युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी चीन के समर्थन में खड़ी थी, भारत के पक्ष में नहीं। और कांग्रेस इस पार्टी के हम प्याला हम निवाला बन देश के वास्तविक इतिहास को धूमिल करने में व्यस्त रहते, चीन को भारत की धरती को हथियाने का अवसर दिया जाता रहा। आज चीन से असली लड़ाई अपनी खोई जमीन को वापस लेने की है। ठीक इसी भांति पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का हिस्सा हड़पने को वापस लेने की है। लेकिन भारत में छुपे जयचन्द छद्दम देशप्रेमी बन जनता को छलने वाले चीन और पाकिस्तान के समर्थन में शोर मचाकर जनता को भ्रमित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। 
यदि आज महात्मा गाँधी जीवित होते और विदेशी सामान की होली जला रहे होते, निश्चित रूप से छद्दम देशप्रेमियों के विरोध का सामना करना पड़ता।   
चीन के साथ हालिया तनाव के बीच देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मॉंग जोर पकड़ती जा रही है। लेकिन, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है चीन के सामान का बहिष्कार करने से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा।
20 जून, 2020 को चिदंबरम ने कहा कि हमें जितना संभव हो सके उतना आत्मनिर्भर बनना चाहिए, लेकिन हम बाकी दुनिया से अलग नहीं हो सकते। भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जारी रखनी चाहिए और चीनी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं करना चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि चीनी सामानों का बहिष्कार करने से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा। जब हम भारत की रक्षा जैसे बहुत गंभीर मामलों पर चर्चा कर रहे हैं, तो हमें बहिष्कार जैसे मुद्दों को बीच में नहीं लाना चाहिए।

नोएडा में करीब 20 हजार MSME ने निर्माण प्रक्रिया में चीनी उत्पादों और उपकरणों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इसी तरह कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने भी चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की है।
पिछले दिनों गलवान में चीनी सैनिकों के धोखे से किए गए हमले में 20 सैनिक बलिदान हो गए थे। हालॉंकि भारतीय सैनिकों ने इस का मुॅंहतोड़ जवाब दिया था और चीन के 43 सैनिकों के मरने की खबर भी है। इस घटना को लेकर भी कई कांग्रेस नेता अनर्गल प्रलाप अलाप चुके हैं।
कारगिल से कांग्रेस पार्षद जाकिर हुसैन ने तो इस घटना का हवाला देकर सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसका ऑडियो वायरल होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
उससे पहले कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रह चुके हुसैन दलवई ने कहा था कि इस घटना में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा है। भारतीय सेना को अपमानित करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें वहाँ लाठी लेकर क्यों भेजा गया, क्या वहाँ आरएसएस की कोई शाखा थी? महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता दलवई ने कहा कि भारत-चीन के बीच हुई झड़प में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा, सिर्फ हमारे जवान मारे गए हैं।
उन्होंने कहा, “हमने जवानों को लाठियाँ देकर क्यों बॉर्डर पर भेजा, क्या वहाँ RSS की शाखा थी? ऐसा है तो सैनिकों को क्यों आरएसएस के लोगों को ही बॉर्डर पर भेजो। वे सीमा पर पहरा देंगे।”
आरएसएस के कुछ पदाधिकारियों से इस विषय पर चर्चा करने पर जवाब मिला कि "यदि सरकार ने ऐसा किया तो ये लोग सेना के मन में संशय पैदा करना का कोई अवसर नहीं छोड़ेंगे। दूसरे यह कि जब भी देश पर कोई विपदा आने पर अन्य पार्टियों की अपेक्षा आरएसएस कार्यकर्ता ही अग्रिम भूमिका निभाता रहा है। इतिहास इसका गवाह है किसी प्रमाण की जरुरत नहीं।"  
इतना ही नहीं राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) के आधिकारिक ‘कलैगनार टीवी’ (Kalaignar TV) पर प्रसारित एक शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वरवणई सेंथिल (Varavanai Senthil) नाम के होस्ट को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हुए चीनी आक्रामण का बचाव करते देखा जा सकता है।
वीडियो में टीवी एंकर सेंथिल को चीन का समर्थन करते हुए करते हुए सुना जा सकता है कि भारतीयों के खिलाफ पीएलए सैनिकों द्वारा किया गया हमला मोदी सरकार की कुछ नीतियों की प्रतिक्रिया थी, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करना।
इंटेलिजेंस एजेंसीज द्वारा 52 चाइनीज़ ऐप्स को रेड फ्लैग 
भारत की इंटेलिजेंस एजेंसियों की ओर से करीब 52 चाइनीज ऐप्स को रेड फ्लैग किया गया है और खतरनाक माना गया है। इन ऐप्स में TikTok, UC Browser, Xender और Shareit भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय इंटेलिजेंस ने चीन से जुड़े ऐसे ऐप्स को यूजर्स की सेफ्टी और प्रिवेसी को लेकर चिंताजनक माना है। ऐसे ऐप्स की लिस्ट में कुछ सबसे पॉप्युलर नाम भी शामिल हैं और इनकी मदद से डेटा विदेश के सर्वर्स पर भेजा जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में सरकार की ओर से चीन के ऐप्स को या तो ब्लॉक किया जाए या फिर यूजर्स को इनका इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी जाए। यह बात इंटेलिजेंस इनपुट्स के हवाले से कही गई है कि इस ऐप्स की मदद से भारतीयों का डेटा चोरी किया जा रहा था। ये रिपोर्ट्स भारत और चीन के बीच तनाव के दौरान सामने आई हैं। इंटेलिजेंस एजेंसी की ओर से दी गई यह सलाह नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट की ओर से कही गई बात से भी जुड़ी है। रिपोर्ट में किसी अनाम गर्वर्मेंट ऑफिशल के हवाले से भी कहा गया है कि देश की सुरक्षा के लिए चाइना से जुड़े ऐप्स खतरा साबित हो सकते हैं।
ढेरों पॉप्युलर ऐप्स लिस्ट में
इंटेलिंजेंस की ओर से जिन ऐप्स को रेड फ्लैग दिखाया गया है, उनमें TikTok, Vault-Hide, Vigo Video, Weibo, WeChat, SHAREit, UC News, UC Browser, BeautyPlus, Helo, LIKE, Kwai, ROMWE, SHEIN, NewsDog, Photo Wonder, APUS Browser, VivaVideo- QU Video Inc, Perfect Corp, CM Browser और Virus Cleaner (Hi Security Lab) शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन ऐप्स की जांच की जा रही है।
शाओमी के कई ऐप्स शामिल
लिस्ट में शामिल बाकी चाइनीज ऐप्स Mi Community, DU recorder, YouCam Makeup, Mi Store, 360 Security, DU Battery Saver, DU Browser, DU Cleaner, DU Privacy, Clean Master - Cheetah, CacheClear DU apps studio, Baidu Translate, Baidu Map, Wonder Camera, ES File Explorer, QQ International, QQ Launcher, QQ Security Centre, QQ Player, QQ Music, QQ Mail, QQ NewsFeed, WeSync, SelfieCity, Clash of Kings, Mail Master, Mi Video call-Xiaomi और Parallel Space भी हैं। ये सभी ऐप्स अलग-अलग तरह से यूजर्स का डेटा स्टोर करते हैं।

चीनी कंपनी के सस्ते टीवी की सेल पर टूट पड़ी जनता, स्वदेशी अपनाओ कैंपेन की उड़ी धज्जियां

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर दिया था। उन्होंने अपने संबोधन में देशवासियों से अपील की थी कि वे लोकल चीजों का ज्यादा प्रयोग करें। कुल मिलाकर देशवासियों को उनका एक ही संदेश था कि अब से नागरिकों को ना सिर्फ देश में बने सामानों का उपयोग करना है, बल्कि उसे प्रोमोट भी करना है। इसी बीच लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन के बीच टकराव ने इस पहल को और गति दी है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने खुलकर चीनी सामानों के बहिष्कार और 10 जून से एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।
दरअसल, चीन की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में व्यापारी वर्ग ही जिम्मेदार है। व्यापारी को चाहिए ज्यादा लाभ, इसी कारण अपने उत्पाद को नज़रअंदाज कर सस्ते चीनी उत्पाद को बढ़ावा देकर केवल अपनी तिजोरी पर निगाह रख, बेरोजगारी को बढ़ावा दिया। व्यापारी वर्ग के एक वर्ग कहना था कि विदेशी सामान के बहिष्कार के नाम पर ख़राब चीनी उत्पाद को जलाकर सरकार और जनता को पागल बनाया गया। इस बात में वजन भी लगता है, आप स्वयं ही देख लो, क्या विदेशी माल के नाम पर जलाये गए चीनी उत्पादनों के बाद बाजार में चीनी माल आना बंद हो गया? आज कौन-सा ऐसा क्षेत्र बचा है, जहाँ चीनी उत्पाद का अधिकार न हो। क्या भारत इतना निष्क्रिय हो चुका है कि कुछ बनाने योग्य ही न रहे, क्यों? विश्व में भारतीय कुटीर उद्योग चर्चित थे, लेकिन इन अधिक लाभ के लालची व्यापारियों ने चीन को सिर पर बैठा उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर भारत को उतना ही कमजोर कर दिया और आज कोरोना के चक्कर में चीनी उत्पादनों के बहिष्कार करने में कितना दम है, आने वाला समय ही बताएगा।   
2021 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये का आयात कम करने का लक्ष्य
चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर कैट का शुरू होने वाला अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ को प्रोत्साहन देने में मददगार होगा। कैट की ओर से कहा गया है कि हमारा लक्ष्य है कि दिसंबर 2021 तक चीनी सामानों के भारत द्वारा आयात में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए कम कर दिए जाएं।

कैट ने 3 हजार उत्पादों की बनायी सूची
कैट ने चीन से आयात होने वाले लगभग 3 हजार उत्पादों की ऐसी सूची बनाई है, जिन वस्तुओं के आयात न होने से भारत को कोई अंतर नहीं पड़ेगा और वह सारी वस्तुएं भारत में पहले से ही बन रही है। 
‘वोकल फॉर लोकल’ को प्रोत्साहन
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा की इस अभियान के अंतर्गत जहां कैट व्यापारियों को चीनी वस्तुएं न बेचे जाने के लिए आग्रह करेगा, वहीं देश के लोगों से चीनी वस्तुओं के स्थान पर स्वदेशी उत्पादों को इस्तेमाल में लाने का आग्रह करेगा। कैट के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने बताया कि पीएम मोदी के आह्वान ‘लोकल पर वोकल’ को सफल बनाने में कैट एक अहम भूमिका निभाएगा।
व्यापारियों और नागरिकों ने लिया संकल्प
कैट का कहना है चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर भारत के व्यापारी और नागरिक संकल्प ले चुके हैं। यह काम एक रात में नहीं होगा लेकिन हम इसकी शुरुआत करेंगे और अपने लक्ष्य को हासिल करेंगे।
चीन से 6 अरब डॉलर का आयात घटा
इन पहलों के परिणामस्वरूप, 2017-18 में चीन से आयात 76 अरब डॉलर से घटकर वर्तमान में 70 अरब डॉलर हो गया है। खंडेलवाल ने कहा कि यह 6 अरब डॉलर का आयात गिरावट स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और उपभोक्ता भावनाओं को बदलने की कहानी बताता है।

सोनम वांगचुक ने की थी चीन सामान के बहिष्कार की पहल

कुछ दिन पहले सोनम वांगचुक ने यूट्यूब पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने बताया कि चीन को आईना दिखाने के लिए क्या किया जा सकता है। उनके हिसाब से इसके दो तरीके हैं- एक तो सेना की तैनाती और दूसरा भारतीयों की ओर से चीनी सामान का बहिष्कार। सोनम वांगचुक के इस वीडियो को लोगों ने समर्थन देते हुए सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया था। 
मार्केटिंग कैंपेन में ‘वोकल फॉर लोकल’ पर बढ़ा जोर
इससे पहले देश की बड़ी कन्ज्यूमर कंपनियां अपने संकेत दिया कि वे सभी ऐडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग कैंपेन में ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर बढ़ा रही हैं। ITC, पारले प्रॉडक्ट्स, अमूल, डाबर, बिसलरी, गोदरेज, मैरिको और वोल्टास जैसी कंपनियों ने इस दिशा में कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में 12 मई को राष्ट्र को संबोधित किया था।
चीनी कंपनी के सस्ते टीवी की सेल पर टूट पड़ी जनता, स्वदेशी अपनाओ कैंपेन की उड़ी धज्जियां
मोदी के स्वदेशी अपनाओ की अपील के बाद सोशल मीडिया पर स्वदेशी अपनाओ कैंपेन चला चीनी सामान का बहिष्कार करो जैसे पोस्टर छपने लगे व्हाट्सएप से लेकर फेसबुक तक सब स्वदेशी-स्वदेशी की रट लगाने लगे लेकिन भारत में कथनी और करनी का कितना फर्क है इसे ऐसे समझिए कि चीनी कंपनी रियलमी ने आज फ्लिपकार्ट पर 32 और 43 इंच के स्मार्ट टीवी की ऑनलाइन सेल की आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सिर्फ दस मिनट में कंपनी ने 15 हजार टीवी बेच लिए जो टीवी की कैटेगिरी में सेल का अबतक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है 32 इंच टीवी की कीमत थी 12,999 और 43 इंच टीवी की कीमत थी 21,999 रूपये
रियलमी का बंपर टीवी सेल
उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रिस्पॉस से चीनी कंपनी रियलमी के मालिक काफी उत्साहित हैं और अब उन्होंने एलान किया है कि वो जल्द ही भारतीय बाजारों में 55 इंच का स्मार्ट टीवी बेचेंगे कंपनी को उम्मीद है कि जितना बेहतरीन रिस्पॉस कंपनी को अब मिला है उतना ही बेहतर रिस्पॉस आगे भी मिलेगा जिस तरह रियलमी के टीवी बिके हैं उसे देखते हुए स्वदेशी अपनाओ जैसे नारे हवा हवाई ही नजर आते हैंरियलमी की सेल सिर्फ इस बात का उदाहरण है कि कैसे भारतीय चीनी कंपनी के उत्पादनों पर टूट पड़ते हैं
ये तो वही बात हो गई कि चीनी सामान के बहिष्कार वाली टीशर्ट भी चीनी कंपनियां बना रही हैं और लोग उसे पहनकर आत्मसंतुष्टि पा रहे हैं कि हां हमने आज जो स्वदेशी वाली टीशर्ट पहनी उससे कई लोगों को स्वदेशी अपनाने का संदेश गया यही है स्वदेशी अपनाओ की हकीकत, सब एक दूसरे को स्वदेशी अपनाने का ज्ञान दे रहे हैं और खुद चीनी सामान धडल्ले से खरीद रहे हैं