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राहुल गाँधी की देश-तोड़ू जाति-राजनीति पर कांग्रेस में ही विरोध

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस की वर्किंग कमेटी के सदस्य, दिग्गज नेता आनंद शर्मा ने राहुल गाँधी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राहुल गाँधी की चुनाव केंद्रिय नीतियों पर सवाल उठाते हुए उसे इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का अपमान करार दिया है, खासकर जातिगत जनगणना के मुद्दे पर। उन्होंने कांग्रेस पार्टी द्वारा घोषित जातिगत जनगणना को लेकर राहुल गाँधी पर हमला किया और बताया कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर जाने का मतलब है कि कांग्रेस अब अपने ऐतिहासिक रुख से पलट रही है, जो इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की लीगेसी का अपमान भी है।

कांग्रेस के विद्रोही जी-23 टीम के सदस्य और वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के लोकप्रिय चुनावी नारों का भी हवाला दिया है। उन्होंने मंगलवार (19 मार्च 2024) को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक पत्र लिखा है, जिसमें राहुल गाँधी द्वारा कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक नीतियों का विरोध किया गया है। उन्होंने अपने पत्र में इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के चुनावी नारे ‘न जात पर, न पात पर… मोहर लगेगी हाथ पर’ का जिक्र किया। बता दें कि इस नारे को सबसे पहले इंदिरा गाँधी ने साल 1980 में दिया था और ये नारा कुछ समय पहले तक इस्तेमाल भी होता रहा है, खासकर उन हिंदी भाषी राज्यों में, जहाँ जाति आधारित राजनीतिक पार्टियाँ सक्रिय हैं।

आनंद शर्मा ने पत्र में लिखा है कि राहुल गाँधी जिस जातिगत जनगणना के मुद्दे को जोरशोर से उठा रहे हैं और कांग्रेस पार्टी ने चुनाव में जीत के बाद जिस जातिगत जनगणना को कराने की बात कही है, वो कांग्रेस के ऐतिहासिक रुख से ठीक उलट है। इस नीति पर चलते से कांग्रेस को नुकसान ही होगा, क्योंकि विपक्षी भी उसे खूब निशाना बनाएँगे।

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का ये पत्र ऐसे समय पर सामने आया है, जब लोकसभा चुनाव में पार्टी उतर चुकी है। ये पत्र कांग्रेस के चुनाव प्रचार के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकता है, क्योंकि एक तरफ वो जातिगत जनगणना को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ आनंद शर्मा ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का नाम लेकर और कांग्रेस के सियासी इतिहास को सामने रखकर कांग्रेस के दावों की हवा निकाल दी है।

आनंद शर्मा जी-23 नेताओं में से एक हैं। उन नेताओं ने साल 2021 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को तीखा पत्र लिखा था और पार्टी की संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव लाने की बात कही थी। इन नेताओं में कई नेता पार्टी छोड़ गए हैं, तो कईयों को हाशिये पर ढकेल दिया गया है। इस पत्र में भी कांग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल आनंद शर्मा ने पार्टी में समन्वय की कमी का मामला उठाया है। उन्होंने कहा है कि जिला और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों की कोई पूछ नहीं है।