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झाड़खंड, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और प. बंगाल पर जवाब देने से बचने के लिए विपक्ष ने उछाला मणिपुर ; साजिश के तहत वायरल किया गया वीडियो

मणिपुर में भीड़ द्वारा दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने और गैंगरेप की घटना से पूरा देश मर्माहत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त किया और दोषियों को कठोर सजा देने का देश को अश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मैं देश को आश्वस्त करता हूं, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। कानून पूरी ताकत से अपना काम करेगा। मणिपुर की बेटियों के साथ जो हुआ उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता। इसके बाद मोदी सरकार मानसून सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों में इस मामले पर चर्चा के लिए तैयार हो गई। लेकिन विपक्ष ने हंगामा कर सदन की कार्यवाही को बाधित कर दिया। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो विपक्ष हंगामा कर चर्चा से क्यों भाग रहा है? इसके साथ ही घटना के 77 दिनों बाद वीडियो जारी करने के पीछे गहरी साजिश की आशंका व्यक्त की जा रही है।

मणिपुर की घटना को लेकर संसद में विपक्ष का हंगामा, कार्यवाही स्थगित

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हो चुकी है। सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मणिपुर की घटना को लेकर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की वजह से संसद की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित की गई थी लेकिन हंगामा जारी रहने पर अब कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि विपक्ष को देखकर साफ हो गया है कि वह संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से नहीं चलने देने का मन बना चुके हैं। जब सरकार ने साफ कर दिया है कि हम मणिपुर की घटना पर चर्चा के लिए तैयार हैं तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां सदन की कार्यवाही को चलने नहीं दे रही हैं। साफ है कि वह संसद को चलने नहीं देना चाहती। विपक्षी दल अपने खोट छिपाने के लिए चर्चा से भाग रहे हैं। चर्चा करना नहीं चाहते हैं। जब चर्चा होगी तो और खुलासा माननीय गृहमंत्री जी करेंगे।

 

अपना खोट छिपाने और सदन की कार्यवाही बाधित करने की विपक्ष की साजिश

जिस वायरल वीडियो को लेकर विपक्ष हंगामा कर रहा है, वो दो महीने से अधिक पुराना है। वीडियो 4 मई, 2023 का बताया जा रहा है,जब हिंसा शुरुआती चरण में थी। वायरल वीडियो में जिन दो महिलाओं को नग्न करके घुमाया जा रहा है, वो कुकी समुदाय की हैं। महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का आरोप मैतई समुदाय के लोगों पर लगा है। लेकिन इस वीडियो को 77 दिन बाद संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले साजिश के तहत जानबूझकर वायरल किया गया। सरकार इस घटना को लेकर चर्चा करने के लिए तैयार है, इसके बावजूद जिस तरह विपक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हंगाम शुरू किया, उससे लगता है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए पहले से तैयार था। कार्यवाही बाधित कर विपक्ष असल मुद्दे से भागने की कोशिश कर रहा है।

राजस्थान, छत्तीसगढ़ और प. बंगाल पर जवाब देने से भाग रहा विपक्ष

अगर विपक्ष मणिपुर मामले में संवेदनशील है, तो उसे सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने देना चाहिए। सदन की कार्यवाही में शामिल होकर सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। दरअसल विपक्ष इस पर चर्चा करना नहीं चाहता है। मुद्दाविहीन विपक्ष का मकसद सिर्फ मोदी सरकार के साथ ही भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करना है। विपक्ष चर्चा से इस लिए भाग रहा है कि चर्चा के दौरान उसे अपने शासित राज्यों में महिलाओं और दलितों पर हो रहे अत्याचार के मामले में जवाब देना पड़ेगा। इसका संकेत प्रधानमंत्री मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ का जिक्र कर दे दिया। उन्होंने कहा कि सभी मुख्यमंत्रियों से आग्रह करता हूं कि वो अपने राज्य में कानून और व्यवस्था को और मजबूत करें। खासकर के हमारी माताओं और बहनों की रक्षा के लिए कठोर से कठोर कदम उठाए। घटना चाहे राजस्थान की हो, घटना चाहे छत्तीसगढ़ की हो, घटना चाहे मणिपुर की हो।

कुकी – मैतई संघर्ष और सियासी साजिश में जल रहा मणिपुर

मणिपुर के जिस वीडियो को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है, उसके पीछे की कहानी काफी भयावह है। मणिपुर में हिंसा भड़कने की बड़ी वजह हाईकोर्ट के द्वारा मैतई समुदाय को जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग को स्वीकार करना है। हाईकोर्ट के इसी फैसले के बाद मैतई समुदाय निशाने पर आ गया और चुराचंदपुर जिले में हिंसा भड़क उठी। कुकी बहुल चुराचंदपुर में 28 अप्रैल को द इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने आठ घंटे बंद का ऐलान किया था। देखते ही देखते इस बंद ने हिंसक रूप ले लिया। चार मई को चुराचंदपुर में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की एक रैली होने वाली थी। पूरी तैयारी हो गई थी, लेकिन रात में ही उपद्रवियों ने टेंट और कार्यक्रम स्थल पर आग लगा दी। सीएम का कार्यक्रम स्थगित हो गया। हथियारबंद कुकी उग्रवादियों ने हिन्दू मैतई समुदाय के घरों पर हमला और नरसंहार शुरू कर दिया। हिन्दू मंदिरों और घरों को जलाया जाने लगा। जब तक मैतई मर रहे थे, तबतक राहुल गांधी, तमाम विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट सोया हुआ था। जैसे ही मैतई बहुल इलाकों में इसकी प्रतिक्रिया शुरू हुई, हिंसा ने भयंकर रूप ले लिया। चर्चों में आग लगाई जाने लगी। इससे कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष परेशान हो गया। यहां तक यूरोपीय यूनियन में भी प्रस्ताव पेश होने लगा। विपक्ष की सियासी साजिश ने आग में घी डालने का काम किया। आज सोशल मीडिया मेें मैतई लोगों के नरसंहार का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर किसी की रूह कांप जाती है।

महिला अपराध में राजस्थान नंबर वन, एक ही परिवार के चार लोगों को जलाया

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान पूरे देश में अव्वल है। महिलाओं के साथ गैंगरेप और हत्या की घटनाएं लगातार हो रही है। हाल ही में एक दलित लड़की को गैंगरेप के बाद चेहरे पर तेजाब डालकर मार डाला गया था और उसे कुएं फेंक दिया गया था। इसी बीच जोधपुर जिले के ओसियां में मंगलवार रात एक ही परिवार के चार लोगों को जलाकर मारने की घटना ने पूरे देश को झकझोंर दिया। चारों शव जली अवस्था में एक झोपड़ी में मिले। पुलिस के मुताबिक मरने वालों में एक पुरुष, दो महिलाओं के साथ एक मासूम बच्ची शामिल है, जिन्हें गला काटकर हत्या कर दी गई थी। अपराधियों ने वारदात को अंजाम देने के बाद झोपड़ी में आग लगा दी थी। इस तरह की अनेक घटनाएं राजस्थान में हो रही है, लेकिन इस तरफ ध्यान न तो विपक्षी दलों का जाता है और ना सेक्युलर, लिबरल और वामपंथी मीडिया का। महिलाओं के साथ हो रहे अपराध के खिलाफ आवाज उठाने में विपक्ष का सेलेक्टिव अप्रोच अपराधियों का हौसला बढ़ा रहा है। 

छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सरकार में एससी-एसटी के अधिकारों का हनन

कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में एससी-एसटी के अधिकारों का हनन हो रहा है। अपने साथ हो रहे अन्याय के विरोध में एससी-एसटी के युवक नग्न होकर सड़कों पर प्रदर्शन के लिए मजबूर हो रहे हैं। रायपुर में विधानसभा रोड पर एससी-एसटी युवाओं ने नग्न होकर प्रदर्शन किया। आमासिवनी के पास फर्जी आरक्षण प्रमाणपत्रों का आरोप लगाते हुए करीब 12 युवाओं ने पूरी तरह नग्न होकर सड़क पर प्रदर्शन किया। युवाओं ने फर्जी आरक्षण प्रमाण पत्रों से नौकरी पाने वालों का विरोध किया। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि गैर आरक्षित वर्ग के लोग आरक्षित वर्ग के कोटे का शासकीय नौकरियों और राजनैतिक क्षेत्रों में लाभ उठा रहे हैं। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय जाति छानबीन समिति गठित की थी। इसकी रिर्पोट के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे अधिकारी कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों से तत्काल बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए, लेकिन कांग्रेस की बघेल सरकार अभी तक कार्रवाई के नाम पर युवाओं को गुमराह कर रही है।

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में हिंसा, महिलाओं के साथ बदसलूकी

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक रक्त चरित्र पंचायत चुनाव में भी देखने को मिला। नामांकन से लेकर मतगणना तक लोकतंत्र का चीरहरण होता रहा, लेकिन लोकतंत्र के सभी ठेकेदार अपनी आंखों पर पट्टी बांधे हुए थे। चुनाव में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। मतपेटियों में तोड़फोड़ की गई और उसे आगे के हवाले किया गया। राज्य में उत्तर से लेकर दक्षिण तक हिंसा, बमबाजी, गोलीबारी, चाकूबाजी और आगजनी से वोटर्स भी भय के साये में आ गए। कई इलाकों से तो वोटर्स तक को घर से नहीं निकलने दिया गया। 24 घंटे में 19 लोगों की जान गई। 50 से ज्यादा लोग घायल भी हुए। हिंसा की ये वारदातें मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, पूर्वी बर्दवान, मालदा, नादिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना में हुई हैं। केंद्र सरकार ने सीएपीएफ की 649 कंपनियां भेजी थी। लेकिन राज्य चुनाव आयोग और पुलिस की लापरवाही से उनका संवेदनशील इलाकों में तैनाती नहीं की गई। इससे अपराधी तत्वों के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने जमकर हिंसा की। महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई। महिलाओं के खिलाफ अपराध की एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक का पैर पकड़ कर एक महिला विलाप करती नजर आई। वहीं महिलाओं पर हुए अत्याचार की जांच के लिए बीजेपी को एक जांच कमेटी पश्चिम बंगाल भेजनी पड़ी।