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भारत से रिश्‍ते खत्‍म कर, बर्बादी की राह पर पाकिस्‍तान

जम्‍मू-कश्‍मीर पर मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले से बौखलाया पाकिस्‍तान, कही ये बात...
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छे 370 खत्म कर विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद से पाकिस्तान की बेचैनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आलम ये है कि पाक पीएम तीन दिन में दो बार राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) के साथ बैठक कर चुके हैं। पाकिस्तानी संसद भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को राजनीतिक दबाव में अगस्त 7 को भारत संग व्यापारिक और राजनयिक संबंध खत्म करने की घोषणा तक करनी पड़ी। लेकिन उसके लिए यह कदम आत्‍मघाती साबित होगा। इसकी वजह भी बेहद साफ है। भारत को छोड़कर वह अरबों डॉलर का व्‍यापार करने के लिए चाहकर भी बाजार तैयार नहीं कर सकेगा। ऐसे में हमारे लिए भी ये जानना जरूरी है कि आखिर पाकिस्तान के इस फैसले का असर उस पर और भारत पर क्‍या होगा। साथ ही जान लेते हैं कि दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक गणित क्‍या है और इस मुद्दे पर क्‍या है विशेषज्ञ की राय।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 में भारत ने पाकिस्तान को कुल 2.3 लाख अरब रुपये का निर्यात किया। इसी वर्ष भारत ने पाकिस्तान से कुल 3.6 लाख अरब रुपये का सामान आयात किया। आसान भाषा में समझें तो पिछले वित्तीय वर्ष में भारत के मुकाबले पाकिस्तान ने हमें 1.3 लाख अरब रुपये का ज्यादा सामान बेचा है। मतलब भारत, पाकिस्तान से खरीदता ज्यादा है और बेचता कम है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए भारत एक बड़ा बाजार है, जहां पिछले वर्ष उसने कुल 3.6 लाख अरब रुपये का व्यापार किया। वहीं, पाकिस्तान अपने आवाम की जरूरी आवश्यकतें पूरी करने के लिए भी काफी हद तक भारत पर निर्भर है।
क्या कहते हैं वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े?
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मार्च में पाकिस्तान का आयात 92 प्रतिशत घटकर लगभग 24 लाख डॉलर रह गया था, जो मार्च 2018 में 3.4 करोड़ डॉलर था। वित्त वर्ष 2018-19 की जनवरी-मार्च अवधि के दौरान पाकिस्तान से आयात 47 प्रतिशत घटकर 5.3 करोड़ अमरीकी डॉलर रहा। पाकिस्तान में भारत का निर्यात भी मार्च में लगभग 32 प्रतिशत घटकर 17 करोड़ अमरीकी डॉलर के आसपास रहा है। हालांकि, 2018-19 के दौरान निर्यात 7.4 प्रतिशत बढ़ा।
पाकिस्तान पर क्या होगा असर
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि भारत से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने के बाद पाकिस्तान 3.6 लाख रुपये के व्यापार की भरपाई कैसे करेगा। यहां ये भी जानना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के मुकाबले पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्ते बहुत सीमित हैं। ऐसे में पहले से ही तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और खराब होना तय है। पाकिस्तान ने अभी महंगाई दर लगभग 10.35 प्रतिशत है। वर्ष 2013 में पाकिस्तान की महंगाई दर अब तक सबसे ज्यादा 10.9 फीसद थी। जानकारों का अनुमान है कि भारत से व्यापारिक रिश्ते खत्म कर पाकिस्तान ने अपने लिए मुसीबत बढ़ा ली है। इससे उसकी महंगाई दर 11 फीसद तक पहुंचने का अनुमान है। मतलब पहले ही महंगाई की मार झेल रही पाकिस्तानी आवाम की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।
निर्यातक देशों की सूची में पाक का स्थान 68वां
पाकिस्तान का कुल निर्यात करीब 24.8 बिलियन डॉलर ( लगभग 1757 अरब रुपये) का है और आयात करीब 55.6 बिलियन डॉलर (तकरीबन 3939 अरब रुपये) है। निर्यात के मामले में वह दुनिया के 221 देशों की सूची में 68वें और आयात में वह 47वें नंबर पर है। प्रति व्यक्ति आय की बात करें तो पाकिस्तान 138वें स्थान पर है। भारत से व्या‍पारिक संबंध खत्म करने के बाद पाकिस्तान को जो 3.6 लाख अरब रुपये का नुकसान होगा, उसके लिए उसे कहीं न कहीं अपनी परिस्थितियों से समझौता करना जरूरी होगा। इसको ऐसे भी देखा जा सकता है कि अमेरिका, जर्मनी और चीन समेत जो भी उसके उत्पादों के बड़े खरीदार हैं, वहां अपने सामान को ज्यादा खपाने का प्रयास करेगा। ऐसे में उसे मजबूरन अपने सामान की कीमतों को कम करना होगा। ऐसे में मुमकिन है कि वह अपना सामान तो बेचने में सफल हो जाए, लेकिन भारत से हो रहे व्यापारिक घाटे की भरपाई नहीं कर पाएगा।
पाक के लिए मुश्किल है घाटे की भरपाई
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में अर्थशास्त्री राधिका पांडे कहती हैं पाकिस्तान द्वारा व्यापार संबंध खत्म करने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसकी दो वजह हैं। पहला भारत का पाकिस्तान के साथ जो ट्रेड है वो डायरेक्ट रूट से बहुत कम है। पाकिस्तान के साथ हमारा जो ज्यादातर व्यापार है वो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रास्ते से होता है। इस रूट से व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ये पहले की तरह ही जारी रहेगा। भारत के भी ज्यादातर उत्पाद इसी रूट से पाकिस्तान को निर्यात होते हैं। डायरेक्ट व्यापार बहुत कम है। बावजूद जो भी नकारात्मक असर होगा वो पाकिस्तान पर होगा, क्योंकि भारत के मुकाबले उनकी अर्थव्यवस्था काफी छोटी है। पाकिस्तान, भारत पर ज्यादा निर्भर है।
हमारी अर्थ व्यवस्था 2900 बिलियन डॉलर (लगभग 2054 खरब रुपये) है। पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था 300 बिलियन डॉलर (करीब 212 खरब रुपये) से भी कम है। उनका फॉरेन रिजर्व (विदेशी मुद्रा भंडार) भी भारत के मुकाबले बहुत कम है। पाकिस्तान, भारत से हुए नुकसान की भरपाई जल्दी नहीं कर सकेगा। जब दो देश आपस में व्यापार शुरू करते हैं, तो एक-दूसरे की अर्थ व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मंच में उनकी छवि को भी देखते हैं। पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगे हैं। उसकी छवि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के तौर पर है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए शार्ट टर्म में इस नुकसान की भरपाई कर पाना संभव नहीं होगा।
भारत पर क्या होगा असर
भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान को 2.3 लाख अरब रुपये का सामान निर्यात किया था। इससे बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठ सकता है कि भारत को भी पाकिस्तान से होने वाले व्यापार में घाटा उठाना पड़ेगा। हालांकि, ऐसा नहीं है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद से ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तनावपूर्ण हैं। लिहाजा, भारत से पाकिस्तान को निर्यात होने वाले सामान में पहले ही भारी कटौती हो चुकी है। यहा ये भी जानना जरूरी है कि भारत ने 1996 में पाकिस्तान को व्यापार के लिए सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा दिया था, जो पुलवामा हमले के बाद वापस ले लिया गया है। वहीं पाकिस्तान ने भारत को कभी MFN का दर्जा नहीं दिया।
इन जरूरतों को कैसे पूरा करेगा भारत?
इसके बाद भी बहुत से लोगों के जेहन में ये सवाल होगा कि भारत-पाकिस्तान से जो सामान मंगाता है, वो जरूरत कैसे पूरी करेगा। यहां, आपके लिए ये जानना जरूरी है कि भारत, पाकिस्तान से जो सामान मंगाता है उसमें ड्राई फ्रूट्स, कपास, ताजे फल, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद और खनिज अयस्क जैसे सामान शामिल हैं। पुलवामा के बाद से ही भारत ने पाकिस्तान से आयातित सभी सामानों पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया है। लिहाजा पाकिस्तान से आयात बहुत कम हो गया है। इसकी भरपाई के लिए भारत ने अन्य पड़ोसी देशों से आयात बढ़ाया है।
 इन चीजों के लिए भारत पर निर्भर है पाकिस्तानइन चीजों के लिए भारत पर निर्भर है पाकिस्तान 
भारत के साथ व्यापारिक संबंध खत्म करने के फैसले से खुद पाकिस्तान को झटका लगा है। चीजें आयात नहीं होने से महंगाई बढ़ रही है। खाने के लाले पड़ रहे हैं। पाकिस्तान प्याज और टमाटर जैसी खाद्य वस्तुओं के लिए भारत पर निर्भर है। व्यापार बंद होने से अब पाकिस्तान में इन चीजों की मांग और कीमत बढ़ गई है। इसके अलावा केमिकल्स के लिए भारत पर निर्भर है। एक्सपर्ट्स और ट्रेडर्स की मानें तो इससे पाकिस्तान को ही झटका लगेगा। भारत आयात के मुकाबले पाकिस्तान के साथ सामान निर्यात ज्यादा करता है। साल 2018-19 में भारत ने जहां पाकिस्तान ने 49.5 करोड़ की चीजें खरीदी तो वहीं 206.7 करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया। निर्यात की बात करें तो भारत पाकिस्तान को सबसे ज्यादा केमिकल, प्लास्टिक, रबड़ और मशीन और उनके पार्ट-पुर्जें बेचता है।
ये चीजें पाकिस्तान को बेचता है भारत 
 ये चीजें पाकिस्तान को बेचता है भारतअगर बात करें कि भारत पाकिस्तान को कौन-कौन सी चीजें बेचता है तो भारत केमिकल और इंडस्ट्री से संबंधित उत्पाद पाकिस्तान को सबसे ज्यादा बेचता है। इसके बाद टेक्सटाइल और टेक्सटाइल आर्टिकल्स बेचता है। तीसरे नंबर पर प्लास्टिक और रबड़ उत्पाद, चौथे नंबर पर सब्जियां और पांचवें नंबर पर मशीन उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट-पुर्जे बेचता है।
पाकिस्तान से क्या खरीदता है भारत 

अगर बात करें कि भारत कौन-कौन सी चीजें पाकिस्तान से खरीदता है तो लिस्ट में सबसे ऊपर खनिज उत्पाद हैं। इसके बाद सब्जियां,टेक्सटाइल आर्टिकल्स, केमिकल इंडस्ट्री । इसके अलावा चमड़ा, खाल, लेदर, घोड़े की जीनसाजी, ड्राई फ्रूट, मसाले, शॉल आदि खरीदता है।
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सऊदी और मलेशिया छोड़ सकते हैं पाकिस्तान का साथ, निवेश से हट सकते हैं पीछे

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भारतीय वायु सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब पाकिस्तान पर आर्थिक संकट गहराने वाला है। सऊदी अरब और मलेशिया पाकिस्तान में निवेश करने से पीछे हट सकते हैं। यह बात खुद इस्लामाबाद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अहमद हसन मोघुल ने स्वीकारी है। उनके मुताबिक सऊदी, मलेशिया समेत कई देशों ने पाकिस्तान में निवेश करने की इच्छा जताई थी, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे तनाव के चलते पाकिस्तान में इन देशों का निवेश रुक सकता है।

भारत ने लगाई थी 200 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी

पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आने वाले सारे उत्पादों पर 200 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भी छीन लिया। इसके बाद से ही पाकिस्तानी बाजारों में हलचल मची हुई है। पाकिस्तान अब तक इसका कोई जवाब नहीं ढूंढ पाया है। पाकिस्तान के राजस्व मंत्री हम्माद अजहर ने कहा कि आगे क्या करना है इस बारे में सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। 
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परेशानी में हैं व्यापारी

पाकिस्तानी व्यापारियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। भारतीय व्यापारियों ने पाकिस्तान से सभी व्यापारिक संबंध खत्म करने का निर्णय ले लिया है। न तो पाकिस्तान से कुछ भारत आ रहा है और न भारत से कुछ वहां एक्सपोर्ट किया जा रहा है। ऐसे में पाकिस्तानी व्यापारियों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। इस्लामाबाद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अहमद हसन मोघुल का कहना है कि, ‘दोनों देशों के बीच इस तनाव को भारत ही खत्म कर सकता है। भारत को ऐसी स्थितियां बनाने से बचना चाहिए जिससे दक्षिण एशिया में निवेश के मौके घटें और नौकरियों के अवसर कम हों।’