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दिल्ली : पिछले दो सालों में सिर्फ 28 लोगों को दी नौकरी, आरटीआई से केजरीवाल के महाझूठ का बड़ा खुलासा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुफ्त की रेवड़ियां बांटकर और झूठे वादे कर राष्ट्रीय राजधानी में सरकार तो बना ली। अब इस झूठ को ही वो चुनावी सफलता की कुंजी मान रहे हैं। लेकिन आरटाआई कार्यकर्ता डॉ. डीसी प्रजापति ने आरटीआई के हवाले से दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के महाझूठ का बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली सरकार जब से सत्ता में आई है, उसने रोजगार को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए। रोजगार के मामले में बड़े-बड़े वादे करती रही, लेकिन सभी झूठे निकले। 

आरटीआई के मुताबिक केजरीवाल सरकार ने पिछले दो सालों में सिर्फ 28 लोगों को नौकरियां दी हैं। इससे पहले अगस्त 2018 में दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान तत्कालीन नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रोजगार कार्यालय में हुए पंजीयन और नौकरियों की जानकारी सरकार के रोजगार मंत्री से मांगी थी। दिल्ली सरकार के रोजगार विभाग ने लिखित जवाब में बताया कि तीन साल में सिर्फ 344 बेरोजगारों को नौकरियां मिलीं। इनमें से 177 कंडक्टर, वॉटरमैन और टेम्पररी वॉटरमैन पद पर नियुक्त हुए। इसके साथ यह जानकारी भी सामने आई कि रोजगार विभाग ने इसके लिए कुल 21.53 करोड़ रुपये खर्च किए।

जुलाई 2020 में केजरीवाल सरकार ने कोरोना महामारी से प्रभावित नौकरी की तलाश करने वाले और नौकरी देने वाले दोनों के लिए एक जॉब पोर्टल jobs.delhi.gov.in लॉन्च किया था। इस पोर्टल को सरकार ने रोजगार बाजार नाम दिया। लेकिन, सरकार ने अभी तक स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि रोजगार बाजार में कितने लोगों को नौकरियां मिलीं। केजरीवाल की यह रोजगार योजना भी फेल साबित हुई है। दरअसल अरविंद केजरीवाल रोजगार के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए वो दूसरों राज्यों में भी सरकार बनाने के लिए लोगों को झूठे वादे कर झांसा देने की कोशिश कर रहे हैं। 

उत्तराखंड के हल्द्वानी में केजरीवाल ने ऐलान किया कि राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर 6 महीने में 1 लाख लोगों को नौकरियां मिलेंगी। जब तक रोजगार नहीं मिलता तब तक हर महीने 5,000 रुपये का भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा युवाओं के लिए जॉब पोर्टल, पलायन और रोजगार मंत्रालय का गठन किया जाएगा। इसी बीच केजरीवाल और उनकी सरकार ने रोजगार के नाम पर किस तरह दिल्ली की जनता की आंखों में धूल झोंकी है, उसका सबूत अब जनता के सामने है। इससे उत्तराखंड और अन्य राज्य की जनता को सबक लेने की जरूरत है।

कोरोना महामारी के दौरान केजरीवाल ने कोरोना वारियर्स की मृत्यु होने पर जो सहायता की घोषणा की थी, लेकिन वह काम भी धर्म देखकर किया। देखिए वीडियो:-

दिल्ली में रोजगार देने में नाकाम केजरीवाल सरकार 

RTI से खुलासा : 2 साल में 28 लोगों दी नौकरी

        वर्ष                 नियुक्तियां    
       2020                28
       2019                  0
  दिल्ली सरकार के रोजगार विभाग ने खोली पोल
3 साल में 344 बेरोजगारों को मिली नौकरी
             वर्ष             नियुक्तियां 
            2017                   66
            2016                  102
            2015                 176

योगी सरकार ने चार साल में दी 4 लाख नौकरियाँ, सुप्रीम कोर्ट ने भी की तारीफ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 4 साल में लगभग चार लाख लोगों को नौकरी और रोजगार देकर एक अनोखा रिकॉर्ड कायम किया है। यूपी सरकार ने चार साल में सबसे ज्यादा नौकरी और रोजगार दिया है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रिकॉर्ड के तहत उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा नौकरी और रोजगार देने वाला राज्य बन गया है।

कोरोना काल के दौरान जहाँ सबकी नौकरियाँ जा रहीं थी, उस वक्त भी प्रदेश सरकार की भर्ती प्रक्रिया नहीं थमी। योगी ने बुधवार (9 दिसंबर,/2020) को 3209 ट्यूबवेल (Tubewell) चालकों को नियुक्ति पत्र दे कर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कैंडिडेट्स को संबोधित किया।

गौर करने वाली बात यह है कि अभ्यर्थियों से संवाद कर भर्ती प्रक्रिया की शुचिता और पारदर्शिता को सिर्फ अधिकारी ही नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया के पश्चात खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कैंडिडेट के टैलेंट को परखते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी योगी सरकार की भर्ती प्रक्रिया की सराहना की है।

पिछले 4 सालों में प्रदेश में इन पदों पर युवाओं को नौकरी मिली है:-

  • पुलिस विभाग – 1,37,253 नौकरियाँ
  • बेसिक शिक्षा – 1,21,000 नौकरियाँ
  • राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन – 28,622 नौकरियाँ
  • यूपी लोक सेवा आयोग – 26,103 नौकरियाँ
  • उत्‍तर प्रदेश अधीनस्‍थ चयन बोर्ड – 16,708 नौकरियाँ
  • चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण – 8,556 नौकरियाँ
  • माध्‍यमिक शिक्षा विभाग – 1,400 नौकरियाँ
  • यूपीपीसीएल – 6,446 नौकरियाँ
  • उच्‍च शिक्षा – 4,615 नौकरियाँ
  • चिकित्‍सा शिक्षा विभाग – 1,112 नौकरियाँ
  • सहकारिता विभाग – 726 नौकरियाँ
  • नगर विकास – 700 नौकरियाँ
  • वित्‍त विभाग – 614 नौकरियाँ
  • तकनीकी शिक्षा – 365 नौकरियाँ

सीएम ने कैंडिडेट्स से बातचीत के दौरान कहा कि सभी 3209 नवचयनित अभ्यर्थियों को इस बात पर गर्व करना चाहिए कि उन्हें किसी सिफारिश या जुगाड़ से यह सरकारी नौकरी नहीं मिली है। यह नौकरी आपकी अपनी मेधा, क्षमता और मेहनत से मिली है। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नौकरी का एक मात्र आधार ‘मेरिट’ ही है।