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मोदी सरकार ने दिया पाकिस्तानियों को फिर झटका

Prime Minister Narendra Modiपाकिस्तान को हर मोर्चे पर घेरने में जुटी मोदी सरकार ने अब उसे एक और झटका दिया है। सरकार ने एक बार फिर पाकिस्तानियों को झटका देते हुए शत्रु शेयरों को बेचकर 1150 करोड़ रुपए कमाए हैं। यह शत्रु शेयर देश की बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार विप्रो में मौजूद थे और एनमी प्रॉपर्टी ऑफ इंडिया के तहत गृम मंत्रालय की देखरेख में थे। 
तीन सरकारी कंपनियों ने की खरीदारी
स्टॉक एक्सचेंज बीएसई से मिली जानकारी के अनुसार, यह आईटी कंपनी विप्रो में करीब 4.43 करोड़ शत्रु शेयर थे। इनको 258.90 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से बेचा गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कॉरपोरेशन ने यह शेयर खरीदे हैं। LIC ने 3.86 करोड़ शत्रु शेयर की खरीदारी की है। बीएसई के अनुसार, इन शत्रु शेयरों की बिक्री से सरकार को 1150 करोड़ रुपए मिले हैं। इससे सरकार के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिली है। 
शत्रु शेयरों की बिक्री के लिए कमेटी का गठन
देश में करीब तीन हजार करोड़ रुपए मूल्य के शत्रु शेयर हैं। पिछले साल केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 996 कंपनियों में करीब 20 हजार लोगों के 6 करोड़ से ज्यादा शत्रु शेयर हैं। यह शेयर 588 सक्रिय, 139 सूचीबद्ध और बाकी गैरसूचीबद्ध कंपनियों में हैं। केंद्र सरकार ने इन शेयरों को बेचने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया था। यह कंपनी इन शेयरों की बिक्री का मूल्य निर्धारण का कार्य करेगी।

क्या होता है शत्रु संपत्ति और शत्रु शेयर

बंटवारे के बाद पाकिस्तान में जा बसे लोगों और 1962 के युद्ध के बाद चीन चले गए लोगों की भारत में स्थित संपत्ति को शत्रु संपत्ति कहा जाता है। 1968 में संसद द्वारा पारित शत्रु संपत्ति अधिनियम के बाद इन संपत्तियों पर भारत संरकार का कब्जा हो गया था। तब से इन संपत्तियों की देखभाल गृह मंत्रालय कर रहा था। देश के कई राज्यों में शत्रु संपत्ति फैली हुई है। 2017 में सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम में बदलाव कर इन लोगों का संपत्ति से अधिकार खत्म कर दिया था। इसके अलावा पाकिस्तान और चीन जा बसे इन लोगों की ओर से भारतीय शेयर बाजारों में किए गए निवेश को शत्रु शेयर कहा जाता है। भारत में करीब 3000 करोड़ रुपए के शत्रु शेयर हैं।

भारत में करीब एक लाख करोड़ की है शत्रु संपत्ति

गृह मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 1 लाख करोड़ रुपए की शत्रु संपत्ति है। इनकी संख्या 9400 के करीब है। इसके अलावा तीन हजार करोड़ रुपए के शत्रु शेयर भी भारत सरकार के पास हैं। इन संपत्तियों में से सबसे ज्यादा 4991 उत्तर प्रदेश, 2735 पश्चिम बंगाल और 487 संपत्ति दिल्ली में स्थित हैं। इसके अलावा भारत छोड़कर चीन जाने वालों की 57 संपत्ति मेघालय, 29 पश्चिम बंगाल और 7 आसाम में स्थित हैं। केंद्र सरकार लंबे समय से इन संपत्तियों को बेचने की कोशिश कर रही है। 

72 साल बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने लिया यह बड़ा फैसला

Prime Minister Narendra Modi
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान पर नकेल कसने में जुटे भारत ने 72 साल बाद एक और बड़ा फैसला किया है। केंद्र की मोदी सरकार ने शत्रु संपत्तियों के सार्वजनिक उपयोग की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद इन संपत्तियों का उपयोग आम आदमी कर सकेगा। अभी तक इन संपत्तियों को आम आदमी उपयोग नहीं कर पाता था।
भारत में करीब एक लाख करोड़ की है शत्रु संपत्ति
गृह मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 1 लाख करोड़ रुपए की शत्रु संपत्ति है। इनकी संख्या 9400 के करीब है। इसके अलावा तीन हजार करोड़ रुपए के शत्रु शेयर भी भारत सरकार के पास हैं। इन संपत्तियों में से सबसे ज्यादा 4991 उत्तर प्रदेश, 2735 पश्चिम बंगाल और 487 संपत्ति दिल्ली में स्थित हैं। इसके अलावा भारत छोड़कर चीन जाने वालों की 57 संपत्ति मेघालय, 29 पश्चिम बंगाल और 7 आसाम में स्थित हैं। 

शत्रु शेयरों की बिक्री के लिए कमेटी का गठन

देश में करीब तीन हजार करोड़ रुपए मूल्य के शत्रु शेयर हैं। पिछले साल केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 996 कंपनियों में करीब 20 हजार लोगों के 6 करोड़ से ज्यादा शत्रु शेयर हैं। यह शेयर 588 सक्रिय, 139 सूचीबद्ध और बाकी गैरसूचीबद्ध कंपनियों में हैं। केंद्र सरकार ने इन शेयरों को बेचने के लिए पिछले महीने एक कमेटी का भी गठन किया था। यह कंपनी इन शेयरों की बिक्री का मूल्य निर्धारण का कार्य करेगी। 

क्या होती है शत्रु संपत्ति

बंटवारे के बाद पाकिस्तान में जा बसे लोगों और 1962 के युद्ध के बाद चीन चले गए लोगों की भारत में स्थित संपत्ति को शत्रु संपत्ति कहा जाता है। 1968 में संसद द्वारा पारित शत्रु संपत्ति अधिनियम के बाद इन संपत्तियों पर भारत संरकार का कब्जा हो गया था। तब से इन संपत्तियों की देखभाल गृह मंत्रालय कर रहा था। देश के कई राज्यों में शत्रु संपत्ति फैली हुई है। लंबे समय से कई संगठन इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार ने अब जाकर इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की अनुमति दी है। 2017 मं सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम में बदलाव कर इन लोगों का संपत्ति से अधिकार खत्म कर दिया था।