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उत्तर प्रदेश : मुलायम सरकार ने मुख्तार अंसारी पर POTA लगाने वाले जिस DSP को भेज दिया था जेल, योगी सरकार ने वापस लिया केस

                              योगी आदित्यनाथ, शैलेन्द्र कुमार सिंह और मुख़्तार अंसारी (बाएँ से दाएँ)
उत्तर प्रदेश के खूँखार माफिया नेता मुख्तार अंसारी के खिलाफ POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) के तहत कार्रवाई करने वाले पूर्व डिप्टी SP शैलेन्द्र कुमार सिंह को यूपी सरकार से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा योगी सरकार ने वापस ले लिया है। जनवरी 2004 में वे यूपी STF की वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी थे। उन्होंने भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय हत्याकांड में अहम खुलासा किया था।

उन्होंने पता लगाया था कि इस हत्याकांड के लिए मुख्तार अंसारी ने ‘लाइट मशीनगन (LMG)’ की खरीद की थी। साथ ही उन्होंने उस LMG को बरामद करने में भी सफलता प्राप्त की थी। तब राज्य में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। तत्कालीन राज्य सरकार शैलेन्द्र के इस कदम से नाराज़ हो गई थी और उन पर POTA वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा था। इसके आगे झुकने से इनकार करते हुए शैलेन्द्र सिंह ने यूपी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफा देने के कुछ महीने बाद ही वाराणसी के कैंट थाने में उनके खिलाफ DM कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लालजी की तरफ से डीएम दफ्तर के रेस्ट रूम में घुसकर तोड़फोड़, मारपीट और हंगामा करने की FIR दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तुरंत चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी और शैलेन्द्र को जेल जाना पड़ा था। अब इस केस को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वापस ले लिया है। शैलेन्द्र ने इस पर ख़ुशी जताते हुए कहा:

“राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया था और मुझे जेल में डाल दिया गया था। लेकिन, जब योगी जी की सरकार बनी तो उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे CJM न्यायालय द्वारा मार्च 6, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। न्यायालय के आदेश की प्रति आज ही प्राप्त हुई। मैं और मेरा परिवार योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा।”

2004 में जब मैनें माफिया मुख्तार अंसारी पर LMG केस में POTA लगा दिया था, तो मुख्तार को बचाने के लिए तत्कालीन सरकार ने मेरे ऊपर केस खत्म करने का दबाव बनाया। जिसे न मानने के फलस्वरूप मुझे Dy SP पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। इस घटना के कुछ महीने बाद ही तत्कालीन सरकार के इशारे पर, राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में अपराधिक मुकदमा लिखा गया और मुझे जेल में डाल दिया गया।
लेकिन जब मा. योगी जी की सरकार बनी तो, उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे मा. CJM न्यायालय द्वारा 6 मार्च, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। मा. न्यायालय के आदेश की नकल आज ही प्राप्त हुई।
मैं और मेरा परिवार मा. योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा। संघर्ष के दौरान मेरा साथ देने वाले सभी शुभेक्षुओं का, हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
जय हिंद 🙏

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शैलेन्द्र सिंह ने संघर्ष के दिनों में साथ देने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया। सहायक अभियोजन अधिकारी की तरफ से दी गई रिपोर्ट के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (वाराणसी) ने मुकदमा वापस लेने का आदेश जारी किया। फरवरी 2004 में ततकालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री को भेजे पत्र में शैलेन्द्र ने आरोप लगाया था कि LMG जब्ती केस में मुख़्तार अंसारी का नाम हटाने के लिए उन पर ऊपर से बड़ा दबाव बनाया जा रहा है।

पंजाब की जेल में बंद मुख़्तार अंसारी के उत्तर प्रदेश प्रत्यर्पण में वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार कई महीनों से अड़ंगा लगा रही थी। 5 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि गैंगस्टर मुख्तार अंसारी दो सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि बांदा जेल के अधीक्षक चिकित्सा सुविधाओं की देखरेख करेंगे। पंजाब सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि किसी राज्य को इस प्रकार के स्थानांतरण का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।