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खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाने में सिखों के नाम से फर्जी फेस बुक-इंस्टाग्राम अकाउंट चला रहा चीन

नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग (फोटो साभार : X)
भारत से टक्कर लेने के चक्कर में हर जगह मुँह की खाने वाला चीन अब खालिस्तानी अलगाववाद को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है। इसके लिए वो फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी इस्तेमाल कर रहा है, ताकि भारत से बाहर रह रहे खालिस्तानी समर्थकों को एकजुट कर सके। इसके लिए चीन बोट्स का सहारा ले रहा था, लेकिन फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने उसकी हरकत को पकड़ लिया है। मेटा ने एक रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें चीनी कारनामों के बारे में खुलासा हुआ है।

मेटा ने अपनी ‘एडवर्सियल थ्रेट रिपोर्ट‘ प्रकाशित की है, जो 33 पन्नों की है। इसमें मेटा ने बताया है कि 37 फेसबुक खाते, 9 इंस्टाग्राम खाते, 13 फेसबुक पेज और 5 ग्रुप, जो चीन से चलाए जा रहे थे, उन्हें बंद कर दिया गया है। इनमें से कुछ पेजों पर 2700 के करीब फॉलोवर्स हैं, कुछ ग्रुपों में 1300 से ज्यादा सदस्य, वहीं इंस्टाग्राम आईडी पर 100 से भी कम फॉलोवर्स मिले थे।

इस अकाउंट्स के जरिए खालिस्तानी आतंकवाद और सिख अलगाववाद को भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, नाइजीरिया और यूके जैसे देशों में बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही थी। इस रिपोर्ट के पेज नंबर 7 पर मेटा ने बताया है कि चीन द्वारा पोषित प्रो-खालिस्तानी प्रोपेगेंडा सिर्फ फेसबुक तक ही लिमिटेड नहीं है, बल्कि चीन की कम्युनिष्ट पार्टी (सीसीपी) अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स और टेलीग्राम का भी इस्तेमाल कर रहा है। इन फेक अकाउंट्स और बोट्स में से कईयों को मेटा के सिस्टम ने पकड़ लिया और हमने जाँच शुरू की। इसमें से अकाउंट्स को सिखों की तरह पेश किया गया और उनपर खालिस्तान समर्थक कंटेंट पोस्ट किया जा रहा था।

चीन का ऑपरेशन-के

चीन द्वारा ऑपरेट किए जा रहे ‘ऑपरेशन-के’ द्वारा मेटा पर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों के बीच भारत को लेकर घृणा फैलाई जा रही थी। रिपोर्ट में लिखा है, “हमें जैसे ही प्रो-खालिस्तानी पोस्ट दिखे, हमने उन्हें फैलने से पहले ही डिलीट कर दिया। ये पोस्ट अंग्रेजी और हिंदी में थे, जिनमें न्यूज और एआई द्वारा एडिटेड तस्वीरें थी। इसमें पंजाब से जुड़ी बातें थी, जिन्हें पूरी दुनिया में सिख कम्यूनिटी के बीच फैलाने की कोशिश की जान रही थी। इन पोस्ट में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और भारत सरकार की बुराई शामिल थी।” मेटा ने अपनी आंतरिक जाँच टीम के ‘कॉर्डिनेटेर इनॉथेंटिक बिहैवियर’ प्रोग्राम के जरिए इस पूरी रिपोर्ट को सामने रखा है।

भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त चीन

कम्युनिस्ट चीन भारत के दूसरे पड़ोसी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान का एक मजबूत सहयोगी है और पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के अंदर गड़बड़ी फैलाने की कोशिश करता रहा है। कोरोना महामारी के दौरान एलएसी पर चीन-भारत के बीच काफी तनातनी रही, जो अब तक जारी है। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता रहा है, तो भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में उग्रवाद फैलाने के लिए भी बदनाम रहा है।
अब चीन भारत के पंजाब में पाकिस्तान की आईएसआई के साथ मिलकर गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान से आए कई ड्रोन, जो भारतीय सीमा के अंदर पकड़े गए हैं, उनका चीनी कनेक्शन भी निकला है। अब वो वैश्विक स्तर पर खालिस्तान के मुद्दे को हवा देने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत वो अब ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, नाइजीरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में खालिस्तान के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

त्रिपुरा टूलकिट ने ऐसे जलाया गया महाराष्ट्र : 7 तस्वीरें, दावा: कुरान जलाई-मस्जिदों में आग लगा दी

आखिर जिस फेक पोस्ट के कारण रज़ा अकाडेमी ने महाराष्ट्र को साम्प्रदायिकता की आग में झोंका, सरकार को ऐसे लोगों के विरुद्ध ऐसी सख्त कार्यवाही करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी फेक न्यूज़ फ़ैलाने वाले ऐसा साहस न कर पाएं। इन लोगों का काम ही अपने आकाओं के इशारे पर देश में अराजकता फैलाना है। सरकार को इन आकाओं पर नकेल कसनी चाहिए। ताकि कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा से देश का माहौल ख़राब होने पाए। रज़ा अकाडेमी से पूछना चाहिए कि क्या बंध का आव्हान करने से पहले समाचार की सत्यता जानने का प्रयास किया गया था? यदि  नहीं तो क्यों नहीं सत्यता जानने की कोशिश की? दंगे में जितना भी नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई दंगाइयों से की जाए।   

त्रिपुरा के नाम पर महाराष्ट्र में पिछले दिनों मुस्लिम दंगाइयों ने जमकर उत्पात मचाया। सैंकड़ों की भीड़ ने सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ की, पुलिस पर पथराव किया। अब इसी घटना को लेकर टाइम्स नाऊ ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की है। मीडिया चैनल के अनुसार, हिंदुओं और हिंदू संगठनों के ख़िलाफ़ ये हिंसा त्रिपुरा के बारे में फर्जी पोस्ट कर करके फैलाई गई। कहीं इसमें कहा गया कि मुस्लिमों पर हमला हुआ तो कहीं बोला गया कि मस्जिद को जलाया गया।

रिपोर्ट में 7 तस्वीरों का जिक्र है और इन्हीं के बल पर दावा किया गया है कि हिंदुओं के विरुद्ध पूरा अभियान फर्जी तस्वीरों (वीडियो में मौजूद) से चलाया गया। एक फोटो में दो लोग हाथ में जली हुई किताब लेकर दिख रहे हैं। इस तस्वीर को कैप्शन दिया गया कि हिंदू गुंडों ने कुरान की प्रतियाँ जलाई हैं जबकि वास्तविकता में ये तस्वीर जून में दिल्ली के एक रिफ्यूजी कैंप से ली गई थी।

दूसरी तस्वीर में एक इस्लामी उलेमा, इमारतों में लगी आग को ये कहकर फैलाता पाया गया कि त्रिपुरा में 16 मस्जिदों में आग लगा दी गई है जबकि तस्वीर त्रिपुरा के अगरतला की है जिसमें सीपीएम ऑफिस को निशाना बनाया गया था न कि मस्जिदों को।

इसी तरह एक अन्य तस्वीर जिसमें बीजेपी का झंडा देख लोगों की भीड़ वाली तस्वीर पर लिखा गया, ‘भगवा आतंकी आपे से बाहर हो रहे हैं।’ अब ये तस्वीर दरअसल कोलकाता में विहिप द्वारा रामनवमी पर निकाले गए जुलूस की है जिसका त्रिपुरा से लेना-देना नहीं है।

अगले पोस्ट में एक फिरोज खान ने कहा कि दंगाइयों को त्रिपुरा पुलिस संरक्षण प्रदान कर रही है। वहीं राज्य पुलिस की साइबर क्राइम ने इसे फेक तस्वीर कहा। ऐसी ही अगली तस्वीर का जिक्र भी रिपोर्ट में है जो असलियत में पाकिस्तान के निजामाबाद की है। वो भी तब की जब एक धमाके में 4 लोग मारे गए थे।

इसके बाद अगली तस्वीर में कहा गया कि त्रिपुरा में मुस्लिमों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। लेकिन यदि सच का पता लगाएँ तो दावे वाली तस्वीर जौनपुर की है जहाँ 22 अक्टूबर 3 मंजिला बिल्डिंग गिर गई थी। 

महाराष्ट्र में भड़की हिंसा को देखते हुए गृह मंत्रालय पहले ही बयान जारी कर चुका है कि त्रिपुरा में मस्जिद को नुकसान पहुँचाने की खबरें झूठी हैं और तथ्यों को जोड़-तोड़ कर बनाई गई हैं। त्रिपुरा के गोमती जिले के ककराबन इलाके में ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई, जैसी फैलाई जा रही है कि वहाँ मस्जिदों पर हमला हुआ और तोड़फोड़ हुई।

12 नवंबर को महाराष्ट्र के नांदेड़, अमरावती और मालेगाँव समेत कई शहरों में मुस्लिम संगठनों ने त्रिपुरा हिंसा के नाम पर इकट्ठा होकर उपद्रव मचाया था। भीड़ के डर से बाजार में दुकानें बंद हो गईं थी और पुलिस पर भी पथराव किया गया था। इलाके शांत होने के बाद पता चला था कि इस तरह सड़कों पर उतरने से पहले सोशल मीडिया पर जमकर तस्वीरें शेयर हुई थी। कहीं बांग्लादेश के रोहिंग्याओं को त्रिपुरा के मुस्लिम कहा गया था तो कहीं दूसरे राज्यों की तस्वीरें शेयर हुई थी।