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मेधा पाटकर की दोषसिद्धि; 24 साल बाद उपराज्यपाल V K Saxena की मानहानि केस में पाटकर दोषी साबित

सुभाष चन्द्र

मेधा पाटकर ने नर्मदा आंदोलन चला कर नर्मदा पर बांधों के निर्माण को रोकने का भरपूर प्रयास किया जिससे देश के विकास में रोड़ा अटकाया जा सके आज नर्मदा पर सरदार सरोवर बाँध बनने की वजह से ही महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान की जलापूर्ति होती है  दृढ निश्चय से शुरू किए गए कार्य को रोकने और मोदी को परेशान करने के लिए पाटकर ने पूरा जोर लगा दिया था

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ये केस 21 साल पुराना था। साल 2000 से ही वीके सक्सेना और मेधा पाटकर कोर्ट की लड़ाई में उलझे थे। साल 2000 में मेधा पाटकर ने अपने खिलाफ आपत्तिजनक ऐड छापने के मामले में वीके सक्सेना पर केस दर्ज कराया था। इसके जवाब में वीके सक्सेना, जो उस समय केवीआईसी के अध्यक्ष थे, उन्होंने मेधा पाटकर पर 2 केस दर्ज कराए थे। जिस केस में मेधा पाटकर दोषी पाई गई हैं, वो साल 2003 में दर्ज कराया गया था।

वर्ष 2000 में दिल्ली के वर्तमान LG विनय कुमार सक्सेना National Council of Civil Liberties नमक संगठन के अध्यक्ष थे और उन्होंने मेधा पाटकर के आंदोलन के विरोध में एक विज्ञापन जारी किया था उसके बाद मेधा पाटकर ने सक्सेना के खिलाफ एक प्रेस रिलीज़ में आपत्तिजनक और अपमानजनक बातें कहीं जिन्हें लेकर सक्सेना ने 2001 में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया जिस पर कल फैसला आया है

कल(24 मई) मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने पाटकर को दोषी साबित करते हुए तल्ख़ टिपण्णी करते हुए कहा कि “मेधा की दुर्भावनापूर्ण हरकत से वीके सक्सेना की प्रतिष्ठा और साख को काफी नुकसान पहुंचा है और इसका उद्देश्य सक्सेना की छवि को ख़राब करना था; प्रतिष्ठा सबसे मूल्यवान सम्पत्तियों में से एक है और समाज में किसी की स्तिथि पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है”

अदालत ने दर्ज किया कि पाटकर द्वारा सक्सेना की देशभक्ति पर सवाल उठाते हुए “कायर और हवाला लेनदेन” में शामिल होने के आरोप मानहानि करने के साथ नकारात्मक धारणाओं को भड़काने के लिए तैयार किए गए थे अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि ऐसे आरोप किसी के व्यक्तिगत चरित्र और उसकी राष्ट्र के प्रति वफ़ादारी पर सीधा हमला है सार्वजनिक जीवन में ऐसे आरोप विशेष रूपसे गंभीर हैं जहां देशभक्ति को अत्यधिक महत्त्व दिया जाता है

मेधा पाटकर की उम्र इस वक्त 69 साल है। जब का कांड है उस समय उनकी उम्र 45 साल रही होगी 24 साल ट्रायल कोर्ट में लगे हैं तो हाई कोर्ट में अपील पर भी हो सकता है 5 साल में फैसला हो और अगर सुप्रीम कोर्ट गया मामला तो और 5 साल लगा लो माफ़ी मिलने या सजा की पुष्टि होने में यानि अंतिम फैसले तक उनकी उम्र हो जाएगी 79 साल अगर सजा हो भी गई तो 79 years की age में सजा तो सरकारी खर्चे पर अस्पताल में ही पूरी होगी या वो सुप्रीम कोर्ट में माफ़ी मांगेगी

अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट लोअर कोर्ट्स और हाई कोर्ट्स में चल रहे मुकदमों के लिए निगरानी समिति बनाए ये लोग इसलिए ही बोलने से पहले कुछ नहीं सोचते क्योंकि उन्हें पता होता है कि कोई केस चल भी गया तो 15-20 साल से कम नहीं लगेंगे, जैसे इस मामले में कुल 30 से 35 साल लगेंगे ऐसा है हमारा पुराना सड़ा गला सिस्टम

मेधा पाटकर पर अभी अपने संगठन NBA (नर्मदा बचाओ आंदोलन) के funds के गबन का केस दर्ज है ये मेधा पाटकर जैसे वामपंथी गिरोह के लोग देश की प्रगति की राह में शुरू से रोड़े अटका रहे है, इनका काम देश विरोध है चाहे देश का कितना भी नुकसान क्यों न हो जाए इस गिरोह के अरुंधति रॉय जैसे कुछ लोग तो पाकिस्तान की भक्ति में लीन रहते हैं और कश्मीर को भारत का हिस्सा ही नहीं मानते

ब्रिटेन का सबसे बड़े फ्रॉड : 15 अरब रूपए की टैक्स चोरी, आरिफ पटेल और जफर अली दोषी करार

                                     आरिफ पटेल और जफर अली (तस्वीर साभार: Blog Preston)
जाली कपड़ों के घोटाले के मास्टरमाइंड भारतीय मूल के आरिफ पटेल (Arif Patel) को ब्रिटेन में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स चोरी 150 मिलियन पाउंड (15 अरब से अधिक रुपए) का दोषी ठहराया गया है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेस्टर क्राउन कोर्ट में 14 सप्ताह तक चली सुनवाई के बाद मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को पटेल को गलत बही खाता पेश करने, सरकारी राजस्व में धोखाधड़ी करने के लिए साजिश रचने, ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया।

प्रेस्टन के सॉक्स निर्माता 55 वर्षीय आरिफ पटेल पर एक आपराधिक गिरोह के साथ मिलकर कपड़ा और मोबाइल फोन के फर्जी निर्यात पर वैट भुगतान का दावा कर £97m (9 अरब से अधिक रुपए) का टैक्स चोरी करने का आरोप है। इन पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन और लंदन में संपत्ति खरीदने के लिए किया। बताया जा रहा है कि वह बहुत पहले प्रेस्टन से भाग गया है और अभी वह दुबई में रह रहा है।

इस मामले में आरिफ के सह आरोपित दुबई के 58 वर्षीय मोहम्मद जफर अली को भी राजस्व में धोखाधड़ी करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया है। आरिफ और अली को अगले महीने सजा सुनाई जाएगी।

आरिफ पटेल ने कैसे रचा 150 मिलियन पाउंड का फ्रॉड?

आरिफ पटेल और Faisaltex ग्रुप की कंपनियों ने 2004 में नकली कपड़ों के थोक आयात की ओर रुख किया था। अगले तीन वर्षों के दौरान नकली डिजाइनर कपड़ों वाले दर्जनों कंटेनरों को पूरे ब्रिटेन में बंदरगाहों पर रोक दिया गया था। यूके के व्यापारियों को इसकी पुष्टि तब हुई जब ग्लासगो थोक व्यापारी को होने वाली एक डिलीवरी पुलिस द्वारा रोक दी गई। इसके बाद जाँच में ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने का मामला सामने आया था।
इस घोटाले को Carousel Fraud के रूप में जाना जाता है, जहाँ माल वास्तविक खरीदारों को बेचा जाता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया अपराधियों द्वारा कंट्रोल होती है। आरिफ पटेल अक्सर मोहम्मद जफर अली से मिलने के लिए दुबई जाता था। इसके अलावा वह ब्रांड के नाम पर जाली कपड़े बनाने वाले निर्माताओं के साथ डील करने के लिए चीन और तुर्की भी जाया करता था। आरिफ पटेल के बारे में कहा जाता है कि वह शानदार जीवन जीने का शौकीन था। इस पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन में संपत्ति खरीदने के लिए किया था, जिसमें लंकाशायर सिटी की मेन शॉपिंग स्ट्रीट फिशरगेट पर कमर्शियल प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं।

इंग्लैंड : पुलिस की 17 साल की नौकरी में 24 बलात्कार, 12 महिलाओं को बनाया सेक्स स्लेव; पीड़िताओं पर करता था पेशाब

ब्रिटिश पुलिस अधिकारी डेविड कैरिक ( साभार- @BladeoftheS)
इंग्लैंड की राजधानी लंदन (London, England) में ब्रिटिश पुलिस डिपार्टमेंट ने डेविड कैरिक नाम के अपने अधिकारी को बर्खास्त कर दिया है। डेविड पर 12 महिलाओं के साथ रेप का दोष सिद्ध हुआ है। बर्खास्त पुलिस अधिकारी पर साल 2003 से 2023 के बीच बलात्कार के 24 मामलों सहित कुल 49 केस दर्ज हुए थे। अब डेविड को ब्रिटेन के सबसे बड़े सेक्स अपराधियों में गिना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्खास्त 48 वर्षीय पुलिस अधिकारी डेविड कैरिक लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस में साल 2001 से तैनात हुआ था। साल 2009 से वह संसदीय और राजनीतिक सुरक्षा कमान में काम कर रहा था। पुलिस में आने से पहले डेविड ब्रिटिश फ़ौज में पोस्टेड था। रेप के आरोपों के बाद साल 2021 में डेविड को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद से वह जेल में है। उसे पुलिस फोर्स से टर्मिनेट कर दिया गया है।

डेविड का सबसे पहले भंडाफोड़ उसकी गर्लफ्रेंड ने किया था। अदालत में डेविड ने कुल 49 यौन अपराध कबूल किए। इनमें से 24 अपराध रेप के हैं। हालाँकि, अलग-अलग रिपोर्ट में डेविड द्वारा कबूल किए गए गुनाहों की संख्या अलग-अलग हैं। कुछ जगहों पर उसके द्वारा किए गए यौन अपराधों की संख्या 80 से भी अधिक बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद ब्रिटिश पुलिस सवालों के घेरे में आ गई है।

डेविड महिलाओं को सोशल डेटिंग ऐप के साथ-साथ सोशल गेदरिंग में फँसाता था। वह महिलाओं को लुभाने के लिए अपने पद का इस्तेमाल करता था। जब महिलाओं उसके जाल में फँस जाती थीं तो वह उन्हें सेक्सुअली प्रताड़ित करता था। इतना ही नहीं, उन्हें चुप कराने के लिए भी वह अपने पद का डर दिखाता था। डेविड पीड़िताओं को यह कह चुप करा देता था कि वह एक पुलिसकर्मी है और पीड़िताओं की बातों पर कोई विश्वास नहीं करेगा।

डेविड महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ (यौन गुलाम) की तरह ट्रीट करता था। वह महिलाओं को अपमानित करता था और उन्हें गुलाम कहता था। डेविड ने कुछ पीड़ितों को सीढ़ियों के नीचे एक छोटी अलमारी में 10 घंटे तक बिना खाना दिए रखा। वहीं, कुछ महिलाओं को उसने बेल्ट से पीटा और उसके घर को नंगा होकर साफ करने को मजबूर किया।

डेविड पर कई तरह आपराधिक मामले होने के बाद भी उसे एलिट आर्म्ड यूनिट और संसदीय एवं कूटनीतिक आर्म्ड कमांड ने तैनात किया गया। पिछले साल दिसंबर में उसकी शुरुआती दोष सिद्ध होने के बाद कोर्ट ने डेविड का वेतन रोकने का आदेश दिया था। अब उसे बर्खास्त कर दिया गया है।

इंग्लैंड के महिला संगठनों ने दोषी डेविड कैरिक के साथियों और सीनियरों पर सब कुछ जानते हुए उसे बचाने का आरोप लगाया है। महिला संगठनों ने पुलिस को ‘संकट संस्थान’ कहा है। मामलों के उजागर होने पर अब ब्रिटेन का पुलिस बल अन्य यौन अपराधों की गंभीरता से जाँच कर रहा है।

बताया जा रहा है कि 1000 शिकायतों में लगभग 800 अधिकारी आरोपित हैं, जिन पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। डेविड कैरिक की करतूत पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी दुःख जताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को पुलिस में होना ही नहीं चाहिए था।

प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने स्वीकार किया है कि डेविड की हरकत से आम लोगों का पुलिस में विश्वास कम हो गया है। लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस के कमिश्नर मार्क राउली ने भी डेविड की करतूत उजागर होने के बाद आम लोगों से माफी माँगी है।

दिल्ली : केजरीवाल पार्टी के 2 विधायक कोर्ट में दोषी करार, दंगा भड़काने और पुलिस पर पत्थरबाजी का मामला

विधायक संजीव झा और अखिलेशपति त्रिपाठी (फोटो साभार: हिंदुस्तान)
दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने दंगा भड़काने और पुलिस पर हमला करने के मामले में 12 सितंबर, 2022 को आम आदमी पार्टी (AAP) के दो विधायकों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने 7 साल पुराने मामले की सुनवाई के दौरान AAP विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी और संजीव झा व 15 अन्य लोगों को दोषी ठहराया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इसी सुनवाई में सज़ा का भी ऐलान किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 7 सितंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि पुलिस की ओर से पेश किए गए सबूतों व गवाहों से साफ है कि दोनों AAP विधायक न केवल दंगाई भीड़ में शामिल थे बल्कि नारेबाजी कर भीड़ को भड़काने का काम भी किया था। इन दोनों विधायकों के उकसाने के बाद ही भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की थी।

यह पूरा मामला 20 फरवरी, 2015 का है। इस मामले में जब एक बेक़ाबू भीड़ ने दिल्ली के बुराड़ी पुलिस स्टेशन पर हमला करते हुए पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। ये सभी दंगाई पुलिस से गिरफ्तार किए गए दो लोगों को छोड़ने की माँग कर रहे थे। इस हमले में हवलदार भारत रतन, मोहन लाल और कॉन्स्टेबल बाबू सहित कई जवान घायल हुए थे।

आम आदमी पार्टी के दो विधायकों को दोषी करार दिए जाने के बाद भाजपा अरविंद केजरीवाल की पार्टी पर हमलावर है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “फिर एक बार AAP का घिनौना चेहरा हुआ जग जाहिर हुआ है। AAP के 2 विधायकों को कोर्ट ने दंगा भड़काने और पुलिस के साथ मारपीट करने में दोषी करार दिया है। ऐसे ही दंगाइयों-गुंडों का आप गढ़ बन गई है। अरविंद केजरीवाल संविधान की धज्जियाँ उड़ाने वाले इन लोगों को पार्टी और विधायक पद से तुरंत बरख़ास्त करो।”

दंगा भड़काने के आरोपित अखिलेशपति त्रिपाठी दिल्ली की मॉडल टाउन सीट से विधायक हैं। जबकि दूसरे आरोपित संजय झा दिल्ली के ही बुराड़ी से विधायक हैं। इन दोनों AAP विधायकों के आलवा कोर्ट ने बलराम झा, श्याम गोपाल गुप्ता, किशोर कुमार, ललित मिश्रा, जगदीश चंद्र जोशी, नरेंद्र सिंह रावत, नीरज पाठक, राजू मलिक, अशोक कुमार, रवि प्रकाश झा, इस्माइल इस्लाम, मनोज कुमार, विजय प्रताप सिंह, हीरा देवी और यशवंत को भी दोषी ठहराया है।