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सम्राट हेमचंद्र की समाधि वक्फ बोर्ड के पास; दिल्ली के सिंहासन पर बैठे अंतिम हिंदू सम्राट, जिन्होंने गोहत्या पर लगा दिया था प्रतिबंध: सरकारी कागजों में जहाँ उनका समाधि-स्थल, वहाँ दरगाह का कब्जा

                                      सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (साभार: भास्कर/जागरण)
इतिहासकारों ने चंद चांदी के टुकड़ों की खातिर भारतीय इतिहास का मजाक वह तो समझ में आता है, उससे बड़ा मजाक हमारे उन राज नेताओं -जो संविधान की शपथ लेकर उसी संविधान की धज्जियां उड़ाते हैं। जिन्हे संवैधानिक पद पर बैठ देश की अस्मिता, संस्कृति और धरोहरों का संरक्षण करना चाहिए-ने किया है जिन्हे हम जनहितैषी मान सम्मान देते यानि करते हैं। जिन राज नेताओं ने इतिहास एवं संस्कृति का मजाक बनाया है उन्हें ब्लैकलिस्टेड करने की मांग क्यों नहीं होती?  

भारत की धरती वीरों की जननी है। इन्हीं में से एक महावीर थे हेमू। इन्हें हेमचंद्र विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है। विक्रमादित्य एक उपाधि है, जिसे देश के हिंदू शासक धारण करते आए हैं। हेमू दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाले अंतिम हिन्दू सम्राट थे। वे अद्वितीय योद्धा एवं कुशल रणनीतिकार थे। उन्हें मध्ययुग का नेपोलियन कहा जाता है। 5 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि थी। 

हेमू का जन्म 1501 ईस्वी में राजस्थान के अलवर क्षेत्र में राजगढ़ के निकट माछेरी ग्राम में के एक साधारण परिवार में हुआ था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हेमू बिहार के सासाराम के रहने वाले थे। साधारण परिवार में जन्म लेकर एक व्यापारी से वजीर (प्रधानमंत्री) और सेनापति होते हुए उन्होंने दिल्ली के ताज तक का सफर उन्होंने अपने पराक्रम से हासिल किया।

हेमू ने अपने जीवन में 22 लड़ाइयाँ लड़ीं और विजयी रहे। आगे चलकर उन्होंने ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि धारण की। हेमू का उद्भव ऐसे समय में हुआ, जब हिंदुस्तान में मुगल एवं अफगान दिल्ली की सत्ता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे दिल्ली की सत्ता हासिल करने में सफल रहे, लेकिन यह अधिक समय तक कायम नहीं रही। भारतीय इतिहास की यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

हेमू की कहानी शुरू होती है व्यापार से। उनका परिवार किराने का काम करता था। हेमू जब बड़े हुए तो वे भी अपने परिवार के व्यवसाय शामिल हो गए। अकबर के जीवनीकार अबुल फ़ज़ल ने उन्हें फेरीवाला कहा है, जो रेवाड़ी की गलियों में नमक बेचा करते थे। उन दिनों ईरान-इराक से दिल्ली के मार्ग पर रिवाड़ी महत्वपूर्ण नगर था। उन्होंने शेरशाह की सेना को रसद और जरूरी सामग्री पहुँचानी शुरू कर दी थी।

हेमू में युद्ध में काम आने वाले शोरा भी बेचने लगे थे। इसके कारण वे शेरशाह सूरी के बेटे इस्लाम शाह की नजर में आ गए। आगे चलकर वे शेरशाह के विश्वासपात्र बन गए। शेरशाह की 22 मई 1545 को मौत हो गई। उसके बाद इस्लाम शाह ने हेमू को शानाये मण्डी, दरोगा-ए-डाक चौकी तथा प्रमुख सेनापति के साथ-साथ अपना सलाहकार बना दिया। यह स्थान ब्रह्मजीत गौड़ नाम के एक ब्राह्मण को हासिल था।

सन 1552 में इस्लाम शाह की मौत हो गई। इस्लाम शाह की मौत के बाद उसके दो साल के बेटे फिरोज खान को शासक बनाया गया, लेकिन उसके मामा मुबारक शाह उर्फ आदिल शाह ने उसकी हत्या कर दी। भोग-विलास में डूबे आदिल शाह के समय हर तरफ अराजकता फैल गई। इसके बाद आदिल शाह ने हेमू को प्रधानमंत्री तथा अफगान सेना का मुख्य सेनापति बना दिया।

इस बीच बाबर का बेटा हुमायूँ 1555 में भारत लौटा और दिल्ली पर हमला कर दिया। आदिल शाह ने हेमू को लड़ाई के लिए भेजा और खुद चुनार भाग गया। अब सूरी वंश का चार भागों में बँट गया था, जिसका एक हिस्सा आदिल शाह के अंतर्गत था। 26 जनवरी 1556 को हुमायूँ की मौत हो गई और अकबर को गद्दी मिली। उस समय अकबर की उम्र 13 साल थी। बैरम खाँ को उसका अभिभावक नियुक्त किया गया।

हेमू ने इसे एक महत्वपूर्ण मौका माना। उन्होंने आगरा के मुगल गवर्नर इसकंदर खाँ उजबेग को पराजित किया शहर को कब्जे में ले लिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रूख किया। दिल्ली का मुगल गवर्नर तारीफ बेग खाँ अत्यधिक घबराकर बैरम खाँ से सेना भेजने का आग्रह किया। सेनापति पीर मोहम्मद शेरवानी के नेतृत्व में आई मुगल सेना को हेमू ने 6 अक्तूबर 1556 को तुगलकाबाद में बुरी तरह परास्त किया।

इस तरह 7 अक्तूबर 1556 को हेमू ने दिल्ली सिंहासन पर कब्जा कर लिया। इस तरह से एक भारत के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। उनका दिल्ली के पुराने किले, जिसे पांडव निर्मित किला कहा जाता है, में राज्याभिषेक हुआ। दिल्ली की गद्दी बैठते ही उन्होंने कई घोषणाएँ कीं, जिनमें से एक गोहत्या पर प्रतिबंध भी था।

सम्राट के रूप में हेमचंद्र ने घोषणा की कि उनके राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध होगा और जो इस आज्ञा का पालन नहीं करेगा, उसका सिर काट लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने दूसरी घोषणा भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों को हटाने की की। उन्होंने शासन प्रशासन से लेकर वाणिज्य तक, हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए। अब हेमू का अगला लक्ष्य मुगलों और अफगानों को भारत से खदेड़ने का था। उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी।

दिल्ली में हार का समाचार सुनकर बैरम खाँ बौखला गया। उस समय पंजाब के जालंधर में बैरम ख़ाँ अकबर के साथ था। अकबर वापस काबुल जाना चाहता था, लेकिन बैरम खाँ इस हार को पचा नहीं पा रहा था। हार की जानकारी देने टारडी ख़ाँ दिल्ली से भाग कर अकबर के ख़ेमें में गया तो बैरम खाँ ने उसका सिर काट दिया। बैरम खाँ ने कहा कि इससे लोगों को सबक मिलेगा कि युद्ध से भागने का क्या अंजाम होता है।

उधर हेमू को पता चला कि बैरम खाँ हमले की योजना बना है तो उन्होंने अपनी तोपें पानीपत की तरफ भेज दीं। बैरम ख़ाँ ने भी अली क़ुली शैबानी के नेतृत्व में 10,000 सेना पानीपत की भेज दिया। हेमू की सेना में 30,000 अनुभवी घुड़सवार और 500 से 1500 के बीच हाथी थे। हाथियों की सूढ़ों में तलवारें और बरछे बँधे हुए थे और उनकी पीठ पर युद्ध कौशल में पारंगत तीरंदाज़ सवार थे।

6 नवंबर 1556 की पानीपत की दूसरी लड़ाई के नाम से मशहूर इस लड़ाई में सिर में कोई कवच नहीं पहना था। वे हाथी पर बैठकर सेना का लगातार जोश बढ़ा रहे थे। यह लड़ाई बहुत भयंकर थी। क्षत्रियों के नेतृत्व में यह हेमू के हमले से मुगल सेना बिखर गई थी। बदायूँनी ने अपनी किताब ‘मुंतख़ब-उत-त्वारीख़’ में इसका जिक्र किया था। हेमू अपनी जीत के करीब थे।

इस बीच क़ुली शैबानी के सैनिक हेमू की सेना पर लगातार तीरों की बौछार कर रहे थे। इन्हीं में से एक तीर उनकी आँख में जा धँसा। हरबंस मुखिया अपनी किताब ‘द मुग़ल्स ऑफ़ इंडिया’ में मोहम्मद क़ासिम फ़ेरिश्ता के हवाले से लिखते हैं कि तीर लगने पर भी हेमू ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी आँख तीर निकाला और रूमाल से ढ़क कर लड़ना जारी रखा।

हालाँकि, अत्यधिक खून बहने के कारण हेमू बेहोश होकर अपनी हाथी के हौदे में गिर गए। इस बीच क़ुली शैबानी ने बिना महावत के एक हाथी को घूमते हुए देखा तो उसने एक व्यक्ति को उस पर चढ़कर देखने के लिए कहा। जब वह व्यक्ति हाथी पर चढ़कर देखा तो उसमें एक व्यक्ति बेहोश दिखा। वह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि हेमू थे। इसके बाद शैबानी उस हाथी को हाँक कर अकबर के पास ले गया।

इसकी जानकरी मिलते ही हेमू की सेना के हताशा छा गई और मुगल सेना खुशियाँ मनाने लगी। उधर, हेमू को जंजीरों से बाँधकर अकबर के सामने पेश किया। बैरम खाँ ने अपनी तलवार से हेमू का सिर काट दिया। उनका सिर काबुल भेजा गया और धड़ को दिल्ली दरवाजे पर लटका दिया गया। हेमू के पुराने घर माछेरी पर आक्रमण कर लूटमार की गई। उनके 80 वर्षीय पिता पूरनदास के साथ-साथ कई रिश्तेदारों को इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा गया।

जब सम्राट हेमचंद्र के परिजन और रिश्तेदार नहीं माने तो उनका कत्ल कर दिया गया। इससे एक मीनार बनाई गई। इस मीनार की पेंटिंग अकबरनामा में भी है। इस तरह हेमू एक शूरवीर की तरह युद्ध क्षेत्र में वीरगति को प्राप्त हो गए और 29 दिन के उनके शासन का अंत हो गया। विन्सेंट ए स्मिथ अकबर की जीवनी में लिखते हैं, “क्षत्रिय (राजपूत) नहीं होने के बावजूद हेमू ने युद्ध के मैदान पर आखिरी साँस ली।”

सम्राट हेमचंद्र की समाधि वक्फ बोर्ड के पास

हरियाणा के पानीपत में जहाँ हेमू का सिर काटा गया था, वहाँ एक समाधि बना दी गई। सौदापुर गाँव में स्थित हेमू की यह समाधि सदियों तक उपेक्षित रही। इस बीच प्रवासी मुस्लिमों ने वहाँ एक दरगाह बना दिया। सन 1990 तक यह जगह भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के पास थी। सन 1990 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने समाधि वक्फ बोर्ड को दे दिया।  
जिस जगह सम्राट हेमू की समाधि है, वह पूरा क्षेत्र 10 एकड़ का है। चौटाला ने उन सारी जमीनों को वक्फ को दे दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय हरियाणा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मेवात क्षेत्र के एक मुस्लिम विधायक थे। उस विधायक पर कुछ लोगों से पैसे लेकर सम्राट हेमचंद्र की समाधि पर अतिक्रमण की अनुमति देने के आरोप लगे थे। इसको लेकर दोनों समुदायों में विवाद चल रहा है।

देश में अब आएगा भूचाल : इटली ने भारत को सौंपे अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से जुड़े दस्तावेज!


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान 4 जून के बाद 6 महीने के भीतर देश में बहुत बड़ा भूचाल आने की बात कही थी। उस वक्त लोगों की समझ में भले ही बात नहीं आई हो लेकिन अब जो खबर आ रही है उससे भूचाल आना तय है। जानकारी के मुताबिक, इटली ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले पर अपनी अदालत के फैसले की विस्तृत रिपोर्ट, जो कि 225 पृष्ठों की है, के साथ ही घोटाले से संबंधित दस्तावेज भारत के साथ साझा किया है। ये वे दस्तावेज हैं जिससे इस घोटाले से जुड़े भारत के कई हाई प्रोफाइल बिचौलियों से लेकर राजनेताओं तक को सजा हो सकती है या यूं कहें कि जो लोग अभी सबूत के अभाव में खुले घूम रहे हैं वे जेल जा सकते हैं। दस्तावेज में एक पूर्व प्रधानमंत्री और एक राजनीतिक परिवार का नाम आने की बात भी कही जा रही है। अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में भारत के कई नेताओं से लेकर बिचौलियों को 600 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत मिली थी।

मोदी के इटली दौरे से कांग्रेस क्यों नाराज

पीएम मोदी हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली गए थे। वहां जिस गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया, वो देश के विपक्षी दलों के नेताओं को रास नहीं आया। विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी पीएम मोदी के इस दौरे से कुछ ज्यादा ही परेशान दिखी। तभी तो उसने पीएम मोदी की इटली यात्रा के उद्देश्य पर ही सवाल खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं कांग्रेस ने मजाक तक उड़ाया और कहा कि प्रधानमंत्री तो केवल फोटो खिंचाने के लिए इटली गए। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले को लेकर कांग्रेस का यह डर उसकी खीज के रूप में बाहर आ रहा है। अब जब भारत सरकार को दस्तावेज हाथ लग गया है तो ऐसे भ्रष्ट नेताओं और नौकरशाहों की पेशानी पर बल आना स्वाभाविक ही है।  

देश की राजनीति में भूचाल आने वाला हैः पीएम मोदी

लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी ने 29 मई को पश्चिम बंगाल के मथुरापुर में चुनावी रैली में कहा कि 4 जून के बाद अगले 6 महीनों में देश की राजनीति में बड़ा भूचाल आने वाला है। परिवारवादी पार्टियां अपने आप बिखर जाएगी।

इटली ने भारत को सौंपे डॉक्यूमेंट

इटली की सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला से जुड़े अपने यहां के कोर्ट केस और सबूतों से संबंधित कुछ दस्तावेज भारत को सौंपे हैं। इससे यहां भी अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला की जांच में तेजी आ सकती है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने तो ट्वीट कर ये दावा भी किया है कि इसी वजह से कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी की हाल की इटली यात्रा पर सवाल उठाए थे।

यूपीए सरकार के दबाव में इटली ने दबा लिया था दस्तावेज

6 मई 2014 को नरेंद्र मोदी जब पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने, उसके लगभग 8 महीने पहले, इटली की एक अदालत ने भारत से जुड़े सबसे बड़े अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वत घोटालों में एक हाई प्रोफाइल कंपनी के सीईओ, एक इतालवी रक्षा कंपनी के अध्यक्ष और दो बिचौलियों सहित चार लोगों को दोषी ठहराते हुए एक फैसला सुनाया था। लेकिन, इस मामले में वहां की अदालत में दर्ज अभियुक्तों के पूरे बयान, अपीलों का पूरा लेखा-जोखा और अदालत के अंतिम फैसले को 2013 में भारत के दबाव में तत्कालीन इतालवी सरकार द्वारा कभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया था, क्योंकि इससे भारत के राजनीतिक और नौकरशाही प्रतिष्ठानों में भूचाल आ सकता था।

यूपीए-2 के दौरान सत्ता में बैठे लोगों के लिए खतरे की घंटी

इटली के द्वारा भारत को सौंपे गए सीलबंद इतालवी दस्तावेजों में रक्षा घोटाले में रिश्वत पाने वालों के नाम भी हैं। इससे यूपीए-2 के दौरान सत्ता में बैठे लोगों के लिए खतरे की घंटी बजना तय है। यह सबसे बड़े रक्षा घोटालों में से एक है जो एक दशक तक दबा रहा और अब इसके ऊपर से पर्दा उठना तय नजर आ रहा है।

दस्तावेज में भारत के पूर्व पीएम और राजनीतिक परिवार का नाम

इतालवी अदालत का फैसला भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत के प्रमुख राजनीतिक परिवार के मुखिया में से एक की भूमिका को उजागर करता है। 225 पेज के फैसले में रिश्वत कांड का पूरा खुलासा किया गया है और इसमें सबूत के तौर पर हाथ से लिखे नोट भी हैं। ओरसी और अन्य ने कबूल किया है कि कैसे उन्होंने भारतीय राजनेताओं को रिश्वत दी और सौदे के लिए कड़ी पैरवी की। अन्य बातों के अलावा, फैसले में एक प्रमुख राजनीतिक दल के महासचिव और भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के खिलाफ सबूतों का हवाला दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि भारत के एक बड़े राजनेता और एक राजनीतिक परिवार के मुखिया का नाम इतालवी अदालत के फैसले के पेज 193 और 204 पर 4 बार, 2-2 बार उल्लेखित है।


रिश्वत की रकम बांटने के लिए हस्तलिखित नोट

सूत्रों का कहना है कि इतालवी अदालत के फैसले के पेज 9 पर एक बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स (भारत की हिरासत में एक ब्रिटिश नागरिक) का हस्तलिखित नोट हैश्के को चिपकाया गया है कि रिश्वत के 30 मिलियन यूरो (करीब 268 करोड़ रुपये) के कुल कमीशन को कैसे वितरित किया जाए। नोट में रक्षा सचिव, डीजी एक्विजिशन, रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव सहित यूपीए युग के नौकरशाहों के बीच रिश्वत के पैसे का विस्तृत विवरण दिया गया है। इतालवी अदालत के फैसले से पता चलता है कि वायु सेना के अधिकारियों को 6 मिलियन यूरो (53 करोड़ रुपये)और नौकरशाहों को 8.4 मिलियन यूरो (करीब 75 करोड़ रुपये) का भुगतान किया गया था।

भारतीय राजनेताओं को लगभग 14 से 16 मिलियन यूरो का भुगतान

इतावली अदालत के फैसले में उद्धृत दस्तावेजों में कहा गया है कि भारतीय राजनेताओं को लगभग 14 से 16 मिलियन यूरो (करीब 140 करोड़ रुपये) का भुगतान किया गया था, जिसमें ‘एपी’ अक्षर वाले एक राजनीतिक सचिव भी शामिल थे। फैसले के पेज नंबर 163 और 164 पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री का नाम बताया गया और बताया गया कि कैसे ओरसी ने सौदे के लिए उनके साथ पैरवी की। इतालवी अदालत के फैसले में पेज नंबर 163 पर ओरसी का एक नोट लगाया गया है, जो जेल से तत्कालीन इतालवी नौकरशाहों और प्रधानमंत्री मारियो मोंटी और राजदूत पास्क्वेले टेरासिआनो के साथ तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री से बात करने के लिए पैरवी कर रहे थे।

अप्रैल 2019 में ईडी ने सोनिया गांधी की करीबी अहमद पटेल का नाम लिया

अप्रैल 2019 में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अगस्ता वेस्टलैंड आरोपपत्र में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के करीबी विश्वासपात्र और लंबे समय तक राजनीतिक सचिव अहमद पटेल (एपी) का नाम लिया था। आरोप पत्र के ठीक एक दिन बाद, पीएम मोदी ने उत्तराखंड के देहरादून में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं पर करोड़ों रुपये के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था। पीएम मोदी ने कहा था “हेलीकॉप्टर घोटाले के दलालों ने जिन लोगों को घूस देने की बात कही है उसमें एक ‘एपी’ है, दूसरा ‘फैम’ है। इसी चार्जशीट में कहा गया है कि ‘एपी’ का मतलब है ‘अहमद पटेल’ और ‘फैम’ का” मतलब है ‘परिवार।’

क्रिश्चियन मिचेल ने रिहाई की मांग की

अगस्ता वैस्टलैंड हेलिकॉप्टर केस के आरोपी क्रिश्चियन मिचेल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। मिचेल ने खुद की जल्द रिहाई की मांग की है। ब्रिटिश नागरिक मिचेल ने कहा कि मैं 5 साल 3 महीने से जेल में हूं। मुझे भी जीने और आजादी का हक है। अगर मैं दोषी पाया जाता तो पांच साल की सजा ही होती। मिचेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कल (18 मार्च को) सुनवाई है। मिचेल ने ये भी कहा कि अभी तक मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। यही नहीं, ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ। लिहाजा न्यायिक हिरासत ‘अवैध’ है। मिचेल को 2017 को दुबई से प्रत्यर्पित करके लाया गया था।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला क्या है

मामला यूपीए-2 के दौरान VVIP हेलिकॉप्‍टर की खरीद से जुड़ा है। ये हेलिकॉप्‍टर्स प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री जैसे अतिविशिष्ट लोगों के आवागमन के लिए इस्तेमाल होने के उद्देश्य से खरीदे गए। भारत ने 12 अगस्‍ता वेस्‍टलैंड हेलिकॉप्‍टर्स खरीदने के लिए 3,700+ करोड़ रुपये का सौदा किया था। आरोप है कि सौदा कंपनी के पक्ष में हो, इसके लिए ‘बिचौलियों’ को घूस दी गई जिनमें राजनेता और अधिकारी भी शामिल थे। आरोप है क‍ि कई नियमों से छेड़छाड़ कर कंपनी का रास्‍ता साफ किया गया। सीबीआई सौदे को अगस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में करने की खातिर दिए गए रुपयों के लेनदेन की जांच कर रही है।

अगस्‍ता वेस्‍टलैंड VVIP चॉपर घोटाला 

अगस्त 1999 :

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान VVIPs के लिए भारतीय वायुसेना के MI-8 हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल होता था। इन हेलिकॉप्टर्स की तकनीक पुरानी हो चुकी थी, इसलिए वायुसेना ने MI-8 चॉपर बदलने का सुझाव दिया।

मार्च 2002 :

नए हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए दुनियाभर की कंपनियों को बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया गया। उस समय 4 वेंडर्स ने इस टेंडर में रुचि दिखाई। इसमें यूरोकॉप्टर EC-225 सबसे आगे नजर आ रहा था, क्योंकि यह 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता था।

नवंबर-दिसंबर 2003 :

तत्‍कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्रा ने ‘सिंगल वेंडर’ से बचने के लिए रक्षा मंत्रालय और वायुसेना को अपनी तकनीकी शर्तों में बदलाव करने के लिए कहा। इस दौरान इस डील पर ज्‍यादा उत्साह से काम नहीं हुआ और 2004 में अटल सरकार चली गई। डॉ. मनमोहन सिंह नए प्रधानमंत्री बने।

मार्च 2005 :

UPA-1 सरकार ने नए हेलिकॉप्टर खरीदने की कवायद शुरू की। ज्‍यादा दावेदारों से बोली लगवाने के लिए नए हेलिकॉप्टर्स की तकनीकी शर्तों में बदलाव किया गया। 2005 में ही मनमोहन सरकार ने इस डील में इंटीग्रिटी क्लॉज़ डाला, जिसके मुताबिक अगर किसी डिफेंड डील में कोई दलाल शामिल पाया गया, तो डील रद्द कर दी जाएगी। इसी शर्त की वजह से बाद में अगस्‍ता वेस्टलैंड डील विवाद की वजह बन गई। इस दौरान प्रणब मुखर्जी रक्षामंत्री और एसपी त्यागी वायुसेना प्रमुख थे।

सितंबर 2006 :

12 VVIP चॉपर खरीदने के लिए नया टेंडर जारी हुआ, जिसके लिए तीन कंपनियों- AW-101 (ब्रिटेन), S-92 (अमेरिका) और Mi-172 (रूस) ने आवेदन किया। रूसी कंपनी का आवेदन शुरुआती दौर में ही खारिज हो गया। अक्टूबर 2006 से मार्च 2007 के बीच एके एंटनी रक्षामंत्री बन गए और त्यागी वायुसेना प्रमुख के पद से रिटायर हो गए।

2008 :

वायुसेना ने टेंडर में आवेदन करने वाली कंपनी के चॉपर्स का फील्ड ट्रायल लिया। फिर वायुसेना ने ही अमेरिकी कंपनी सिकोर्सिकी एयरक्राफ्ट के S-92 के बजाय ब्रिटिश कंपनी अगस्‍ता वेस्टलैंड के AW-101 हेलिकॉप्टर को तरजीह दी।

फरवरी 2010 :

UPA-2 सरकार के दौरान प्रणब मुखर्जी के वित्तमंत्री रहते कैबिनेट कमिटी 12 हेलिकॉप्टर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी देती है। इसका ठेका तब 556 मिलियन यूरो यानी करीब 3,546 करोड़ रुपए में अगस्‍ता वेस्टलैंड को दिया गया। अगस्‍ता वेस्टलैंड का हेडक्वॉर्टर ब्रिटेन में है, जबकि इसकी पैरंट कंपनी फिनमैकेनिका का हेडक्वॉर्टर इटली में है।

फरवरी 2012 :

इटली की जांच एजेंसियों ने इस डील में दलाली की बात कही। इटली की एजेंसियों के मुताबिक फिनमैकेनिका ने यह ठेका हासिल करने के लिए भारत के कुछ नेताओं और वायुसेना के कुछ अधिकारियों को 360 करोड़ रुपए की रिश्वत दी। इटली की एजेंसियों ने इस डील में तीन दलालों- क्रिश्चियन मिशेल, गुइदो हाश्के और कार्लो गेरोसा के शामिल होने की बात कही। ये आरोप लगते-लगते भारत को 12 में से 3 AW-101 मिल चुके थे, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं हो सका था।

फरवरी 2013 :

इटली की कोर्ट में यह डील घिर गई और फिनमैकेनिका के CEO ओरसी और अगस्‍ता वेस्टलैंड के चीफ ब्रूनो स्पैग्नोलिनी को इटली में गिरफ्तार कर लिया गया। इधर भारत में UPA-2 सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गई। रक्षा मंत्रालय ने अगस्‍ता वेस्टलैंड को होने वाले सभी भुगतान रोक दिए।

मार्च 2013 :

भारत में इस डील की जांच CBI को सौंप दी गई। CBI ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी, उनके तीन भाइयों, ओरसी और स्पैग्नोलिनी समेत नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। हालांकि, इस समय तक इस डील में किसी नेता या अधिकारी का नाम सामने नहीं आया था।

इटली की कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान भारत के कई नेताओं के नाम इस डील में आए। आरोप लगा कि ये नेता डील के लिए ली-दी गई रिश्वतबाज़ी में शामिल थे। कोर्ट में जो डॉक्युमेंट्स पेश किए गए, उनमें एक नाम सिग्नोरा गांधी भी है। सियासी गलियारों में माना गया कि यह नाम सोनिया गांधी के लिए इस्तेमाल किया गया है। सोनिया गांधी के अलावा इस डील में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, अहमद पटेल, प्रणब मुखर्जी, वीरप्पा मोइली, केएम नारायणन और ऑस्कर फर्नांडिस का भी नाम आया।

अप्रैल 2013 :

रक्षामंत्री एके एंटनी ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि अगस्‍ता वेस्टलैंड को भारतीय सेनाओं को हथियार बेचने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। उनके मुताबिक नौसेना के लिए खरीदे जाने वाले हल्के हेलिकॉप्टर्स के टेंडर भी अगस्‍ता वेस्टलैंड कंपनी ने भरे हैं। ये टेंडर अगस्त 2012 में जारी किए गए थे। एंटनी के मुताबिक अगस्‍ता वेस्टलैंड ने इंडियन नेवी के लिए 56 यूटिलिटी हेलिकॉप्टर के टेंडर तब भरे थे, जब CBI ने VVIP हेलिकॉप्टर डील की जांच शुरू नहीं की थी।

अक्टूबर 2013 :

रक्षा मंत्रालय ने अगस्‍ता वेस्टलैंड को आखिरी कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें कंपनी से पूछा गया कि लिकॉप्टर सौदे के तहत किए गए ईमानदारी बरतने का वादा तोड़ने के आरोप में क्यों नहीं पूरा सौदा रद्द कर दिया जाए?

जनवरी 2014 :

लोकसभा चुनाव से कुछ वक्त पहले ही UPA-2 सरकार ने अगस्‍ता वेस्टलैंड के साथ यह डील रद्द कर दी। जो पेमेंट पहले ही किया जा चुका था, उसे कवर करने के लिए अगस्‍ता वेस्टलैंड द्वारा दाखिल की गई अडवांस बैंक गैरंटी को भुनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सौदा करने के साथ इसकी सभी शर्तों को पूरा करने की गारंटी देने के लिए कंपनी ने 1,700 करोड़ रुपए की बैंक गैरंटी दी थी। यह पैसा भारत और इंटरनेशनल बैंकों में जमा था। रक्षा मंत्रालय ने डील के लिए 30% रकम अडवांस जमा की थी।

घोटाले के बाद

फरवरी 2014 :

अगस्‍ता वेस्टलैंड को भारतीय कोस्ट गार्ड के लिए हेलिकॉप्टर्स के टेंडर से बाहर कर दिया गया। मीडियम भार वाले 14 हेलिकॉप्टर्स का यह सौदा करीब 1,000 करोड़ रुपए का था, जिसके लिए अगस्‍ता वेस्टलैंड ने अपना EC-725 हेलिकॉप्टर पेश किया था।

जून 2014 :

CBI ने इस डील में रिश्वत के आरोप की जांच के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन गवर्नर एमके नारायणन से बतौर गवाह पूछताछ की। नारायणन उस ग्रुप में शामिल थे, जिसने हेलिकॉप्टर खरीदने से पहले टेंडर प्रॉसेस देखा था। नारायणन 2005 में उस मीटिंग में भी शामिल थे, जिसमें हेलिकॉप्टर की टेक्निकल शर्तों में बड़े बदलावों की इजाज़त दी गई।

अक्टूबर 2014 :

इटली की निचली अदालत ने ओरसी और स्पैग्नोलिनी को हेराफेरी के लिए दो साल की सजा सुनाई और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप माफ कर दिए।

फरवरी 2016 :

‘दि टेलिग्राफ’ में छपी खबर के मुताबिक क्रिश्चियन मिशेल ने आरोप लगाया कि सितंबर 2015 में न्यू यॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पीएम मोदी ने इटली के प्रधानमंत्री मैटेयो रेंजी के साथ मुलाकात में नौसैनिकों को रिहा करने के बदले गांधी परिवार के खिलाफ अगस्‍ता वेस्टलैंड मामले में सबूत मांगे थे। विदेश मंत्रालय ने इस आरोप को बकवास बताया।

अप्रैल 2016 :

इटली मिलान कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और अगस्‍ता वेस्टलैंड और फिनमैकेनिका के प्रमुखों को भ्रष्टाचार का दोषी मानती है। मिलान कोर्ट ने ओरसी को साढ़े चार साल और स्पैग्नोलिनी को चार साल का सज़ा सुनाती है। इधर भारत की पिछली UPA-2 सरकार ने इटली के प्रॉसिक्यूटर्स को पर्याप्त सबूत और अहम दस्तावेज नहीं दिए। पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी को भी भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया।

जून 2016 :

प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में एक नई चार्जशीट दायर की, जो ब्रिटिश नागरिक और कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स और उसके कुछ भारतीय सहयोगियों की भूमिका से संबंधित थी। इसमें ED ने आरोप लगाया कि मिशेल ने अगस्‍ता वेस्टलैंड से 225 करोड़ रुपए हासिल किए थे, जो असल में रिश्वत थी।

दिसंबर 2016 :

राजस्थान की भाजपा सरकार सिर्फ अगस्‍ता वेस्टलैंड से हेलिकॉप्टर खरीदने का टेंडर देकर विवादों में आ गई। इस सरकार की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए हेलिकॉप्टर खरीदने के मकसद से 21 नवंबर को एक टेंडर जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि सरकार केवल अगस्‍ता वेस्टलैंड का AW 169 हेलिकॉप्टर चाहती है। इसी बीच पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने सोनिया गांधी का बचाव करते हुए कहा कि इस डील में सोनिया गांधी की कोई भूमिका नहीं है।