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लोकसभा में घुसे युवक को 11 सांसदों ने मिल कर कूटा, बाहर साथियों ने लगाए ‘जय भीम’ के नारे

             संसद भवन में घुसे प्रदर्शनकारियों को 11 सांसदों ने मिल कर पीटा, बाहर लग रहे थे 'जय भीम' के नारे
संसद भवन में बुधवार (13 दिसंबर, 2023) को लोकसभा सदन में 2 लोग गैलरी से कूद गए। उन्होंने अपने हाथ में रंग-बिरंगे धुएँ छोड़ने वाला कनस्तर रखा हुआ था। इस दौरान पूरे सदन में धुआँ फैल गया। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सदन में कूदे युवक की कई सांसद मिल कर धुनाई कर रहे हैं। सांसदों ने उसे पकड़ लिया और फिर उसकी जम कर पिटाई की। किसी ने बाल नोचे तो, किसी ने मुक्के मारे तो किसी ने जूते बरसाए।
कुछ सांसदों द्वारा उस सांसद को भी हिरासत में लेने की मांग की है, जिसके पास पर ये उपद्रवी संसद में घुसे। बल्कि चर्चा यह भी है कि उस सांसद की केवल सदस्यता ही रद्द न हो, बल्कि परिवार सहित सभी के बैंक खाते सील हो और समस्त सरकारी सुविधाओं से हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए। 

इस दौरान ‘राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी’ के हनुमान बेनीवाल और बसपा के मलूक नागर इस दौरान आगे नज़र आए। एक अन्य सांसद को इस दौरान हमलावर के हाथ से कनस्तर का दबा छीनते हुए भी देखा गया। 11 सांसदों ने मिल कर उक्त हमलावर को पीटा। कुछ तो बेंच पर ही खड़े हो गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोपहर के 4 बजे सर्वदलीय बैठक भी की है। विजिटर गैलरी पास पर फ़िलहाल रोक लगा दी गई है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया में खासा वायरल हो रहा है।

इस मामले में 4 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 2 अंदर घुसे थे और 2 बाहर नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारी ‘मणिपुर को इंसाफ दो’ के साथ-साथ ‘जय भीम’ का नारा भी लगा रहे थे। उन्होंने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘संविधान बचाओ’, ‘महिलाओं पर अत्याचार नहीं चलेगा’, ‘भारत माता की जय’, ‘तानाशाही बंद करो’ और ‘जय भीम, जय भारत’ के अलावा ‘वन्दे मातरम्’ के नारे भी लगाए। अंदर घुसे प्रदर्शनकारी कह रहे थे – ‘काला कानून नहीं चलेगा, गुंडागर्दी नहीं चलेगी’।

अवलोकन करें:-

संसद में फेंका गया जो रंगीन धुएँ वाला कनस्तर उसे दिखाने के लिए लड़ बैठे पत्रकार, सबूत पुलिस को दे

सदन में घुसे प्रदर्शनकारियों में से एक तो अध्यक्ष की कुर्सी की तरफ बढ़ने लगा था। उसने नीले रंग की जैकेट पहन रखी थी। इस दौरान उसे जूते खोलने की कोशिश करते हुए भी देखा गया। इस दौरान पीले रंग का धुआँ सदन में फैल गया। प्रदर्शनकारी ‘काला कानून वापस लो’ भी कह रहे थे। उनका दावा था कि वो किसी संगठन से नहीं जुड़े हैं, हम छात्र हैं। ये घटना दोपहर के 1 बजे हुई। जैसे ही लोकसभा का पूरा व्यू टेलीकास्ट में आने लगा, ये लोग कूद गए। 

बिहार : आधी रात घर में घुस किसानों पर पुलिस की बर्बरता

बक्सर में आक्रोशित किसानों का प्रदर्शन, पुलिस ने पीटा (फोटो साभार: ANI)
बिहार के बक्सर में पुलिस की बर्बरता के बाद शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान उग्र हो उठे हैं। पुलिस की प्रताड़ना से नाराज किसान सड़क पर उतर आए। किसानों ने बसों व पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। जानकारी मिली है कि कई किसानों को हिरासत में लिया गया है। चौसा में पावर प्लांट के लिए ली गई भूमि के मुआवजे को लेकर किसान काफी समय से धरना दे रहे हैं।
कृषि कानूनों को लेकर तथाकथित किसानों द्वारा महीनों सड़क जाम कर जनता को परेशान किया, 26 जनवरी को लाल किले पर उपद्रव करने पर दिल्ली पुलिस और केंद्र में मोदी सरकार ने बहुत ही संयम से काम लिया था, 

क्यों भड़के किसान?

मुआवजे को लेकर कई दिनों से किसान धरना दे रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने आधी रात को धरना दे रहे किसानों के घरों में घुसकर उनके साथ मारपीट की। दावा है कि पुलिस रात 12:00 बजे के करीब किसानों के घरों में दाखिल हुई और सोते हुए किसानों पर लाठीचार्ज किया। जो भी सामने दिखा, उस पर जमकर लाठियाँ तोड़ी गईं। किसानों का दावा है कि उन्होंने पुलिस की बर्बरता अपने स्मार्टफोन में रिकॉर्ड कर ली है। बेरहमी से लाठियाँ बरसाते बिहार पुलिस के जवानों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहे हैं।

लाठी चर्ज पर पुलिस का पक्ष

आधी रात को किसानों के घर में घुसकर लाठीचार्ज पर पुलिस का कहना है कि पावर प्लांट कंपनी एसजेवीएन ने कुछ किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस रात्रि में उन्हें पकड़ने गई थी। पुलिस का कहना है कि पहले किसानों ने हमला किया, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। किसानों को परिवार (महिलाओं-बच्चों) के सामने ही पीटा गया।

ताज़ा हालात क्या हैं?

पुलिस की पिटाई के खिलाफ किसान सड़कों पर उतर आए। नाराज किसानों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। आक्रोशित किसानों ने पावर प्लांट में भी बवाल काटा। किसानों ने पावर प्लांट में जमकर तोड़-फोड़ की और आग लगा दिया। खबर है कि किसानों ने पुलिस पर भी हमला किया है। हमले में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है। साथ ही जानकारी मिली है कि पुलिस ने कुछ किसानों को हिरासत में लिया है। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा जा रहा है और जल्द ही हालात काबू में कर लिए जाएँगे।

क्या है मामला ?

दरअसल, चौसा में वर्ष 2010-11 से पहले ही बनारपुर गाँव में पावर प्लांट बनाने के लिए किसानों का भूमि अधिग्रहण किया गया था। किसानों को 2010-11 के सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा दिया गया। कंपनी ने वर्ष 2022 में जमीन अधिग्रहित करने का काम शुरू किया। किसान अब वर्तमान दर से जमीन का मुआवजा माँग रहे हैं। किसानों का आरोप है कि पावर प्लांट बनाने वाली कम्पनी एसजेवीएन पुराने दर पर ही मुआवजा देकर जमीन हथिया रही है। इसे लेकर किसान तकरीबन 2 महीनों से धरना दे रहे हैं।