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पिता वीरभद्र पर 10 करोड़ की गैरकानूनी संपत्ति बनाने का आरोप, अब बेटी हुई भष्ट्राचार के खिलाफ बने Lokpal में शामिल

Abhilasha singhदेश को 52 साल की लंबी लड़ाई के बाद लोकपाल मिला। भारत में साल 1967 में पहली बार भारतीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों को लेकर लोकपाल संस्था की स्थापना का विचार रखा था। हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया था। हालांकि इस बिल को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक अनशन किया और जनवरी 2014 यह कानून बनकर तैयार हुआ। 

कानून बनने के 5 साल बाद मिला लोकपाल

देश लोकपाल कानून बनने के 5 साल बाद पहला लोकपाल सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष के रुप  में मिला। हालांकि घोष के साथ चार न्यायिक व चार ग़ैर न्यायिक सदस्यों की भी नियुक्ति की है। जिन चार न्यायिक सदस्य की नियुक्ति की गई, उसमें से एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वो है जस्टिस अभिलाषा कुमारी। ऐसा इसलिए क्योंकि अभिलाषा हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की बेटी हैं। वही वीरभद्र सिंह जिन पर गैरकानूनी तरीके से 10 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाने का आरोप है।

virbhadra singhवीरभद्र पर गैरकानूनी तरीके से संपत्ति बनाने का आरोप

वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनाया गया है। उन पर आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई ने वीरभद्र सिंह, प्रतिभा सिंह और आनंद चौहान समेत अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है। चार्जशीट में कहा गया था कि केंद्रीय मंत्री रहते हुए वीरभद्र सिंह ने गैरकानूनी तरीके से 10 करोड़ की संपत्ति बनाई, जो उनकी आय से अधिकहै। सीबीआइ द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे का संज्ञान लेते हुए ईडी ने भी मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया था। 

ishrat jahanअभिलाषा ने इशरत जहां एनकाउंटर केस में जांच के आदेश

जस्टिस कुमारी के गुजरात हाईकोर्ट का जज बनने के बाद गुजरात राज्य का मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष नियुक्त की गई। उनके ही कार्यकाल में इशरत जहां एनकाउंटर केस की जांच का आदेश दिया गया था। अभिलाषा गुजरात उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहने के अलावा त्रिपुरा व मणिपुर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश और गुजरात उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रह चुकी हैं। जस्टिस कुमारी  पिछले 30 वर्षों से ज्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं। साल 2007 में जब उन्हें सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया गया था, तो उस वक्त यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह तब तक की दूसरी महिला थीं।