Showing posts with label land jehad. Show all posts
Showing posts with label land jehad. Show all posts

सबसे बड़ा जमीन घोटाला : भारत का सबसे खतरनाक कानून "वक़्फ़ बोर्ड" कब होगा समाप्त?

एक देश दो विधान क्यों?
सरकार जब वक़्फ़ बोर्ड और मस्जिदों के रख-रखाव पर धन देती है, फिर मस्जिदों और दरगाहों की आय को क्यों नहीं वसूलती, जिस तरह हर बड़े मंदिरों की आय को? पिछली सरकारों की तरह मोदी सरकार भी अप्रत्यक्ष रूप से तुष्टिकरण नीति को अपनाए हुए है।
हमारे अपने ही देश भारत में हम लगभग 80 से 90 करोड़ हिन्दुओं के लिए न कोई आयोग, न कोई बोर्ड। लगभग 15 से 20 करोड़ मुस्लिम आबादी के लिए वक्फ़ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ ही उनकी धार्मिक शिक्षा के लिए मदरसा भी। एक देश दो विधान क्यों? देश के बंटवारे में हमें मिली इस भारत भूमि पर हमारा संवैधानिक अधिकार है। हमारे देश की एक एक इंच जमीन हमारी है, यहाँ हमें हमारे हिसाब से जीने का अधिकार है। फिर हमारे साथ यह भेदभाव क्यों? हमारे लिए सनातन बोर्ड क्यों नहीं? हमारे लिए सनातन आयोग क्यों नहीं ? हमारे धार्मिक शिक्षा के लिए गुरुकुल क्यों नहीं?
देश का हिन्दू समाज जातिवाद की जंजीर तोड़ कर एक हो रहा है। देश का हर हिन्दू अब अपना अधिकार माँग रहा है। सरकार को देश की बहुसंख्यक आबादी की भी सुननी होगी। आजादी के बाद भी उपेक्षित रहा हिन्दू समाज अपने ही देश में अपना अधिकार पाने के लिए कोई बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर हो उससे पहले उसके भी मन की व्यथा को सरकार समझे और तत्काल सनातन आयोग का गठन करे।
मोदी सरकार ने कई कानून रद्द किये हैं, मुगलों के नाम पर सडकों के नाम बदले जा रहे हैं, लेकिन भारतीय मुगलों द्वारा बनाए वक़्फ़ बोर्ड को कब समाप्त किया जायेगा या फिर मोदी सरकार भी पिछली सरकारों की तरह तुष्टिकरण अपनाते हुए इस खतरनाक कानून को बरक़रार रखेगी? सरकार को वक़्फ़ बोर्ड से वक़्फ़ के नाम मस्जिदों और दरगाहों की कमाई का ब्यौरा मांगना चाहिए। कई मस्जिदों और दरगाहों की इतनी अधिक कमाई है, फिर भी उनके रख-रखाव पर वक़्फ़ खर्च कर रहा है, क्यों? क्या यह अल्पसंख्यक के नाम पर लूट सियासत नहीं?

वक्फ कानून को जानिये

वक्फ का शाब्दिक अर्थ है खड़ा होना, रोकना या कब्जे में लेना।
थॉमस पैट्रिक ह्यूजेस (रूपा एंड कंपनी, दिल्ली, 1999) द्वारा रचित इस्लाम का शब्दकोश वक्फ शब्द की व्याख्या करता है।
यह मजहबी उपयोग हेतु संपत्ति का विनियोग या समर्पण है।
यह एक प्रकार की धार्मिक बंदोबस्ती है जिसका जमींदार वक्फ बोर्ड है।
आपके जानकारी के लिए बता दें कि भारत में भूमि के मामले में वक्फ की जमींदारी अकल्पनीय रूप से बहुत बड़ी है।
इसमें लगभग 4 लाख पंजीकृत संपत्ति और लगभग 6 लाख एकड़ भूमि शामिल है।
राज्यसभा के पूर्व उप सभापति के रहमान खान की अध्यक्षता वाली एक संयुक्त संसदीय समिति के अनुसार, भारतीय रेलवे और रक्षा विभाग के बाद भूमि का तीसरा सबसे बड़ा स्वामित्व वक्फ बोर्ड का है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि
वक्फ एक्ट पर पहला कानून 1923 में बनाया गया था, जिसमें बोर्ड को कोई विशेषाधिकार नहीं दिया गया था।
इस एक्ट को बनाने का मकसद बस यही था कि अगर कोई मुसलमान अपनी प्रॉपर्टी अल्लाह को देना चाहता है, तो वो अल्लाह को दे सकता और उसकी प्रॉपर्टी कि देख रेख वक्फ बोर्ड करेगा।
उसके बाद समय-समय पर इसमें कुछ संशोधन होते रहे।
प्रथम संशोधन, वक्फ एक्ट 1954 के तहत हुआ, जिसमें इसे थोड़ी बहुत शक्तियां दी गई।

वक्फ एक्ट 1984 के समय राजीव गांधी ने इसे विशेषाधिकार दिए।
लेकिन 1995 में जब नया वक्फ एक्ट 1995 लाया गया तब इसे प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार भी दिए गए। और फिर वर्ष 2013 में मनमोहन¢सिंह ने तो इसमें कुछ संशोधन करके वक्फ बोर्ड की ताकत को चरम पर पहुंचा दिया।
अब समझते है कि आखिर ऐसा क्या है वक्फ एक्ट 1995 में जो इसे हिन्दुओं और पूरे भारत भूमि के लिए बहुत ही ज्यादा ख़तरनाक बनाता है:-
धारा 36 व धारा 40-
इसप्रावधान में यह लिखा है कि वक्फ बोर्ड किसी कि भी प्रॉपर्टी को चाहे वह प्राइवेट हो, सोसाइटी की हो या फिर किसी भी ट्रस्ट की, उसे अपनी सम्पत्ति घोषित कर सकता है।
धारा 40 (1)-
अगर किसी Individual की प्रॉपर्टी को वक्फ प्रॉपर्टी घोषित किया जाता है तो उसको उस ऑर्डर की कॉपी तक देने का कोई प्रावधान नहीं है और अगर आपने उसके खिलाफ 3 साल के अंदर अपील नहीं की तो वो ऑर्डर फाइनल हो जाएगा।
धारा 52 धारा 54-
जो सम्पत्ति वक्फ संपति घोषित हो जाएगी, उसके बाद वहां जो रह रहा होगा वो ”ENCROCHER” माना जाएगा।
उसके बाद वक्फ बोर्ड डीएम को जगह खाली कराने का निर्देश देगा, जिसे डीएम मानने के लिए बाध्य होगा।
धारा 28 व धारा 29-
वक्फ बोर्ड का जो ऑर्डर होगा उसका पालन स्टेट मशीनरी एवं डीएम को करना होगा।
अब एक सवाल उठता है कि क्या ऐसे आधिकार किसी पंडित, मठाधीश या फिर किसी अन्य हिन्दू ट्रस्ट को दिया गया है?
धारा 85-
इसके तहत अगर कोई मामला वक्फ से संबंधित है तो आप दीवानी दावा दायर नहीं कर सकते है, मतलब आप वक्फ ट्रिब्यूनल में जाने के लिए बाध्य होंगे।
धारा 89-
इसमें अगर आप सिविल कोर्ट जाना चाहते है तो आपको वक्फ बोर्ड को दो महीने का नोटिस देना पड़ेगा।
धारा 101-
आप यह जानकर दंग रह जाएंगे की वक्फ बोर्ड के मेंबर Public Servant हैं।
क्या किसी भी हिंदू संस्थान में मठाधीश, शंकराचार्य, पंडित को पब्लिक सर्वेंट माना गया है?
पूर्ण रूप से एक
मजहबी संस्था है वक्फ बोर्ड
इसी के स्वामित्व और प्रबंधन के लिए कांग्रेस ने वक्फ बोर्ड को वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत न सिर्फ कानूनी अमलीजामा पहनाया, बल्कि इसके साथ-साथ इसको जमीन हड़पने के प्रशासनिक अधिकार के अलावा विवाद सुलझाने के न्यायिक अधिकार भी दिए।
किसी भी रूप से इसका सदस्य या अंग बनने के लिए आपका मुसलमान होना अनिवार्य है।
वक्फ पूर्ण रूप से एक मजहबी संस्था है जो मजहब की आड़ में भू माफिया में परिवर्तित हो गई है, पर कांग्रेस ने न सिर्फ इसे वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत कानूनी वैधता प्रदान किया, बल्कि इसे संवैधानिक मान्यता भी दे दिया।
आपको जानकर हैरानी होगी कि विषय ‘वक्फ’ भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची से जुड़ी समवर्ती सूची में प्रविष्टि संख्या 10- “ट्रस्ट और ट्रस्टी” के सापेक्ष है जो यह घोषित करता है कि
यह केंद्र और राज्य दोनों सरकारों का मामला है। प्रधानमंत्री की उच्च-स्तरीय समिति ने पुष्टि की है कि देश भर में 49 से अधिक पंजीकृत वक्फ हैं, जिनमें से दिल्ली में वक्फ संपत्ति के वर्तमान मूल्य का अनुमान 6,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
उत्तर प्रदेश में वक्फ की संपत्ति सबसे ज्यादा है।
पर ये सब कहने की बातें हैं। असल में वक्फ अधिनियम, 1995 जैसे काले कानून के रूप में न सिर्फ भूमि जिहाद को बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि इस संस्था को एकाधिकार प्रदान कर भारत भू संसाधन पर मुस्लिमों का वर्चस्व स्थापित किया जा रहा है।
इसके साथ साथ इस अधिनियम के बहुतेरे प्रावधान ऐसे भी हैं, जिनका धर्मनिरपेक्ष भारत में कोई स्थान नहीं है।
इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।