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दिल्ली : अरविन्द केजरीवाल : 22 दिन बाद भी उपलब्ध नहीं कराई किचेन की लिस्ट

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने झूठे वादों के लिए विख्यात है। कोरोना संकट के दौरान दिल्लीवासी परेशान हैं लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल लगातार झूठे वादे कर रहे हैं। सीएम केजरीवाल ने पहले प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से बाहर भेजने की साजिश रची। उसके बाद उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में किसी को भूखा नहीं रहने देंगे। उन्होंने ये भी दावा किया कि दिल्ली सरकार 10 लाख लोगों को खाना खिला रही है लेकिन इस बात को साबित करने के लिए 22 दिन बाद भी उनकी सरकार 10 लाख लोगों के लिए खाना बना रही किचेन की लिस्ट उपलब्ध कराने में नाकाम रही।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 8 अप्रैल को दिल्ली के सांसदों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी,जिसमें उन्होंने कोविड-19 को लेकर की जा रही तैयारियों का जायजा लिया था, इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में पश्चिम दिल्ली के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री से सवाल किया था कि दिल्ली सरकार 10 लाख लोगों को खाना खिलाने का दावा कर रही है लेकिन ये खाना कहां तैयार हो रहे हैं, इस सवाल के जवाब में अरविंद केजरीवाल ने इस कॉन्फ्रेंस मेें मौजूद आप आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह से इस बारे में शाम तक पूरी सूची देने को कहा था, लेकिन ये बात आई गई हो गई। 22 दिन बाद भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिर्फ और सिर्फ मुद्दों को लेकर पब्लिसिटी करते हैं। अखबरों में किसी योजना पर जितने पैसे खर्च कर विज्ञापन दिया जाता है, उसके मुकाबले योजना पर खर्च नहीं किया जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री कई मुद्दों पर झूठ बोल चुके हैं।

प्लाज्मा थेरेपी को लेकर झूठ लगाया 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में प्लाज्मा थेरेपी को लेकर झूठ फैलाया कि इससे मरीजों को काफी फायदा हो रहा है लेकिन हकीकत कुछ और है। ICMR ने साफ किया है कि प्लाज्मा थेरेपी कोरोना बीमारी का इलाजा नहीं है और इसपर अभी शोध जारी है। लेकिन इसके उलट केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्लाज्मा थेरेपी को लेकर वाहवाही लूटने से पीछे नहीं रहे है।
लॉक आउट में कैसे आ गए ? इससे पहले कहाँ थे?
दिल्ली में हॉटस्पॉट ने लगाया शतक
कोरोना को लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल जिस रफ्तार से दावे कर रहे हैं, दिल्ली में कोरोना उसी रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। दूसरे चरण का लॉकडाउन पूरा होने के पहले ही दिल्ली में हॉटस्पॉट की संख्या करीब दोगुनी हो गई है। अब तक 130 हॉटस्पॉट बन चुके हैं दिल्ली में। सड़क पर डेरा डाल कर सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए कुख्यात रहे शाहीनबाग को भी कोरोना का हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में कोरोना हॉटस्पॉट की संख्या सौ हो गई है। शाहीनबाग में डी ब्लॉक के जिस क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित किया गया है, उसके पास जाकिर नगर, अबु फजल एनक्लेव के कुछ ब्लॉक पहले से हॉटस्पॉट घोषित हैं। जाहिर है, केजरीवाल भले ही रोज मीडिया में आकर बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन दिल्ली में कोरोना की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
दिल्ली में हालात चिंताजनक
राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिल्ली में संक्रमितं की संख्या  3439 हो गई। एक आंकड़े के मुताबिक देश के कुल मरीजों में करीब 12.6 फीसदी दिल्ली के हैं। इसके अलावा कोरोना वायरस से 56 लोगों की मौत हो चुकी है। चिकित्साकर्मियों के संक्रमित होने की दर सबसे ज्यादा है। पिछले एक महीने में दिल्ली की स्थिति और खराब हुई है। 26 मार्च को पहला कंटेनमेंट जोन चिन्हिंत किया था। 14 अप्रैल को हॉटस्पॉट की संख्या 52 थी, जबकि अब हॉटस्पॉट की संख्या 120 हो गई।
अँधा बांटे रेवड़ी, फिर फिर अपने को दे
आखिर किस आधार पर राशन किट का वितरण हो रहा है? जैसाकि अक्सर अपने इसी ब्लॉग पर वीडियो सहित प्रकाशित किया कि घर में भरपूर राशन होते हुए, राशन की मांग कर रहे हैं और इस समाचार की अप्रैल 30 को IndiaTV ने भी पुष्टि की। कमरे में रोटियां, खाना सड़ रहा है, लेकिन फोन कर भूख से मरने का स्वांग कर खाना मंगवाया जा रहा है। जबकि कई स्थानों पर कुछ एनजीओ अपने ही कार्यालय से राशन किट का वितरण कर रहे हैं, जबकि होना यह चाहिए घर-घर जाकर केवल जरूरतमंदों को राशन किट दी जाए। पार्षद अथवा विधायक की निगाहों में इतने हज़ार लोगों को राशन बाँटने के कारण सुर्ख़ियों में आ गए। क्या किसी पार्षद अथवा विधायक जिसके माध्यम से वितरण हो रहा है, क्या उन्होंने यह जानने का साहस किया कि क्या "राशन किट अथवा रूपए(क्योकि कुछ स्थानों पर 2000 से लेकर 5000 रूपए भी बांटे जा रहे हैं) किसी जरूरतमंद को दिए गए हैं या फिर अँधा बांटे रेवड़ी, फिर फिर अपने को दे। 
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प्रवासी मजदूर के भूखे रहने की आई खबर 
अभी कुछ पहले खबर आई थी कि कोरोना संकट से परेशान सैकड़ों मजदूर यमुना किनारे खुले में किसी तरह दिन गुजारने को मजबूर है।  पत्रकार अरविंद गुनासेकर ने 15 अप्रैल को ट्विटर पर दिल दहला देने वाली तस्वीर शेयर की। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को टैग करते हुए उन्होंने लिखा कि प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों की हालात। सैकड़ों कामगार यमुना किनारे एक पुल के नीचे रहने को मजबूर हैं। करीब एक हफ्ते से दयनीय हालत में गुजारा कर रहे हैं। पास के गुरुद्वारे से एक वक्त की रोटी मिल जाती है।