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2010-11 से टैक्स नहीं भर रहे रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका गाँधी पर भी 11 लाख रूपए बकाया: वायनाड से भरा पर्चा तो खुली पोल; ऐसे लोग जनसेवक या शाही लुटेरे? क्या और लूट करने चुनाव लड़ा जा रहा है? क्या कहे लाचारी या गाँधी परिवार के आगे घुटने टेक, या वित्त मंत्रालय बेबस?

              प्रियंका गाँधी और उनके पति पर 78 करोड़ रूपए से ज्यादा बकाया है (चित्र साभार: Times Of India)
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने बुधवार (23 अक्टूबर, 2024) को केरल की वायनाड लोकसभा सीट उपचुनाव के लिए पर्चा दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के दौरान भाई राहुल गाँधी भी मौजूद रहे। प्रियंका गाँधी के दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी करोड़ों की सम्पत्ति और उन पर इनकम टैक्स के बकाए की जानकारी सामने आई है। सामने आया है कि प्रियंका गाँधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने लगभग 78.5 करोड़ रूपए का इनकम टैक्स नहीं चुकाया है। इसको लेकर मुकदमे भी चल रहे हैं।

एक बहुत कहावत है "You show me the man I will show you the rule" इस सन्दर्भ में बिलकुल सटीक बैठती है। अगर आम टैक्सपेयर ने इतनी लापरवाही की होती क्या इतने लम्बे मुकदमा चलता? क्यों भारत सरकार और न्यायालय गाँधी परिवार के आगे जरुरत से ज्यादा कमजोर दिखाई देते हैं? भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और न्यायालय को बताना चाहिए आखिर क्यों आम नागरिक और सियासतखोरों के लिए कानून के दो-रूप क्यों? मुद्दा सिर्फ ये नहीं, किसी भी मुद्दे को ले लो। बिजली विभाग कनेक्शन काटता है अरविन्द केजरीवाल जोड़ देता है, कोई कार्यवाही नहीं। अगर यही काम उपभोक्ता ने खुद किया होता छतीसों कानून लग गए होते। भ्रष्टाचार पर जेल हुई जमानत भी हो गयी लेकिन वसूली नहीं क्यों? ये संविधान की दुहाई देने वाले किस तरह जनता की गर्दन और जेबों पर वार कर रहे हैं और अपनी काली करतूतों को छुपाने बेरोजगारी और महंगाई का रोना रोते नज़र आते है और पागल जनता भी इन लुटेरों पर विश्वास कर अपनी बर्बादी के लिए वोट दे देते हैं। क्या ऐसे लुटेरे एक भी वोट के हक़दार हैं, चाहे वह लुटेरा किसी भी पार्टी से हो?    प्रियंका गाँधी द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, उन्होंने साल 2012-13 का 15.75 लाख रूपए का इनकम टैक्स नहीं चुकाया है और इसको लेकर इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल मुकदमा चल रहा है। उन्होंने CBDT के पास मात्र 3.15 लाख रूपए जमा किए हैं। वर्तमान कार्रवाई के अनुसार, उनके ऊपर 11.11 लाख रूपए की रकम का इनकम टैक्स बकाया और उन्हें यह चुकाना है।

प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने इनकम टैक्स की बड़ी रकम दबा रखी है। उन्होंने 2010-11 के बाद से 2020-21 तक का इनकम टैक्स नहीं भरा है। यानि वह लगभग 12 सालों का इनकम टैक्स नहीं जमा कर रहे हैं। अब यह धनराशि लगभग 78.5 करोड़ रूपए पहुँच चुकी है।

हलफनामे के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा पर साल 2010-11 के लिए 7.15 करोड़ रूपए, साल 2011-12 के लिए 3.02 करोड़ रूपए, साल 2012-13 के लिए 3.39 करोड़ रूपए, साल 2013-14 के लिए 11.05 करोड़ रूपए, साल 2014-15 के लिए 10.02 करोड़ रूपए और 2015-16 का 8.98 करोड़ रूपए बकाया है।

इसके अलावा 2016-17 के 4.12 करोड़ रूपए, 2017-18 के 3.06 करोड़ रूपए, 2018 के लिए 2.39 करोड़ और 2019-20 के 24.16 करोड़ रूपए भी बकाया हैं। रॉबर्ट वाड्रा ने 2020-21 का 1 करोड़ रूपए का इनकम टैक्स भी नहीं जमा किया है।

इस हलफनामे में प्रियंका गाँधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा की संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। हलफनामे में प्रियंका गाँधी ने बताया है कि उनके पास 60 किलो से अधिक सोना चाँदी है। इसके अलावा उनके पास करोड़ों की जमीन भी है।

प्रियंका गाँधी वाड्रारॉबर्ट वाड्रा
आय साल 2023-24रूपए 69,31,660रूपए 55,58,000
आय साल 2022-23रूपए19,89,420रूपए11,38,710
आय साल 2021-22रूपए45,56,940रूपए9,03,810
आय साल 2020-21रूपए47,21,820रूपए9,35,530
आय साल 2019-20रूपए46,39,100रूपए15,09,220
बैंक सेविंग्स अकॉउंटरूपए3,67,281रूपए13,95,604
बैंक करंट अकॉउंटजीरोरूपए2,95,251
बैंक फिक्स्ड डिपोजिटजीरोरूपए35,60,245
शेयरजीरोरूपए65,72,012
म्यूचुअल फंडरूपए2,24,93,988रूपए32,79,998
PPF/LICरूपए17,38,265रूपए6,00,000
विभिन्न कंपनियों को दिया गया पैसाजीरोरूपए35,38,89,724
सोना-चाँदी-जेवरात2.509 किलो सोना (रूपए1,15,79,065) 59.830 किलो चाँदी (रूपए29,55,581)जीरो
कुल चल संपत्तिरूपए4,24,78,689रूपए37,91,47,432
दिल्ली में जमीन3.78 एकड़ (रूपए2,10,13,598)जीरो
व्यावसायिक भवनजीरोरूपए27,64,38,633
आवासीय भवनरूपए7,74,12,598जीरो

ऊपर प्रियंका गाँधी और उनके पति की संपत्तियों का हर एक ब्योरा देखा जा सकता है। प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा के पास कोई नई गाड़ियाँ भी नहीं हैं। इस हलफनामे में बताया गया है कि दोनों के पास 3 कारें और 1 मोटरसाइकिल है। यह सभी गाड़ियाँ 15 वर्ष से अधिक पुरानी हैं।

यानी अगर देखा जाए तो रॉबर्ट वाड्रा- प्रियंका गाँधी पर इनकम टैक्स का बकाया उनकी कुल सम्पत्ति से भी ज्यादा है। हलफनामे के अनुसार, दोनों की कुल सम्पत्ति लगभग 77.5 करोड़ रूपए है जबकि उनके ऊपर 78 करोड़ रूपए से ज्यादा का इनकम टैक्स बकाया है। प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा का कुल इनकम टैक्स बकाया लगभग 78.5 करोड़ रूपए पहुँचता है।

प्रियंका गाँधी चुनावी राजनीति में उतरने वाली गाँधी परिवार की सबसे नई सदस्य हैं। यदि वह चुनाव जीतती हैं तो गाँधी परिवार के सभी सदस्य सांसद होंगे। उनके भाई राहुल गाँधी वर्तमान में रायबरेली जबकि माँ सोनिया गाँधी राज्यसभा की सांसद हैं।

दिल्ली : दिवंगत कॉन्स्टेबल अमित कुमार के परिजनों को घोषित मुआवजा कब देगी केजरीवाल सरकार? हिन्दू कॉन्स्टेबल की पत्नी खा रही दर-दर की ठोकर

आपने अक्सर सुना होगा कि नेता वादे करते हैं और फिर भूल जाते हैं। चुनाव के दौरान बड़ी-बड़ी घोषणाएँ की जाती हैं और जीतने के बाद नेता उसे पूरे नहीं करते। देश में एक नेता ऐसा भी है, जो धर्म नहीं मजहब देख कर निर्णय लेता है कि किसी पीड़ित की सहायता करनी है कि नहीं, या फिर किसी मृतक के परिजनों को घोषित मुआवजा देना है कि नहीं। अरविंद केजरीवाल सरकार की बेरुखी के कारण दिवंगत कॉन्स्टेबल अमित कुमार की विधवा दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है।
केजरीवाल आखिर कौन-सा सेकुलरिज्म अपना रहे हैं? क्या इसी का नाम सेकुलरिज्म है? किसी मुसलमान को हिन्दू मार दे, दिल्ली छोड़ दादरी भागने वाले केजरीवाल दिल्ली में हो रही हिन्दुओं की हत्याओं पर खामोश हो जाते हैं। जो खुल्लम-खुल्ला तुष्टिकरण है और इस कटु सच्चाई को अब जनता को समझना होगा। इसी तुष्टिकरण के कारण हिन्दू अत्याचारों का शिकार होता रहा है। 

अमित कुमार राष्ट्रीय राजधानी के पहले ऐसी पुलिसकर्मी थे, जिन्होंने खतरनाक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अपनी जान गँवाई। कोरोना काल में भी जान हथेली पर रख कर ड्यूटी करने वाले और फिर अपने सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमित कुमार के परिजनों के लिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 1 करोड़ मुआवजे की घोषणा तो कर दी, लेकिन अभी तक उन्हें एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई है।

दिल्ली उच्च-न्यायालय में अमित बंसल की पीठ ने जुलाई 23, 2021 को इस मामले की सुनवाई की तारीख के रूप में मुकर्रर की है और दिल्ली सरकार को नोटिस देते हुए जवाब माँगा है। मई 2020 में ही दिल्ली सरकार ने कोविड-19 से जान गँवाने वाले युवा कॉन्स्टेबल अमित कुमार के परिजनों के लिए मुआवजा की घोषणा की थी, लेकिन अब एक साल से एक महीना अधिक बीतने के बावजूद इस पर अमल नहीं हो सका है।

ऐसा नहीं है कि ये वादा चोरी-छिपे किया गया था। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर के अमित कुमार की मौत पर दुःख जताया था और परिवार को 1 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा देने की घोषणा की थी। पत्नी पूजा ने अंत में हार कर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में कहा कि ‘प्रशासनिक कारणों’ से मुआवजे की राशि देने में देर हुई है। साथ ही दावा किया कि कई लोगों को मुआवजा देने के लिए दिल्ली सरकार कदम उठा रही है।

आश्चर्य की बात ये है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री खुद जाकर जब किसी मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि सौंप सकते हैं तो अमित कुमार के मामले में कोई अधिकारी तक उनके घर क्यों नहीं जा सकता? इसी साल मई में GTB अस्पताल में तैनात युवा डॉक्टर अनस मुजाहिद की मौत के बाद केजरीवाल मुस्तफाबाद के भागीरथी विहार स्थित उनके घर गए थे, परिजनों को ढाँढस बँधाया था और 1 करोड़ रुपए का चेक सौंपा था।

किसी को दिवंगत डॉक्टर मुजाहिद के परिजनों को मिली मदद से दिक्कत नहीं होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली में दारू-शराब की होम डिलीवरी करने वाली सरकार क्या अमित कुमार से सिर्फ इसीलिए भेदभाव करती है कि वो हिन्दू हैं? या इसीलिए भेदभाव करती है कि हिंदू वोट-बैंक नहीं होते? एक बात और… यहाँ दिवंगत डॉक्टर मुजाहिद और अमित कुमार राणा के बीच जो अंतर है, उसे भी समझना होगा।

मुजाहिद के पिता भी डॉक्टर थे, जबकि अमित कुमार राणा एक सामान्य परिवार से थे। सोचिए, उस परिवार पर क्या गुजरी होगी जहाँ पति की मौत के बाद विधवा पत्नी और 3 साल का बेटा भी कई दिनों तक कोरोना से जंग लड़ते रहे। दिल्ली में दारू-शराब की होम डिलीवरी करने वाली सरकार जब अमित कुमार से सिर्फ इसीलिए भेदभाव करे कि वो हिन्दू हैं और हिंदू वोट-बैंक नहीं होते हैं, तो इससे जरूर लोग निराश होंगे।

ये आरोप भी है कि ज़िंदा रहते अमित कुमार के इलाज के लिए दिल्ली सरकार ने समुचित व्यवस्था नहीं की थी। उनके सहयोगी उनकी मौत के बाद नाराज़ थे। उनकी बातें भी सीएम केजरीवाल को आज सुननी चाहिए, भले 1 साल बाद। अमित कुमार के साथियों का कहना था कि अगर वो कोई बड़े अधिकारी होते तो उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करा दिया गया होता, लेकिन वो सिर्फ एक कॉन्स्टेबल थे और इसीलिए सही समय पर उन्हें इलाज नहीं मिला।

अमित कुमार की मौत के बाद दिल्ली के मुखिया ने क्या लिखा था, वो देखिए – “अमित जी अपनी जान की परवाह ना करते हुए कोरोना की इस महामारी के समय हम दिल्ली वालों की सेवा करते रहे। वे खुद करोना से संक्रमित हो गए और हमें छोड़ कर चले गए। उनकी शहादत को मैं सभी दिल्लीवासियो की ओर से नमन करता हूँ। उनके परिवार को 1 करोड़ रुपए की सम्मान राशि दी जाएगी।” उन्होंने LG के ट्वीट को कोट करते हुए ये वादा किया था। देखिए:

32 वर्षीय अमित कुमार कोरोना पॉजिटिव साबित होने के मात्र 6 घंटे बाद ही चल बसे थे। उन्होंने साँस लेने में तकलीफ, बुखार और कफ की शिकायत की थी। उनकी मौत के बाद पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर ने कहा था कि दिल्ली प्रशासन की गलती से ये हुआ है। उन्होंने अमित कुमार के बच्चे को अपने बच्चे की तरफ देखभाल का भरोसा दिया था। ‘गौतम गंभीर फाउंडेशन’ ने तो थोड़ी-बहुत मदद की भी, लेकिन प्रदेश सरकार निष्क्रिय हो गई।

अमित कुमार के बारे में बता दें कि वो हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले थे। उनका एक चार साल का बेटा है। भारत नगर स्थित पुलिस थाने में उनकी ड्यूटी थी। बगल में ही स्थित गाँधी नगर में वो अपने एक दोस्त के साथ एक किराए के फ़्लैट में रहते थे। ‘क्राइम रिकार्ड्स यूनिट’ में उनकी ड्यूटी लगी हुई थी। जब वो बीमार हुए, तब भी वो ड्यूटी पर ही थे। उससे पहले 36 पुलिसकर्मी दिल्ली में कोरोना संक्रमित हुए थे, लेकिन किसी की मौत होने का ये पहले मामला था।

ये भी याद दिलाना ज़रूरी है कि एक बलिदानी पुलिसकर्मी के परिवार को दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर करने वाली दिल्ली सरकार ने निर्भया के नाबालिग बलात्कारी को एक सिलाई मशीन और 10,000 रुपए दिए थे। दिल्ली सरकार के ‘महिला एवं बाल विकास’ ने एक महिला के बलात्कारी को ये इनाम दिया था। जेल से छूटने के बाद उसे और उसके परिवार को सरकारी खर्चे पर दिल्ली लाया गया था।

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फिर अमित कुमार जैसे रक्षक के परिवार से दिल्ली की AAP सरकार को क्या दिक्कत है? जब अमित कुमार कोरोना संक्रमित थे तो सुबह से उनके साथ उन्हें कई अस्पतालों में लेकर गए थे, लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया। 8-9 अस्पतालों में उनके साथ उन्हें लेकर भटके। उस समय दिल्ली सरकार कुछ नहीं कर पाई, लेकिन मृत्यु के बाद मुआवजे का ऐलान कर के वाहवाही बटोर ली। वो मुआवजा, जो अब तक नहीं मिला है।