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राधिका खेड़ा ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, लिखा- पार्टी में राम नाम लेने वालों का विरोध

जब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा होने वाली थी तब लिखा था कि राम मन्दिर से केवल अयोध्या ही नहीं, समस्त भारत की दिशा और दशा में ऐसा परिवर्तन आना शुरू होगा जिससे विश्व प्रभावित होगा। सनातन विरोधी छटपटा रहे हैं। लेकिन उनकी हर चाल नाकाम साबित हो रही है। 
जैसाकि संभावनाएं लगाई जा रही है कि जून 4 के बाद कांग्रेस 2 हिस्सों में बंट जाएगी, लेकिन लगता है चुनाव परिणाम आते-आते पार्टी टूट जाएगी। रोहन गुप्ता, गौरव बल्लभ और राधिका खेड़ा कांग्रेस के ऐसे योग्य प्रवक्ता थे जो जी जान से कांग्रेस पार्टी के लिए लड़ते थे! जबकि राधिका तो बुरी तरह बीजेपी प्रवक्ता से ऐसे भिड़ जाती थी, जिस कारण इन्हें कई उपनामों से सम्बोधित किया जाने लगा था। माना कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण करते हर हिन्दू धार्मिक स्थल को विवादित बना दिया, लेकिन सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद से जितना सनातन धर्म का अपमान होना शुरू है, इससे पहले नहीं। 

लेकिन सनातन विरोधी कांग्रेस को नहीं मालूम कि आदि काल(4+अरब वर्षो प्राचीन धर्म) से लेकर सनातन को ख़त्म करने वाले कितने आए कितने दफ़न हो गए सनातन को कोई समाप्त नहीं कर पाया और ना ही कर पाएगा।   
कांग्रेस नेता राधिका खेड़ा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। कुछ दिनों पहले रायपुर में उनका सुशील आनंद शुक्ला के साथ विवाद हुआ था। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा है। उसमें उन्होंने लिखा है कि पार्टी में राम नाम लेने वालों का विरोध किया जा रहा है।

उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर इस्तीफे का लेटर पोस्ट कर लिखा- आज अत्यंत पीड़ा के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता त्याग रही हूं व अपने पद से इस्तीफा दे रही हूं। हां मैं लड़की हूं और लड़ सकती हूं, और वही अब मैं कर रहीं हूं। अपने व देशवासियों के न्याय के लिए मैं निरंतर लड़ती रहूंगी।

आदिकाल से ये स्थापित सत्य है कि धर्म का साथ देने वालों का विरोध होता रहा है। हिरण्यकश्यप से लेकर रावण और कंस तक इसका उदाहरण हैं। वर्तमान में प्रभु श्री राम का नाम लेने वालों का कुछ लोग इसी तरह विरोध कर रहे हैं। हर हिंदू के लिए प्रभु श्री राम की जन्मस्थली पवित्रता के साथ बहुत मायने रखती है और राम लल्ला के दर्शन मात्र से जहां हर हिंदू अपना जीवन सफल मानता है वहीं कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

मैंने जिस पार्टी को अपने 22 साल से ज़्यादा दिए, जहां एनएसयूआई से लेकर एआईसीसी के मीडिया विभाग में पूरी ईमानदारी से काम किया, आज वहां ऐसे ही तीव्र विरोध का सामना मुझे करना पड़ा है क्योंकि मैं अयोध्या में राम लल्ला के दर्शन करने से खुद को रोक नहीं पाई।

मेरे इस पुनीत कार्य का विरोध इस स्तर तक पहुंच गया कि मेरे साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुए घटनाक्रम में मुझे न्याय देने से इनकार कर दिया गया। मैंने हमेशा ही दूसरों के न्याय के लिए हर मंच से लड़ाई लड़ी है, किंतु जब स्वयं के न्याय की बात आई तो पार्टी में मैंने स्वयं को हारा हुआ पाया।

प्रभु श्री राम की भक्त व एक महिला होने के नाते मैं बेहद आहत हूं। बार बार पार्टी के समस्त शीर्ष नेताओं को अवगत कराने के बाद भी जब मुझे न्याय नहीं मिला, इससे आहत होकर मैंने आज यह कदम उठाया है।