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पाकिस्तानी श्रद्धालुओं पर लगाए रोक, न दे वीजा : अजमेर शरीफ के दीवान की सरकार से मांग

ajmer sharifपुलवामा में हुए आतंकी हमले से ना सिर्फ देश देश रोष में है बल्कि विदेशों में भी इसकी घोर निंदा की जा रही है। इस हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को दिया हुआ मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस ले लिया है। अब अजमेर शरीफ के दीवान सै्ययद जैनुल आबेदीन अली खान ने शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा भारत सरकार सलाना उर्स में आने वाले यात्रियों के जत्थे पर रोक लगाए।

देश की सुरक्षा के लिए है खतरा

उन्होंने कहा, '' भारत सरकार अब आगामी अजमेर शरीफ उर्स में किसी भी पाकिस्तानी जत्थे को आने की अनुमति ना दें। पाकिस्तान हुकूमत भारत भेजने वाले जत्थे में अपने एजेंट भी भेजता है जिससे कई गुप्त जानकारियां भारत से हासिल करता है। जो देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरनाक है'' उन्होंने कहा पाकिस्तान से अजमेर शरीफ आने वाले लोगों को वीजा न दिया जाए । 

पहले भी वीजा रद्द होने पर बौखला चुका है  पाकिस्तान

बता दें कि 19-29 मार्च 2018 के बीच अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर उर्स के अवसर पर शामिल होने के लिए 503 पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों को वीजा नहीं दिया गया था जिसपर पाकिस्तान नाराजगी जाहिर कर चुका है।
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हर साल लगभग 3 लाख पाकिस्तानी पहुंचते हैं दरगाह

12वीं सदी में बनी इस दरगाह से हुक्मरानों का प्यार काफी पुराना है। बता दें कि मुगल बादशाह अकबर भी यहां औलाद के लिए दुआ मांगने आए थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, हर साल करीब 3 लाख लोग पाकिस्तान से आते हैं। पाकिस्तानी हुक्मरानों को सूफी की दरगाह खासतौर पर अपनी ओर खींचती रही है। जरदारी, बेनजीर भुट्टो, पूर्व राष्ट्रपति जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ भी यहां दुआ मांगने आ चुके हैं।