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यमुना के पानी में जहर : फर्जीवाड़े पर उतरी AAP, केजरीवाल ने एडिटेड वीडियो किया शेयर: नूपुर शर्मा का भी एडिटेड वीडियो शेयर कर ख़राब किया गया था देश का माहौल; हरियाणा के CM ने खुद पीकर दी ‘शुद्धता’ की गारंटी, देखिए Video

याद हो, अरविन्द केजरीवाल ने एक बार कहा था कि मैं anarchy हूँ, जिसे फ्री की रेवड़ियों के लॉलीपॉप के जरिए साबित करने के बाद अब जिस तरह अरविन्द केजरीवाल पार्टी द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा यमुना जल पीने का प्रसारित होने वाले एडिटेड वीडियो ने नूपुर शर्मा प्रकरण की याद ताजा कर दी है। जिस तरह जेहादी पत्रकार मोहम्मद जुबेर द्वारा नूपुर शर्मा का एडिटेड वीडियो प्रसारित कर "सिर तन से जुदा गैंग" ने देश में अशांति फैला दी थी, लगता है मुस्लिम कट्टरपंथियों की इसी छिछोरी हरकत को केजरीवाल ने अपनाकर देश में अशांति फ़ैलाने की कोशिश की जा रही है। गनीमत यह है कि उस समय सिर्फ TimesNow चैनल ने असली और एडिटेड वीडियो को अपने दर्शकों को दिखाने की हिम्मत की थी क्योकि इसी चैनल पर हुई चर्चा को मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिन्दू द्वारा इनकी मजहबी किताब में लिखी बात को बोल दिया था। 
गनीमत है आज मीडिया दोनों वीडियो दिखाने की हिम्मत कर रहा है, अगर यही हिम्मत नूपुर शर्मा के समय दिखाई होती किसी कन्हैया को जान से हाथ नहीं धोना पड़ता और न ही किसी जज को नूपुर पर तल्ख़ टिप्पणी(मौखिक) करने की हिम्मत नहीं होती।    
दिल्ली आने वाली पानी में जहर मिलाने के आरोप के बाद हरियाणा की एक अदालत ने दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजा है। केजरीवाल ने दावा किया था कि दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने ज़हर का पता लगाकर पानी को दिल्ली पहुँचने से रोक दिया। हालाँकि, DJB ने इससे इनकार किया है। इससे पहले चुनाव आयोग ने भी केजरीवाल को नोटिस दिया था। उन्होंने अब सीएम सैनी को लेकर झूठ फैलाया है।

हालाँकि, अरविंद केजरीवाल अपने बेबुनियाद आरोप से पीछे नहीं हट रहे हैं। वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केजरीवाल के आरोपों को नकारते हुए दिल्ली में यमुना का पानी पीते हुए वीडियो जारी किया था। अब यमुना की पानी का घूँट लेते हुए सीएम सैनी का एक एडिटेड वीडियो पोस्ट करते हुए केजरीवाल ने दावा किया है कि सीएम ने पानी पीने का नाटक किया था। वास्तव में उन्होंने पानी नहीं पी थी।

अरविंद केजरीवाल का दावा है कि सीएम सैनी ने पानी पीने का नाटक किया और फिर मुँह में लिए पानी को वापस यमुना में थूक दिया। केजरीवाल ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी ने यमुना का पानी पीने का ढोंग किया… और फिर वही पानी वापस यमुना में थूक दिया।”

अरविंद केजरीवाल ने आगे दावा किया, “जब मैंने कहा कि अमोनिया की मिलावट के कारण यमुना का पानी दिल्लीवालों की जान के लिए ख़तरा हो सकता है तो इन्होंने मुझ पर FIR करने की धमकी दी। जिस ज़हरीले पानी को ये खुद नहीं पी सकते, वही पानी दिल्ली की जनता को पिलाना चाहते हैं। मैं ऐसा हरगिज़ नहीं होने दूँगा।

हालाँकि, केजरीवाल ने इस वीडियो का एक छोटा सा हिस्सा एडिट करके डाला है। यह वीडियो केजरीवाल द्वारा पोस्ट की गई वीडियो से चार गुना अधिक लंबी है। ANI द्वारा जारी ऑरिजिनल वीडियो में देखा जा सकता है कि सीएम सैनी ने नदी से पानी का एक घूँट लिया और फिर उसे थूक दिया। संभवत: वे अपना मुँह धो रहे थे। इसके बाद उन्होंने एक अंजुली पानी मुँह में लेकर उसे पी लिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीएम सैनी दिल्ली के पल्ला गाँव में यमुना नदी के किनारे गए था। वहाँ उन्होंने अरविंद केजरीवाल के पानी में जहर मिलाने के दावे को गलत साबित करने के लिए नदी का पानी पीया। अरविंद केजरीवाल के इस दावे के बाद उनके खिलाफ हरियाणा के सोनीपत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने केजरीवाल को 17 फरवरी को पेश होने के लिए कहा है।

उधर, चुनाव आयोग ने भी अरविंद केजरीवाल से नोटिस भेजकर इस बुधवार (29 जनवरी 2025) की शाम 8 बजे तक जवाब माँगा था। केजरीवाल के बयान पर आयोग ने कहा था कि इस तरह के आरोपों से क्षेत्रीय समूहों के बीच दुश्मनी, पड़ोसी राज्यों के निवासियों के बीच तनाव और पानी की कमी को लेकर कानून-व्यवस्था की समस्याएँ हो सकती हैं।

नोटिस में विभिन्न निर्णयों और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि राष्ट्रीय एकता और सार्वजनिक सद्भाव के खिलाफ भ्रामक बयान देने के लिए केजरीवाल को तीन साल तक की जेल हो सकती है। वहीं, अपने जवाब में केजरीवाल ने कहा कि हाल के दिनों में बीजेपी शासित हरियाणा से मिल रहा पानी अत्यधिक दूषित और जहरीला रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

दिल्ली का बॉस कौन, सुप्रीम कोर्ट ने खींच दी लकीर: पुलिस-कानून व्यवस्था-जमीन केंद्र की, ट्रांसफर-पोस्टिंग सहित बाकी सब NCT सरकार की


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के अधिकार के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने आज (11 मई 2023) अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं पर दिल्ली में चुनी गई सरकार का अधिकार होगा। इसके अलावा अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े निर्णय भी दिल्ली सरकार कर पाएगी। वहीं केंद्र का अधिकार दिल्ली में व्यवस्था, पुलिस और जमीन से जुड़े मामलों में रहेगा।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी और एलजी विनय कुमार सक्सेना के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्णा मुरारी, जस्टिस हीमा कोहली और जस्टिस पीएमस नरसिम्हा ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया।

पीठ ने कहा राज्य के पास भी शक्ति है, लेकिन राज्य की कार्यकारी शक्ति, संघ के मौजूदा कानून के अधीन होगी। कोर्ट ने कहा कि वो साल 2019 के जस्टिस भूषण के फैसले से सहमत नहीं है। प्रशासन चलाने की असल शक्ति निर्वाचित सरकार के पास होनी चाहिए। अगर संवैधानिक रूप से चुनी गई सरकार को ये अधिकार नहीं मिलते तो जवाबदेही के लिए ट्रिपल चेन का सिद्धांत निरर्थक हो जाएगा।

अदालत ने यह भी कहा कि अगर अधिकारी मंत्रियों को रिपोर्ट करना बंद कर देते हैं या उनके निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत प्रभावित होता है। अधिकारियों को लगता है कि वे सरकार के नियंत्रण से अछूते हैं, जो जवाबदेही को कम करेगा और शासन को प्रभावित करेगा।

इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा दिल्ली में पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड पॉवर एलजी के पास ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली अन्य केंद्रशासित प्रदेशों जैसा प्रदेश नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विधानसभा के पास भूमि, लोक व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर सूची 2 में सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति है।

दिल्ली सरकार और केंद्र के बी कामकाज के अधिकार को लेकर विवाद पुराना है। इस संबंध में एक फैसला 4 जुलाई 2018 को भी आया ता। हालाँकि सर्विसेज और अधिकारियों पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को आगे की सुनवाई पर छोड़ दिया गया था। इसके बाद राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक सेवाएँ के नियंत्रण का अधिकार किसके पास रहेगा इस पर एक फैसला साल 2019 में आया। लेकिन तब पीठ के दोनों जजों के मत अलग-अलग थे। आगे यह मामला मुख्य न्यायाधीश को रेफर किया गया ताकि तीन जजों की बेंच गठित हो सके। अंत में यह मामला पाँच जजों की पीठ ने सुना और 18 जनवरी 2023 को फैसला सुरक्षित रख लिया।