Showing posts with label prostitution. Show all posts
Showing posts with label prostitution. Show all posts

बांग्लादेश में HIV का epicenter बना रोहिंग्या कैंप; पैसा कमाने के लिए रोहिंग्यों के पास बस 2 ही काम-सेक्स और ड्रग्स

भारत में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के बचाव में खड़े होने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों को बांग्लादेश में रोहिंग्यों द्वारा फैलाई जा रही AIDS जैसी खतरनाक बीमारी से आंखें खोलनी चाहिए और जनहित में इनको बाहर करने राज्य और केन्द्र सरकार का साथ देना चाहिए। रोहिंग्या अपनी जीविका के लिए कोई भी गिरा हुआ काम करने को तैयार रहते हैं।  
बांग्लादेश के स्थानीय मीडिया ने एक न्यूज पब्लिश की है, जो चौंकाती है। बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्व समुद्र तट पर स्थित सिटी कॉक्स बाजार से एक होश उड़ाने वाली खबर है। यहां की रोहिंग्या बस्ती में एड्स(AIDS) के मरीज बढ़ गए हैं। आसपास की बांग्लादेशी बसाहटो में भी यह हाल है। पिछले एक साल में 115 रोहिंग्या और 10 बांग्लादेशी इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। बता दें कि कॉक्स बाजार में स्थित रिफ्यूजी कैम्प में बड़ी संख्या में रोहिंग्या रहते हैं। यहां वेश्यावृत्ति आम बात हो गई है।

बांग्लादेश में HIV संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मानवीय संगठनों में गंभीर चिंता पैदा हो गई है। विश्व एड्स दिवस (1 दिसंबर) पर जारी सरकारी आँकड़ों के अनुसार, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच 1,891 नए मामले दर्ज किए गए। यह हाल के वर्षों में दर्ज हुई सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। पिछले वर्ष से तुलना करें तो यह संख्या 453 अधिक है।

इन नए मामलों में 217 संक्रमण अकेले कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों में मिले और विशेषज्ञ ‘गंभीर रूप से चिंताजनक’ बता रहे हैं। यह इसलिए भी जोखिम की बात है कि विस्थापित आबादी पहले से ही संवेदनशील और जोखिमग्रस्त मानी जाती है।

बांग्लादेश में AIDS के आँकड़े

 रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश में HIV का पहला मामला 1989 में सामने आया था। इस साल तक HIV पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 14,313 थी। इनमें से 2,666 की मौत हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि HIV से संभावित रूप से संक्रमित लगभग 18% लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति से अनजान हैं यानी उन्हें संक्रमण का अंदाजा ही नहीं है। ऐसे मामलो की संख्या करीब 17,480 है।

बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत चलते वाले राष्ट्रीय एड्स और यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में AIDS के 1,438 नए मामले और 195 मौतें दर्ज हुई थीं जबकि 2023 में संक्रमण के 1,276 मामले और 266 मौतें हुईं। हालाँकि, आधिकारिक रूप से जिन मरीजों की पहचान की गई है, उनकी संख्या काफी कम है।

नए आँकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक साल में 14.21 लाख लोगों ने HIV टेस्ट कराया जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.91 लाख कम है। इसके अलावा, इसी अवधि के दौरान स्वास्थ्य जाँच के तहत 10.72 लाख लोगों का HIV टेस्ट किया गया जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.34 लाख अधिक है।

अस्पतालों की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं का संकट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश में HIV रोगियों के लिए केवल एक ही विशेष अस्पताल, ढाका स्थित मोहाखाली संक्रामक रोग अस्पताल है। और यहाँ भी HIV/AIDS मरीजों के लिए सिर्फ 40 बेड उपलब्ध हैं। ये बेड लगभग पूरे साल भरे रहते हैं, जिसके चलते कई मरीजों को फर्श पर इलाज करवाना पड़ता है।

सर्जरी की ज़रूरत वाले मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और डॉक्टरों का कहना है कि बुनियादी ढाँचे की कमी मरीजों की जान पर खतरा बन रही है। कार्यक्रम के निदेशक डॉ. एम. खैरुज्जमान के अनुसार इसकी जाँच के लिए टेस्टिंग किटों की भी कमी है। साथ ही, इलाज करने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की भी जरूरत है।

प्रवासी श्रमिक और सामाजिक कलंक का डर

इन सबके अलावा HIV/AIDS से जुड़ा कलंक भी एक बड़ी बाधा है। बड़ी संख्या में लोग समाज में बदनामी के डर से इसकी जाँच तक कराने या फिर इलाज कराने से बचते हैं। बांग्लादेश में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों को भी HIV का बड़ा वाहक माना जाता है। मध्य पूर्वी देशों से लौटने वाले कई श्रमिक HIV के साथ लौटते हैं और अंतत: बांग्लादेश में HIV के मामलों में बढ़ोतरी की वजह बनते हैं।

बांग्लादेश में ‘खास आबादी’ के कारण बढ़ रहे HIV के केस

बांग्लादेश में नैशनल AIDS/STD कंट्रोल प्रोग्राम की डिप्टी डायरेक्टर जुबैदा नसरीन देश में बढ़ते मामलों के लिए ‘खास आबादी’ में की गई टेस्टिंग को जिम्मेदारी बताती हैं। इस खास आबादी में ‘ड्रग्स लेने वाले लोग, महिला और पुरुष सेक्स वर्कर और ट्रांसजेंडर लोग’ शामिल हैं। नवंबर-अक्टूबर के दौरान इस आबादी के 1.17 लाख लोगों का टेस्ट किया गया जो पिछले साल से करीब 20,000 अधिक है।

बांग्लादेश में नई अंतरिम सरकार के बाद भी दिक्कतें बढ़ी हैं। अधिकारियों ने कहा कि पिछले साल मध्य में सरकारी प्रोग्राम के खत्म होने से खास आबादी के बीच कंडोम, सुई और सिरिंज बांटने जैसी बचाव सेवाओं में रुकावट आई है।

डेटा के मुताबिक, नए मामलों में 56% मुख्य आबादी के, 12% माइग्रेंट, 11% रोहिंग्या और बाकी आम लोग थे। इनमें भी 81% पुरुष, 18% महिलाएँ और 1% ट्रांसजेंडर थे। आँकड़ों को और गहराई से देखने पर पता चलता है कि इनमें भी शादीशुदा लोगों की संख्या अधिक थी। 52% शादीशुदा और 42% सिंगल थे जबकि अन्य लोग विधवा या तलाकशुदा थे।

बांग्लादेश में नहीं कम हो रहे HIV के मामले

बांग्लादेश के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी देश में HIV इन्फेक्शन और मौतों को लेकर परेशान हैं। 2010 से दुनिया भर में HIV इन्फेक्शन में 40% और AIDS से जुड़ी मौतों में 56% की कमी आई है। हालाँकि, बांग्लादेश के लिए इस सफलता को दोहराना अभी भी चुनौती ही बना हुआ है। हाल के वर्षों में टेस्टिंग बढ़ी है लेकिन सरकार के रोकथाम के उपाय अभी भी बढ़ती मौतों की संख्या में दिखाई देने वाली तेजी को कम नहीं कर पा रहे हैं।

DGHS अब डेडिकेटेड सेंटर्स पर HIV मरीजों के लिए टेस्टिंग जारी रखने और दवा देने के लिए विदेशी डोनर्स पर निर्भर है। हालाँकि, यहाँ भी फंडिंग की कमी के कारण 25 जिले इन सेवाओं की कवरेज से बाहर हैं। बांग्लादेश में HIV के केसों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन इनके लिए बचाव की सेवाओं की भारी कमी है और इसके चलते हेल्थ एक्सपर्ट्स में चिंता बढ़ गई है।

बांग्लादेश ने 2030 तक AIDS को खत्म करने का टारगेट रखा है लेकिन जिस तरह मामलों में कमी की जगह बढ़ोतरी हो रही है इस लक्ष्य का हासिल होना लगभग नामुमकिन ही लग रहा है। इसके उलट डर है कि प्रिवेंटिव सर्विस के लिए कम फंडिंग से पॉजिटिविटी रेट और बढ़ सकता है।

2015 में शुरू किया गया था कॉक्स बाजार में एड्स जांच कार्यक्रम
कॉक्स बाजार जिला सदर अस्पताल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) और एचआईवी फोकल पर्सन डॉ. आशिकुर रहमान ने बताया कि 2015 में कॉक्स बाजार सदर अस्पताल में HIV जांच कार्यक्रम शुरू हुआ था। 6 जुलाई तक 710 लोगों में एचआईवी का पता चला है। ट्रांसजेंडर लोगों में भी एचआईवी के कीटाणु पाए गए हैं और इस बीमारी से 61 रोहिंग्या समेत 118 लोगों की मौत हो चुकी है। अशिकुर ने कहा कि विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की 12 टीमें उखिया और टेकनाफ में फील्ड स्तर पर जागरूकता पैदा करने के लिए काम कर रही हैं। इसके अलावा जिला सदर अस्पताल में एड्स/एचआईवी की रोकथाम के लिए विभिन्न पहल की गई हैं। कॉक्स बाजार के सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवर डॉ. मोहम्मद महबूबुर रहमान ने कहा: "एचआईवी के प्रसार में बहुत अधिक अज्ञानता और सामाजिक पूर्वाग्रह है। एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति उनसे संक्रमित होने के डर से समाज से अलग-थलग पड़ जाते हैं। और जिनके शरीर में यह वायरस होता है, वे इलाज कराने से कतराते हैं।"

असुरक्षित यौन संबंध बने जानलेवा
कॉक्स बाजार सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष अबू मोर्शेद चौधरी खोका ने कहा कि रोहिंग्या कॉक्स बाजार इलाके में होटल और मोटल में घूमते दिख जाएंगे। वे स्थानीय लोगों से असुरक्षित यौन संबंध बनाना रहे हैं, जिससे एचआईवी फैल रहा है।

एक खबर यह भी: कॉक्स बाजार में याबा गोलियां, क्रिस्टल मेथ 26 सी जब्त
बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के सदस्यों ने रविवार को कॉक्स बाजार के टेकनाफ उपजिला में एक अभियान के दौरान 25.89 करोड़ रुपये मूल्य के क्रिस्टल मेथामफेटामाइन और याबा की गोलियां जब्त कीं। टेकनाफ बटालियन (बीजीबी-2) के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल शेख खालिद मोहम्मद इफ्तेखार ने बताया कि सूचना मिलने पर बीजीबी-2 की एक टीम ने एक नाव को रोका, जिसमें म्यांमार से तीन से चार संदिग्ध तस्कर जलियर द्वीप की ओर जा रहे थे। हालांकि तस्कर नफ नदी में कूद गए और भागने में सफल रहे। बाद में, बीजीबी के लोगों ने 4 किलो से अधिक क्रिस्टल मेथम्फेट जब्त किया।

कॉक्स बाजार क्या है?
कॉक्स बाजार बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित एक शहर है। यह अपने बहुत लंबे रेतीले समुद्र तट के लिए जाना जाता है। यह उत्तर में सी बीच से लेकर दक्षिण में कोलाटोली बीच तक फैला हुआ है। यहां अग्गामेदा ख्यांग मठ में कांस्य की मूर्तियां और सदियों पुरानी बौद्ध पांडुलिपियां हैं। शहर के दक्षिण में हिमचारी नेशनल पार्क के उष्णकटिबंधीय वर्षावन में झरने और कई पक्षी हैं। उत्तर में समुद्री कछुए पास के सोनादिया द्वीप पर प्रजनन करते हैं। कॉक्स बाजार चटगांव से 150 किमी दक्षिण में स्थित है। 

गैंगस्‍टर की बीवी भी निकली लेडी डॉन, खाकी से लेकर खादी वालों तक थी पहुंच

lady don of bihar patima arrestबिहार में लूट-पाट गैंग के सरगना की बीवी भी डॉन निकली। वो लेडी डॉन, जिसे पुलिस ने पटना से रंगदारी वसूलते पकड़ा है। वह घर पर जिस्‍मफरोशी का धंधा भी चलाती थी। उस पर स्मैक, गांजा, हेरोइन आदि नशीली चीजें खिलाने के भी आरोप हैं। कुछ ​युवतियां का यहां तक भी कहना है कि वह उन्हें इंजेक्शन लगवा देती थी, ताकि कोई हवस पूरी कर सकें।
लेडी डॉन के पकड़े जाने का यह केस है राजधानी पटना के गांधी मैदान थाना का। यहां पांडव गिरोह के सरगना संजय की पहली पत्नी प्रतिमा सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ी है। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई लड़कियां सामने आई हैं, जिन्हें प्रतिमा ने तड़पाया था। लड़कियों के अनुसार, प्रतिमा की पुलिस वालों से लेकर नेता व अनेक रसूखदारों तक पहुंच है। वे सब उसके ग्राहक होते थे। प्रतिमा अपने घर से देह व्‍यापार का धंधा चलाती थी।
हवस बुझाने बड़े-बड़े लोग आते थे एक पीड़िता ने बताया कि प्रतिमा पटना के एक्जीबिशन रोड स्थित जुबेदा काम्पलेक्स के अपने फ्लैट संख्या-304 में वेश्यावृत्ति (prostitution) कराती है। खादी से लेकर खाकी तक लोगों को वो लड़कियां की होम सप्लाई भी करती थी। उसके एक मकान पर नित-नए लोग आते थे। प्रतिमा खाने की चीजों में नशीले पदार्थ मिला देती थी, जिससे लडकियां बेहोस हो जातीं। फिर उनका रेप कराने के बाद वीडियो बनवा लेती, उस वीडियो का भय दिखाकर शोषण करती थी।
फ्लैट में काफी कुछ था अंदर प्रतिमा के फ्लैट में काफी मात्रा में स्मैक, गांजा, हेरोइन आदि नशीली वस्तुएं रखी होती थीं। वह पहले भी रंगदारी मामले में पकड़ी जा चुकी थी। 

मां की मदद के लिए पार्टियों में नाची, प्रॉस्टिट्यूट बनी

मां की मदद के लिए पार्टियों में नाची, प्रॉस्टिट्यूट बनी, फिर बॉलीवुड ने बदली Life
आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक 
शगुफ्ता रफीक फिल्म इंडस्ट्री में पर्दे के पीछे का वो नाम है, जिसे कम ही लोग जानते हैं। लेकिन उनके स्ट्रगल की स्टोरी बहुत ही दर्द भरी है। कम ही लोग जानते होंगे कि 'आशिकी 2' जैसी फिल्मों की ये राइटर 17 साल की उम्र में प्रॉस्टिट्यूट बन गई थी। यह खुलासा खुद शगुफ्ता ने एक इंटरव्यू के दौरान किया था। उन्होंने कहा था, "साढ़े सत्रह साल की उम्र में मैं प्रॉस्टिट्यूट बन गई थी। एक अजनबी के साथ वर्जिनिटी खोना बहुत दर्दनाक होता है। 27 साल की उम्र तक मैं एक आदमी से दूसरे आदमी के पास जाती रही। मेरी मां यह जानती थी कि मैं प्रॉस्टिट्यूशन कर रही हूं।" 
मां को लेकर रहा कन्फ्यूजन
शगुफ्ता ने इस इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वे अपनी बायलॉजिकल मां को नहीं जानती थीं। उनके मुताबिक, वे अनवरी बेगम (जिन्होंने उन्हें गोद लिया था) को अपनी मां के रूप में देखती थीं। वे कहती हैं, "उस वक्त मेरे जन्म को लेकर तीन तरह की बातें कही जाती थीं। एक, कि मैं अपने जमाने की फेमस एक्ट्रेस और डायरेक्टर बृज सदाना की पत्नी (कमल सदाना की मां) सईदा खान की बेटी हूं। दूसरी, कि मैं किसी ऐसी मां की बेटी हूं, जिसने किसी अमीर आदमी से संबंध बनाए और पैदा करके मुझे छोड़ दिया। तीसरी, यह कि मेरे पेरेंट्स झोपड़पट्टी में रहते हैं और उन्होंने मुझे फेंक दिया था। मैं दो साल की थी, जब सईदा की शादी बृज साहब से हुई। अक्सर, जब लोग मुझे अनवरी बेगम के साथ देखते थे तो कहते थे, 'नानी के साथ जा रही हो।'
मां की मदद के लिए पार्टियों में नाची, प्रॉस्टिट्यूट बनी, फिर बॉलीवुड ने बदली Life
मेरे साथ जानवरों की तरह सलूक हुआ
शगुफ्ता की मानें तो बचपन में लोग उन्हें हरामी लड़की कहा करते थे। इस वजह से वे रोया करती थीं और अकेली रहा करती थीं। वे कहती हैं, "कई ऐसे सस्पेंस थे, जिनकी वजह से मैं क्रूर हो गई। मैंने स्कूल छोड़ दिया। मैं लोगों से लड़ती थी। इसलिए नहीं कि मैं उनसे नफरत करती थी। बल्कि इसलिए कि मुझे लगता था कि वे मुझसे नफरत कर रहे हैं। फिर मैं सोचती कि ऐसी महिला क्यों होनी चाहिए, जो अपने पति के डर से मुझे अपना भी नहीं सकती। बच्चा तो एक कुत्ता भी पैदा करता है। मैं एक जानवर की तरह थी, जिसे पैदा किया और फेंक दिया। मैंने यह मानने से इनकार कर दिया कि अनवरी बेगम मेरी मां है। हालांकि, एक वही थीं, जो हमेशा मेरे साथ रहीं। अनवरी के दूसरे पति का नाम मोहम्मद रफीक था। यही वजह है कि मैं शगुफ्ता रफीक बन गई।"
बृज साहब करते थे नफरत
"बृज साहब मुझसे नफरत करते थे। क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि मैं कौन हूं। इसकी एक वजह यह भी थी कि हम (अनवरी बेगम और शगुफ्ता रफीक) उन पर फाइनेंशियली निर्भर थे। बृज साहब का गुस्सा जायज था। उन्हें लगता था कि जब अनवरी बेगम का एक बेटा है तो वे क्यों उनकी मदद करें। वे बहुत कन्फ्यूजन में थे। उनकी फ़िल्में फ्लॉप हो रही थीं और यही वजह है कि उन्होंने शराब के नशे में पत्नी सईदा, बेटी नम्रता और खुद को गोली मार ली। नौकरानी ने हमें आकर यह बताया। तब मैं 25 साल की थी, जब सईदा आपा की डेथ हो गई।"
पैसों के लिए नाचना शुरू किया
शगुफ्ता आगे बताती हैं, "जब मैंने देखा कि मेरी मां अनवरी बेगम, जो कभी बहुत धनी हुआ करती थी, ने सरवाइव करने के लिए पहले अपनी चूड़ियां और बाद में बर्तन तक बेच डाले। तब मैंने कत्थक सीखा। जब मैं 12 साल की थी, तब मैंने प्राइवेट पार्टियों में नाचना शुरू कर दिया। इन पार्टियों में सम्मानित लोग मिस्ट्रेस और कॉल गर्ल्स के साथ आते थे। इनमें हाई रैंकिंग ऑफिसर्स, पुलिस, मंत्री, इनकम टैक्स ऑफिसर्स पैसा उड़ाते थे और मैं उसे झोली में समेट लिया करती थीं। 17 साल की उम्र तक मैंने यही सब किया।"
27 साल की उम्र में दुबई चली गईं
शगुफ्ता के मुताबिक, 17 से 27 साल तक वे प्रॉस्टिट्यूशन में रहीं। इसके बाद किसी ने सलाह दी कि उन्हें दुबई जाना चाहिए। क्योंकि वहां वे बार डांसर बनकर 10 गुना ज्यादा पैसा कमा सकती हैं। शगुफ्ता ने ऐसा ही किया। वे दुबई गईं। लेकिन अरब लोगों के डर से वे वहां प्रॉस्टिट्यूशन से दूर रहीं। जब उनकी मां बीमार पड़ी तो उन्हें मुंबई लौटना पड़ा। इस दौरान वे मुंबई और बेंगलुरु में शोज करती रहीं। 1999 में शगुफ्ता की मां अनवरी बेगम की कैंसर के चलते डेथ हो गई।
2006 में मिला लिखने का मौक़ा
शगुफ्ता के मुताबिक, 2002 में 36 साल की उम्र में एक मुलाकात के दौरान उन्होंने महेश भट्ट से कहा कि वे लिखना चाहती हैं। हालांकि, 2006 तक मौक़ा नहीं मिला। मोहित सूरी की फिल्म 'कलयुग' के दो सीन लिखने के बाद उन्हें 'वो लम्हे', 'आवारापन', 'राज 2', 'जिस्म 2', 'मर्डर 2', 'राज 3' और 'आशिकी 2' जैसी फिल्मों के लिए लिखने का मौक़ा मिला। शगुफ्ता महेश भट्ट को अपने जुड़वां भाई के रूप में देखती हैं। उनके मुताबिक, उनकी और महेश भट्ट की जन्मतिथि एक ही है।