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अगर ऐसा हुआ तो गांधी- नेहरू के समकक्ष खड़े होंगे मोदी: शब्बीर शाह

Narendra Modiप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। बीते छह बरस में पीएम नरेंद्र मोदी ने कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनमें उनकी दूरगामी सोच झलकती है। इसमें- नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), आतंकवादियों के गढ़ में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और हाल में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करते हुए जेएंडके और लद्दाख को विभाजित करना प्रमुख रूप से शामिल है।
हालांकि, जब पांच अगस्त को संसद की पटल पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, तो सभी मोदी सरकार के निर्णय से हैरान रह गए। सबको लगा कि केंद्र सरकार ने एक झटके में कैसे कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया। लेकिन एक नेता को इस बात का बहुत पहले से ही आभास था और वह हैं कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह।
वैसे तो,पीएम मोदी द्वारा लिए गए निर्णय की तारीफ भारत के अलावा दुनिया के तमाम नेता भी करते रहे हैं, लेकिन इसमें नया नाम जुड़ गया है कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह का। शब्बीर शाह ने कहा था कि अगर कोई कश्मीर को लेकर बड़ा निर्णय ले सकता है, तो वह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
'पीएम मोदी ही सक्षम हैं'
इस बात का जिक्र जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य सचिव मूसा रजा ने अपने किताब 'कश्मीर: लैंड ऑफ रिग्रेटस' (Kashmir: Land of Regrets) में किया है। मूसा रजा ने कहा है कि शब्बीर शाह ने उनसे 2016 में ही कहा था, 'लोकसभा में अपनी पार्टी के बहुमत, आरएसएस की लोकप्रियता और समर्थन के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर पर 'साहसिक निर्णय' के लिए एकमात्र सक्षम व्यक्ति हैं।' बता दें कि मूसा रजा 1988 से 1990 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव थे।

गांधी और नेहरू के समकक्ष होंगे पीएम मोदी'
रजा ने अपने किताब में लिखा है कि नोटबंदी के एक दिन बाद 9 नवंबर 2016 को वह छह दिवसीय यात्रा पर श्रीनगर गए थे। उन्होंने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में घाटी की स्थिति का जमीनी आकलन करने गए थे। रजा ने कहा कि शाह ने उनसे कहा, 'अगर नरेंद्र मोदी ऐसा करने में सफल हुए तो वह महात्मा गांधी और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समकक्ष खड़े हो जाएंगे।

'मुश्किल से जन्म लेते हैं ऐसे नेता'
रजा ने कहा जब वह कश्मीर यात्रा पर गए थे तब उनकी मुलाकात शब्बीर शाह से हुई थी। शाह ने नोटबंदी को लेकर रजा से कहा, 'नोटबंदी के फैसले ने न केवल काले धन की कमर तोड़ी, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात में भी भाजपा की संभावनाओं को भी खतरे में डाल दिया। एक ऐसा नेता बहुत मुश्किल से ही जन्म लेता है जो इतने विशाल बहुमत मिलने के बाद जोखिम उठा सकता है।'

'खोई जमीन वापस पाना होगा'
रजा ने कहा कि सरकार ने किसी को बात करने के लिए नहीं छोड़ा है। कश्मीर की मुख्यधारा की पार्टियां जिसमें कांग्रेस,पीडीपी औऱ एनसी अपना चेहरा खो सकती है और निकट भविष्य में उन पर कोई विश्वास नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के नेताओं को खोई जमीन वापस पाने की जरूरत है। मूसा ने कहा कि उन्हें इस बात का भय है कि जो मुख्यधारा के नेताओं द्वारा जगह खाली हुई है, उसे कहीं अलगाववादी और आतंकवादी न भरें।

'आग में तेल डालेगा पाकिस्तान'
मूसा ने कहा, 'वो (अलगाववादी और आतंकवादी) जाएंगे और कश्मीरियों से कहेंगे कि ये अब्दुल्ला, मुफ्ती .. सब धोखेबाज हैं, सिर्फ हम तुम्हारे साथ हैं।' उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ पाकिस्तान बहुत खुश होगा और आग में तेल डालने का काम करेगा।

मसर्रत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को NIA ने किया गिरफ्तार

Asia Andrabi
आसिया अंद्राबी  |  तस्वीर साभार: BCCL
भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के केन्द्रीय गृह मंत्री बनने के बाद से कश्मीर समस्या पर मंथन शुरू होते ही, बड़े स्तर पर वर्षों से शहंशाही ज़िंदगी जीने वाले अलगाववादियों के विरुद्ध कार्यवाही ने गति पकड़ ली है। तुष्टिकरण के चलते पिछली सरकारें उन पर कोई कार्यवाही करने की बजाए दामादों की पाल, जनता में डर पैदा कर रखा था। परन्तु केन्द्र में सत्ता परिवर्तन ने सारे पासे ही पलट दिए। लोगों को डराने वाले ही अब डर के साये में जीने को मजबूर हैं। 
दिल्ली की एक अदालत ने आतंकवादी गतिविधियों के लिये धन मुहैया कराने के एक मामले में अलगाववादी मसरत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को दस दिनों के लिये एनआईए की हिरासत में भेज दिया। यह मामला 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के सरगना और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद से जुड़ा हुआ है।
एक वकील ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश राकेश स्याल की अदालत में बंद कमरे में चल रही सुनवाई के दौरान तीनों को गिरफ्तार किया और 15 दिनों तक उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की। आरोपियों के वकील एम एस खान ने पीटीआई को बताया कि आसिया और शाह अलग-अलग मामलों में पहले से ही हिरासत में हैं, जबकि आलम को ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू- कश्मीर से लाया गया था।
एनआईए ने 2018 में सईद, एक अन्य आतंकवादी सरगना सैयद सलाउद्दीन और दस कश्मीरी अलगाववादियों के खिलाफ घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के लिये कथित तौर पर धन मुहैया कराने और अलगाववादी गतिविधियों के मामले में आरोपपत्र दायर किया था।इसने कहा कि आरोपियों के खिलाफ जिन अपराधों के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है उनमें भादंसं की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धाराएं शामिल हैं।
एनआईए के मुताबिक, मामला 30 मई 2017 को दर्ज हुआ था और पहली गिरफ्तारी पिछले वर्ष 24 जुलाई को हुई थी। दरअसल जांच एजेंसी तीनों आरोपियों से पत्थरबाजी और टेरर फंडिंग मामले में और इसके पीछे शामिल लोगों के बारे में जानकारी हासिल करना चाहती है।

कौन हैं आसिया अंद्राबी

हुर्रियत की महिला विंग ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ चीफ आसिया अंद्राबी जानी-मानी अलगावावादी नेता हैं! 28 अगस्त 2010 को आसिया को देश में गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने, हिंसा फैलाने और देश के विरुद्ध युद्ध छेडने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 6 जुलाई 2018 को एनआईए ने आसिया अंद्राबी को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। आसिया के साथ उसकी दो सहयोगियों नाहिदा नसरीन और सोफी फहमीदा को भी गिरफ्तार किया गया था। 
कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी ने खुलासा किया है कि, वह पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी के जरिए लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के करीब आई थी। अधिकारी दुख्तारन-ए-मिल्लत नेता अंद्राबी का रिश्तेदार था। अंद्राबी के साथ ही दो अलगाववादी नेताओं से इन दिनों राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) पूछताछ कर रही है। कश्मीर यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक अंद्राबी चार साल पहले पाकिस्तानी झंडा फहराने और पाकिस्तानी राष्ट्रगान गाने के कारण सुर्खियों में आई थी। अंद्राबी के इस कृत्य के पीछे हाफिज सईद को माना जाता है !
एनआईए सूत्र ने कहा कि, अंद्राबी का भतीजा पाकिस्तान सेना में कैप्टन रैंक का अधिकारी है। उसका एक अन्य करीबी रिश्तेदार पाकिस्तान सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में है। अंद्राबी के रिश्तेदार दुबई और सऊदी अरब में भी हैं जहां से वह फंड प्राप्त करती है और भारत के खिलाफ गतिविधियों में उपयोग करती है। एनआईए ने अंद्राबी के खिलाफ एक केस दर्ज किया है जिसके तहत जमात-उद-दावा के अमीर और लश्कर के मास्टरमाइंड सईद बडे पैमाने पर अंद्राबी को फंड मुहैया कराते थे ! यह धन पत्थरबाजों और हुर्रियत के समर्थकों में बांटे गए थे जिन्होंने श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए !
आसिया अंद्राबी कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों के खिलाफ महिलाओं को भडकाती थीं ! महिलाओं को भडकाने में अंद्राबी का अहम रोल माना जाता है। साथ ही इसे पाकिस्तान परस्त नेता को महिलाओं के रोल मॉडल के तौर पर भी पेश किया जाता है। अपने नफरत भरे भाषणों से आसिया अंद्राबी भारत के खिलाफ लडाई का झंडा बुलंद करती थी !