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G20 समिट के बाद बौखलाया चीन, कहा – भारत ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ा दिया, हमारे हितों को पहुँचा दिया नुकसान

                                      G20 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से पस्त हुआ चीन,
भारत द्वारा जी20 के शिखर सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। लेकिन, चीन के एक थिंक-टैंक ने भारत पर G20 शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए करने का आरोप लगाया है। थिंक-टैंक ने कहा कि भारत ने शिखर सम्मेलन में अपने हितों के मुद्दों को उठाकर और चीन विरोधी कामों को अंजाम देकर चीन के साथ धोखा किया है।

इस थिंक-टैंक का कहना है कि भारत ने विवादित क्षेत्रों (कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश) में जी-20 की बैठकों का आयोजन करके उन क्षेत्रों पर अपने कब्जे की मान्यता लेने की कोशिश की है।

चीन को हुई तकलीफ की मुख्य वजह

G-20 सम्मेलन के पहले दिन भारत ने इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका भी अहम साझीदार है। इस कॉरिडोर को चीन के BRI (बेल्ट एन्ड रोड) के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक एकीकरण का प्रभावी माध्यम होगा। यह पूरे विश्व में कनेक्टिविटी और विकास को सस्टेनेबल दिशा प्रदान करेगा।
इस बात से चीन को इतनी मिर्ची लगी है कि वो बौखला गया है। चीनी सरकार भले ही सीधे तौर पर कुछ नहीं बोल रही हो, लेकिन वो अपने कथित थिंक-टैंक्स के माध्यम से भारत को धमकाने की कोशिश कर रही है।

अपना एजेंडा बढ़ा रहा भारत : चीनी थिंक-टैंक

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्परेरी इंटरनेशनल रिलेशंस नाम के एक थिंक-टैंक ने अपने लेख में कहा कि भारत ने “जी20 के मंच का इस्तेमाल अपने स्वयं के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया है, जो वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की बजाय विभाजन को बढ़ावा देने के लिए है।” थिंक-टैंक ने कहा कि चीन विरोधी मुद्दों को उठाकर भारत ने “जी20 की एकता को तोड़ा और चीन के हितों को नुकसान पहुँचाया।”

अपने मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा चीन!

थिंक-टैंक का लेख स्पष्ट रूप से राजनीतिक विचारों से प्रेरित है। चीन अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड और दक्षिण चीन सागर में आक्रामक व्यवहार के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। भारत पर G20 को कमजोर करने का आरोप लगाकर, चीनी सरकार अपने स्वयं के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
वैसे, लेख तथ्यात्मक रूप से भी गलत है। उदाहरण के लिए, यह दावा करता है कि भारत “चीन की कीमत पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।” हालाँकि, उसने अपने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं रखा है।

इस चीनी थिंक टैंक के दावों के उलट भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:

1-जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा देना
2-वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देना
3-आतंकवाद और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करना
4-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना
5-स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सामाजिक सेवाओं में निवेश को बढ़ावा देना

भारत जी-20 का जिम्मेदार सदस्य

G20 शिखर सम्मेलन ने भारत की वैश्विक नेतृत्व की स्थिति को मजबूत किया है। भारत हमेशा से जी20 का एक जिम्मेदार सदस्य रहा है और उसने हमेशा वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया है। भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और वह चीनी आक्रामकता का विरोध करेगा।

रणबीर कपूर ने सऊदी अरब में पाकिस्तान के साथ काम करने पर भरी ‘हाँ’,

                                                 रणबीर कपूर (तस्वीर साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
सऊदी अरब में हुए ‘रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में रणबीर कपूर ने भी शिरकत की। इस कार्यक्रम में उन्हें ‘वैरायटी इंटरनेशनल वैनगार्ड एक्टर अवार्ड’ दिया गया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की ब्लॉकबस्टर रही ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट’ फिल्म की काफी तारीफ की। साथ ही बोला कि उन्हें पाकिस्तानी क्रू के साथ काम करने में काफी खुशी होगी।

दरअसल, रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम में ऑडियंस में से एक सदस्य ने उनसे पूछा था, “आज हमारे पास सऊदी अरब जैसे प्लेटफॉर्म हैं जहाँ मिलकर फिल्में की जा सकती हैं। मुझे आपको अपनी फिल्म के लिए साइन करवाकर खुशी होगी। क्या आप अपनी टीम के साथ मिलकर पाकिस्तानी टीम के साथ सऊदी अरब में काम करना चाहेंगे?”

इस सवाल पर रणबीर कपूर ने कहा, "बिलकुल सर। मुझे लगता है कि कलाकारों के लिए कोई सीमा नहीं होती, खासकर कला में ऐसा नहीं होता। पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री को द लीजेंड ऑफ मौला जट के लिए बहुत-बहुत शुभकामानाएँ। ये पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी हिट है जैसा कि हमने देखा। बिलकुल मुझे साथ काम करने में खुशी होगी।"

उनके इस बयान के बाद भारतीयों की सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया आ रही है। एक यूजर ने गुस्से में लिखा, “सारी की सारी टेंशन तो सेना को लेनी है। ये %$# तो पैसे कमाएँगे। अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। लोगों को उर्दूवुड की ये गंदगी साफ करनी होगी।”

एक यूजर ने कहा, अगर ये आदमी पाकिस्तान के साथ काम करता है तो भारत में तो इसका करियर चौपट हो जाएगा।

इसी तरह एक ट्विटर यूजर ने कहा, “जब देश की,देश की सुरक्षा,सम्मान की बात आती है तो वहां ये बात कहना गलत है कि “नो बाउंड्री फॉर आर्टिस्ट्स।” इसका मतलब ये होता है कि वो खुद को देश के सम्मान से ऊँचा मानते हैं। एक सैनिक की भी किसी दूसरे देश से व्यक्तिगत शत्रुता नहीं है लेकिन वो देश के सम्मान और सुरक्षा को महत्व देते हैं।”

अविनाश झा लिखते हैं, “इसका परदादा पृथ्वीराज कपूर जान बचा के पाकिस्तान से भारत आया था और इसका पाकिस्तान प्रेम देखो फिर भी लोग इसकी फिल्म देखने जाते है।”

रणबीर कपूर पिछले दिनों अपनी ब्रह्मास्त्र फिल्म के कारण काफी सुर्खियों में रहे थे। उनके बीफ वाले बयान के वायरल होने के बाद उनके बॉयकॉट की माँगें उठीं थीं। इसके बाद वे और आलिया शादी के 6 महीने बाद माता-पिता बनने के कारण मीडिया की हेडलाइन्स में आए और अब उनका ये बयान लोगों में चर्चा का कारण है। उन्होंने द मौला जट्ट के हीरो फवाद खान के साथ अपनी आखिरी फिल्म 2016 में ‘ए दिल है मुश्किल’ की थी। इसके बाद उरी अटैक से भारतीय लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा उमड़ा और उनकी भावनाओं को देखते हुए पाकिस्तानी एक्टर-एक्ट्रेस के साथ फिल्में करना बंद कर दिया गया।