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दिल्ली दंगा: हजार में थे मुस्लिम दंगाई, भीड़ के हाथ में लाठी, तलवार, सरिया, चाकू; गिरफ्तार 20

जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इन्हीं में एक ASI अरुण कुमार भी थे। घटना में उनके पाँव और कंधे में चोट आई है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह उस दृश्य को शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं जो उन्होंने अपने सामने देखा।

उन्होंने बताया कि वह शोभा यात्रा का हिस्सा शुरू से बने हुए थे। उनकी गाड़ी उस गाड़ी के पीछे थी जिसमें मूर्ति रखी गई थीं। उन्होंने बताया कि जैसे ही वो कुशल चौक पहुँचे। सैकड़ों की भीड़ अचानक जुलूस के पास आने लगी। वह कहते हैं, “शब्द उस दृश्य को नहीं बयान कर सकते हैं जो मैंने उस दिन देखा। हर जगह हल्ला था। लोग पत्थर फेंक रहे हैं। गाली-गलौच हो रहा था। हमने स्थिति को संभालना चाही लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी।”

ASI अरुण 
‘औरतें गाली दे रही थीं… भीड़ के हाथ में लाठी, तलवार, सरिया, चाकू थे’ : जहाँगीरपुरी हिंसा का शिकार हुए ASI अरुण कुमार

ASI अरुण कुमार याद करते हैं कि कैसे उस भीड़ में लोगों के हाथों में तलवारें थीं, चाकू थी, पत्थर थे और बोतलें थीं। वे लोग कार जलाने की कोशिशें कर रहे थे। पुलिस उन्हें रोक रही थी। स्थिति शांत करने के प्रयास हो रहे थे। मगर, तभी एक पत्थर एएसआई पर आकर गिरा।

उन्होंने बताया कि कैसे शोभा यात्रा के गुजरते समय गाली-गलौच करने वालों में महिलाएँ ज्यादा थीं। उनके अनुसार वह लोग जैसे ही सी ब्लॉक से बाहर निकले वैसे ही उनके ऊपर पथराव शुरू हो गया। उनके हाथों में लाठी, तलवार, सरिया सब कुछ था। पत्थर और ईंट वो लोग इतना मार रहे थे कि सबने अपनी गाड़ियाँ छोड़ दी थीं। 

पुलिस का कहना है कि उसके 8 जवानों समेत 9 लोग इसमें घायल हुए हैं। दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर मेधालाल मीणा के हाथ पर गोली लगी है। उनकी हालत फ़िलहाल स्थिर है। गोली चलाने वाले असलम को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से एक देशी पिस्तौल भी जब्त हुआ है।

पुलिस ने इस हिंसा के मामले में 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। दंगा, हत्या का प्रयास और अवैध हथियार रखने के मामला दर्ज किए गए हैं। पूरे घटनाक्रम की जाँच के लिए स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों की 10 टीमें बनाई गई हैं। FIR में कहा गया है कि मस्जिद के पास से गुजर रही शोभा यात्रा को देख कर आरोपितों में से एक अंसार बाहर निकला और उसने श्रद्धालुओं से बहस शुरू कर दी। रैली में शामिल लोगों का भी कहना है कि वो शांति से गुजर रहे थे, तभी पत्थरबाजी शुरू हो गई।

पुलिस ने स्थानीय शांति समितियों की बैठक बुला कर इलाके में तनाव खत्म करने को कहा है। निष्पक्ष जाँच का आश्वासन देते हुए पुलिस ने गलत ख़बरों और भ्रामक सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए भी उन्हें कहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि लोग एक-दूसरे का हाथ थामे रखें और शांति बनाए रखें। गिरफ्तार आरोपित हैं – अंसार, ज़ाहिद, शहज़ाद, मुख़्तार अली, मोहम्मद अली, आमिर, अक्सार, नूर आलम, मोहम्मद असलम, ज़ाकिर, अकरम, इम्तियाज़, मोहम्मद अली और अहीर।

उत्तर-पश्चिम दिल्ली से भाजपा सांसद हंस राज हंस ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं सभी से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील करता हूँ। हर धर्म में कुछ बुरे तत्व हैं, वे ही ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके पीछे कुछ विदेशी ताकतें हो सकती हैं जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं।” सड़कों पर अभी भी ईंट-पत्थर, टूटे काँच और जली हुई गाड़ियाँ दिख रही हैं। मुस्लिमों की भीड़ सैकड़ों में थी।

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वहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि ये करतूत मुस्लिम भीड़ की है। उनके हाथों में तलवार, चाकू और डंडे जैसे हथियार थे। एक स्थानीय व्यक्ति ने भीड़ की संख्या हजार में बताया। लगभग एक घंटे तक ये बवाल चलता ही रहा। भीड़ द्वारा बंगाली भाषा में नारा लगाने की बात भी सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। फ़िलहाल वहाँ शांति है।