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चुनाव आयोग ने 474 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द, पिछले 6 वर्षों से नहीं लड़ा था चुनाव: 359 अन्य दलों को भी भेजा शो-कॉज नोटिस

पूर्व चुनाव आयुक्त T N Sheshan अनेक विरोधों के बीच चुनाव आयोग के जिस संविधान को खोलकर गए है बंद होने का नाम ले रहा। भारत में इतनी ज्यादा पार्टियां हैं जिनकी कोई गिनती नहीं, दूसरे अगर सारी दुनियां में पार्टियों को मिला लिया जाए, सभी भारत में पार्टियों की भरमार की पासंग भी नहीं होंगी। वैसे राजनीतिक पार्टी बनाना सफेदपोश धंधा है। जिन्हे कोई कामधाम नहीं मिलता या करना चाहते पार्टी बना लो और मालपुए खाते रहो। चुनाव में सौदेबाज़ी कर तिजोरी भरो जनता जाए भाड़ में। चुनाव आयोग द्वारा बहुत ज्यादा देर से कदम उठाया है।  
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने देश की चुनावी व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को चुनाव आयोग ने 474 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को डीलिस्ट कर दिया क्योंकि ये पिछले 6 सालों से कोई चुनाव नहीं लड़ रहे थे।

इससे पहले 9 अगस्त 2025 को ऐसे ही 334 दल हटाए गए थे। यानी सिर्फ दो महीनों में कुल 808 दलों को बाहर किया गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत राजनीतिक दलों को अपना पंजीकरण बनाए रखने के लिए चुनावों में सक्रिय रूप से भाग लेना आवश्यक है। 

चुनाव आयोग का कहना है कि जो पार्टियाँ लगातार 6 साल तक कोई चुनाव नहीं लड़तीं, उन्हें एक्ट के मुताबिक हटाया जा सकता है। इसके पीछे मकसद यह है कि सिर्फ नाम की पार्टियाँ जो चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेतीं, लेकिन चुनाव चिन्ह और टैक्स जैसी सुविधाएँ लेती हैं, उन्हें हटाया जाए।

इस बार सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ा जहाँ 121 पार्टियाँ हटाई गईं जबकि महाराष्ट्र में 44, तमिलनाडु में 42, दिल्ली में 40, पंजाब में 21 और राजस्थान में 17 पार्टियों को हटाया गया।

ECI यहीं नहीं रुका। अब तीसरे चरण में 359 और पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। ये वे पार्टियाँ हैं, जिन्होंने भले ही पिछले 6 सालों में चुनाव लड़ा है लेकिन उन्होंने अपने ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनाव खर्च की रिपोर्ट तीन सालों (2021-22, 2022-23 और 2023-24) से नहीं दी है।

इन सभी को अब शो-कॉज नोटिस भेजा गया है और जवाब मिलने के बाद उन पर भी फैसला लिया जाएगा। यहाँ भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहाँ 127 पार्टियाँ इस जाँच के घेरे में हैं, इसके बाद दिल्ली (41), तमिलनाडु (39) और बिहार (30) हैं। फिलहाल भारत में 6 राष्ट्रीय पार्टियाँ, 67 राज्य पार्टियाँ और आज की कार्रवाई के बाद 2046 RUPPs बाकी हैं।

इस पूरी मुहिम का मकसद है कि जो पार्टियाँ न तो चुनाव लड़ती हैं और न ही पारदर्शिता बरतती हैं, उन्हें हटाकर भारत की चुनावी लिस्ट को साफ किया जाए, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और चुनावी प्रक्रिया में गंभीर पार्टियाँ ही बनी रहें।

चुनाव आयोग की यह सख्त कार्रवाई भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।