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तृणमूल कांग्रेस(TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने फिर किया हिंदुओं का अपमान: SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय को बताया ‘चुनावी सनातनी’


तृणमूल कांग्रेस(TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने हिंदुओं को लेकर अपमानजनक बातें की हैं। उन्होंने जातियों को निशाना बनाया और हिंदू प्रतीकों तक का मजाक उड़ाने से भी वह नहीं चूकीं। वो भी जानती हैं कि हिंदू धर्म और इसको मानने वाले सहिष्णु हैं तो वो कुछ भी कहकर बचकर निकल जाएँगी।

महुआ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। गुरुवार(28 अगस्त 2025) के बताए जा रहे इस वीडियो को बीजेपी की IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी X पर शेयर किया है।

महुआ इस वीडियो में वह हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए बंगाली में कह रही है, “पूरे साल आप तृणमूली रहते हैं और चुनाव के दौरान सनातनी?” जाहिर है कि वह बताना चाहती हैं कि कोई एक साथ हिंदू (सनातनी) और TMC का समर्थक नहीं हो सकता है।

अपने बयान में आगे उन्होंने SC(अनुसूचित जाति), नामशूद्र, मतुआ समुदायों को भी अपमानजनक तरीके से निशाना बनाया और वैष्णव समुदाय की पवित्र कंठी माला का मजाक उड़ाया है। उन्होंने उसे ‘लकड़ी की माला पहनने और खैरात लेने वालों की निशानी’ के रूप में पेश किया।

तृणमूल सांसद ने कहा कि SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय के लोग ममता बनर्जी सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठाते हैं लेकिन चुनावों के दौरान वे बीजेपी के पक्ष में वोट देते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका वीडियो शेयर करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि भाजपा इस भाषण की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने मोइत्रा पर हिंदू-विरोधी नफरत फैलाने का आरोप लगाया और माँग की कि उन्हें इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट रूप से हिंदू-विरोधी, जातिवादी नफरत भरा भाषण है। इस तरह के सांप्रदायिक जहर के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा, “भाजपा हमेशा नामशूद्र, SC और मतुआ समुदायों के साथ मजबूती से खड़ी रही है। अब समय आ गया है कि ये समुदाय महुआ मोइत्रा के तत्काल इस्तीफे की माँग करें और एक बड़ा आंदोलन शुरू करें। SC-ST और हिंदू समुदायों का अपमान करने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

इससे पहले गुरुवार (28 अगस्त 2025) को सांसद महुआ मोइत्रा ने एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह का सिर काट दिया जाना चाहिए और कटे हुए सिर को मेज पर रख कर लोगों को दिखाना चाहिए। महुआ ने ये बयान अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बोलते हुए दिया था।

महुआ ने कहा था, “मैं पूछती हूँ कि क्या हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाला कोई नहीं है? और अन्य देशों के लाखों और करोड़ों की संख्या में लोग भारत में घुस रहे हैं, अगर वे हमारी माताओं और बहनों पर नजर रख रहे हैं, अगर वे हमारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, तो सबसे पहले अमित शाह का सिर काटकर मेज पर रख देना चाहिए।”

कांग्रेस ही कर रही असली ‘वोट चोरी’: पहले पवन खेड़ा, अब पत्नी कोटा नीलिमा के मिले दो वोटर कार्ड

                            पवन खेड़ा और उनकी पत्नी कोटा नीलिमा की तस्वीर (साभार : moneycontrol)
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा पर दो वोटर आईडी रखने का मामला अभी थमा भी नहीं था कि अब उनकी पत्नी को लेकर भी ऐसा ही आरोप सामने आया है। पवन खेड़ा को चुनाव आयोग ने नोटिस भी भेजा था। पवन खेड़ा की पत्नी कोटा नीलिमा के पास भी दो वोटर ID हैं, एक तेलंगाना की खैरताबाद सीट से और दूसरी काका नगर नई दिल्ली सीट से।
सोनिया जी पर अपराधिक मामला दिल्ली में दर्ज हुआ है जिसकी सुनवाई 10 सितंबर को है..मामला है कि जब नागरिकता 1983 में ली तो 1980 में वोटर लिस्ट में नाम किन दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत करवाया..भारतीय संविधान में किसी भी गैर भारतीय नागरिक को वोटर लिस्ट में नामांकन का अधिकार ही नहीं तो फिर मताधिकार का प्रश्न ही नहीं है....

यह आरोप बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सार्वजनिक किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गाँधी दूसरों पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हैं, लेकिन उनके करीबी सहयोगी खुद इस गड़बड़ी में लिप्त हैं।

पवन खेड़ा की पत्नी कोटा नीलिमा पर भी दो वोटर ID

बीजेपी का आरोप है कि कोटा नीलिमा के नाम से भी दो एक्टिव वोटर ID हैं। एक ID तेलंगाना के खैरताबाद विधानसभा क्षेत्र में है। यह ID उनके चुनावी हलफनामे में भी दर्ज है।

लेकिन दूसरा EPIC नंबर दिल्ली की काका नगर नई दिल्ली विधानसभा में भी एक्टिव है। यहीं पवन खेड़ा का नाम भी दर्ज है। यानी दोनों पति-पत्नी के नाम दो-दो जगहों पर वोटर लिस्ट में मौजूद हैं।

बीजेपी नेता अमित मालवीय का कहना है कि यह अकेला मामला नहीं है। उन्होंने इसे कॉन्ग्रेस की ‘वोट बैंक’ राजनीति का हिस्सा बताया है।

पवन खेड़ा पर दो वोटर ID

पवन खेड़ा का नाम दिल्ली की दो विधानसभा सीटों ‘जंगपुरा और काका नगर नई दिल्ली’ की वोटर लिस्ट में पाया गया। दोनों जगहों पर उनके नाम से अलग-अलग EPIC नंबर एक्टिव हैं।

इस आधार पर चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा। आयोग ने कहा है कि एक व्यक्ति दो जगहों पर वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो सकता। इसलिए पवन खेड़ा से 8 सितंबर 2025 तक जवाब माँगा गया है।

वहीं, पवन खेड़ा का कहना है कि उन्होंने 2016 में एक जगह से नाम हटाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन चुनाव आयोग ने उसे समय पर हटाया नहीं। उन्होंने जाँच की माँग की है और कहा है कि अगर उन्होंने दो बार वोट डाला है तो CCTV फुटेज पेश किया जाए।

मामले पर बीजेपी का रुख

बीजेपी ने इस मुद्दे को कॉन्ग्रेस के ‘दोहरे रवैये’ से जोड़ा है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी खुद ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाती है, लेकिन उसके अपने नेता ऐसे कृत्यों में शामिल हैं। बीजेपी ने राहुल गाँधी से सवाल किया है कि वे अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ लगे इन आरोपों पर क्यों चुप हैं।

दिल्ली : राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ पाखंडी राजनीति की खुल गई पोल; कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास मिले 2 एक्टिव वोटर ID: मतदाता सूची में मृत सदस्य का भी नाम

           पवन खेड़ा के दो वोटर आईडी ने वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेसी पाखंड की खोली पोल। (साभार: Dall-E)
कांग्रेस पार्टी के सांसद राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ की बातें उनकी पार्टी के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गईं। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 2 सितंबर 2025 को खुलासा किया कि कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो एक्टिव EPIC नंबर हैं। एक निजामुद्दीन ईस्ट में जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में और दूसरा नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के काका नगर में।

खेड़ा के नाम पर दो एक्टिव EPIC नंबर

मालवीय द्वारा साझा की गई जानकारी सार्वजनिक है। OpIndia ने इन जानकारियों को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मिलान किया है, जिसमें ये दावा सच पाया गया है। वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि खेड़ा का नाम जंगपुरा में EPIC नंबर XHC1992338 के साथ दर्ज है।

                                                                                                       Source: Amit Malviya/ECI

पवन खेड़ा का नाम न सिर्फ जंगपुरा में है, बल्कि नई दिल्ली में EPIC नंबर SJE0755967 के साथ भी है। वोटर लिस्ट में एंट्री अभी भी एक्टिव हैं।

                                                                                                           Source: Amit Malviya/ECI

खेड़ा का वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट नाम होना एक गंभीर सवाल उठाता है कि चुनाव आयोग को इसकी जाँच करनी चाहिए कि उनके पास दो एक्टिव वोटर आईडी कैसे हैं। इसके अलावा मालवीय ने अपने पोस्ट में कहा कि अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या खेड़ा ने कभी एक से ज्यादा बार वोट डाला है।

मृत परिवार के सदस्य का नाम अभी भी वोटर लिस्ट में

उसी पते पर अन्य वोटरों की जाँच करने पर OpIndia को पता चला कि रूपम खेड़ा का नाम अभी भी वोटर लिस्ट में एक्टिव है। खास बात ये है कि रूपम का निधन 2021 में कोविड-19 की वजह से हो गया था।

Source: Amit Malviya/ECI

इसके अलावा एक व्यक्ति श्रावण कुमार प्रजापत का नाम दोनों वोटर लिस्ट में दिखा। दिलचस्प बात ये है कि जंगपुरा क्षेत्र से खेड़ा की पत्नी का नाम लिस्ट से हटा दिया गया है।

                                                                                                     Source: Amit Malviya/ECI

कांग्रेस नेताओं के बार-बार ‘वोट चोरी’ के दावों के बावजूद, उनके अपने मृत परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने जैसे बेसिक काम भी नजरअंदाज किए गए हैं।

पाखंडी राजनीति की खुल गई पोल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा दूसरों को चुनावी ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं और जब किसी का नाम अलग-अलग जगहों पर चार बार वोटर लिस्ट में दिखा तो हंगामा मचाया। बाद में वह व्यक्ति कैमरे पर आया और साफ किया कि उसने पहले जहाँ रहता था, वहाँ से नाम हटाने की अर्जी दी थी, लेकिन वोटर लिस्ट अपडेट नहीं हुई।

इसमें विडंबना ये है कि उनके अपने रिकॉर्ड ही गड़बड़ियों से भरे हैं। मालवीय ने ये भी बताया कि सोनिया गाँधी का नाम भारत की वोटर लिस्ट में तब दर्ज था, जब वो भारत की नागरिक भी नहीं बनी थीं। उन्होंने ये भी कहा कि राहुल गाँधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा में चुनावी गड़बड़ी के अपने आरोपों के बारे में कोई औपचारिक शपथपत्र शिकायत नहीं दी है और सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में गड़बड़ी के आरोप वाले केस को पहले ही खारिज कर दिया है।

इससे पहले, पवन खेड़ा ने CSDS-Lokniti के संजय कुमार के X पर एक पोस्ट के आधार पर डेटा शेयर किया था, जिसमें महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का दावा था। हालाँकि बाद में संजय कुमार ने वो पोस्ट डिलीट कर दी और कहा कि उनकी टीम ने टेबल्स को ‘गलत पढ़ा’। राहुल गाँधी और अन्य नेताओं के चुनाव आयोग के खिलाफ किए गए हर दावे पिछले कुछ महीनों में खोखले साबित हुए हैं।