Showing posts with label #vote chori. Show all posts
Showing posts with label #vote chori. Show all posts

क्या राहुल की न्यूजलॉन्ड्री और ThinkTank ही कांग्रेस को तबाह-बर्बाद करने की कमर कस चुकी है? राहुल गाँधी ने ‘वोट चोरी’ के प्रेजेंटेशन में दिखाई न्यूजलॉन्ड्री की प्रोपेगेंडा रिपोर्ट, लिखने वाले हिंदू-विरोधी विशाल वैभव और सुमेधा मित्तल

राहुल गाँधी 'वोट चोरी' प्रोपेगेंडा
सनातन के गुरु स्वामी विवेकानन्द का कहना था कि हर बुराई में अच्छाई छिपी होती है। इस कड़वे सच को कोई झुठला नहीं सकता। "विनाश काले विपरीत बुद्धि" LoP बने राहुल गाँधी जिस तरह Newslaundry और जॉर्ज सोरोस के पटकथा पर काम कर रहे हैं, निश्चितरूप से कांग्रेस की पतन की बहुत तेजी से बढ़ रही है। वैसे कांग्रेस के पतन की भविष्यवाणी 7 नवम्बर 1966 को पार्लियामेंट स्ट्रीट पर आचार्य कृपालु महाराज कर दी गयी थी। जब गो-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु समाज से खून की होली खेलते हुए पूरी पार्लियामेंट स्ट्रीट साधुओं की लाशों और लहू से पट गयी थी। तब आचार्य कृपालु जी ने हुंकार भरी थी कि "इन्दिरा तेरी पार्टी को बर्बाद करने हिमालय से आधुनिक ड्रेस में एक तपस्वी आएगा", इस बात को मेरी आयु के सियासत से लेकर पत्रकारिता से जुड़े लोग भूले नहीं होंगे। परिणाम सामने है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में कांग्रेस और विपक्ष देश विरोध कर अपने पतन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।  
इतना ही नहीं, तब एक महान आत्मा यानि श्रद्धेय साधु ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पर ही भूख हड़ताल कर अपने प्राण दे दिए, लेकिन कांग्रेस गुलाम किसी भी मीडिया ने इस दुखद समाचार को प्रकाशित नहीं किया। खैर, कांग्रेस के पतन की पटकथा 1966 में ही पार्लियामेंट स्ट्रीट पर लिख दी गयी थी।      

कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग पर बेबुनियाद ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाकर उसे ‘मुद्दा’ बनाने की कोशिश करती है, जबकि उसके समर्थक प्रोपेगेंडा चैनल अपने राजनीतिक आकाओं के दावों को ‘विश्वसनीय’ बताते हुए झूठे तथ्यों का प्रचार-प्रसार करते हैं।

पत्रकार विजय पटेल ने इस सांठगांठ को उजागर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हाल ही में पोस्ट डाला है। इसमें बताया गया है कि कैसे राहुल गाँधी और कांग्रेस का ‘वोट चोरी‘ प्रचार अभियान भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा है और हिन्दू विरोधियों के हाथों में इसकी डोर है।

कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी की 7 अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई गई ‘वोट चोरी’ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन पहले ही सवालों के घेरे में आ चुकी है, लेकिन हालिया खुलासे चुनावी धोखाधड़ी के उनके दावों को और कमजोर कर देते हैं। गाँधी को न केवल ‘वोट चोरी’ प्रेजेंटेशन के कारण, बल्कि वामपंथी प्रचारक न्यूज़लॉन्ड्री में प्रकाशित हिटजॉब्स पर उनकी निर्भरता के कारण भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

ये प्रोपेगैंडा लेख कट्टर हिंदू-विरोधी लोगों द्वारा लिखे गए हैं। इनमें से एक की पहचान विशाल वैभव के रूप में हुई है। ये लोग चुनाव आयोग के खिलाफ साजिश कर रहे हैं।

विवादास्पद पीपीटी के चौथे पेज पर, राहुल गाँधी ने दावा किया, “महाराष्ट्र के नतीजों ने बड़े पैमाने पर वोट चोरी के हमारे संदेह की पुष्टि की है।” पीपीटी में न्यूज़लॉन्ड्री की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। विशाल वैभव और सुमेधा मित्तल द्वारा लिखी गई इस रिपोर्ट का शीर्षक है, “नए मतदाताओं की बाढ़? कामठी का अजीबोगरीब मामला, जहाँ महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख जीते।”

चुनाव आयोग की ईमानदारी पर सवाल उठाने के लिए न्यूज़लॉन्ड्री के प्रचार लेखों का सहारा लेना, उनके ‘वोट चोरी’ के दावों की विश्वसनीयता को दर्शाता है। हालाँकि यह बात सामने आई है कि न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार विशाल वैभव हिंदू विरोधी हैं, जो वैचारिक मतभेदों को लेकर हिंदू समर्थक सोशल मीडिया यूजर्स पर ‘गौमूत्र’, ‘cowf&kers’ और ‘D%kless Hindutva’ जैसे तंज कसते हैं।

न्यूज़लॉन्ड्री पर ऑथर पेज के अनुसार, विशाल वैभव आईआईटी-दिल्ली में भौतिकी के पूर्व प्रोफेसर हैं। हालाँकि एक्स अकाउंट ‘@panchagavyag’, जो पहले ‘@vvaibhav_iid’ था, अब मौजूद नहीं है। इसमें हिंदू-विरोधी पोस्ट के स्क्रीनशॉट ऑनलाइन दिख जाएँगे।

शायद, न्यूज़लॉन्ड्री के प्रोपेगैंडा फैक्ट्री का हिस्सा बनने के लिए हिंदुओं को ‘गाली देना’ अनिवार्य पात्रता है। राहुल गाँधी ने अपनी वोट चोरी वाले पीपीटी में जिस न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर की सह-लेखिका सुमेधा मित्तल की बात की, अब उसके बारे में बात करते हैं। उसका कांग्रेस पार्टी से पुराना नाता रहा है। सुमेधा मित्तल के लिंक्डइन पेज के अनुसार, उन्होंने कुछ समय के लिए सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) नामक एक थिंक टैंक में काम किया था। इस थिंक टैंक की ऑनर और संचालक विवादास्पद कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी अय्यर है।

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे सीपीआर विदेशी फंडिंग मानदंडों के उल्लंघन के लिए जाँच के घेरे में रहा है और केंद्र सरकार ने इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया था। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पर सितंबर 2022 में आयकर छापे पड़े थे। जुलाई 2023 में अय्यर के सीपीआर को टैक्स छूट मिलना भी बंद हो गया।

मित्तल इंडियास्पेंड (IndiaSpend) पोर्टल के साथ काम कर चुके हैं। इंडियास्पेंड कांग्रेस पार्टी की वैचारिक विचारधारा से सबसे ज़्यादा जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी के डेटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती इंडियास्पेंड के संस्थापक ट्रस्टी हैं। हालाँकि, इंडियास्पेंड की वेबसाइट में उनका नाम नहीं है। ऑपइंडिया ने कई मौकों पर इंडियास्पेंड के हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी झूठों का पर्दाफ़ाश किया है। इंडियास्पेंड ने पहले भी अपने डेटाबेस में मुस्लिम पीड़ितों की संख्या बढ़ाने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। कई मामलों में ऐसा देखा गया है।

न्यूज़लॉन्ड्री की वरिष्ठ रिपोर्टर सुमेधा मित्तल ने द वायर और द कारवां जैसे भाजपा-विरोधी और इस्लाम-समर्थक प्रोपोगेंडा आउटलेट्स में भी काम किया है।

दिलचस्प बात यह है कि नवंबर 2021 से सितंबर 2022 के बीच, सुमेधा मित्तल ने मोदी विरोधी और कुख्यात शासन विरोधी जॉर्ज सोरोस की क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) में काम किया। OCCRP को अमेरिकी विदेश विभाग और अब भंग हो चुकी अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) से भारी मात्रा में धन प्राप्त हुआ। OCCRP को जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन (OSF), फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन और रॉकफ़ेलर ब्रदर्स फ़ाउंडेशन जैसी संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलती है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि OCCRP ने व्यवसायी गौतम अडानी और सेबी के खिलाफ़ हिटजॉब्स प्रकाशित किए थे। OCCRP भारतीय लोकतंत्र को कमज़ोर करने के लिए बार-बार दुष्प्रचार भी करता रहा है। भारत में ‘वोट चोरी’, म्यांमार में डेटा संकलन, झूठ और भ्रामक सूचनाओं को ‘ज़बरदस्त’ खुलासे के रूप में प्रस्तुत किया गया

कांग्रेस पार्टी राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ पीपीटी के साथ एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा करने की कोशिश कर रही थी। इस बीच से बात सामने आयी कि ये दस्तावेज म्यांमार में तैयार किए गए थे। ‘वोट चोरी’ वेबसाइट पर अपलोड की गई पीडीएफ फाइलों के मेटाडेटा विश्लेषण से पता चला कि राहुल गाँधी की प्रस्तुति के तीनों संस्करण म्यांमार मानक समय (एमएमटी) में बनाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं और आईटी सेल ने इन आरोपों को हालाँकि खारिज किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

चुनाव आयोग की ईमानदारी पर संदेह जताने के लिए कांग्रेस ने न्यूज़लॉन्ड्री के लेखों का सहारा लेना, अपने आप में उनके ‘वोट चोरी’ के दावों की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है। हालाँकि, यह सामने आया है कि न्यूज़लॉन्ड्री के लेखक, विशाल वैभव, एक कट्टर हिंदू विरोधी रहे हैं, जो वैचारिक मतभेदों को लेकर हिंदू समर्थक सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं पर ‘गौमूत्र’, ‘गाय-बकरियों’ और ‘गधा हिंदुत्व’ जैसे व्यंग्य करते रहते हैं। न्यूज़लॉन्ड्री पर उनके लेखक पृष्ठ के अनुसार, विशाल वैभव आईआईटी-दिल्ली में भौतिकी के पूर्व प्रोफेसर हैं। हालाँकि X अकाउंट ‘@panchagavyag’, जो पहले ‘@vvaibhav_iid’ था, अब “मौजूद नहीं है”, लेकिन उनके बेहद विक्षिप्त और हिंदू-विरोधी पोस्ट के स्क्रीनशॉट ऑनलाइन सामने आए हैं।

राहुल गाँधी द्वारा अपने वोट चोरी पीपीटी में उद्धृत न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्ट्स की सह-लेखिका सुमेधा मित्तल की बात करें तो उनका न केवल एक वैचारिक पूर्वाग्रह है, बल्कि कांग्रेस पार्टी से उनका पुराना संबंध भी है।

सुमेधा मित्तल के लिंक्डइन पेज के अनुसार, उन्होंने कुछ समय के लिए सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) नामक एक थिंक टैंक में काम किया था। इस थिंक टैंक का स्वामित्व और संचालन विवादास्पद कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी अय्यर के पास है। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च सितंबर 2022 में आयकर छापों का विषय रहा है। जुलाई 2023 में अय्यर के थिंक टैंक की कर छूट की स्थिति भी रद्द कर दी गई थी। मित्तल ने द वायर और द कारवां जैसे भाजपा विरोधी और इस्लाम समर्थक प्रचार आउटलेट में भी योगदान दिया है।

राहुल गाँधी की वोट चोरी के दस्तावेजों का म्यांमार में तैयार किया जाना आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि उनका करियर विदेशी ताकतों की संलिप्तता से जुड़े विवादों में घिरा रहा है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, रहस्यमयी विदेश यात्राएँ, विदेशी अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें, कज़ाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया के रोबोट द्वारा संचालित सोशल मीडिया प्रभाव अभियान, और भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप का आह्वान किया जाना, इसकी पुष्टि करते हैं।

22 पेज वाली वोट चोरी की इस पीपीटी में कांग्रेस पार्टी ‘हम हारे नहीं हैं, हमें हरा दिया गया है’ साबित करने की कोशिश करती रही। हालाँकि ऑपइंडिया ने बताया है कि कैसे चुनाव आयोग ने हर आरोप का खंडन किया, चाहे वह मतदाता पंजीकरण और मतदान प्रतिशत में वृद्धि हो, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में गड़बड़ी हो, मतदान प्रक्रिया के सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करना हो या राहुल गाँधी द्वारा लगाए गए डिजिटल मतदाता सूची को साझा करने से चुनाव आयोग का साफ इनकार हो।

दस्तावेज़ के पेज 8 पर, गाँधी ने यह आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र के आँकड़ों को छिपा रहा है ताकि ‘वोट चोरी’ का पता नहीं चल पाए, लेकिन उनकी टीम ने बड़ी मेहनत से इसकी जाँच की है। हालाँकि, चुनाव आयोग के इस पेज में 30 एंट्री हैं और महादेवपुरा में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 6 लाख है। इसका सीधा अर्थ यह है कि गाँधी के दावों के विपरीत, लाखों नहीं, बल्कि केवल 20,000 पेज की जाँच की आवश्यकता थी। जाहिर है, आँकड़ों पर आधारित प्रचार में भी, कांग्रेस मेलोड्रामा का तड़का लगाना नहीं भूली।

यह दस्तावेज चुनिंदा मामलों से जुड़ा है, जिसमें प्रबंधन या तकनीकी समस्याएँ शामिल थीं और उन्हें ‘वोट चोरी’ के सबूत के रूप में पेश किया गया। कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदुओं की उपेक्षा का इतिहास रहा है। देश की सबसे पुरानी पार्टी अब सरासर झूठ और वैचारिक रूप से पक्षपातपूर्ण प्रचार करने वालों पर निर्भर है और तुच्छ राजनीतिक फायदे के लिए भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

दिल्ली : राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ पाखंडी राजनीति की खुल गई पोल; कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास मिले 2 एक्टिव वोटर ID: मतदाता सूची में मृत सदस्य का भी नाम

           पवन खेड़ा के दो वोटर आईडी ने वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेसी पाखंड की खोली पोल। (साभार: Dall-E)
कांग्रेस पार्टी के सांसद राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ की बातें उनकी पार्टी के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गईं। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 2 सितंबर 2025 को खुलासा किया कि कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो एक्टिव EPIC नंबर हैं। एक निजामुद्दीन ईस्ट में जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में और दूसरा नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के काका नगर में।

खेड़ा के नाम पर दो एक्टिव EPIC नंबर

मालवीय द्वारा साझा की गई जानकारी सार्वजनिक है। OpIndia ने इन जानकारियों को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मिलान किया है, जिसमें ये दावा सच पाया गया है। वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि खेड़ा का नाम जंगपुरा में EPIC नंबर XHC1992338 के साथ दर्ज है।

                                                                                                       Source: Amit Malviya/ECI

पवन खेड़ा का नाम न सिर्फ जंगपुरा में है, बल्कि नई दिल्ली में EPIC नंबर SJE0755967 के साथ भी है। वोटर लिस्ट में एंट्री अभी भी एक्टिव हैं।

                                                                                                           Source: Amit Malviya/ECI

खेड़ा का वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट नाम होना एक गंभीर सवाल उठाता है कि चुनाव आयोग को इसकी जाँच करनी चाहिए कि उनके पास दो एक्टिव वोटर आईडी कैसे हैं। इसके अलावा मालवीय ने अपने पोस्ट में कहा कि अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या खेड़ा ने कभी एक से ज्यादा बार वोट डाला है।

मृत परिवार के सदस्य का नाम अभी भी वोटर लिस्ट में

उसी पते पर अन्य वोटरों की जाँच करने पर OpIndia को पता चला कि रूपम खेड़ा का नाम अभी भी वोटर लिस्ट में एक्टिव है। खास बात ये है कि रूपम का निधन 2021 में कोविड-19 की वजह से हो गया था।

Source: Amit Malviya/ECI

इसके अलावा एक व्यक्ति श्रावण कुमार प्रजापत का नाम दोनों वोटर लिस्ट में दिखा। दिलचस्प बात ये है कि जंगपुरा क्षेत्र से खेड़ा की पत्नी का नाम लिस्ट से हटा दिया गया है।

                                                                                                     Source: Amit Malviya/ECI

कांग्रेस नेताओं के बार-बार ‘वोट चोरी’ के दावों के बावजूद, उनके अपने मृत परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने जैसे बेसिक काम भी नजरअंदाज किए गए हैं।

पाखंडी राजनीति की खुल गई पोल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा दूसरों को चुनावी ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं और जब किसी का नाम अलग-अलग जगहों पर चार बार वोटर लिस्ट में दिखा तो हंगामा मचाया। बाद में वह व्यक्ति कैमरे पर आया और साफ किया कि उसने पहले जहाँ रहता था, वहाँ से नाम हटाने की अर्जी दी थी, लेकिन वोटर लिस्ट अपडेट नहीं हुई।

इसमें विडंबना ये है कि उनके अपने रिकॉर्ड ही गड़बड़ियों से भरे हैं। मालवीय ने ये भी बताया कि सोनिया गाँधी का नाम भारत की वोटर लिस्ट में तब दर्ज था, जब वो भारत की नागरिक भी नहीं बनी थीं। उन्होंने ये भी कहा कि राहुल गाँधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा में चुनावी गड़बड़ी के अपने आरोपों के बारे में कोई औपचारिक शपथपत्र शिकायत नहीं दी है और सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में गड़बड़ी के आरोप वाले केस को पहले ही खारिज कर दिया है।

इससे पहले, पवन खेड़ा ने CSDS-Lokniti के संजय कुमार के X पर एक पोस्ट के आधार पर डेटा शेयर किया था, जिसमें महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का दावा था। हालाँकि बाद में संजय कुमार ने वो पोस्ट डिलीट कर दी और कहा कि उनकी टीम ने टेबल्स को ‘गलत पढ़ा’। राहुल गाँधी और अन्य नेताओं के चुनाव आयोग के खिलाफ किए गए हर दावे पिछले कुछ महीनों में खोखले साबित हुए हैं।

भारत विरोधी ताकतों के हाथ खिलौना राहुल और INDI गठबंधन; बेशर्म गुलाम मीडिया खामोश, क्यों? NYT, अल जजीरा, ABC…भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करने के लिए विदेशी मीडिया एकजुट; राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा फैलाने को सबने एक साथ बजाया भोंपू

राहुल गाँधी (फोटो साभार: PTI) (बाकी तस्वीरों का साभार: The Washington Post, New York Times और Al Jazeera)
राहुल गाँधी विदेशों में जाकर जो भारत के लोकतान्त्रिक मूल्यों को बचाने के लिए रोना रोता है उसका परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं। ये भारत का दुर्भाग्य है कि राहुल जैसा LoP और भारत विरोधी ताकतों के हाथ खिलौना बना INDI गठबंधन। जो नेता और पार्टियां भारत विरोधियों के इशारे पर नाचेंगी देश का किसी भी कीमत पर भला नहीं कर सकते। समय आ गया है जनता को कांग्रेस और 
INDI गठबंधन को चुनावों में या तो धूल चटाएं या गुलाम बनने, जिस तरह मुग़ल और ब्रिटिश सरकारों ने हमें गुलाम बनाया हुआ था उसी तरह गुलाम बनने के लिए तैयार रहना चाहिए। कांग्रेस और INDI गठबंधन की गुलाम मीडिया खामोश, क्यों? 

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग पर धांधली के बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। इसमें विपक्ष के साथ-साथ विदेशी मीडिया भी उन्हें समर्थन दे रहा है। द वाशिंगटन पोस्ट, द न्यूयॉर्क टाइम्स, अल जजीरा सहित कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने गुमराह करने वाले लेख प्रकाशित किए हैं ताकि ‘वोट चोरी’ के राहुल गाँधी के प्रोपेगेंडा को हवा दिया जा सके।

INDI गठबंधन के नेताओं ने 11 अगस्त 2025 को संसद से लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालकर हंगामा काटा। हालाँकि इस मार्च के लिए प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी। लिहाजा विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। धक्का मुक्की की स्थिति पैदा हो गई।

इस दौरान विपक्षी नेताओं ने यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि बल प्रयोग से उनकी आवाज दबाई जा रही है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सांसद महुआ मोइत्रा और समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव जैसे कुछ नेता पुलिस बैरिकेड्स पर भी चढ़ गए थे।

इस घटना को द न्यूयॉर्क टाइम्स ने ‘चुनावी अनियमितताओं का विरोध करने पर भारतीय सांसदों को हिरासत में लिया’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया ताकि विपक्ष के बेबुनियाद आरोपों को बल मिल सके।

                                                  ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ वेब पोर्टल का स्क्रीनशॉट

इसी तरह वाशिंगटन पोस्ट ने बिहार में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को शातिर तरीके से ‘विवादास्पद मतदाता सूची पुनरीक्षण’ बताया है।

                                                ‘वॉशिन्गटन पोस्ट’ वेब पोर्टल का स्क्रीनशॉट

अल जजीरा ने भी विरोध मार्च की रिपोर्टिंग में INDI गठबंधन के नेताओं के आरोपों को प्रमुखता दी है।

इनके सुर में सुर मिलाते हुए ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) ने भी बिहार में मतदाता सूची संशोधन को “विवादास्पद” बताया।

                                                       ABC वेब पोर्टल का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने 7 अगस्त 2025 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। कांग्रेस पार्टी की चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग और सत्ताधारी बीजेपी को दोषी ठहराया। बिना किसी प्रमाण 2024 के लोकसभा चुनावों को ‘फिक्स’ बता दिया।

राहुल गाँधी की रायबरेली में ‘फर्जी मतदाता’

इस दौरान राहुल गाँधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का जिक्र किया। कहा कि उनकी पार्टी ने यहाँ एक ‘आंतरिक सर्वेक्षण’ कर 1,00,250 मतों की ‘वोट चोरी’ पकड़ी है। उनका कहना था कि कर्नाटक को कांग्रेस में 16 सीट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन वह 9 सीट ही जीत पाई और ऐसा ‘वोट चोरी’ से ही संभव है।

उनका कहना था कि उनकी पार्टी ने इस अप्रत्याशित हार का विश्लेषण करने के बाद पाया कि ‘वोट चोरी’ हुई थी। राहुल गाँधी ने सत्ता में आने पर चुनाव आयोग के अधिकारियों को ‘परिणाम’ भुगतने की धमकी भी दी।

राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूचियों में ‘मकान नंबर 0’ जैसी विसंगतियों का हवाला देते हुए, चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता बनाने का आरोप लगाया। लेकिन बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि राहुल गाँधी के खुद के निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में भी बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में इस तरह की विसंगति है।

एक तरफ ‘फर्जी वोटरों’ का रोना, दूसरी तरफ SIR का विरोध

कांग्रेस पार्टी समेत पूरा INDI गठबंधन बिहार में SIR का विरोध कर रहा है। इस पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं। हालाँकि शीर्ष अदालत ने मतदाता सूची संशोधन को नियमित प्रक्रिया और चुनाव आयोग का अधिकार बताते हुए रोक से इनकार कर दिया था।

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि चुनाव आयोग राहुल गाँधी से उनके आरोपों पर शपथ देने को कह चुका है ताकि जाँच शुरू की जा सके। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता ने यह कहते शपथ पत्र देने से इनकार कर दिया कि एक नेता होने के कारण उनके कहे को ही शपथ के तौर पर लिया जाना चाहिए। इससे उनके आरोपों की ‘गंभीरता’ का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अवलोकन करें:-

सुर्खियों में कर्नाटक के ‘शशि थरूर’: मंत्री राजन्ना ने Rahul Gandhi के वोट चोरी के दावों की पोल खोली, जो
सुर्खियों में कर्नाटक के ‘शशि थरूर’: मंत्री राजन्ना ने Rahul Gandhi के वोट चोरी के दावों की पोल खोली, जो
 

यही कारण है कि एक तरफ राहुल गाँधी मतदाता सूची में फर्जी लोगों का नाम जोड़ने का आरोप लगाते हैं, दूसरी तरफ मतदाता सूची से फर्जी, अयोग्य और मृत लोगों के नाम हटाए जाने का विरोध भी करते हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार में चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया ने भारी विसंगतियाँ पकड़ी है।

आयोग ने पाया है कि सूची में 18 लाख मृत लोगों के नाम दर्ज थे। 7 लाख नाम डुप्लीकेट थे। इसके अलावा 26 लाख लोग ऐसे थे जो दूसरे जगहों पर जा चुके हैं।