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दिल्ली : बुलडोजर देख मस्जिद के ऊपर चढ़ गई मुस्लिम औरतें भी, MCD ने अवैध निर्माण ढहाया: मंगोलपुरी में कार्रवाई रोकने को पहले बनाई ‘मानव दीवार’, फिर पथराव

                  मस्जिद पर होता एक्शन और विरोध करती भीड़ (चित्र साभार: medineshsharma/X)
दिल्ली के मंगोलपुरी में MCD ने मस्जिद ने अवैध निर्माण पर एक्शन लिया है। यहाँ MCD ने एक मस्जिद के अवैध हिस्से को भी गिरा दिया। मस्जिद के अवैध निर्माण को हटाने के दौरान काफी हंगामा हुआ। हंगामे के बीच मस्जिद के अवैध हिस्से को गिरा दिया गया।

अब सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि किस नेता और अधिकारी रहते अवैध निर्माण हुआ? मंगोलपुरी तो एक झांकी है। MCD बताए कि पूरी दिल्ली में कितने अवैध निर्माण हैं और भवन विभाग क्यों खामोश रहा? क्या MCD निष्पक्ष रूप से दिल्ली से अवैध निर्माण हटाएगा? कोई व्यक्ति अगर  नियमित कार्य के लिए जाता है, इजाजत नहीं मिलती, कई अड़चने लगा दी जाती है, लेकिन जब उसी काम को किसी बिल्डर के माध्यम से करवाता है, तुरंत हो जाता है, क्यों? क्या राज है? 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगोलपुरी के वाई ब्लॉक में में मंगलवार (25 जून, 2024) सुबह पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा बलों के साथ MCD की टीम पहुँची। यहाँ टीम कुछ अवैध निर्माणों को गिराने पहुँची थी। इन अवैध निर्माण की शिकायत की गई थी। इन अवैध निर्माण में एक मस्जिद का हिस्सा भी शामिल था। दूसरे, दिल्ली में अवैध निर्माण ही नहीं, अधिक्रमण भी कम नहीं, जिस कारण चौड़ी सड़कें तंग हो रही है। 

जब MCD और सुरक्षाबल यहाँ पहुँचे तो बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएँ और पुरुष मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और इस कार्रवाई का विरोध करने लगे। इसके बाद उन्होंने टीम को घेर भी लिया। इसके बाद हँगामा करने वाली भीड़ ने पुलिस और MCD पर पथराव भी किया, ऐसी सूचना भी सामने आई है।

बताया गया कि मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों ने मस्जिद के अवैध हिस्से को बचाने के लिए एक मानव दीवाल बना दी। यह भी सूचना सामने आई कि कुछ हिस्सा तोड़ने के बाद MCD की टीम ने यहाँ काम रोक दिया। MCD के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण ज्यादा मजबूत है और उसको तोड़ने के लिए बड़ी मशीनें लानी पड़ेंगी।

मंगोलपुरी से कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। गौरतलब है कि दिल्ली में MCD लगातार पिछले कुछ समय से अतिक्रमण पर कार्रवाई कर रहा है। मंगोलपुरी का अतिक्रमण भी एक शिकायत के बाद हटाया जा रहा था।

इससे पहले यह भी सामने आया था कि दिल्ली की जामा मस्जिद ने भी एक सार्वजनिक पार्क पर कब्जा किया हुआ है, इसे लेकर मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। इस मामले में पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कब्जा वापस न ले पाने के लिए MCD को फटकारा है।

‘केजरीवाल के लिए राष्ट्रहित से ऊपर व्यक्तिगत हित’: भड़का हाई कोर्ट, जेल से सरकार चलाने के कारण दिल्ली के 2 लाख+ स्टूडेंट को न किताब मिली, न ड्रेस; क्या केजरीवाल कोर्ट को कोई सख्त फैसला लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?

शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई। यानि कोर्ट ने केजरीवाल को इस्तीफा नहीं देने के कारण दिल्ली को हो रहे नुकसान पर सख्त आदेश देने के संकेत दे दिए हैं। हर जगह केजरीवाल की तानाशाही काम नहीं आने वाली। हाई कोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल राष्ट्रहित से ऊपर अपना व्यक्तिगत हित रखते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके जेल में होने के कारण दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में 2 लाख विद्यार्थियों को किताब एवं यूनिफॉर्म मिलने में देरी हो रही है।

केजरीवाल पहले खुद ही कह चुके हैं कि 'मैं anarchy हूँ' लेकिन ये anarchy मुख्यमंत्री बने केजरीवाल को नहीं मालूम कि सांप का फन कैसे कुचला जाता है। हर जिद की एक सीमा होती है। सीमा से बाहर जाने पर होने वाली कार्यवाही को उचित ही कहा जायेगा अनुचित नहीं। केजरीवाल दिल्ली की जनता और स्कूल के छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ मत करो। घोटाले करके ईमानदार मत बनो। 

दरअसल, ‘सोशल ज्यूरिस्ट’ नाम के एक NGO ने एक जनहित याचिका दाखिल करके कहा है कि नगर निगम के स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को अब तक किताबें नहीं मिली हैं। इस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली सरकार को सिर्फ सत्ता की चाह है।

बेंच ने कहा, “किताब और यूनिफॉर्म बँटवाना कोर्ट का काम नहीं है। हम ये इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि कोई अपना काम नहीं कर रहा है… आपके क्लाइंट (दिल्ली सरकार) को सिर्फ सत्ता में दिलचस्पी है। मैं नहीं जानता कि आप कितनी शक्ति चाहते हैं? समस्या यह है कि आप शक्ति को हथियाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके कारण आपको शक्ति नहीं मिल रही है।”

इस पर दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील शादान फरासत ने कोर्ट को बताया कि MCD की स्थायी समिति की गैर-मौजूदगी में किसी अधिकारी को शक्ति देने के लिए मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी है। मुख्यमंत्री अभी हिरासत में हैं, इसलिए देरी हो रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ये कोई बहाना नहीं हो सकता।

इस पर जस्टिस मनमोहन ने कहा कि खुद हाई कोर्ट अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग वाली कई याचिकाओं को खारिज कर चुका है। उन्होंने कहा, “आपने कहा है कि मुख्यमंत्री के हिरासत में होने के बावजूद सरकार जारी रहेगी। आप हमें उस रास्ते पर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिस पर हम नहीं जाना चाहते थे। यदि आप चाहते हैं कि हम इस पर टिप्पणी करें, तो हम पूरी सख्ती से करेंगे।”

कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि इस मामले को ऐसे ही छोड़ दिया जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर स्टैंडिंग कमिटी किसी भी वजह से नहीं बन पा रही है तो दिल्ली सरकार किसी उपयुक्त अथॉरिटी को वित्तीय अधिकार दे। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वो इस मामले में दो दिन के अंदर जरूरी कार्रवाई करे।

भाजपा का दिल्ली सरकार पर हमला

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रामवीर बिधूड़ी ने कहा क‍ि मुख्यमंत्री केजरीवाल की जेल से सरकार चलाने की जिद से संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सिफारिश के अभाव में द‍िल्‍ली नगर न‍िगम में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में पिछले 35 दिनों से कैबिनेट की बैठक नहीं हुई है। राजधानी में बिजली और पानी का समर प्लान नहीं बना है। पिछले साल डूबने के बावजूद मॉनसून के दौरान राजधानी को बचाने के लिए कोई मीटिंग नहीं हो रही है। पूरा प्रशासन ठप पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उपराज्यपाल को हस्तक्षेप करना चाहिए।

शराब घोटाले में नष्ट किए सबूत

शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में अपनी बात रखी है। हलफनामे में ED ने कहा, “घोटाले की अवधि में और जब 2021-22 की दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति में घोटाला और अनियमितताएँ सार्वजनिक हो गईं, तब 36 व्यक्तियों (आरोपित और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों) द्वारा कुल 170 से अधिक मोबाइल फोन बदले/नष्ट किए गए।”
हलफनामे में आगे कहा गया है, “घोटाले और धन के लेन-देन के महत्वपूर्ण डिजिटल सबूतों को आरोपियों और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों द्वारा सक्रिय रूप से नष्ट कर दिया गया है। सबूतों के इतने सक्रिय और आपराधिक विनाश के बावजूद एजेंसी महत्वपूर्ण सबूतों को फिर से हासिल करने में सक्षम रही है, जो सीधे तौर पर प्रक्रिया में याचिकाकर्ता का खुलासा करती है।”

दिल्ली हाई कोर्ट की MCD को फटकार : पब्लिक पार्क वापस लो, पुलिस चाहिए तो देंगे: सरकारी जमीन पर जामा मस्जिद ने कर रखा है कब्जा; जामा मस्जिद को हो रही लाखों की कमाई पर कार्यवाही कब?

जामा मस्जिद ने कर रखा है आसपास के पार्कों पर कब्जा
दिल्ली के जामा मस्जिद ने पास के एक पब्लिक पार्क पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इसे लेकर मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। अब मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कब्जा वापस न ले पाने के लिए MCD को फटकारा है। कोर्ट ने कहा है- “हम ऐसी सदी में नहीं रह रहे हैं जहाँ कानून का शासन नहीं है फिर आखिर क्यों MCD ये कब्जा वापस नहीं ले पाई।”

सुनवाई के दौरान MCD ने हाईकोर्ट को बताया कि पब्लिक पार्क पर जामा मस्जिद की अथॉर्थी और शाही इमाम ने कब्जा कर रखा है। उन लोगों ने अवैध रूप से उसे अपने कब्जे में किया हुआ है और उस पर वे ताला भी लगा देते हैं। एमसीडी की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि वजूखाने के पास बने पार्क में वह लोग एमसीडी अधिकारियों को प्रवेश नहीं करने देते और दिल्ली वक्फ बोर्ड भी पार्क को अपनी संपत्ति बताता है।

MCD की ओर से पेश वकील की बात सुनने के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और मिनी पुष्कर्ण ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि आखिर कैसे पब्लिक पार्क पर कब्जा कर लिया गया और अब एमसीडी इतनी मजबूर है कि उसे वापस भी नहीं ले पा रही। पीठ ने कहा- “सार्वजनिक पार्कों पर कैसे भी कब्जा नहीं हो सकता…आप हमें 21वीं सदी में क्या बताने की कोशिश कर रहे हो? ये सब कैसे हो सकता है। हम हर दिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कह रहे हैं। हम साँस नहीं ले पा रहे हैं, और आप पार्कों पर कब्ज़ा खो रहे हैं?आप इस पर कब्ज़ा नहीं खो सकते यदि आप पार्क के मालिक हैं, तो आप पार्क को दिल्ली के नागरिकों के लिए सार्वजनिक ट्रस्ट में रखते… ऐसा लगता है कि आपके अधिकारी किसी और दुनिया में रह रहे हैं… आप इस तरह सार्वजनिक पार्क का कब्जा नहीं खो सकते। हम ऐसे देश में नहीं रह रहे हैं, जहाँ कानून का शासन नहीं है…हम 21वीं सदी में रह रहे हैं।”

कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करने के बाद कहा है कि MCD कानून के अनुसार सार्वजनिक पार्क पर कब्जा वापस पाने के लिए कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस की जरूरत होगी तो उनकी सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस तरह पब्लिक पार्क पर प्रशासन पर अपना अधिकार नहीं छोड़ सकता।

जिस पार्क पर जामा मस्जिद के प्रशासन ने कब्जा किया हुआ है। वो नॉर्थ पार्क है। जहाँ एमसीडी को घुसने तक नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक साउथ पार्क को भी लेकर विवाद है लेकिन वहाँ वह आ जा पाते हैं और पार्क की देख रेख कर पाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गई थी।

कोर्ट के इस कदम से जनता में अब यह प्रश्न पूछा जा रहा है कि जामा मस्जिद को होने वाली लाखों/करोड़ों की कमाई का कब हिसाब माँगा जाएगा? जबकि इसके रख-रखाव पर सरकारी धन खर्च किया जाता है। दूसरे, सर्विस लेन और सीढ़ियों पर लगने वाली दुकानों की कमाई किसकी जेब में जा रही है, जबकि कई बार कोर्ट के आदेश के बाद इनको हटाया जाता रहा है, फिर किसके इशारे पर दुकाने लग जाती हैं? नीचे मीना बाजार में भी अतिक्रमण हुआ है।  

दिल्ली नगर निगम हंगामा: क्या आतिशी के इशारे पर केजरीवाल के नेताओं ने की मारपीट? देखिए वीडियो

दिल्ली वालों को, एक अपवाद पंजाब को छोड़कर, दूसरे राज्यों से सीखने की जरुरत हैं, जहाँ के मतदाता फ्री के चक्कर को लात मार रहे हैं। दिल्ली में जब से केजरीवाल सरकार ने डेरा डाला है, हिन्दुओं की जितनी हत्याएं हुई कभी कांग्रेस राज में नहीं हुईं। अरविन्द केजरीवाल दिल्ली से बाहर किसी मुसलमान की हत्या होने पर दौड़े-दौड़े जाते हैं, लेकिन दिल्ली में केजरीवाल के वोट बैंक द्वारा किसी हिन्दू की हत्या होने पर चुप्पी साधे रहते हैं, कभी दिल्ली वालों ने सोंचा। विधान सभा की तरह नगर निगम में भी केजरीवाल पार्टी को लाकर देखो, वह कांड हो रहे हैं, जो इतिहास बन रहा है। पहले नियम था कि किसी भी विदेशी के भारत आने पर एयरपोर्ट पर दिल्ली महापौर स्वागत करने जाते थे। लेकिन नगर निगम में भारतीय जनसंघ के होने कारण जनसंघ के महापौर द्वारा स्वागत करना तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने नियम ही बदल दिया, परन्तु कभी जनसंघ और कांग्रेस में कभी मनमुटाव नहीं हुआ। दिल्लीवासी अगर बीजेपी को वोट नहीं देना चाहते मत दे, कांग्रेस को दे दें। दिल्ली वालों की तरह पंजाब भी फ्री के मकड़जाल में फंस आज देखो पंजाब को आग में झोंक दिया है। 

फरवरी 24 को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों के चुनाव के दौरान जमकर हंगामा हुआ। परिणाम घोषित होने से ठीक पहले आम आदमी पार्टी और बीजेपी पार्षदों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस दौरान आप विधायक आतिशी मार्लेना के इशारे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेताओं ने निगम की मर्यादा को तार-तार कर दिया। ट्विटर पर आतिशी मार्लेना का कुछ इस तरह संधि विच्छेद--मार+लेना=मार्लेना-- किया जा रहा है। सदन में हंगामा के बीच नारेबाजी के बीच मारपीट तक हुई। दिल्ली की पूर्व मेयर आरती मेहरा ने आरोप लगाया कि आप मेयर ने अपने संगठन की गरिमा को तार-तार किया। वे आतिशी, दुर्गेश पाठक और पीछे से अरविंद केजरीवाल से निर्देश लेती रहीं। हमारे पास वीडियो है जिसमें आतिशी अपनी स्टैंडिंग कमेटी की सदस्य सरिता चौधरी को निर्देश दे रही हैं कि मारो और फिर एक के बाद एक लोग मारने के लिए आ जाते हैं।

आतिशी ने बोला और AAP की महिला पार्षद ने मारपीट शुरू कर दी, समझ में नही आ रहा यह आम आदमी पार्टी वाले जहा पहुंच जाते है वहाँ सभी जगह आरोप प्रत्यारोप की गन्दी राजनीति गाली-गलौज क्यो चालु हो जाती है। साफ सुथरी राजनीति करने आया केजरीवाल आज सर्वाधिक नकारा व भ्रष्टाचार में लिप्त है,
Aatishi Marlena instigating her bunch of clowns to fight like peacefool zombies!
आज के हालात यह है कि केजरीवाल सरकार नें दिल्ली को विश्व में अपराधियों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान बना दिया है सब कुछ फ्री में, देश विरोधियों का यह केजरीवाल सदैव समर्थन करता है, लाखो अवैध रोहंगियों, बांग्लादेशियो का आधारकार्ड व् वोटरआईडी कार्ड बनवा भारत का वैध नागरिक बना दिया इसने केवल दिल्ली की ही नहीं वरन सम्पूर्ण देश की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, उन्हें मासिक पेंशन, फ्री राशन, बिजली पानी भी देता है।
सर्जिकल स्ट्राइक के इसने सेनाओं से सबूत मांगे, जेएनयू में टुकड़े गैंग को समर्थन, उन अपराधियों पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति चुनाव आने पर दी, जितना पैसा दिल्ली को केंद्र व् राजधानी होने की वज़ह से टैक्स के रूप में मिलता है यदि उतना पैसा दिल्ली के विकास पर सही ईमानदारी से खर्च होता तो आज दिल्ली विश्वस्तरीय शहर होता, इस केजरीवाल के विधायक जिन्हें इसने ईमानदारी का सर्टिफिकेट दिया था वो भ्र्ष्टाचार में जेल में फिर भी केजरी उसकी पार्टी ईमानदार।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने वीडियो जारी कर आप नेता आतिशी मार्लेना पर पार्टी नेताओं को मारपीट के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि आतिशी एक महिला पार्षद के कान में कुछ कहती हैं। उसके बाद उस पार्षद ने दूसरे पार्षदों के साथ जमकर बवाल किया। वह महिला पार्षद आतिशी के निर्देश के बाद एक पुरुष से तू-तू, मैं-मैं करने लगती है, फिर थप्पड़ जड़ देती है।

आतिशी का मारपीट के लिए उकसाने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और केजरीवाल की पार्टी पर अराजकता का आरोप लग रहा है। केजरीवाल की पार्टी की इससे भारी किरकिरी हो रही है।

आमदनी से 3 गुना ज़्यादा है MCD का खर्च, कैसे चलेगी AAP की रेवड़ी वाली राजनीति?

दिल्ली नगर निकाय (MCD) चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत हुई है। AAP को 250 में से 134 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को 104 और कॉन्ग्रेस को 09 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। राजधानी दिल्ली का 97 फीसदी इलाका एमसीडी के अंडर ही आता है। बाकी का तीन प्रतिशत इलाका नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) और दिल्ली कंटेन्मेंट बोर्ड (DCB) के पास है।

एमसीडी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम के दायरे में लगभग 2 करोड़ लोग आते हैं, जो इसे भारत का सबसे बड़ा नगर निगम बनाती है। क्षेत्रफल की दृष्टि से दिल्ली नगर निगम विश्व में सबसे बड़ा निगम है और जनसंख्या की दृष्टि से दिल्ली नगर निगम की गिनती टोक्यो के बाद होती है। दिल्ली नगर निगम में लगभग 1.50 लाख कर्मचारी काम करते हैं।

इसी साल केंद्र सरकार ने दिल्ली के तीन निगमों को मिलाकर एक कर दिया था। तीनों नगर निगम एक करने के बाद एमसीडी का बजट बढ़कर 15,000 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुँच गया है। इस बार भी 15,276 करोड़ रुपए बजट का प्रा वलवधान किया गया है। वर्ष 2022-23 के लिए अनुमानित इस बजट का ऐलान होना बाकी है।

भले ही आम आदमी पार्टी एमसीडी चुनाव जीत चुकी है, लेकिन आगे उसकी राह आसान नहीं होने वाली है। एमसीडी की आर्थिक स्थिति बता रही है कि यह आम आदमी पार्टी के लिए काँटों भरा ताज है। दरअसल, दिल्ली नगर निगम की जितनी आमदनी है, उससे कई गुना ज्यादा खर्च है। एमसीडी के खर्च से पहले उसकी आमदनी के बारे में जान लेते हैं। एमसीडी की सालाना आमदनी लगभग 4800 करोड़ रुपए है।

टैक्स आय का प्रमुख साधन

किसी भी नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत वसूले जाने वाला टैक्स होता है। दिल्ली एमसीडी को संपत्ति टैक्स से अधिक आमदनी होती है। उन्हें प्लॉट, दुकानों, कमर्शियल इमारतों और जगह-जगह लगने वाले एडवरटाइजिंग का टैक्स मिलता है। इसके अलावा बॉर्डर पर वसूले जाने वाले टोल टैक्स, पार्किंग आदि से निगम अपनी कमाई करता है। दिल्ली सरकार जो स्टांप ड्यूटी वसूल करती है, उसमें भी नगर निगम का हिस्सा होता है।

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से मिलता है फंड

पाँचवे वित्त आयोग में व्यवस्था की गई थी कि विकास कार्यों के लिए एमसीडी को दिल्ली सरकार अपने बजट का 12.5% हिस्सा देगा। यह फंड राज्य सरकार तीन किस्तों में एमसीडी को देती है। इसके अलावा केंद्र सरकार का शहरी विकास मंत्रालय भी एमसीडी के लिए फंड जारी करता है।

नक्शों की मंजूरी से फंड की प्राप्ति

दिल्ली में नक्शे मंजूर करने का काम एमसीडी के पास ही है। यदि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में केंद्र सरकार भी कोई इमारत बनाती है तो उसे एमसीडी से ही नक्शा मंजूर कराना होता है। इसके लिए एमसीडी शुल्क वसूलता है।

आय के अन्य स्रोत

इनके अतिरिक्त एमसीडी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, ट्रेड लाइसेंस जारी करने, रेस्टोरेंट लाइसेंस देने, पार्किंग के ठेके जारी करने से भी आमदनी करता है।

आमदनी से अधिक खर्च

एमसीडी को आम आदमी पार्टी के लिए काँटो भरा ताज इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आमदनी के तुलना में यहाँ खर्च बहुत अधिक है। खर्च अधिक और आमदनी कम होने के कारण विकास कार्यों के लिए अक्सर फंड की कमी हो जाती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एमसीडी के लिए काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन पर सालाना 9300 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। एमसीडी को लाखों स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल भरना पड़ता है। इस पर सालाना करीब 100 करोड़ रुपए खर्च आता है।
सफाई व्यवस्था पर सालाना करीब 300 करोड़ रुपए खर्च होता है। बिजली बिल और सफाई पर सालना खर्च 400 करोड़ का खर्च होता है, लेकिन आमदनी नहीं होती। इसके अतिरिक्त सैनिटेशन, कूड़ा ढुलाई और दफ्तरों के मेंटनेंस पर भी खर्च होता है।
कुल मिलाकर कह सकते हैं कि एमसीडी की जितनी आमदनी है, उससे करीब तीन गुना खर्च है। आय और व्यय के बीच का जो अंतर है उसे पाटना आम आदमी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

इस साल एजेंसियाँ कोरोना नियंत्रण में लगी थीं: केजरीवाल

दिल्ली
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देश की राजधानी दिल्ली में रविवार (19 जुलाई, 2020) को हुई भारी बरसात के बाद जो हालात सामने आए उसने केजरीवाल सरकार के ड्रेनेज सिस्टम और बरसात प्रबंधन की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। नाले में बहती झुग्गी और डूबा शहर देखकर, दिल्ली सरकार की मॉनसून को लेकर सारी तैयारियाँ भी पहली ही बारिश में धुलती नजर आईं। कई इलाकों में भारी जल भराव होने के कारण जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है। इस जलभराव के कारण मिंटो रोड पर स्थित एक टेंपो ड्राइवर की मौत हो गई।
बीजेपी ने इस मसले पर जब केजरीवाल सरकार को घेरा तो सफाई देने खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सामने आए। अरविंद केजरीवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब ट्वीट के माध्यम से दिया। उन्होंने कहा, “इस साल सभी एजेंसियाँ, चाहे वो दिल्ली सरकार की हों या एमसीडी की, सभी कोरोना के नियंत्रण में जुटी हुई हैं। कोरोना के कारण उन्हें कई कठिनाइयाँ आईं हैं। ये वक्त एक दूसरे पर दोषारोपण का नहीं है। सबको मिल कर अपनी जिम्मेदारियाँ निभानी है। जहाँ-जहाँ पानी भरेगा, हम उसे तुरंत निकालने का प्रयास करेंगे।”


सफाई विभाग नगर निगम के अधीन है 
इससे पहले बारिश के चलते भरे हुए नाले और दिल्ली की खराब स्थिति को देखते हुए बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने ट्विटर के जरिए अरविंद केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था।
मनोज तिवारी ने कहा था कि, “कुछ घंटों की बारिश में बिगड़े हालात, तो महीनों की बारिश में दिल्ली का क्या हाल होगा? अरविंद केजरीवाल जी मॉनसून की पहली बारिश ने ही आपकी तैयारियों की कलई खोल दी। आगे होने वाली बारिश से निपटने के लिए तुरंत ठोस योजना तैयार करें, ताकि दिल्ली को डूबने और लोगों को तकलीफ से बचाया जा सके।”
दिल्ली सरकार को आरोपित करने से पूर्व, बीजेपी को यह समझना चाहिए था कि सफाई विभाग नगर निगम में सत्ताधारी बीजेपी के अधीन है, अपने महापौरों से क्यों नहीं प्रश्न किया? केजरीवाल ने फिर कोरोना की आड़ में बीजेपी को भी दोषमुक्त किया है। आरोप लगाना अच्छी बात है, लेकिन आधारहीन नहीं। अगर नाले भरे तो दोषी बीजेपी भी है। आधारहीन विरोध करने के ही बीजेपी दिल्ली सत्ता से बाहर है और यही हाल रहा तो नगर निगम से भी बाहर हो जाएगी। बीजेपी की इन्ही गलतियों को अरविन्द केजरीवाल भुनाने में सफल हो रहे हैं। क्या बीजेपी नगर निगम को भ्रष्टाचार मुक्त करवा पायी? इन्ही मुद्दों पर आगामी नगर निगम चुनावों में केजरीवाल पार्टी बीजेपी को घेरेगी और बीजेपी के पास कोई जवाब नहीं होगा। स्थानीय बीजेपी नेता धरातल पर काम करना भूल, केवल चाटुकारों पर ही निर्भर है। मोदी के नाम पर लोकसभा जीत सकते हो, लेकिन स्थानीय चुनाव नहीं।  
दिल्ली के मिंटो रोड अंडरपास में भारी जलभराव की वजह से जिस कुंदन नाम के शख्स की मौत हुई थी, वह अपने परिवार में कमाने वाला इकलौता सदस्य था। कुंदन के टेम्पो पर सीआईपीएफ का स्टीकर लगा था। जिससे पता चलता है कि उसने कोरोना काल के समय दिन-रात लोगों की मदद की है। कुंदन के सर पर उसके माता-पिता, पत्नी और दो बेटियों की जिम्मेदारी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में कुंदन के बड़ी बेटी की शादी तय थी। कुंदन के भाईयों की पहले ही एक सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। वहीं अब दिल्ली प्रशासन की लापरवाही ने उसकी भी जान ले ली। अब सवाल यह उठता है कि क्या केजरीवाल सरकार कुंदन के परिवार की जिम्मेदारी उठाएगी। जो सपना कुंदन ने अपनी बेटी के लिए सँजो रखा था, क्या वो अब पूरा हो पाएगा?
मिंटो रोड ब्रिज के पास पानी में एक शव तैरता हुआ मिला। एक ट्रैकमैन ने इस शव को देखा और बाहर निकाला। बाद में दिल्ली पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान 60 वर्षीय कुंदन के रूप में हुई है। कुंदन सिंह टेंपो ड्राइवर था। वह सुबह कनॉट प्लेस की तरफ जा रहा था। उसने अंडरपास से अपना वाहन निकालने की कोशिश की जहाँ पानी भरा था। ऐसा लगता है कि भारी बारिश में जल-भराव में डूबने से उसकी मौत हुई है। क्योंकि उसके शरीर पर किसी बाहरी चोट का कोई निशान सामने नहीं आया है।