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ममता बनर्जी का ‘शराब घोटाला’: 55 होलसेलर बाहर, चुनिंदा बिचौलियों की एंट्री; क्या ममता केजरीवाल से शराब घोटाले से बचने की सलाह लेने के लिए मिली थी?


दिल्ली की पूर्व केजरीवाल सरकार की शराब नीति के बाद अब पश्चिम बंगाल की 2017 में लागू नई आबकारी नीति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। राज्य की तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने वेस्ट बंगाल स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (WBSBCL) का गठन किया गया।

बंगाल में सरकार बने जुम्मा-जुम्मा आठ दिन नहीं हुए नितरोज ममता बनर्जी के कार्यकाल में हुए घोटाले सामने ही नहीं आ रहे कार्यवाही भी हो रही है और एक तरफ दिल्ली सरकार है जो अरविन्द केजरीवाल के कार्यकाल में हुए घोटालों पर सोई हुई है। CAG रिपोर्ट पर कितना शोर मचाया चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात वाली बात हो गयी

 

एजेंसी ने राज्य के सभी 55 प्राइवेट शराब होलसेलर्स की जगह लेकर शराब वितरण पर सीधा राज्य का नियंत्रण स्थापित कर दिया। इसने वितरण और थोक विक्रेता दोनों के रूप में काम करने की कोशिश की, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुआ। खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसे वसूले गए।

दरअसल टीएमसी सरकार के कार्यकाल में हुए राज्य में शराब व्यापार से जुड़ी एक रिपोर्टें सामने आई है। इसमें उत्पाद शुल्क विभाग के एक गोपनीय दस्तावेज से पता चलता है कि शराब वितरण नेटवर्क का इस तरह से पुनर्गठन किया गया था, जिससे कुछ खास प्राइवेट शराब विक्रेताओं को लाभ हुआ और इस तरह सिस्टम काम कर रहा था, जिससे उनका एकाधिकार स्थापित हुआ।

रिपोर्ट से पता चलता है कि 2017 में शराब वितरण नीति में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के इशारे पर ये बदलाव किए गए।

ऑपइंडिया को एक रिपोर्ट की कॉपी मिली है, जिसमें दावा किया गया है कि नए सिस्टम में धीरे-धीरे थोक वितरण के पुराने मॉडल को खत्म कर दिया गया। उसकी जगह ऐसी व्यवस्था की गई जिससे चुनिंदा बिचौलियों की शराब वितरण के सिस्टम में एकाधिकार हो गया।

इससे पता चलता है कि जिसे आधिकारिक तौर पर शराब वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिए एक सुधार के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वह वास्तव में निजी बोतलबंद शराब विक्रेताओं और शराब निर्माताओं से पैसा वसूलने का एक सिस्टम बन गया।

आबकारी विभाग ने जो रिपोर्ट तैयार की उसमें इन बदलावों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में लागू हुए राज्य की नई आबकारी नीति के बाद शराब निर्माताओं से उपभोक्ताओं तक पहुँचने के तरीका बदल गया। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि मुक्त प्रतिस्पर्धा और विकेंद्रीकृत वितरण के पारंपरिक सिद्धांतों को एक कड़े नियंत्रण वाले नेटवर्क से बदल दिया गया, जिसने कुछ चुनिंदा वितरकों के हाथों में पूरा सिस्टम आ गया।

टीएमसी ने शराब वितरण की पूरी प्रक्रिया को सेंट्रलाइज कर दिया

रिपोर्ट में एक चार्ट दिखाया गया है, जो बताता है कि शराब उत्पाद पारंपरिक रूप से बाजार में कैसे पहुँचते थे और पिछली ममता सरकार के तहत पश्चिम बंगाल में यह प्रणाली कैसे विकसित हुई।

                                                        (रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट)

यह चार्ट निर्माता के गोदाम यानी ‘मदर गोदाम’ से शुरू होता है, जहाँ से उत्पाद कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंसी (C&FA) को भेजे जाते हैं। C&FA माल को सिस्टम में आगे बढ़ने से पहले भंडारण और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में कार्य करती है।

वहाँ से उत्पाद आमतौर पर वितरकों या सुपर स्टॉकिस्टों को आपूर्ति किए जाते हैं। ये वितरक कंपनी के अधिकृत व्यावसायिक भागीदार होते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद विभिन्न क्षेत्रों में खुदरा विक्रेताओं और थोक विक्रेताओं तक कैसे पहुँचे।

यह चार्ट दर्शाता है कि वितरक, निर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। वे बिक्री टीमों का प्रबंधन करते हैं, बाजार से ऑर्डर प्राप्त करते हैं, स्टॉक की आवाजाही को संभालते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद सभी खुदरा दुकानों पर उपलब्ध हों। कई उद्योगों में, वितरक खुदरा विक्रेताओं और थोक विक्रेताओं को लोन भी मुहैया कराते हैं, जिससे बाजार में नकदी की कमी नहीं होती है।

थोक विक्रेता इस सिस्टम में एक और अहम कड़ी हैं। वे वितरकों से थोक में उत्पाद खरीदते हैं और फिर उनको खुदरा विक्रेताओं तक छोटी-छोटी खेप में पहुँचाते हैं। छोटे विक्रेताओं का लाभ खरीद मूल्य और उपभोक्ताओं को बेचने के मूल्य में अंतर से मिलता है।

एक बाजार के निर्माण में निर्माता, वितरक, थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेता सबकी अलग-अलग भूमिकाएँ होती हैं। कई बार वितरकों और थोक विक्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा का फायदा भी बाजार को मिलता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में किए गए बदलावों ने वितरण व्यवस्था पर एक छोटे- से ग्रुप का कब्जा हो गया। प्रतिस्पर्धा कम हो गया और उनका एकाधिकार होने से ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने का उन्हें अवसर मिला। इसकी वजह से पारंपरिक बाजार सिद्धांतों को काफी नुकसान हुआ।

वितरक और थोक विक्रेता क्यों महत्वपूर्ण हैं?

रिपोर्ट में वितरकों और थोक विक्रेताओं के बीच अंतर को विस्तार से बताया गया है। वितरक आम तौर पर निर्माताओं के साथ समझौते करते हैं और आधिकारिक चैनल पार्टनर के रूप में कार्य करते हैं। वितरक न केवल उत्पादों की बिक्री के लिए बल्कि उनकी मार्केटिंग, आपूर्ति नेटवर्क के रखरखाव और बाजार तक पहुँच के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। वे आमतौर पर बड़े क्षेत्रों में काम करते हैं और खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं और कभी-कभी सीधे उपभोक्ताओं से भी संपर्क करते हैं।

दूसरी ओर, थोक विक्रेता मुख्य रूप से बड़ी मात्रा में उत्पाद खरीदते हैं और उन्हें खुदरा विक्रेताओं को बेचते हैं। वे मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं ,जिनका उद्देश्य भंडारण, प्रबंधन और थोक खरीद के माध्यम से लाभ कमाना होता है। वितरक आमतौर पर वितरण से जुड़े व्यावसायिक जोखिमों को वहन करते हैं, जबकि थोक विक्रेता माल की आवाजाही पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लागू किए गए शराब वितरण सुधारों ने इन भेदों को धुंधला कर दिया और एक ऐसा मॉडल तैयार किया, जो स्थापित व्यावसायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।

2017 में सरकार द्वारा नियंत्रित वितरण संरचना में बदलाव

2017 को पश्चिम बंगाल स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूबीएसबीसीएल) का गठन हुआ, जो एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी थी और जिसने राज्य में पैकेटबंद शराब के थोक वितरण का कार्यभार संभाला। डब्ल्यूबीएसबीसीएल के माध्यम से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार ने शराब के कारोबार में कदम रखा।

                                                         (रिपोर्ट से लिया गया स्क्रीनशॉर्ट)

डब्ल्यूबीएसबीसीएल के अस्तित्व में आने से पहले, थोक वितरण का काम बड़े पैमाने पर 1909 के बंगाल उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत संचालित निजी लाइसेंस धारकों द्वारा किया जाता था। ये निजी थोक विक्रेता निर्माताओं से उत्पाद खरीदते थे और उन्हें पूरे राज्य में खुदरा विक्रेताओं को आपूर्ति करते थे।

डब्ल्यूबीएसबीसीएल के गठन के बाद निगम शराब खरीदने वाला और वितरण करने वाला दोनों बन गया। इसने पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से शराब खरीदना शुरू किया और इसे पूरे पश्चिम बंगाल में लगभग 5200 खुदरा दुकानों को बेचना शुरू किया।

बंगाल उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 20 के तहत शराब की बिक्री के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, लेकिन विदेशी शराब क्षेत्र के कई आपूर्तिकर्ता कथित तौर पर लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं के बजाय केवल पंजीकृत ब्रांड मालिक या आयातक के रूप में काम कर रहे थे। इसके बावजूद उन्हें निगम को उत्पाद बेचने और बिल जारी करने की अनुमति दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इससे ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जो अधिनियम की भावना के विपरीत थी।

खुदरा विक्रेताओं और निर्माताओं ने शिकायत क्यों की?

रिपोर्ट में नए मॉडल से उत्पन्न होने वाले कई परिचालन और वित्तीय गड़बड़ियों के बारे में बताया गया है।

एक अहम शिकायत ऋण सुविधाओं के अभाव से संबंधित थी। पूर्व की निजी थोक प्रणाली के तहत खुदरा विक्रेताओं को अक्सर उधार पर उत्पाद प्राप्त होते थे। इससे उन्हें बड़ी अग्रिम राशि का भुगतान किए बिना स्टॉक बनाए रखने की सुविधा मिलती थी।

डब्ल्यूबीएसबीसीएल के अधिग्रहण के बाद खुदरा विक्रेताओं को कथित तौर पर खरीद की पूरी लागत अग्रिम रूप से चुकानी पड़ी। चूँकि शराब के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) का लगभग 70-80% हिस्सा करों और शुल्कों का होता है, इसलिए इससे खुदरा विक्रेताओं पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया।

रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि इस बदलाव के कारण सप्लाई चेन में पूँजी की कमी हुई। छोटे खुदरा विक्रेता विशेष रूप से प्रभावित हुए, क्योंकि उन्हें अब लोन से मदद नहीं मिल रही थी, बल्कि ज्यादा निवेश करना पड़ रहा था। इसकी वजह से बाजार में कथित तौर पर गिरावट आई और राजस्व प्रभावित हुआ।

मोनोपॉली की शुरुआत

रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूबीएसबीसीएल के आने से हालात बदल गए। नई नीति के माध्यम से टीएमसी सरकार ने शराब निर्माताओं और बॉटलर्स को बाध्य किया कि वे केवल WBSBCL के नियुक्त वितरकों के माध्यम से ही व्यापार करें। व्होलसेलर्स की जगह आए नए वितरकों पर आरोप लगे कि वे बॉटलर्स से अनुचित दरें वसूलते थे। प्रत्येक क्रेट पर गोडाउन रेंटल (4 रूपए) और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट (3 रूपए) के नाम पर भारी रकम वसूली गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वितरकों को मिलने वाले मुनाफे का एक हिस्सा राज्य के राजस्व खाते में जाने के बजाय कथित तौर पर टीएमसी नेताओं को जाता था। रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाए गए कि यह पूरी अवैध वसूली सिंडिकेट के जरिए सीधे तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी परिसरों, जैसे- 9, कैमक स्ट्रीट, कोलकाता तक पहुँचाई जाती थी।

रिपोर्ट के अनुसार, “विकेंद्रीकृत व्यवसाय, निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और बहु-आपूर्ति बिंदुओं की अवधारणा ने एकाधिकारवादी व्यवसाय मॉडल को जन्म दिया।”

बोतल बनाने वाली कंपनियों पर सिस्टम में शामिल होने का दबाव

रिपोर्ट और संबंधित विवरणों में यह भी दावा किया गया है कि नई व्यवस्था का विरोध करने वाले बोतल निर्माताओं को काफी दबाव का सामना करना पड़ा। इसका उदाहरण अक्सर आईएफबी एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के रूप में दिया जाता है। कंपनी ने उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों को कई पत्र लिखकर गैरकानूनी हस्तक्षेप और दबाव को लेकर चिंता व्यक्त की।

एक पत्र में, कंपनी ने कहा कि उसने ‘कुछ उत्पाद शुल्क अधिकारियों द्वारा अवैध हस्तक्षेप’ के संबंध में बार-बार चिंता व्यक्त की थी, जो उनसे गैरकानूनी माँग पूरा नहीं करने पर परेशान कर रहे थे।

कंपनी ने आगे अनुरोध किया कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ जाँच की जाए और कार्रवाई की जाए।

रिपोर्ट में उन 5 अधिकारियों के नाम बताए गए हैं जो डब्ल्यूबीएसबीसीएल के गठन की दिशा में नीतिगत ढाँचे को तैयार करने में शामिल थे। इनमें पूर्व विशेष आयुक्त (राजस्व) और महाप्रबंधक (संचालन) गौतम घोष, वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त शांतनु आचार्य, उपायुक्त संचयन गांगुली, अतिरिक्त आयुक्त राजर्षि चक्रवर्ती और विशेष आयुक्त कुनास बिस्वास शामिल थे।

पहले, शुल्क का संग्रह मुख्य रूप से विनिर्माण चरण में होता था, जिसे आम तौर पर राजस्व संग्रह का सबसे सुरक्षित और सबसे कुशल तरीका माना जाता है। नए मॉडल में शुल्क संग्रह को विनिर्माण चरण और वितरक चरण के बीच विभाजित किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप राजस्व प्राप्ति में देरी हुई और वितरण नेटवर्क में व्यवधान उत्पन्न हुआ, क्योंकि वितरक अक्सर अतिरिक्त शुल्क वक्त पर जमा करने में विफल रहते थे। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि इससे न केवल प्रणाली जटिल हो गई बल्कि राजस्व दक्षता भी कमजोर हो गई।

AAP का भ्रष्टाचार: INDI गठबंधन वाले कांग्रेस ने ही ‘कट्टर ईमानदार’ का सर्टिफिकेट कैंसल कर I.N.D.I. गठबंधन में डाल दी फूट; क्या मुस्लिम बीजेपी को वोट न देकर सरकार बनवाएंगे?

                                  आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी 
क्या दिल्ली विधानसभा चुनाव 
I.N.D.I. गठबंधन का रायता फैला देगा? इसलिए नहीं कि कांग्रेस उस आम आदमी पार्टी के विरुद्ध मैदान में है, जबकि बाकि पार्टियां अरविन्द केजरीवाल के समर्थन में। संभावनाएं है कि कांग्रेस 10/15 सीटें निकाल सकती है। अगर कांग्रेस 10 सीट भी निकाल लेती है जो I.N.D.I. गठबंधन को बिखरने को मजबूर कर देगा। जिस तरह कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ना गठबंधन को चुभता था उससे कहीं ज्यादा केजरीवाल के साथ खड़ा होने की कीमत चुकानी होगी। 

कांग्रेस द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्र सीलम पुर से अपना चुनावी शंकनाद करना साबित कर रहा है कि कांग्रेस अपने खोए वोटबैंक को वापस हासिल कर खड़ा होने की शुरुआत करना I.N.D.I. गठबंधन के लिए खतरे की घंटी है क्योकि I.N.D.I. गठबंधन का वोटबैंक मुसलमान ही है।   

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद को कट्टर ईमानदार कहते हैं। वो अपनी पार्टी को ईमानदारी का पर्याय बताते हुए उसे ईमानदारी का सर्टिफिकेट देते हैं, लेकिन इंडी गठबंधन में शामिल उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के ही नेता ने उनके ईमानदारी के ‘सर्टिफिकेट’ को कैंसिल कर दिया है। कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोपों को न सिर्फ दोहराया है, बल्कि साफ कहा है कि सरकारी एजेंसियों की कार्रवाईयों के चलते शराब नीति के घोटाले से आने वाला पैसा बंद हो गया है, इसलिए दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।

तेलंगाना कांग्रेस नेता किरण कुमार चमाला ने AAP की ईमानदारी पर सीधा सवाल उठाते हुए पूछा कि आप अब क्यों क्राउडफंडिंग का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने साउथ लॉबी और तेलंगाना की MLC के कविता के साथ मिलकर दिल्ली की शराब नीति में भ्रष्टाचार किया था। उनका दावा है कि जब तक केंद्र सरकार ने इस गड़बड़ी पर चोट नहीं की, तब तक AAP ने शराब नीति के जरिए पैसे बनाए।

चमाला ने कहा, “दिल्ली CM आतिशी अब चुनावों के लिए 40 लाख रुपये जुटाने के लिए जनता से क्राउडफंडिंग माँग रही हैं। उन्हें यह बताना चाहिए कि जब तक ‘साउथ ग्रुप’ सक्रिय था, तब तक उनकी पार्टी ने शराब घोटाले से कमाई की। अब जब भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है, तो उन्हें जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।”

केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद शराब घोटाले की कमाई बंद हो गई, जिससे आम आदमी पार्टी की असलियत सामने आ गई। तेलंगाना कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली की शराब नीति से हासिल किए पैसों के जरिए गोवा चुनाव लड़ा और नतीजा यह है कि वहाँ बीजेपी की सरकार है।

एक तरह से ये केंद्र सरकार की तारीफ ही है कि उसने भ्रष्टाचार पर गहरा चोट किया है और शराब की कमाई को बंद कर दिया। कांग्रेस नेता का ये बयान आम आदमी पार्टी को बुरी तरह से एक्सपोज करता है कि उसका भ्रष्टाचार बंद हो गया तो उसे क्राउडफंडिंग की राह पकड़नी पड़ी।

शराब घोटाले से आतिशी का सीधा कनेक्शन रहा है, क्योंकि घोटाले से जुड़े लोगों की वो रिश्तेदार हैं। ऑपइंडिया ने अपने लेख में बताया था कि आतिशी की बहन रोजा बसंती की शादी पत्रकार भूपेंद्र चौबे से हुई है, जो ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ में बड़े पद पर थे और चैनल का सारा काम वही देख रहे थे। बकौल कपिल मिश्रा, आतिशी के जीजा वाले इस चैनल को हवाला के माध्यम से शराब घोटाले का 17 करोड़ रुपया पहुँचाया गया। ‘India Ahead News’ चैनल में कमर्शियल हेड के रूप में तैनात रहे अरविंद कुमार सिंह को CBI ने शराब घोटाले में गिरफ्तार भी किया था। जून 2021 से लेकर जनवरी 2022 तक हवाला के जरिए हुए पैसों के लेनदेन में उन्हें जाँच एजेंसी ने शामिल बताया था।

अरविंद कुमार सिंह चैनल में प्रोडक्शन कंट्रोलर भी थे। गोवा में AAP का चुनाव प्रचार देख रही कंपनी ‘Chariot Media’ के खाते में 17 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। CBI ने आरोप लगाया था कि हवाला नेटवर्क के जरिए ये पैसे भेजे गए थे। 14 फरवरी, 2022 को गोवा में विधानसभा चुनाव हुए थे। दिल्ली के शराब घोटाले में हुआ ये था कि एक नई शराब नीति बना कर ‘साउथ लॉबी’ यानी, दक्षिण भारत की कुछ शराब कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया और बदले में करोड़ों रुपए की घूस ली गई।

AAP को मिली घूस की रकम 100 करोड़ रुपए बताई गई थी। कविता के करीबी अरुण पिल्लई ने ‘साउथ लॉबी’ की तरफ से बैठकों में हिस्सा लिया था। वहीं Indospirit के मालिक समीर महेन्द्रू ने भी घूस में करोड़ों रुपए दिए थे। इस पूरे खेल में कोरोना के दौरान नुकसान दिल्ली की जनता का हुआ, अरविंद केजरीवाल अपने आवास ‘शीशमहल’ को सुख-सुविधाओं से लैस करने में व्यस्त रहे।

दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार

अब दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाले और शीशमहल के मामले को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 14 रिपोर्ट्स विधानसभा में पेश नहीं की गईं। इनमें से दो रिपोर्ट्स लीक हो चुकी हैं, जिनमें केजरीवाल के सरकारी बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च और शराब नीति से सरकारी खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है।
जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने दिल्ली सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने विधानसभा सत्र बुलाने में कदम पीछे खींच लिए। इससे आपकी ईमानदारी पर संदेह होता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि CAG रिपोर्ट को समय पर पेश करना सरकार की जिम्मेदारी थी।

क्या ‘सर्टिफिकेट’ अब भी दिखाएगी आम आदमी पार्टी या…?

आम आदमी पार्टी की ‘कट्टर ईमानदारी’ पर न केवल राजनीतिक विरोधी, बल्कि सहयोगी दल भी सवाल खड़े कर रहे हैं। कोर्ट की फटकार और भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी की छवि को बड़ा झटका दिया है। मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी दुविधा वाली बात हो गई है कि वो जनता के बीच क्या मुँह लेकर जाए? ‘कट्टर ईमानदारी’ वाला सर्टिफिकेट खारिज होने के बाद क्या वो इसे महज एक राजनीतिक नारा बताकर अपना पलड़ा झाड़ ले? या बेशर्मों की तरह वो अपने सर्टिफिकेट पर डटी रहे। ऐसे में आम आदमी पार्टी को ECI और CAG की रिपोर्ट्स को सामने लाना इसलिए भी जरूरी है ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और ‘अगर’ कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, तो इस मुद्दे पर भी दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

दारू घोटाले से दिल्ली को हुआ 2026 करोड़ रूपए का नुकसान: CAG रिपोर्ट में खुलासा; मुख्यमंत्री आतिशी उपराज्यपाल के कहने के बावजूद क्यों नहीं CAG रिपोर्ट विधान सभा में प्रस्तुत की?

आम आदमी पार्टी झूठों, मक्कारों और घोटालेबाज़ों का गैंग है। अरविन्द केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आतिशी के मुख्यमंत्री बनने पर उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने मुख्यमंत्री कार्यालय में रखी CAG रिपोर्ट्स को विधानसभा में रखने के कहने के बावजूद टेबल नहीं कर दिल्ली वालों को गुमराह किया। आतिशी अच्छी तरह जानती है कि CAG रिपोर्ट्स को विधानसभा में रखते ही सरकार ही नहीं आम आदमी पार्टी की बड़ी तेजी के साथ उलटी गिनती शुरू हो जाएगी, कोई पार्टी को भी नहीं बचा पाएगा। आधी से ज्यादा पार्टी तिहाड़ में चली जाएगी।

इस चुनाव में अगर कांग्रेस आक्रामक हो केजरीवाल पर हमला करती है, केजरीवाल सरकार एक इतिहास ही नहीं बनेगी बल्कि कांग्रेस को ही नई जान मिलेगी। पंजाब में आप सरकार की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी वो कांग्रेस की दूसरी सबसे जीत होगी। पंजाब में सरकार गिरते ही केजरीवाल पार्टी इतिहास बन जाएगी, जिसे एक-दो चुनाव के बाद जनता भी भूल जाएगी बशर्ते न कांग्रेस और न बीजेपी इस पार्टी के किसी भी तथाकथित नेता को अपनी पार्टी में शामिल करे। दूसरे, अगर कांग्रेस 10 सीटें भी जीत जाती है केजरीवाल कम से कम 20/22 सीटों का नुकसान होगा। जो कांग्रेस की बहुत बड़ी जीत होगी। बीजेपी का भी 30 से 32 सीटें जीतने की संभावनाएं की जा रही है। लेकिन कांग्रेस बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के किसी भी कीमत पर 2013 वाली भयंकर गलती कर केजरीवाल को समर्थन न दे, जो कांग्रेस के लिए आत्मघाती कदम होगा। अगर उस समय कांग्रेस ने समर्थन नहीं दिया होता एक विपक्ष के रूप में उभर कर आती।        

दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, अरविंद केजरीवाल सरकार की इस शराब नीति के कारण दिल्ली सरकार को 2026 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। यह नीति नवंबर 2021 में लागू की गई थी और इसका उद्देश्य शराब की बिक्री के माध्यम से राजस्व बढ़ाना और व्यवस्था में सुधार लाना था। हालाँकि, रिपोर्ट में इसे भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और कमीशनखोरी से भरा बताया गया है। इस चक्कर में मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी, क्योंकि शराब घोटाले से जमा किए पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग का भी मामला सामने आ गया था।

कथित तौर पर लीक हुई CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी करने में नियमों का उल्लंघन किया गया। कई ऐसी कंपनियों को लाइसेंस दिए गए, जो घाटे में थीं या जिनके खिलाफ शिकायतें थीं। नियम तोड़ने वालों को सज़ा देने की बजाय उन्हें छूट दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि शराब नीति के कई अहम फैसले बिना कैबिनेट और उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए गए।

यही नहीं, दिल्ली शराब नीति घोटाले के दौरान एक्सपर्ट पैनल की सिफारिशों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से फैसले लिए गए। लाइसेंसधारकों और थोक विक्रेताओं के बीच अनुचित समझौते हुए। सरकार ने कोविड-19 के नाम पर 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी।

CAG ने अपने विश्लेषण में बताया कि शराब नीति के तहत कई मोर्चों पर नुकसान हुआ। इसमें-

  • लाइसेंस वापस लिए गए, लेकिन उन्हें दोबारा टेंडर नहीं किया गया, जिससे ₹890 करोड़ का नुकसान हुआ।
  • ज़ोनल लाइसेंसधारकों को दी गई छूट से ₹941 करोड़ का घाटा हुआ।
  • कोविड-19 के नाम पर ₹144 करोड़ की माफी ने राजस्व को और कमजोर किया।
  • सुरक्षा जमा राशि सही से वसूलने में ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ।
शराब की गुणवत्ता और जाँच पर ध्यान नहीं: नीति के तहत शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टेस्टिंग लैब और अन्य बुनियादी ढाँचे की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शराब की दुकानों का वितरण समान रूप से नहीं किया गया, जिससे जनता को परेशानी हुई।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस नीति से आप नेताओं को सीधा फायदा हुआ। उस समय आबकारी विभाग के प्रमुख मनीष सिसोदिया और उनके साथी मंत्रियों ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया। लाइसेंस जारी करने और शुल्क माफी जैसे फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही।
CAG की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दिल्ली चुनाव नजदीक हैं। भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जवाब माँगा है। हालाँकि आम आदमी पार्टी ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा, “यह रिपोर्ट अभी दिल्ली विधानसभा में पेश नहीं हुई है। भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने के लिए गलत दावे कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस रिपोर्ट का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी की छवि खराब करने के लिए कर रही है।
दिल्ली शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार के शीर्ष लोगों को जेल जाना पड़ा था। इस मामले में जाँच अभी जारी है। मनीष सिसोदिया को काफी समय बाद जेल से बेल मिली थी, तो अरविंद केजरीवाल को भी महीनों जेल में बिताना पड़ा, इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से भी हटना पड़ा। हालाँकि जेल से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था।
बहरहाल, दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर यह विवाद राजनीति के नए मोड़ ले सकता है। जनता यह जानना चाहती है कि 2026 करोड़ का नुकसान क्यों हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रिपोर्ट के बाद आम आदमी पार्टी पर जनता और विपक्ष का दबाव बढ़ गया है।

‘मुख्यमंत्री’ आतिशी से कनेक्शन ; मम्मी-पापा अफजल गुरु के लिए मरते हैं, जीजा वाले India Ahead News channel ने AAP के लिए पहुँचाए 17 करोड़ रूपए : शराब घोटाले का खुलासा होते ही हो गया बंद


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया है, उनकी जगह अब आतिशी मार्लेना को नया CM चुना गया है। आतिशी 2020 में कालकाजी से पहली बार विधायक चुनी गई थीं। हालाँकि, वो AAP में इसके गठन के समय से ही सक्रिय रही हैं। पंजाबी तोमर राजपूत परिवार से आने वाली आतिशी के नाम में मार्क्स और लेनिन से प्रभावित होकर ‘मार्लेना’ जोड़ा गया था। उन्होंने दिल्ली स्थित सेंट स्टीफेंस कॉलेज और लंदन स्थित ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।

दिल्ली की राजनीति में अचानक हुए इस बदलाव के पीछे शराब घोटाला है। इसी शराब घोटाले के कारण मनीष सिसोदिया जेल गए और उनका उप-मुख्यमंत्री का पद भी गया। उनकी जगह ही आतिशी को मंत्री बनाया गया था। अब अरविंद केजरीवाल ने भी विधानसभा चुनाव से 5 महीने पहले इस्तीफा देकर सहानुभूति वोट की चाहत में अपनी राजनीति चाल चली है। आतिशी को इससे पहले शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, संस्कृति, पर्यटन और PWD जैसे बड़े विभाग दिए गए थे।

आतिशी के जीजा चलाते थे ‘India Ahead News’ चैनल

जब आतिशी को दिल्ली में मंत्री बनाया गया था, तब दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा ने ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया था कि आतिशी की बहन रोजा बसंती की शादी पत्रकार भूपेंद्र चौबे से हुई है, जो ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ में बड़े पद पर थे, चैनल का सारा काम वही देख रहे थे। बकौल कपिल मिश्रा, आतिशी के जीजा वाले इस चैनल को हवाला के माध्यम से शराब घोटाले का 17 करोड़ रुपया पहुँचाया गया। उन्होंने AAP के नेताओं द्वारा खुद को ‘कट्टर ईमानदार’ बताए जाने पर निशाना साधा था।
‘India Ahead News’ चैनल में कमर्शियल हेड के रूप में तैनात रहे अरविंद कुमार सिंह को CBI ने शराब घोटाले में गिरफ्तार भी किया था। जून 2021 से लेकर जनवरी 2022 तक हवाला के जरिए हुए पैसों के लेनदेन में उन्हें जाँच एजेंसी ने शामिल बताया था। अरविंद कुमार सिंह चैनल में प्रोडक्शन कंट्रोलर भी थे। गोवा में AAP का चुनाव प्रचार देख रही कंपनी ‘Chariot Media’ के खाते में 17 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
CBI ने आरोप लगाया था कि हवाला नेटवर्क के जरिए ये पैसे भेजे गए थे। 14 फरवरी, 2022 को गोवा में विधानसभा चुनाव हुए थे। दिल्ली के शराब घोटाले में हुआ ये था कि एक नई शराब नीति बना कर ‘साउथ लॉबी’ यानी, दक्षिण भारत की कुछ शराब कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया और बदले में करोड़ों रुपए की घूस ली गई। इस मामले में AAP के करीबी दलाल विजय नायर और हैदराबाद के कारोबारी अभिषेक बोनीपल्ली के अलावा तेलंगाना के CM रहे KCR की बेटी कविता को भी गिरफ्तार किया गया था।
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी इस मामले में जेल जा चुके हैं, जिनमें कारोबारी दिनेश अरोड़ा से 2 करोड़ रुपए घूस लेने का आरोप है। दिनेश अरोड़ा आरोपित से अब अप्रूवर बन चुका है। AAP को मिली घूस की रकम 100 करोड़ रुपए बताई गई थी। कविता के करीबी अरुण पिल्लई ने ‘साउथ लॉबी’ की तरफ से बैठकों में हिस्सा लिया था। वहीं Indospirit के मालिक समीर महेन्द्रू ने भी घूस में करोड़ों रुपए दिए थे। इस पूरे खेल में कोरोना के दौरान नुकसान दिल्ली की जनता का हुआ, अरविंद केजरीवाल अपने आवास ‘शीशमहल’ को सुख-सुविधाओं से लैस करने में व्यस्त रहे।

कर्मचारियों को वेतन नहीं, शराब घोटाला सामने आते चैनल बंद

ऐसे में ‘India Ahead News’ चैनल से AAP नेता आतिशी का कनेक्शन और फिर इसका हवाला के जरिए AAP के लिए काम कर रही कंपनी को करोड़ों रुपए देना केवल संयोग तो हो नहीं सकता है। बड़ी बात कि ये चैनल 2023 की शुरुआत तक ठप्प भी हो गया। ऊपर से कई कर्मचारियों को कई महीनों का वेतन नहीं दिया गया सो अलग। रिद्धिमा केडिया और आकांक्षा वर्मा सहित अन्य पत्रकारों ने इसका खुलासा किया गया। कई रिपोर्टरों और एंकरों को सैलरी नहीं दी गई।
तब इस कंपनी के एडिटर-इन-चीफ रहे भूपेंद्र चौबे ने कहा था कि चैनल के मालिक अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि सबको वेतन मिल जाए। वो ये भूल गए कि कर्मचारियों को ‘कोशिश’ नहीं, तय समय पर खाते में उनकी मेहनत के बदले पैसा चाहिए होता है। वैसे ये बात सुप्रीम कोर्ट में भी कई बार बताई जा चुकी है कि AAP ने शराब घोटाले से मिले पैसे गोवा चुनाव में खर्च किए। इसके सबूत के रूप में WhatsApp चैट्स भी पेश किए गए थे। पार्टी को इस चुनाव में महज 2 सीटें ही मिली थीं।
आतिशी मार्लेना अपने जीजा के चैनल के हवाला कारोबार में संलिप्त रहने से इनकार करती रही हैं। हालाँकि, वो इस बात का जवाब नहीं दे पाईं कि शराब घोटाले का खुलासा होते ही अचानक से ये चैनल बंद क्यों हो गया और कर्मचारियों का वेतन क्यों रुक गया? सिर्फ अरविंद कुमार सिंह ही नहीं, बल्कि IAN चैनल और इसकी पैरेंट कंपनी ‘आंध्र प्रभा’ से जुड़े 3 लोग जाँच एजेंसियों के निशाने पर थे। अक्टूबर 2022 में ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ के मैनेजिंग डायरेक्टर मूठा गौतम से भी ED द्वारा पूछताछ हुई थी।
इसी चैनल के एक अन्य अधिकारी अर्जुन पांडेय का नाम भी शराब घोटाले की FIR में शामिल है। अर्जुन पांडेय न्यूज़ चैनल के सेल्स एवं मार्केटिंग विभाग का प्रमुख था। आरोप है कि उसने 4 करोड़ रुपए विजय नायर की तरफ से समीर महेन्द्रू से लिए। तब भूपेंद्र चौबे ने कहा था कि अर्जुन पांडेय सिर्फ कंसल्टेंट था और इस्तीफा दे चुका है। ‘आंध्र प्रभा’ के बारे में बता दें कि इसकी स्थापना ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के संस्थापक रामनाथ गोयनका ने ही की थी। काकीनाडा के 4 बार विधायक रहे मूठा गोपालकृष्ण अब इसके मालिक हैं।
2019 में भूपेंद्र चौबे खुल कर AAP के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट्स करते थे। उस समय उनकी साली आतिशी को ईस्ट दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया था। हालाँकि, वो तीसरे नंबर पर रही थीं। भूपेंद्र चौबे की पत्नी रोजा बसंती, आतिशी मार्लेना की बड़ी बहन हैं। उसी चुनाव में उम्मीदवार बनने के बाद आतिशी ने अपने नाम से ‘मार्लेना’ सरनेम हटा लिया था। उनके पिता का नाम विजय सिंह और माँ का नाम तृप्ता वाही है। दोनों DU में प्रोफेसर हैं।
इन दोनों ने दिल्ली स्थित संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकी अफजल गुरु का भी बचाव किया था और उसकी फाँसी का विरोध भी किया था। आतिशी AAP की पॉलिटिकल एक्शन कमिटी की सदस्य हैं, साथ ही मनीष सिसोदिया के उप-मुख्यमंत्रित्व काल में उनकी सलाहकार रहीं। AAP दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में अमूल-चूल परिवर्तन का दावा करती है और इसका श्रेय भी आतिशी को देती है। आतिशी के समर्थन में भूपेंद्र चौबे ने रिट्वीटस भी किए थे और उन्हें चुनने की सलाह दी थी।

AAP के सामने गायब हो जाती है भूपेंद्र चौबे की पत्रकारिता

आतिशी के खिलाफ जब पर्चे बाँटे गए थे (आरोप लगा कि ये AAP ने ही विरोधियों को फँसाने के लिए कराया है), तब भूपेंद्र चौबे ने अपनी एक साइड चुन ली थी और अपनी साली का बचाव किया था। तब गौतम गंभीर, जो ईस्ट दिल्ली से जीत कर सांसद बने, उन्होंने कहा था कि अगर ये साबित हो गया कि ये पर्चे उन्होंने बँटवाए हैं तो वो अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। भूपेंद्र चौबे पहले एक संतुलित पत्रकार माने जाते थे, लेकिन इस काण्ड के बाद से लोगों का उन पर से भरोसा जाता रहा।
                                         आतिशी का बचाव करते रहे हैं जीजा भूपेंद्र चौबे
वैसे भूपेंद्र चौबे पहले भी पीएम मोदी के विरोध में लिखते रहे हैं। फरवरी 2015 में उन्होंने लिखा था कि दिल्ली कोई गुजरात नहीं है, इसीलिए नरेंद्र मोदी को निरंकुश राजनीति छोड़नी होगी, अगर वो मीडिया को ‘बाजारू’ बताएँगे तो ज़्यादा आगे नहीं जाएँगे। अभी मोदी कहाँ हैं, ये किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। वहीं जब मार्च 2014 में अरविंद केजरीवाल ने मीडिया पर हमला बोला था तब उन्होंने इतना कड़ा रुख नहीं अपनाया था। कारण – साली आतिशी AAP का हिस्सा हैं।

आतिशी का सिर्फ़ ‘Dummy CM’ बनना , दिल्ली के लिए बहुत दुखद दिन है: स्वाति मालीवाल, आप सांसद; शराब घोटाले में केजरीवाल ने ही लिया नाम; वामपंथन आतिशी के माता-पिता रहे हैं आतंकी अफजल गुरु के ‘फैन’


दिल्ली में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम का अंत हो गया है। मंगलवार (17 सितम्बर, 2024) को AAP विधायक आतिशी को दिल्ली का नया मुख्यमंत्री चुना गया है। यह फैसला दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल के इस्तीफे के ऐलान के बाद सामने आया है। आतिशी के नाम का ऐलान AAP सरकार में मंत्री गोपाल राय ने किया है।

मंगलवार को गोपाल राय ने बताया, “विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय हुआ है कि जब तक अगला चुनाव नहीं होता तब तक आतिशी जी को दिल्ली के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभानी होगी।” गोपाल राय ने यह भी कहा कि वह दिल्ली में अक्टूबर-नवम्बर तक चुनाव की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक अगले चुनाव में AAP को प्रचंड बहुमत नहीं मिलता और केजरीवाल CM नहीं बनते तब तक आतिशी मुख्यमंत्री बनी रहेंगी।

आतिशी के दिल्ली CM बनने के बाद उनकी ही पार्टी से काफी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इसे दिल्ली के लिए दुखद बताया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “दिल्ली के लिए आज बहुत दुखद दिन है। आज दिल्ली की मुख्यमंत्री एक ऐसी महिला को बनाया जा रहा है जिनके परिवार ने आतंकवादी अफ़ज़ल गुरु को फाँसी से बचाने की लंबी लड़ाई लड़ी। उनके माता पिता ने आतंकी अफ़ज़ल गुरु को बचाने के लिए माननीय राष्ट्रपति को दया याचिकाऐं लिखी।

स्वाति मालीवाल ने आगे लिखा, “उनके हिसाब से अफ़ज़ल गुरु निर्दोष था और उसको राजनीतिक साज़िश के तहत फँसाया गया था। वैसे तो आतिशी मार्लेना सिर्फ़ ‘Dummy CM’ है, फिर भी ये मुद्दा देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। भगवान दिल्ली की रक्षा करे!”

आतिशी अभी तक केजरीवाल सरकार में शिक्षा, महिला और बाल कल्याण, PWD, टूरिज्म समेत पाँच मंत्रालय संभालती थीं। वह 2020 में पहली बार विधायक बनी थीं। उनके माता-पिता दोनों कम्युनिस्ट हैं। आतिशी CM केजरीवाल के गिरफ्तार होने के बाद फ्रंट पर थीं। अब उन्हें दिल्ली का CM अरविन्द केजरीवाल ने बनाया है। हालाँकि, ऐसा नहीं है कि आतिशी का विवादों से कोई लेनादेना ना हो। उन पर शराब घोटाले में शामिल होने से लेकर दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था बर्बाद करने और विदेशी धरती पर भारत को बदनाम करने के आरोप लगे हैं।

शराब घोटाले में केजरीवाल ने ही लिया नाम

दिल्ली शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अप्रैल, 2024 में कोर्ट को बताया था कि CM केजरीवाल ने आतिशी का नाम लिया है। ED ने बताया था कि मामले में पहले आरोपित और बाद में सरकारी गवाह बना विजय नायर केजरीवाल नहीं बल्कि आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करता था। नायर पर इस मामले में पैसे की लेनदेन मुख्य तौर पर शामिल होने के आरोप हैं। आतिशी ने खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ED उन्हें और बाकी तीन लोगों को गिरफ्तार करना चाहती है।

घोटाले के दौरान गोवा की इंचार्ज थीं आतिशी: रिपोर्ट

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया था आतिशी उस दौरान गोवा की आम आदमी पार्टी प्रभारी थीं जब यहाँ शराब घोटाले से उगाही किया गया पैसा उपयोग में लाया गया था। टाइम्स नाउ ने यह दावा ED की कार्रवाई के आधार पर किया था। टाइम्स नाउ को मिले पत्र के अनुसार, 13 फरवरी 2022 को आतिशी मार्लेना ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने खुद को गोवा चुनावों के लिए पार्टी का प्रभारी बताया था।
गोवा में चुनाव 14 फरवरी 2022 को समाप्त हो गए थे, इसका मतलब है कि तब भी वही प्रभारी थीं। टाइम्स नाउ के पत्रकार प्रियांक त्रिपाठी ने कहा था कि अगर अरविंद केजरीवाल को दक्षिण भारतीय शराब लॉबी से रिश्वत की रकम लेने और उसका दुरुपयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो निश्चित रूप से आतिशी मार्लेना के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं।

विदेशों में भारत की छवि की धूमिल

आतिशी पर शराब घोटाले में शामिल होने के ही नहीं बल्कि यह भी तोहमत है कि उन्होंने विदेशी धरती पर भारत की छवि को धूमिल किया। आतिशी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा भारत विरोधी ‘100 पर भारत: टुवर्ड्स बीइंग ए ग्लोबल लीडर’ आयोजन में गुरुवार (15 जून 2023) को शामिल हुईं थी।
यहाँ उन्होंने कहा था, “हमें अक्सर बताया जाता है कि भारत की जीडीपी अब 3 ट्रिलियन डॉलर के आँकड़े को पार कर गई है। हमें बताया गया है कि भारत सबसे तेज़ G20 अर्थव्यवस्था है और ऐसी कई अन्य जानकारी दी गईं। हालाँकि, वास्तविकता उससे कहीं अधिक चिंताजनक और कमतर है।”
उन्होंने आगे कहा था, “मुझे लगता है कि एक बेहतर संकेतक, जो वास्तव में आपको देश की स्थिति के बारे में बताता है, वह मानव विकास सूचकांक है… कुछ संकेतक हैं जिनमें 190 देश भाग लेते हैं। भारत 191 में से 132वें स्थान पर है। यह 75वें साल का भारत है।” उन्होंने यहाँ प्रोपेगेंडा के आधार पर बनाई गई ग्लोबल हंगर इंडेक्स का जिक्र भी किया था।

दिल्ली की शिक्षा को बर्बाद करने के भी आरोप

आतिशी दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री और विधायक बनने से पहले सलाहकार थीं। वह सलाहकार के तौर पर शिक्षा विभाग ही देखती थीं। उनको लेकर यह प्रोपेगेंडा चलाया गया कि उनके कार्यकाल में दिल्ली में शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। सच्चाई इससे कोसों दूर है।
दक्षिण दिल्ली नगर निगम की शिक्षा समिति की सदस्य नंदिनी शर्मा के अनुसार, “सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण के बारे में तमाम शोर-शराबे के बावजूद मनीष सिसोदिया और उनकी सलाहकार आतिशी मार्लेना की AAP सरकार ने ना केवल दिल्ली में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बदलने का मौका गंवा दिया, बल्कि इन दोनों ने राष्ट्रीय राजधानी में पहले से ही बदहाल शिक्षा व्यवस्था को और भी बदतर बना दिया।”
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि AAP के ‘मॉडल स्कूल’ प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं के कारण 250 करोड़ रुपये बरबाद हो गए। आप ने 54 सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल में बदलने की शुरुआत की थी और इन स्कूलों के सौंदर्यीकरण का काम दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTDC) को सौंपा था। हालाँकि, महज 3 साल बाद ही हाल ही में बनकर तैयार हुए कुछ स्कूलों की दीवारों में दरारें आ गईं। आतिशी के कार्यकाल में दिल्ली किताबों और शिक्षकों की भी कमी हो गई थी।

माता-पिता ने किया था अफजल गुरु को बचाने का प्रयास

दिलचस्प बात यह है कि आतिशी के माता-पिता विजय कुमार सिंह और तृप्ता वाही कट्टर कम्युनिस्ट हैं। आतिशी के माता-पिता उन ‘प्रतिष्ठित’ हस्तियों के समूह से हैं, जिन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी अफजल गुरु की मौत की सजा के खिलाफ भारत के राष्ट्रपति को दया याचिका लिखी थी। तृप्ता वाही भारत विरोधी और आतंकवादियों के हमदर्द के कुख्यात चेहरों में से एक एसएआर गिलानी से भी जुड़ी हुई हैं। हालाँकि, आतिशी ने कहा था कि वह अपने माँ-बाप की राजनीति के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

दिल्ली शराब घोटाला : केजरीवाल के खिलाफ जाँच पूरी, अब 1100 करोड़ रूपए की प्रॉपर्टी कुर्क करने की तैयारी


दिल्ली शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी जहाँ लगातार इस मामले में अपनी संलिप्ता को नकार रही है तो वहीं जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि उनकी इस केस में पार्टी के साथ-साथ अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जाँच पूरी हो गई है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ये जानकारी खुद ईडी ने दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने बताया है कि उनका ध्यान अब इस बात पर है कि 1100 करोड़ की अपराध आय के बराबर कौन सी संपत्तियाँ कुर्क की जाए। जाँच एजेंसी ने अब तक 244 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है। इस रिपोर्ट के अनुसार ईडी के एक अधिकारी ने पहचान न छापने की शर्त पर बताया,  “अरविंद केजरीवाल और आप, आरोपित संख्या 37 और 38 के संबंध में हमारी जाँच पूरी हो गई है। अ्दालत ने हमारी टीम द्वारा दायर सभी आठ आरोप पत्रों का संज्ञान लिया है और अधिकांश आरोपितों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हम अब अपराध की शेष राशि का पता लगाने और उसे जब्त करने की प्रक्रिया में हैं।”

इसी रिपोर्ट के अनुसार ईडी के ही एक दूसरे अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि वह लोग अब इस मामले में तेजी से सुनवाई के लिए कोशिश करेंगे, क्योंकि इसमें 40 आरोपित, सैकड़ों गवाह और हजारों पन्नों में दस्तावेजी सबूत हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में दायर की गई अपनी चार्जशीट में शराब घोटाला मामले का सरगना सिर्फ दिल्ली सीएम को बनाया हुआ है। उन्होंने दिल्ली सीएम पर लगे आरोपों की पुष्टि के लिए ओंगोल से तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी, उनके बेटे राघव मगुंटा और व्यवसायी पी सरथ रेड्डी के बयानों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा उन्होंने आरोप पत्र में दावा किया है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पार्टी के पूर्व मीडिया प्रभारी विजय नायर ने गोवा और पंजाब में चुनावी फंडिंग के लिए 100 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत की माँग की थी। इसमें से 45 करोड़ का सीधा फायदा आप को हुआ था।

जाँच पूरी होने के बीच AAP मंत्री आतिशी मार्लेना का आरोप, भाजपा अध्यक्ष ने कहा सिर्फ बेल लेने के लिए हो रहा सब

आम आदमी पार्टी के खिलाफ जाँच पूरी होने को लेकर आई रिपोर्ट के बीच पार्टी की मंत्री आतिशी मार्लेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि अरविंद केजरीवाल न्यायिक हिरासत में खतरे में हैं। उनका बीपी शुगर लेवल डिप हो रहा है। वह पिछले 30 साल से डायबिटीज के मरीज हैं। ऐसे में भाजपा का मकसद सिर्फ केजरीवाल को जेल में डालना नहीं बल्कि उनकी तबीयत को नुकसान पहुँचाना है। आतिशी मार्लेना के मुताबिक केजरीवाल का वजन 8.5 किलो कम हुआ है। उन्होंने यहाँ तक अपनी कॉन्फ्रेंस में कहा है कि अगर केजरीवाल का ब्रेन डैमेज हो गया तो फिर इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा। वहीं इस मामले में भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की हालत को लेकर सिर्फ कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास चल रहा है ताकि स्वास्थ्य के आधार पर अरविंद केजरीवाल को बेल मिल जाए।

“आप” की प्रतिनिधि बन गई स्पेशल जज न्याय बिंदु; केजरीवाल को जमानत देना महंगा पड़ सकता है मैडम; केजरीवाल को संवैधानिक पद की गरिमा को गिराने का अधिकार नहीं। तिहाड़ में रहते मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दो; बिंदु जी के बैंक खातों और assets की जांच होनी चाहिए।

सुभाष चन्द्र 

जिस तरह आनन फानन में स्पेशल जज न्याय बिंदु ने केजरीवाल को जमानत देने का आदेश दिया, वह उन्हें किसी बड़ी मुसीबत में फंसा सकता है। अपने आदेश में जो बातें न्याय बिंदु ने कही, वह बातें केजरीवाल के वकील और “आप” पार्टी कहती रही है न्याय बिंदु को इस मामले में हाथ डालना ही नहीं चाहिए था क्योंकि केस के सुनवाई स्पेशल जज कावेरी बवेजा कर रही थी जो MP-MLA कोर्ट के मामलों के लिए मनोनीत हैं

एक बात स्पेशल जज बिंदु ने कही जो सबसे ज्यादा आपत्तिजनक है कि हजारो पन्नों का रिकॉर्ड पढ़ने का किसके पास टाइम है और जमानत पर छोड़ दिया जैसे छोड़ने की कीमत पकड़ रखी थी वरना तो पढ़ने देती सब कुछ कावेरी बवेजा को तुम्हें किसने कहा था कि आज ही आदेश देना है और आपके आदेश से “आपिए” तो ऐसे खुश हुए जैसे स्पेशल जज बिंदु ने कोई ऐसा बिंदु पकड़ लिया जिससे केजरीवाल को जमानत देना जरूरी हो गया और उसे जमानत नहीं मिली बल्कि वो तो “बरी” हो गया आरोपों से

लेखक 
चर्चित YouTuber 
बड़ा रिकॉर्ड पढ़ने की बात कावेरी बवेजा ने भी की थी जब उन्होंने ED के आरोपपत्र पर संज्ञान लेना था और इसलिए उन्होंने order की तारीख 9 जुलाई कर दी यानी एक महीना बाद नाकि तुरंत संज्ञान लेने के आदेश कर दिया जैसे बिंदु ने जमानत देने के कर दिए तुरंत

न्याय बिंदु को इतना भी पता नहीं कि केजरीवाल ने हाई कोर्ट में ED के सामने पेश होने की शर्त लगाईं थी कि उसकी गिरफ़्तारी न हो लेकिन उन्होंने मानी नहीं और ED द्वारा सबूत दिखाने पर यहां तक कहा कि इसे अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया और शाम को उसी दिन ED ने गिरफ्तार कर लिया 

गौर करने की बात है कि न्याय बिंदु को पूछना था कि केजरीवाल गिरफ़्तारी से क्यों पीछे भाग रहा था? क्यों नहीं अब तक अपने electronic devices का पासवर्ड दिया? इसके पीछे भी बहुत बड़ी साज़िश है। शंका व्यक्त की जा रही है कि electronic devices का पासवर्ड देते ही घोटालों का अम्बार सामने आ जाएगा। यह भी शंका है कि शायद पूरा परिवार ही तिहाड़ जा सकता है। अटकलें गलत भी हो सकती हैं। 

न्याय बिंदु ने इस बात से भी आंखें मूंद ली कि हाई कोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा ने सिसोदिया को मई में जमानत देने से मना करते हुए कहा था कि सिसोदिया एक Powerful व्यक्ति हैं जो सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं केजरीवाल तो जब सिसोदिया से भी ज्यादा शक्तिशाली है, तो उसे तो जमानत मिलनी ही नहीं चाहिए फिर भी दी बिंदु मैडम ने

न्याय बिंदु को यह भी याद नहीं रहा कि दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि ED ने कानून का पालन किया है लेकिन बिंदु जी सारा कुसूर ED का बता रही थी

न्याय बिंदु ने केस की नज़ाकत को समझा ही नहीं और लगता है केजरीवाल गैंग से ट्यूशन पढ़ा हुआ था जो जमानत देते हुए शर्त लगाईं कि केजरीवाल जांच में बाधा नहीं डालेंगे जो व्यक्ति ED के 9 summons पर पेश नहीं हुआ, उससे आप कैसे उम्मीद कर गई बिंदु कि वह जांच में बाधा नहीं डालेगा 9 summons पर पेश न होना सबसे बड़ी बाधा पैदा करना था जांच में

दूसरे, केजरीवाल से आज तक किसी भी कोर्ट ने यह नहीं पूछा कि गिरफ़्तारी से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया? अपने पास जरुरी मंत्रालय क्यों नहीं रखे, लूट के सरगना बनने मुख्यमंत्री बन गए? कौन-सी ईमानदारी दिखा रहे हो? यह ईमानदारी है या छल कपट? मुख्यमंत्री रहते जेल में रहना पद का खुलेआम अपमान है। सर्वश्री लालू यादव और सोरेन ने भी गिरफ्तार होने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन केजरीवाल ने नहीं, क्यों? केजरीवाल को संवैधानिक पद की गरिमा को गिराने का अधिकार नहीं।     

यह तो अच्छा हुआ कि आज ही ED ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील कर दी और कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी सबसे बड़ा सबूत न्याय बिंदु के “आप” से मिले हुए होने का यह है कि जब ED ने कहा कि हमें 2 दिन का समय दीजिए अपील करने के लिए तो उसे तुरंत खारिज कर दिया कई मामलों में जब किसी को सजा होती है तो कुछ समय के सजा को निलंबित कर दिया जाता है जिससे वह अपील कर सके बिंदु जी लगता है केजरीवाल गिरोह के किसी लालच में थी जो ED की कोई बात सुनना ही नहीं चाहती थी लोग पूछ सकते हैं कितनी बक्शीश मिली बिंदु जी को केजरीवाल को छोड़ने के लिए बिंदु जी के बैंक खातों और assets की जांच होनी चाहिए

दिल्ली हाई कोर्ट से बिंदु के आदेश पर रोक लगना और गली गली उस पर चर्चा होना बिंदु को किसी मुसीबत में डाल सकता है

शराब घोटाला : जेल में ही रहेंगे मनीष सिसोदिया; सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की जमानत अर्जी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (4 जून 2024) को दिल्ली शराब घोटाला केस में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया। मनीष सिसोदिया पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। हालाँकि कोर्ट ने पूर्व उपमुख्यमंत्री को नए सिरे से जमानत अर्जी डालने की छूट दी है। मनीष सिसोदिया की तरफ से अदालत में अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की।

बार एन्ड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत अर्जी की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की बेंच में हुई। मनीष सिसोदिया की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनका मुवक्किल लगभग 15 महीनों से जेल में हैं और अभी ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट राजनैतिक रूप से संवेदनशील मामलों को सही समय पर नहीं निबटाती है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह लगाया है। बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया और जमानत देने से इनकार कर दिया। मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनको फिर से गुण-दोष के आधार पर जमानत अर्जी दाखिल करने का अधिकार है।

हालाँकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि नए सिरे से जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए मनीष सिसोदिया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँ या ट्रायल कोर्ट का। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ चल रही जाँच में 3 जुलाई 2024 तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।

मनीष सिसोदिया 26 फरवरी 2023 को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद से वे जेल में हैं। वहीं, उनकी पत्नी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस मामले में जमानत के लिए उन्होंने ट्रायल कोर्ट और बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, दोनों ही अदालतों में उनकी याचिका ख़ारिज हो चुकी है। 

‘चालू माल केजरीवाल’ “back to Jail” देश के ख़त्म होने की बात कर गया जाते जाते(देखिए वीडियो) ; “अब नई जीत के बाद हमें नया मोदी चाहिए, एक ऐसे रूप में जिसकी किसी ने कल्पना न की हो”

सुभाष चन्द्र

कल 21 दिन बाद देश की राजनीति का “चालू माल” केजरीवाल एक बार फिर जेल लौट गया और जाते जाते ऐसी बात कह गया जैसे देश ख़त्म हो रहा हो। उसके पहले राहुल गांधी धमकी दे चुका है कि इस देश को आग लग जाएगी और ये देश नहीं बचेगा देश तो हलवा पूरी हो गया जिसे खा जाएंगे ये निर्लज्ज

पाखंडी केजरीवाल ने कहा “उसने 21 दिन देश को बचाने के लिए प्रचार किया दिल्ली वालो, आज आपका बेटा दोबारा जेल जा रहा है, इसलिए नहीं कि मैंने कोई भ्रष्टाचार किया है बल्कि इसलिए कि मैंने तानाशाही के खिलाफ आवाज़ उठाने की जुर्रत की है भगत सिंह ने कहा था कि जब सत्ता तानाशाही हो जाए तो जेल जिम्मेदारी बन जाती है हम भगत सिंह के चेले हैं, वो देश को आज़ाद कराने के लिए फांसी चढ़ गए, हम देश को बचाने के लिए जेल जा रहे हैं जेल जाना और तानाशाही के खिलाफ बोलना हम सबकी जिम्मेदारी है”। आज(जून 3) प्राप्त समाचारों के अनुसार 1 फोन दिया वो भी format किया हुआ। 

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ये फ्रॉड आदमी जेल जाने को जिम्मेदारी बता रहा है और हर कदम पर जोर लगाता रहा कि किसी तरह जेल न जाना पड़े ED के summons को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए भी शर्त रखी कि मेरी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दो और प्रचार के लिए  बाहर आने के लिए पगला गया और अब दोबारा जेल न जाने के लिए बहाने बनाता रहा

देश को खतरे में बताने की बातें तो नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक हर कांग्रेस के नेता ने की हैं जबकि राहुल तो सीधा देश को आग लगाने की धमकी देता रहा है उसे तो देश में मिट्टी का तेल छिड़का हुआ दिखाई देता है। क्योंकि वह तेल तो कांग्रेस ने ही छिड़का है इसके बाद राहुल कहता है एक माचिस की तिल्ली लगने की देर है कांग्रेस के ही हाथ में तिल्ली है चुनाव के दौरान तो उसने खुल कर कह दिया कि EVM से मोदी जीत गया तो देश को आग लग जाएगी और देश नहीं बचेगा


मतगणना के दौरान या बाद में जिस क्षेत्र में माहौल ख़राब हो, माहौल ठीक न होने तक वहां की बिजली पानी और राशन सब बंद कर दिया जाए और माहौल ख़राब करने वालों हर तरह की सरकारी सुविधा जैसे आधार कार्ड, BPL कार्ड, pan card आदि छीन लेनी चाहिए।  

उधर ममता बनर्जी एक बार पहले 3 मई, 2022 को बंगाल जला चुकी है और ऐसा उसकी पार्टी हमेशा करती ही रहती है कल चुनाव नतीजे आ जाएंगे और विपक्ष के तेवर देख कर पूरी संभावना है कि देश में बड़े स्तर पर दंगा किया जायेगा और सरकार की संपत्ति को आग लगाई जाएगी

इसलिए मोदी जी से अनुरोध है कि अब हमें नई जीत के बाद नया मोदी दिखाई देना चाहिए जो देश को आग लगाने वालों पर काल बनकर टूट पड़े और उनकी कमर ऐसी तोड़े कि फिर दंगा करने की हिम्मत न कर सकें ममता की पार्टी के दंगा करते ही सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए - दिल्ली की सरकार भी जेल से नहीं चलनी चाहिए - 

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ को अपने ऑफिस में बुला कर साफ़ कह दीजिये अब सरकार के काम में टांग अड़ाने की कोशिश न करे अदालत वरना फिर कुछ भी हो सकता है “Enough is Enough” ऐसा किए बिना काम नहीं चलेगा

और जहां भी विपक्ष की सरकार हैं, उन्हें विश्राम देकर केंद्रीय बलों को लगा देना चाहिए - उन दंगाइयों का जवाब बर्बरता से ही देने की जरूरत है CAA और किसान आंदोलन के समय दंगे करना उन्हें भुला देने होंगे

हमें ऐसा मोदी चाहिए जिसकी किसी ने कल्पना न की हो, ये विपक्ष मोदी को हिटलर और तानाशाह और न जाने क्या क्या कहता, अब वह रूप ही मोदी को इन दरिंदों को दिखा देना चाहिए जिससे उनकी रूह कांप उठे वैसे आज कुछ इशारा CEC राजीव कुमार ने कर दिया है कि किसी ने यदि उपद्रव करने की कोशिश की तो उसे अपने हिसाब से निपटा जाएगा

मोदी जी अब लट्ठ बजा दो, देश तुम्हारे साथ है

“नटवरलाल चालू माल केजरीवाल” पर भगत सिंह से संबंध जोड़ने के लिए “बैन” लगाए अदालत; मनमोहन सिंह भी मोदी पर बरसे और मोदी के “ध्यान” को अखिलेश ने कह दिया भाजपा की जीत निश्चित है

 सुभाष चन्द्र

केजरीवाल को अब “नटवरलाल” के साथ साथ “चालू माल” भी कहना उचित होगा। ये बार बार अपने को शहीद भगत सिंह का चेला कहता फिरता है और अब किसी वकील को कोर्ट में याचिका दायर कर मांग करनी चाहिए कि इस मक्कार को शहीद भगत सिंह से अपना किसी भी तरह का संबंध जोड़ने से रोक लगनी चाहिए 

शहीद भगत सिंह का लेशमात्र अंश भी केजरीवाल में मौजूद नहीं है भगत सिंह ने कभी किसी  विदेशी ताकत से देश के खिलाफ, उन्होंने कभी शराब को बढ़ावा नहीं दिया, वो किसी तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं रहे, जिन सावरकर को केजरीवाल गाली देता है, उनका भगत सिंह आदर करते थे फिर कैसे अपने को शहीद भगत सिंह का चेला कह सकता है यह नालायक वो तो देश के लिए फांसी पर लटक गए, उन्होंने कभी नहीं कहा कि असेंबली में बम उन्होंने नहीं फेंका जबकि केजरीवाल ढोल पीट रहा है कि कोई घोटाला हुआ ही नहीं जी और जेल जाने से बचने के लिए नए नए प्रपंच रच रहा है

ये “चालू माल” घर में बुला कर स्वाति मालीवाल की अपने PA विभव कुमार से पिटाई करवाता है और पंजाब में इसका मंत्री बलकार सिंह नौकरी के लिए परेशान लड़की से वीडियो काल कर उसके सामने Sexual actions करता है लेकिन केजरीवाल न स्वाति के बारे में कुछ बोलता है और न बलकार सिंह की हरकत पर शहीद भगत सिंह के चेले ऐसे नहीं होते हैं और  इसलिए केजरीवाल पर अपने को भगत सिंह का चेला कहने पर रोक लगनी चाहिए

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केजरीवाल में भगत सिंह पिन पॉइंट भी कोई लक्षण नहीं। भगत सिंह एवं अन्य स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा अपने दल में शामिल किसी भी महिला का यौनाचार करने की बजाए उन्हें अपनी माँ, बहन या भाभी की तरह इज्जत दी जाती थी, जबकि केजरीवाल की पार्टी में मालीवाल ही नहीं कोली आदि कई महिलाओं का यौन शोषण किया गया।   

केजरीवाल ने कल एक ही राग फिर अलापा है कि मोदी की तानाशाही और गुंडागर्दी के खिलाफ लड़ने के लिए 10 बार भी जेल जाना पड़े तो जाऊंगा जबकि एक से दूसरी बार जाने में ही पैंट गीली हो रही है ये कह रहा है, मुझे चुनाव से दूर रखने के लिए भाजपा ने जेल भेजा था जबकि शराब घोटाले में जेल तुझे भेजा कोर्ट ने और छोड़ा भी कोर्ट ने 

कल तक केजरीवाल मोदी से पूछ रहा था कि आपके रिटायर होने के बाद कौन प्रधानमंत्री बनेगा और आज भागवत जी से पूछ रहा है कि क्या मोदी को RSS वाले भगवान मानते हैं भाई तू पागल हो रहा है, हमें पता है और इसलिए पहले अपना उत्तराधिकारी चुन ले क्योंकि तेरी गद्दी बस अब कुर्बान होने का समय आ गया

मनमोहन सिंह ने कहा है मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने पद की गरिमा गिराई है मनमोहन सिंह जी आप जब 10 वर्ष सत्ता में रह कर “चुप” रहे तो अब भी रह लेते जो ऐसी गिरी हुई बात कर रहे हो उस मोदी के लिए जिसने देश का डंका पूरे विश्व में बजा दिया जबकि आपको तो अमेरिका में नवाज़ शरीफ ने बूढ़ी औरत कह दिया था लेकिन मोदी ने आपके लिए नवाज़ शरीफ का बाजा बजा दिया था और आप उस मोदी के लिए ऐसा बोल रहे हो

अखिलेश यादव कह रहा है कि हार के डर से तपस्या करने चले गए मोदी जी मतलब मोदी की जीत पक्की है क्योंकि इसी तरह मोदी 2019 का चुनाव प्रचार ख़त्म होते ही केदारनाथ धाम चले गए थे तपस्या के लिए और 2014 के मुकाबले 20 सीट ज्यादा जीते थे, मतलब तब भी हार के डर से गए होंगे लेकिन जीत गए और अब हार के डर से गए हैं, तब भी जीत पक्की है

वैसे अखिलेश की जुबान जरूरत से ज्यादा चलती है। अखिलेश ने 8-9 जनवरी, 2022 को रामलला के दर्शनों के लिए जाना था जब मंदिर नहीं बना था तब 13 दिसंबर को नरेंद्र मोदी को सलाह देते हुए कहा था कि अंतिम दिनों में रहने के लिए काशी उत्तम जगह है मैंने तब जो लिखा था वह फिर लिख रहा हूँ कि अंतिम दिनों में रहने के लिए काशी सही जगह है या नहीं, इसे छोड़ कर इतना सोच लो कि भगवान् राम भी अंतिम समय में ही याद आते हैं रावण ने भी अंतिम समय में पुकारा था -"श्रीराम"

ED ने केजरीवाल को उतार दिया बोतल में

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल बुरी तरह फँसते नजर आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार (28 मई 2024) को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल आबकारी नीति मामले में हुई मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़े हैं और इस केस में ‘मुख्य साजिशकर्ता’ और ‘सरगना’ भी हैं।इस आरोप पत्र के दाखिल होने के बाद और दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की कोर्ट ने इस मसले पर अपना फैसला 4 जून तक सुरक्षित रख लिया है।

दिल्ली सीएम के मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार आरोपित वकील विनोद चौहान से भी डायरेक्ट बातचीत के सबूत ईडी को मिले हैं। विनोद चौहान वही शख्स है जिसे लेकर ईडी ने कहा था कि वो इस केस में गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए रुपयों को हैंडल कर रहा था। उस पर गोवा चुनावों के वक्त AAP को हवाला के जरिए रकम पहुँचाने के भी आरोप हैं। इसके अलावा उसके पास से 1.06 करोड़ रुपए जब्त किए गए थे।

केजरीवाल फिलहाल जेल से बेल पर बाहर हैं। ऐसे में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल की संलिप्ता की बात कोर्ट को चार्जशीट दाखिल कर बताई हैं। इसके साथ ही ईडी ने कहा है कि आरोपित (अरविंद केजरीवाल) के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए इसमें पर्याप्त सबूत हैं। ईडी ने आरोपपत्र में आम आदमी पार्टी को भी आरोपित बनाया है।

वहीं, ईडी की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने अदालत को बताया कि यह ऐसा मामला है जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 70(1) और 70(2) दोनों को लागू किया जाना है। उन्होंने कहा, “दिल्ली आबकारी घोटाले, जिसमें आप नेता और अन्य लोग शामिल हैं, उसके मुख्य साजिशकर्ता और सरगना केजरीवाल हैं।” उन्होंने कहा कि इस मामले में रिश्वत की माँग की गई थी, और अपराध करने में मुख्य रूप से केजरीवाल शामिल थे।

ईडी ने इस दौरान शराब घोटाले के आरोपित विजय नायर की भी बात की। ईडी के वकील ने कहा है कि आरोपित विजय नायर मुख्यमंत्री आवास के पास वाले बंगले में रह रहे थे और विजय नायर सीधे केजरीवाल को रिपोर्ट कर रहे थे और वह हमेशा मुख्यमंत्री आवास पर होते थे।


दिल्ली शराब घोटाला : पैसा नहीं मिलने का मतलब यह नहीं कि भ्रष्टाचार नहीं हुआ: हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि किसी के पास नकदी नहीं मिली, इसका मतलब यह नहीं है कि कि भ्रष्टाचार नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि अब यह अपराध करने के लिए नई तकनीक अपनाई जाती हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली शराब घोटाला मामले में आरोपित मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

हाई कोर्ट ने कहा, “मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में किसी व्यक्ति के पास से नकदी की बरामदगी कोई जरुरी नहीं है जहाँ साजिश का हिस्सा कई लोग हैं।” कोर्ट ने कहा कि शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं जिनसे देश के सामाजिक-आर्थिक ढाँचे पर जोर पड़ता है और जनता का विश्वास सरकारी संस्थाओं में घटता है।”

हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की शराब नीति ने छोटे और मझोले दुकानदारों को बिक्री से बाहर करके उनको सारी ताकत दे दी जिनके पास पैसा और पहुँच थी और जिन्होंने अपना एक कार्टेल बना लिया था। कोर्ट ने कहा कि शराब नीति को वितीय फायदे के लिए बनाया गया जो कि इस अपराध की गंभीरता को बढ़ाता है।

कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया का आचरण लोकतांत्रिक सिद्धांतों को धोखा है। कोर्ट ने कहा कि सिसोदिया ने ऐसा दिखाया कि दिल्ली की शराब नीति सबको फायदा पहुँचाने के लिए लाई गई है, जबकि असल में यह कुछ लोगों को लाभ पहुँचाने की नीति थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिसोदिया ने दो फोन तोड़ दिए और महत्वपूर्ण सबूत मिटाए।

मनीष सिसोदिया को जमानत देने से मना करते हुए कहा कि वह अभी तक यह बात स्थापित नहीं कर पाए हैं कि उन्हें जमानत क्यों दी जाए। कोर्ट ने इसी के साथ उन्हें जमानत देने से मना कर दिया। सिसोदिया लगातार अलग-अलग अदालतों में जमानत के लिए याचिकाएँ लगाते रहे हैं।

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री को फरवरी, 2023 में दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। वह दिल्ली के आबकारी मंत्री थे। इसी के अंतर्गत वह शराब नीति बनाई गई थी जिसमें गड़बड़ी के आरोप एजेंसियों ने लगाए हैं। एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि इस नई नीति ने बड़े शराब डीलरों को फायदा पहुँचाया गया और उनसे मिले पैसे का उपयोग आम आदमी पार्टी ने गोवा चुनावों में किया।