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अय्याज ताज-अमीन शेख-हजरत मौलाना ने हिंदू महिला से किया रेप-धर्मांतरण का भी प्रयास, पीड़िता के चीखने-चिल्लाने का वीडियो वायरल


महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर के सोनेगाँव क्षेत्र से एक हिंदू विवाहित महिला के साथ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण के दबाव का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में कलमेश्वर निवासी अय्याज ताज मदारे और आमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मध्य प्रदेश के तामिया निवासी हजरत मौलाना फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म, जबरन वसूली, धर्मांतरण के प्रयास और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा एवं काला जादू प्रतिबंध कानून के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

नशीला पदार्थ देकर बनाया वीडियो

पीड़िता 24 वर्षीय विवाहित महिला है और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है। उसका पति भारतीय वायुसेना में कार्यरत है और घटना के समय दूसरे शहर में तैनात था। शिकायत के मुताबिक, फरवरी 2025 में महिला के सहपाठी रहे अय्याज ने प्लॉट खरीदने के बहाने उससे संपर्क किया।

आरोप है कि वह महिला को वर्धा रोड स्थित एक होटल में ले गया, जहाँ उसे जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया। महिला का कहना है कि बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया गया और इस दौरान उसके वीडियो व फोटो रिकॉर्ड किए गए।

शिकायत में कहा गया है कि बाद में इन्हीं वीडियो और तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर आरोपित ने लगातार उसका यौन शोषण किया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उससे 3 लाख 9 हजार रुपए भी वसूले गए।

मौलाना ने कहा- अब तुम्हारा धर्मांतरण हो चुका है

शिकायत के अनुसार, मामला केवल यौन शोषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला पर धर्म बदलने का भी दबाव बनाया गया। महिला का आरोप है कि उससे विभिन्न मजहबी क्रियाएँ कराई गईं। इसी बीच एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें आरोपित महिला के साथ कलमा पढ़ता और उस पर फूँक मारता दिखाई दिया।
शिकायत के मुताबिक, 31 मई को आरोपित उसे नागपुर के कलमेश्वर इलाके में ले गया, जहाँ उसकी मुलाकात आमीन शेख और हजरत मौलाना से कराई। तीनों उसे एक सुनसान स्थान पर ले गए और कुछ मजहबी क्रियाएँ कर यह दावा किया कि उसका धर्मांतरण हो चुका है। इसके बाद उसके साथ दोबारा दुष्कर्म करने की कोशिश भी की गई।

पति के लौटने पर सामने आया मामला, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जाँच

 महिला का कहना है कि वह लंबे समय तक डर और दबाव में रही और किसी को पूरी घटना नहीं बता सकी। मामला तब सामने आया जब उसका पति तीन दिन पहले नौकरी से घर लौटा। इसके बाद महिला ने पूरी घटना पति को बताई और दोनों सोनेगाँव पुलिस थाने पहुँचे।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने दोनों को पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब पीड़िता के मोबाइल चैट, बैंक लेनदेन, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच कर रही है।

मोदी सरकार के खिलाफ रेजाज सिद्दीक रच रहा था जंग की साजिश, केरल पुलिस ने ‘मकतूब मीडिया’ के लेखक को दबोचा: देशद्रोह मामले में हुई गिरफ्तारी

केरल का रहने वाला रेजाज एम शीबा सिद्दीक (26) को देशद्रोह के कारण नागपुर में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि उस पर भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी करने का आरोप है। आरोपित रेजाज के साथ उसकी नागपुर में रहने वाली एक महिला मित्र ईशा कुमारी को भी अलग से गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार रेजाज पर नक्सली ग्रुप से मिले होने की आशंका में गिरफ्तार किया है। इसके अलावा रेजाज पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 149 (भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध की तैयारी), 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 351 (आपराधिक धमकी) और 353 (सार्वजनिक उपद्रव करने वाले बयान) जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांँकि, ईशा कुमारी पर लगे आरोपों की जानकारी अभी नहीं दी गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक रेजाज ‘डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ से जुड़ा है और दिल्ली से केरल लौटते समय नागपुर में एक दोस्त से मिलने आया था, तभी उसे गिरफ्तार किया गया। एसोसिएशन की सदस्य निहारिका प्रदुष ने बताया कि रेजाज ‘मकतूब मीडिया’ और ‘द ऑब्जर्वर पोस्ट’ जैसे मीडिया संस्थानों के लिए लिखता है, जिसमें जातिगत भेदभाव, सांप्रदायिक हिंसा और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषय हैं। रेजाज दिल्ली में जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई की माँग को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने गया था।

नागपुर दंगे के साजिशकर्ता फहीम खान के घर पर चला बुलडोजर : मुस्लिम भीड़ इकट्ठा कर बोला था- किसी भी हिंदू को छोड़ेंगे नहीं

नागपुर दंगों के मुख्य आरोपित फहीम शमीम खान का घर अवैध पाया गया है। उसके घर पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई चालू कर दी है। फहीम खान नागपुर में दंगे के लिए भीड़ इकट्ठा करने और भड़काऊ भाषण देकर पथराव-हिंसा करवाने का आरोपित है।

इस मामले में नागपुर नगर निगम की टीम सोमवार (24 मार्च, 2025) को उसके घर पर पहुँची है। नगर निगम के साथ पुलिस की टीम भी मौजूद है। यहाँ पुलिस ने बुलडोजर लगा कर उसके घर को गिराना चालू कर दिया है। फहीम खान वर्तमान में जेल में बंद है।

 फहीम खान के अवैध घर को इससे पहले हटाने की नोटिस दी गई थी। हालाँकि, फहीम खान के परिवार ने इसे खुद नहीं तोड़ा। 20 मार्च, 2025 को नागपुर नगर निगम की एक टीम ने उसके घर का सर्वे किया था। टीम ने बताया था कि फहीम खान का घर बनाने के लिए कोई भी नक्शा नहीं पास करवाया गया था।

यह घर फहीम खान की पत्नी ज़हरुन्निशा के नाम पर बना है और लगभग 950 स्क्वायर फीट में फैला हुआ है। इस घर में दो मंजिले हैं। यह भी सामने आया है कि उसके अवैध निर्माण के विरुद्ध पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

अब उसके घर को नगर निगम गिरा रहा है। इससे पहले नगर निगम ने नागपुर में दंगा करने वालों की दो दुकानें भी सीज कर दी थी। पुलिस को पता चला था कि यह दुकानें दंगे के दौरान इस्तेमाल की गई थीं। यह दंगा करने वाले भी फहीम के करीबी थे।

फहीम खान ने सोमवार (17 मार्च, 2025) को नागपुर में मुस्लिमों को इकट्ठा किया था। इसके बाद उसने इनको भड़काने के लिए एक बयान दिया था। उसने पुलिस पर हिन्दुओं की मदद करने के आरोप लगाए थे और कहा था किसी को छोड़ना नहीं है।

इसके बाद मुस्लिम भीड़ ने नागपुर में खूब उत्पात मचाया था। इस दंगे में 70 लोग घायल हो गए थे। इसमें 30 से अधिक पुलिसकर्मी थे। दंगाइयों ने 50 से अधिक गाड़ियों को जला दिया था। उन्होंने एक DCP को कुल्हाड़ी मार दी थी। एक महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ की थी।

दंगे का मास्टरमाइंड फहीम खान अल्पसंख्यक डेमोक्रेटिक पार्टी’ का अध्यक्ष है। उसने 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। वह नागपुर से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव में उतरा था और बुरी तरह हार गया था। फहीम खान नागपुर के संजय नगर का रहने वाला है और CCTV मरम्मत करने का काम करता है।

अब उसके खिला राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 100 से अधिक दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। कई विवादित पोस्ट भी हटाई जा चुकी हैं।


नागपुर हिंसा में हुआ जितना नुकसान, सबकी भरपाई दंगाइयों की संपत्ति से होगी: CM फडणवीस ने किया ऐलान, कहा- ‘बुलडोजर चलेगा, कोई (दंगाई) नहीं बचेगा’; Blind firing के आदेश देकर पुलिस को नहीं भेजा जाता?


नागपुर में औरंगजेब की कब्र हटाने की माँग को लेकर भड़की हिंसा के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाया है। देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार (22 मार्च 2025) को कहा कि दंगों में हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से ही होगी।

कश्मीर से जो नकाब में पत्थरबाज़ी करने को आज कहीं भी होने वाले दंगे में देखने को मिल रहा है। ऐसे में सरकार को भी चाहिए कि नकाबपोशों पर पुलिस को blind firing के आदेश देकर इन जेहादियों से लड़ने के लिए भेजना चाहिए। Blind firing के खिलाफ बोलने वालों, चाहे जो भी हो, के भी खिलाफ भी सख्त कार्यवाही करनी होगी। Blind firing से ही पता चलेगा कि बाहरी कौन और स्थानीय कौन? इन दंगाइयों से पूछना चाहिए कि किस आका ने दंगा में पत्थरबाज़ी, पेट्रोल बम बनाने के लिए कितने पैसे दिए? पत्थर सप्लाई किसने किए?   

मुख्यमंत्री ने कहा, “जितना नुकसान हुआ, उसकी कीमत वसूल करेंगे। अगर पैसे नहीं दिए तो उनकी संपत्ति बेच दी जाएगी।” मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुलडोजर एक्शन पर सवाल उठने पर कहा, “महाराष्ट्र में अपने तरीके से कार्रवाई होगी, जहाँ जरूरत पड़ी, बुलडोजर चलेगा। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि अब तक 104 आरोपितों की पहचान हो चुकी है। इनमें से 92 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पकड़े गए लोगों में 12 नाबालिग भी हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि नागपुर हिंसा को लेकर सोशल मीडिया से 68 भड़काऊ पोस्ट हटाई गईं और ऐसे लोगों को भी सह-अभियुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंसा में मालेगाँव से कुछ पार्टियों के सपोर्ट की बात सामने आई है।

मुख्यमंत्री ने महिला पुलिसकर्मी से छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि उसके साथ छेड़छाड़ नहीं बल्कि उस पर पत्थरबाजी हुई। देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि 80% नागपुर शांत है और कर्फ्यू धीरे-धीरे हटेगा। इस बीच, नए सीसीटीवी लगाने की तैयारी भी चल रही है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मार्च को नागपुर की यात्रा पर आ रहे हैं और उनके कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बता दें कि पीएम मोदी 30 मार्च 2025 को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुँचेंगे।

इश बीच, नागपुर के डिप्टी कमिश्नर लोहित मतानी ने बताया कि माइनॉरिटीज डेमोक्रेटिक पार्टी के हामिद इंजीनियर और NNTV चलाने वाले मोहम्मद शहजाद को हिंसा भड़काने के आरोप में पकड़ा गया है।

नागपुर में महिला पुलिस अधिकारी के कपड़े फाड़ने का हुआ प्रयास, रिपोर्ट में बताया- छेड़छाड और अश्लील इशारे भी किए: बोले DCP- हथियार-पेट्रोल-लाठियों से लैस गली से अचानक निकले दंगाई

महाराष्ट्र के नागपुर में इस्लामी भीड़ की हिंसा के बीच एक महिला पुलिस अधिकारी निशाना बनी। उसके साथ छेड़छाड़ की गई। महिला पुलिस अधिकारी के कपड़े फाड़ने का प्रयास भी भीड़ ने किया। वह किसी तरह बच कर वहाँ से निकली। वहीं इस हिंसा में घायल हुए DCP निकेतन कदम ने बताया कि भीड़ में सैकड़ों लोग शामिल थे जिनके पास हथियार थे।

महाराष्ट्र टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार (17 मार्च, 2025) को इस्लामी हिंसा की भीड़ को रोकने के लिए एक पुलिस टीम पहुँची थी। इसमें एक महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल थीं। दंगाई भीड़ इसी बीच एक महिला अधिकारी को दबोच लिया। उन्होंने महिला अधिकारी के साथ छेड़छाड़ चालू कर दी।

भीड़ में शामिल लोगों ने उनको तरफ अश्लील इशारे किए, इसके बाद उनके कपड़े भी फाड़ने का प्रयास किया गया। भीड़ के चंगुल से किसी तरह वह बच कर निकलीं। उन्होंने अब इस विषय में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई है। यह मामला गणेश पेठ थाने में दर्ज किया गया है। छेड़छाड़ करने वाले दंगाइयों की अब तलाश चल रही है।

पुलिस इस मामले में CCTV फुटेज खंगाल रही है। इस बीच इस दंगे में घायल हुए पुलिस अधिकारी निकेतन कदम का भी बयान सामने आया है। उन्होंने बताया है कि दंगाई भीड़ में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे जीके पास हथियार थे।

उन्होंने बताया कि एक गली से अचानक 100 लोगों की भीड़ आई थी और वह सभी हथियारबंद थे। DCP निकेतन कदम ने बताया कि उन्होंने भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो कुछ लोग पीछे हटे लेकिन एक व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। उसने कुल्हाड़ी निकेतन कदम के हाथ पर मार दी। इसमें वह घायल हो गए।

DCP कदम ने कह़ा है कि पुलिस ने हमला करने वालों की पहचान चालू कर दी है। जल्द ही उन आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी। DCP कदम से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी बातचीत की है और उनका हाल जाना है।

सोमवार को इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया था और पार्किंग में खड़ी गाड़ियाँ भी जला दी थीं। इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी जानकारी दी थी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि हिंसा में 33 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें तीन डीसीपी शामिल हैं। पाँच आम नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से तीन को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन एक अभी भी आईसीयू में है। उन्होंने खुलासा किया कि हिंसा वाली जगह से पत्थरों से भरी एक ट्रॉली मिली और तेज धार वाले हथियारों का इस्तेमाल हुआ। कुछ खास (हिंदुओं) घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे साफ है कि यह सब पहले से प्लान था।

नकाबपोश उपद्रवियों पर blind firing से क्यों डरती है सरकार? 1000+ की भीड़, हाथों में हथियार, चेहरे ढके हुए… केवल हिंदुओं के दुकान-घरों को बनाया निशाना: MLA ने बताया- पहले सारे कैमरे तोड़े, फिर हिंसा की

                                     नागपुर में क्रेन को भी लगाई आग (फोटो साभार: X_ANI)
नागपुर में 17 मार्च 2025 की शाम को हुई हिंसा सुनियोजित थी। यह बात बीजेपी विधायक प्रवीण दटके और हिंसा के पीड़ितों ने बताई है। इनके मुताबिक करीब 1000 कट्टरपंथियों की भीड़ इसमें शामिल थे। चेहरे ढक रखे थे। इनके हाथों में हथियार थे।

पत्थरबाजी करने वाली भीड़ ने चुन-चुनकर हिंदुओं की संपत्तियों को निशाना बनाया। तलवारों से दरवाजों को काटने की कोशिश की। गाड़ियों को फूँक दिया। आगजनी-पत्थरबाजी के बाद भीड़ पूरी तरह गायब हो गई। दावा किया जा रहा है कि भीड़ में शामिल लोग बाहर से लाए गए थे।

नागपुर (मध्य) के बीजेपी विधायक प्रवीण दटके ने कहा, “मैं आज सुबह यहाँ पहुँचा। ये सब पहले से तय था। कल सुबह एक आंदोलन के बाद गणेश पेठ पुलिस स्टेशन में कुछ हुआ, फिर सब ठीक था। लेकिन बाद में भीड़ सिर्फ हिंदुओं के घरों और दुकानों में घुसी। हमलावरों ने मुस्लिमों के घरों, दुकानों, गाड़ियों को छुआ तक नहीं। उन्होंने पहले सारे कैमरे तोड़े गए, फिर हथियारों के साथ प्लानिंग से हिंसा की गई। हमलावरों की तस्वीरें डीवीआर में हैं, हम पुलिस को देंगे।”

प्रवीण दटके ने साफ कहा कि हमलावर आसपास के इलाकों से थे और वो स्थानीय नहीं थे। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर हिंदुओं की रक्षा न कर पाने का आरोप लगाया, साथ ही कहा कि घटना के समय स्थानीय पुलिस थाने के इंस्पेक्टर का फोन तक बंद था। उन्होंने बताया कि किस तरह से पहले सीसीटीवी कैमरों को तोड़ा गया और फिर हिंसा की गई। उन्होंने टूटे और जले हुए सीसीटीवी भी मीडिया को दिखाए। उन्होंने कहा कि हंसापुरी में हिंदू-मुस्लिमों की गाड़ियाँ साथ में खड़ी होती हैं, लेकिन हिंसा वाले दिन एक भी मुस्लिम की गाड़ी वहाँ खड़ी नहीं थी, न ही उन्हें कोई नुकसान पहुँचा। ये सब प्लानिंग नहीं तो और क्या है?

एक पीड़ित महिला ने अपने घर के दरवाजे को दिखाते हुए कहा कि हमलावरों ने तलवारों से हमले किए। उसने दरवाजों के काटे जाने की भी जानकारी दी।

एक पीड़ित व्यक्ति ने बतााया, “करीब 1000 लोगों की भीड़ रात 8.30 के आसपास आई। उसने पत्थरबाजी शुरू कर दी। तीसरी मंजिल पर बच्चे थे, वहाँ तक पत्थर फेंके गए। करीब 25-30 गाड़ियों को तोड़फोड़ करके आग के हवाले कर दिया गया।”

 एक स्थानीय महिला ने कहा, “भीड़ अचानक आई। चेहरे ढके थे, हाथों में हथियार थे। वो चिल्ला रहे थे, पत्थर फेंक रहे थे। दुकानें तोड़ीं, गाड़ियाँ जलाईं। हमारे घर की खिड़कियाँ टूट गईं। सब बाहरी लोग थे, प्लानिंग साफ थी।”

हिंसा प्रभावित हंसापुर के स्थानीय दुकानदार ने भयावह आपबीती साझा की। दुकानदार ने कहा, “मैं 10.30 बजे रात में घर पहुँचा। तभी बहुत सारे लोग आए। उन्होंने घर में आग लगाने की कोशिश की। पत्थर मारे, मैं घायल हो गया। गाड़ियों को उन्होंने तोड़ा और फिर आग के हवाले कर दिया।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार की सुबह महाल इलाके में शिव जयंती का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसके बाद दोपहर 12 बजे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने औरंगजेब की कब्र हटाने की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने औरंगजेब का पुतला जलाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। फिर अफवाह फैली कि कुरान जला दी गई। पुलिस ने इसे झूठ बताया, पर मुस्लिम भीड़ ने इसे बहाना बनाकर शाम 5 बजे से हिंसा शुरू कर दी। महाल, कोतवाली, गणेशपेठ और चितनवीस पार्क में नकाबपोश लोग सड़कों पर उतरे। उनके पास लाठियाँ, पत्थर, बोतलें और पेट्रोल बम थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाम 7:30 बजे के बाद हिंसा ने जोर पकड़ा, जो आधी रात के बाद तक जारी रहा। चितनवीस पार्क से शुक्रवारी तालाब रोड तक 40 से ज्यादा गाड़ियाँ जला दी गईं। कारें, बाइक, यहाँ तक कि एक क्रेन भी जल गई। दुकानों में तोड़फोड़ हुई, घरों पर पत्थर फेंके गए। पुलिस पर भी हमला हुआ। डीसीपी निकेतन कदम पर कुल्हाड़ी से वार किया गया, उनके हाथ में गहरी चोट लगी।

पुलिस ने लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया, पर भीड़ नहीं रुकी। अब तक 50 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए हैं। सीसीटीवी और वीडियो से पहचान चल रही है। साइबर पुलिस 100 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट्स की जाँच कर रही है, जहाँ से अफवाह फैली। शहर में कर्फ्यू लगा है, इंटरनेट कुछ घंटों के लिए बंद रहा, अब बहाल हो गया है।

अवलोकन करें:-

‘अब्दुल’ ने कहा कुरान जला दिया, सारे ‘अब्दुल’ नागपुर जलाने निकल पड़े: ‘अफवाह’ की आड़ में प्लानि

महाराष्ट्र सरकार के गृह राज्यमंत्री योगेश कदम का भी बयान आया है। उन्होंने कहा, “हिंसा के पीछे की वजह का अभी पता नहीं चल पाया है। अब तक 47 लोगों को हिरासत में लिया गया है। घटना में 12-14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। 2-3 नागरिक भी घायल हुए हैं। हम घटना के पीछे की वजह का पता लगाएँगे। कानून हाथ में लेने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

‘अब्दुल’ ने कहा कुरान जला दिया, सारे ‘अब्दुल’ नागपुर जलाने निकल पड़े: ‘अफवाह’ की आड़ में प्लानिंग के साथ फूँक दी 40+ गाड़ियाँ; उपद्रवियों को सरकारी सुविधाएं से ब्लैकलिस्ट किया जाए

                                                   नागपुर में हिंसा (फोटो साभार: X_ANI)
जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इन उपद्रवियों को ब्लैकलिस्ट कर इन्हे और इनके परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं करती ये जेहादी किसी न किसी बहाने उपद्रव करते रहेंगे। अगर निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट संविधान की आड़ लेकर बहाल करने के लिए कहे उस स्थिति में सख्त लब्जों को अदालतों को सरकार को अदालत से पूछना होगा कि कुछ रूपए के लालच में आकर उपद्रव करना कौन से संविधान में लिखा है। अपने जिन आकाओं के कहने पर उपद्रव किया है इनकी देखभाल करना उनका काम है सरकार का काम है। किसी भी सूरत में इन्हे ब्लैकलिस्ट सूची से नहीं निकाला जाएगा। जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इस तरह सख्त नहीं होंगी ये बिकाऊ उपद्रवी उपद्रव करते रहेंगे।   

नागपुर में 17 मार्च 2025 की शाम हुई हिंसा को ‘अफवाह’ का नतीजा बताया जा रहा है। लेकिन जिस तरीके से इसे अंजाम दिया गया उससे लगता है सब कुछ पूरी प्लानिंग के साथ हुआ। औरंगजेब की कब्र पर गरम माहौल में किसी ‘अब्दुल’ ने शोर मचाया कि कुरान जला दी गई है। फिर सारे अब्दुल एक साथ निकल पड़े शहर को जलाने।

गाड़ियाँ फूँकी गई। पत्थरबाजी हुई। पुलिस पर हमले हुए। हालात पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा है। ये मुस्लिम भीड़ की हिंसा का वही ‘मॉडल’ है जो आपको कभी भी किसी भी शहर में देखने को मिल सकता है। क्योंकि इस मॉडल में हिंसा ही सत्य है, कथित अफवाह की पुष्टि करने की फुर्सत किसी को नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार की सुबह 7 से 9 बजे के बीच नागपुर के महाल इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति के पास शिव जयंती का कार्यक्रम चल रहा था। लोग आए, नारे लगे, सब शांत था। दोपहर 12 बजे के आसपास विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता औरंगजेब की कब्र को हटाने की माँग लेकर सड़क पर उतरे। उन्होंने औरंगजेब का पुतला बनाया, उस पर कपड़ा डालकर उसे जला दिया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद अफवाह उड़ाई गई कि चादर पर कुरान की आयतें लिखी थीं और उसे जलाया गया। पुलिस ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ, फिर भी हिंसा को अंजाम दिया गया।

इस प्रदर्शन के बाद शाम 5 बजे तक माहौल गरमाने लगा। नागपुर के महाल, कोतवाली, गणेशपेठ और चितनवीस पार्क जैसे इलाकों में मुस्लिम युवकों की भीड़ जमा होने लगी। मुस्लिमों की भीड़ सड़कों पर निकल आई। शाम 7 बजने तक तक नारेबाजी शुरू हो गई और थोड़ी देर में सैकड़ों की संख्या में लोग सड़क पर थे।

भीड़ में ज्यादातर नकाबपोश थे, जिनके हाथों में लाठियाँ, पत्थर, बोतलें और कुछ के पास तो पेट्रोल बम भी थे। शाम 7:30 बजे के बाद इस हिंसा ने रफ्तार पकड़ ली। चितनवीस पार्क से लेकर शुक्रवारी तालाब रोड तक उपद्रवियों ने 40 से ज्यादा गाड़ियाँ जला दीं। कारें, बाइक यहाँ तक कि एक क्रेन को भी आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने दुकानों में तोड़फोड़ की और घरों पर पथराव किया।

डीसीपी निकेतन कदम पर कुल्हाड़ी से हमला, 15 पुलिस वाले घायल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने हालात काबू करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उन पर भी पत्थर बरसाए। पहले लाठीचार्ज हुआ, फिर आँसू गैस के गोले छोड़े गए, लेकिन हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही थी। इस बीच डीसीपी निकेतन कदम पर भी हमला हुआ। भीड़ में से किसी ने उन पर कुल्हाड़ी से वार किया, जिससे उनके हाथ में गहरी चोट लगी। उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया। कुल मिलाकर 15 से ज्यादा पुलिसवाले घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर थी। इसके अलावा 5-6 आम लोग भी चोटिल हुए।
एक स्थानीय महिला ने बताया, “अचानक भीड़ हमारे इलाके में घुस आई। उनके चेहरेढके थे, हाथों में पत्थर और हथियार थे। वो चिल्ला रहे थे, पत्थर फेंक रहे थे। दुकानों को तोड़ा, गाड़ियों में आग लगाई। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि समझ ही नहीं आया। हमारे घर की खिड़कियाँ टूट गईं। गाड़ियों को फोड़कर उनमें आग लगाई गई।” महिला का बयान साफ बताता है कि हिंसा में ज्यादातर बाहरी नकाबपोश शामिल थे, जिन्होंने प्लानिंग करके हमला किया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तांडव में 40 से ज्यादा गाड़ियाँ जलकर खाक हो गईं। इसमें कारें, बाइक, दो जेसीबी मशीनें और कुछ अन्य वाहन शामिल थे। कई घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया। पत्थरबाजी में खिड़कियाँ टूटीं, संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। अग्निशमन कर्मियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन उन पर भी हमला हुआ। एक फायरमैन घायल हो गया। कुल 4 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए, जिनका इलाज चल रहा है।

अब तक 50 से ज्यादा गिरफ्तार, हिंसा करने वालों की हो रही पहचान

पुलिस ने हालात संभालने के लिए अतिरिक्त फोर्स बुलाई। रात तक हंसपुरी इलाके में भी उपद्रव की खबरें आईं, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति काबू में आई। अब तक 50 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीसीटीवी फुटेज और वीडियो क्लिप्स की मदद से पत्थरबाजों और आग लगाने वालों की पहचान की गई।
नागपुर और महाराष्ट्र की साइबर पुलिस टीम ने 100 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट्स की जाँच शुरू कर दी है, क्योंकि अफवाह इन्हीं के जरिए फैली थी। इस बीच, नागपुर शहर के 10 पुलिस थाना इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
हिंसा बढ़ने के बाद इंटरनेट सेवा भी कुछ घंटों के लिए बंद कर दी गई, ताकि अफवाहें और न फैलें। देर रात हालात सामान्य होने पर इसे बहाल कर दिया गया। लेकिन शहर में अभी भी तनाव का माहौल है। लोग डरे हुए हैं, सड़कें सूनी हैं और पुलिस हर गली-नाके पर नजर रख रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ये हिंसा अचानक नहीं हुई। भीड़ में ज्यादातर बाहरी लोग थे, जो प्लानिंग के साथ आए। एक शख्स ने कहा, “हमारे इलाके में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। ये लोग बाहर से आए, उनके पास पेट्रोल बम थे। 8 गाड़ियाँ तोड़ीं, 2 में आग लगा दी।” सीएम देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी ने शांति की अपील की है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि स्थिति अब काबू में है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है।

 

‘अम्मी नाबालिग बच्चों की अभिभावक नहीं, बेवा को संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं’: शरिया के आगे गोदरेज समूह बेबस, 227 करोड़ रूपए की लैंड डील फँसी

                                                                                                                                  साभार: HT
नागपुर में 227 करोड़ रूपए की एक जमीन को लेकर गोदरेज प्रॉपर्टीज और अग्रवाल परिवार के बीच चल रहे विवाद के बीच मुस्लिम पर्सनल लॉ फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में सामने आया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ एक विधवा को जमीन बेचने या उसे ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं देता है। अब इस इस्लामी कानून का सहारा लेकर विधवा के वारिस करोड़ों रुपए बनाने का जुगाड़ लगा रहे हैं।

क्या है गोदरेज से जुड़ा जमीन विवाद और मुस्लिम पर्सनल लॉ का रोल

यह पूरा मामला 1988 का है। महाराष्ट्र के नागपुर के बेसा इलाके के घोगली गाँव में अब्दुल वहाब नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति के पास 58 एकड़ भूमि थी। अब्दुल वहाब की मौत के बाद यह भूमि उसकी विधवा खैरुन्निसा ने अग्रवाल परिवार को बेच दिया। इस जमीन को कितने में बेचा गया, इसकी जानकारी नहीं आई है। बेची गई इस जमीन में खैरुन्निसा के 8 बच्चों का हिस्सा भी शामिल था।
जमीन की बिक्री के समय मधुकर पुरोहित नाम के एक आदमी को अब्दुल वहाब के बच्चों का देखरेख करने वाला नियुक्त किया गया था। पुरोहित ने ही बच्चों की तरफ से जमीन की बिक्री के कागजों पर हस्ताक्षर किया था। आगे चलकर वर्ष 2022 में इसी जमीन को अग्रवाल परिवार ने गोदरेज प्रॉपर्टीज को 227 करोड़ रूपए में बेच दी।
हालाँकि, इस जमीन के सौदे पर अब्दुल वहाब के एक बेटे अब्दुल बशीर ने प्रश्न खड़े करते हुए मुकदमा दायर कर दिया। अब्दुल बशीर ने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ कहता है कि शौहर की मौत के बाद उसकी विधवा उसके बच्चों की देखरेख के लिए वैध अभिभावक नहीं हो सकती। इसीलिए वह बच्चों का हिस्सा नहीं बेच सकती। ऐसे में जमीन की बिक्री अवैध है।
इस मामले में नागपुर के एक सिविल जज ने निर्णय दिया कि मुस्लिम कानून के अंतर्गत उठाए गए इस प्रश्न को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून के अंतर्गत पिता की मौत के बाद उसके बच्चों का सम्पत्ति में हिस्सा लेने का अधिकार तुरंत बन जाता है। इस जमीन को तभी बाँटा जा सकता है, जब कोई वारिस यह चाहे। इसके लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की जा सकती है।
इस मामले में कोर्ट ने कहा कि यह मुकदमा इसलिए भी जायज है, क्योंकि इस पर अधिकार रखने वाले लोग कभी इससे बाहर हुए ही नहीं। ऐसे में 34 वर्षों के बाद दायर किया गया मामला कोर्ट के अंदर सुना जा सकता है। अब ऐसे में आगे और मामलों की सुनवाई की जा सकेगी।

गोदरेज को जमीन मिलने में एक और रोड़ा

इस मामले में अक्टूबर 2022 में एक और मुकदमा किया गया। यह मुकदमा अब्दुल वहाब के बेटे अब्दुल जब्बार की तरफ से मुनव्वरा बेगम ने दायर किया। अब्दुल जब्बार मानसिक रूप से स्थिर नहीं है। इस मामले में कहा गया कि जब्बार की अम्मी ने बिना कोई वैध अभिभावक नियुक्त किए उसका हिस्सा बेच दिया। ऐसे में उनके मानसिक स्वास्थ्य कानून का भी उल्लंघन किया है।
मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि अब्दुल वहाब की विधवा से जमीन खरीदने वाले अग्रवाल परिवार को इस जमीन से मोटा मुनाफा हुआ है। उन्होंने यह जमीन गोदरेज को 227 करोड़ रूपए में बेची है, जो कि उन्होंने 1988 में काफी कम दामों में खरीदी होगी। वहीं, साल 1988 में अब्दुल वहाब के वारिसों को छोटी-मोटी रकम मिली होगी।

मुस्लिम पर्सनल लॉ में कमियाँ और इसका दुरूपयोग

जहाँ एक ओर कोर्ट मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर मामले का निपटारा कर रहा है, वहीं इससे मुस्लिम पर्सनल लॉ की कमियाँ भी जाहिर हो रही हैं। यह मामला दिखाता कि धार्मिक कानून के जरिए कैसे एक विधवा महिला के अधिकारों को छीना जा रहा है। मुस्लिम महिला को उसके अधिकारों वंचित करने वाले ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं।
अब्दुल वहाब के वारिसों ने इस मामले में जहाँ दशकों तक कुछ नहीं किया, वहीं अब वह इस बड़ी डील को देखकर सक्रिय हो गए हैं। वे इस बड़ी बिजनेस डील को लटकाकर मोटा पैसा बनाना चाह रहे हैं। इस मामले से यह समस्या भी सामने आई है कि जो बड़े कॉर्पोरेट विकास के लिए जमीनें खरीदते हैं, वे बाद में जाकर कानूनी पचड़ों में फँस जाते हैं।
समस्या यह है कि भारत में अभी भी यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं है जो विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समान रूप से प्रभावी हों। ऐसे में मजहबी कानूनों को अपनी मनमर्जी से उपयोग करने की खुली छूट कई समस्याएँ पैदा करती हैं, जैसा कि इस मामले में देखा जा रहा है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड की आवश्यकता

यदि देश में सभी लोगों पर एक समान यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता तो ऐसे मामले में कानूनी पचड़ा नहीं फँसेगा। इस मामले में विधवा के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे। भारत को ऐसे मामले में कानून बनाने की तरफ कदम बढ़ाने की जरूरत है, जहाँ बिजनेस डील एवं सम्पत्ति से जुड़े मामले और विधवाओं के अधिकार सुरक्षित किए जा सकें।
कानूनी पचड़े में फँसी 227 करोड़ रूपए की यह गोदरेज की डील दिखाती है कि भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड की आवश्यकता क्यों है। तथ्य ये है कि 2022 में एक 34 वर्ष पुरानी जमीन की बिक्री को चुनौती दी गई है, वह भी मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत।