Showing posts with label #Priyanka Gandhi Vadra. Show all posts
Showing posts with label #Priyanka Gandhi Vadra. Show all posts

प्रियंका वाड्रा ने आतंकवाद को बताया फिजूल का मुद्दा, तो क्या राजीव-इंदिरा की हत्या फिजूल की बात थी?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। न्यूज एजेंसी ANI के साथ बातचीत वाले इस वीडियो में प्रियंका वाड्रा आतंकवाद को फिजूल का मुद्दा बता रही हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने फरवरी 21 को लखनऊ में कहा कि आतंकवाद का मुद्दा फिजूल है और बीजेपी वाले चुनाव की वजह से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन फिजूल की बातों का जवाब देने की मुझे जरूरत ही नहीं है। मैं समझती हूं कि ये फिजूत की बातें हैं। 

जिस परिवार की बेटी ने अपनी दादी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और अपने पिता भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को आतंकवाद की भेंट चढ़ते देखा हो, वही जब आतंकवाद को "फ़िज़ूल की बात" कहा जाए, फिर किस आधार पर इन दोनों की मौत के नाम पर वोट वोट मांगी जाती है? अगर आतंकवाद को "फ़िज़ूल की बात" कहे, फिर ऐसे लोगों की सुरक्षा पर सरकारी धन खर्च करना, क्या धन की बर्बादी नहीं? दूसरे, जब बाटला हाउस में मारे गए आतंकियों पर कांग्रेस अध्यक्ष आंसू बहाती हो, उसकी बेटी द्वारा आतंकवाद को "फ़िज़ूल की बात" बताना कोई बड़ी बात नहीं। इतना ही नहीं, जब यूपीए कार्यकाल में आतंकवादी हमले हो रहे थे, तब कांग्रेस पार्टी इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने के लिए कभी "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दू को बदनाम करने में व्यस्त थी। 

 

प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘प्रियंका गांधी कहती हैं कि आतंकवाद जैसी फिजूल बातों के लिए उनके पास टाइम नहीं है। ये कांगेस, सपा और बसपा वालों ने हमेशा आतंकवादियों को बचाने के लिए कोर्ट के दरवाजे खटखटाएं हैं। इन्होने वोटबैंक के लालच में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई को कमजोर किया है।’

कांग्रेसी शासन काल में देश आंतकवाद से सबसे ज्यादा पीड़ित रहा है और देश कि दो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी इसके शिकार बने हैं। यूपीए शासनकाल में अक्सर कहीं ना कहीं आतंकी वारदात होते रहते थे। ऐसे में प्रियंका गांधी वाड्रा के आतंकवाद को फिजूल की बात बताए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसी की बारे में चर्चा हो रही हैं। प्रियंका के बयान का वीडियो शेयर करते हुए बीजेपी नेता केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट किया, “आतंकवाद फ़िज़ूल की बात कहना देश रक्षा और सुरक्षा आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदानी सुरक्षा बलों का और हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों के घावों में नमक डालने का काम किया है। श्रीमती प्रियंका गांधी जी आपने इसके लिए देश माफ़ नहीं करेगा।”

सोशल मीडिया पर यूजर्स प्रियंका वाड्रा को लताड़ लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री चन्नी ने उड़ाया बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों का मजाक, प्रियंका गाँधी खड़ी मुस्कुराती रहीं

अनेकता में एकता का राग रागने वाली कांग्रेस का असली चेहरा उस नाजुक मोड़ पर सामने आया जब पंजाब के साथ उत्तर प्रदेश में भी  चुनाव हो रहे हैं, और ऐसे समय उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों का मजाक उड़ाना कांग्रेस को बहुत भारी पड़ने वाला है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो राहुल और प्रियंका कांग्रेस को पाताललोक में पहुंचाकर ही चैन की बांसुरी बजाएंगे। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार में कांग्रेस के अभियान का नेतृत्व करते हुए खुद को ‘उत्तर प्रदेश की बेटी’ बताती हैं, लेकिन पंजाब में घुसने के बाद उनका नजरिया बदल जाता है। पंजाब में पहुँचकर उनके लिए बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग बाहरी हो जाते हैं। वह उनके मजाक में साझेदार बन जाती हैं। पंजाब में जब कांग्रेस  मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ घृणा बढ़ाने वाली बात कर रहे थे, उन्हें प्रदेश से बाहर निकालने की बात कर रहे थे, तब प्रियंका गाँधी वाड्रा उनकी टिप्पणी का समर्थन करती नजर आईं।

15 फरवरी को चन्नी ने कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी के साथ पंजाब के रोपड़ में एक रैली को संबोधित किया था। अपने संबोधन के दौरान, चन्नी ने पंजाब में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाई और उन्हें राज्य से बाहर निकालने का आह्वान किया। दिलचस्प बात यह है कि जब वह उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के खिलाफ नफरत का प्रचार कर रहे थे, कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गाँधी उनके बयान पर तालियाँ बजा रही थीं।

प्रियंका गाँधी ने चन्नी की सराहना करते हुए कहा, “समझदारी का इस्तेमाल करो। चुनाव का समय है। लंबी-लंबी बाते नहीं कहना चाहती। लेकिन पंजाब के लोगों, बहनों-भाइयों जो आपके सामने है, उसे ठीक से पहचानो। आपमें बहुत विवेक है। समझदारी है। उस समझदारी का इस्तेमाल करो। जो लोग बाहर से आकर आपको पंजाबियत सिखाते हैं, उन्हें पंजाबियत क्या है ये सिखाएँ। पंजाब, पंजाबियों का है। पंजाब को पंजाबी चलाएँगे। अपनी सरकार बनाओ। यहाँ कोई नई राजनीति नहीं मिलेगी। ये बाहर से जो आते हैं आपके पंजाब में उन्हें सिखाइए पंजाबियत क्या है। पंजाब मेरे ससुरालियों का गृह राज्य है।”

प्रियंका के इतना बोलते ही चन्नी अपने हाथ में माइक लेते हैं और कहते हैं, “प्रियंका पंजाबियाँ दी बहू है। यूपी दे, बिहार दे, दिल्ली दे भईए आके इते राज नई कर दे। यूपी के भइयों को पंजाब में फटकने नहीं देना है।” चन्नी के इतना कहते ही वहाँ मौजूद लोग जो बोले सो निहाल के नारे लगाने लगते हैं। इस दौरान प्रियंका हँसती रहती हैं और खुद भी नारे लगाना शुरू कर देती हैं। फिर तालियाँ बजाती हैं। पंजाबी में ‘भइए’ एक अपमानजनक शब्द है। यह शब्द उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए एक गाली की तरह है। 

अमित मालवीय ने साधा निशान

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “मंच से पंजाब के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, बिहार वालों को अपमानित करते हैं और प्रियंका वाड्रा बगल में खड़े होकर हँस रही है, तालियाँ बजा रही हैं। ऐसे करेगी कांग्रेस उत्तर प्रदेश और देश का विकास? लोगों को आपस में लड़ाकर?”
पंजाब में 20 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं। वोटिंग एक ही चरण में होगी। परिणाम 10 मार्च को चार अन्य राज्यों उत्तर प्रदेश, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के साथ घोषित किए जाएँगे।

अपने ससुर एवं दादा फिरोज जहांगीर गाँधी की कब्र पर फूल चढ़ाने नहीं जाओगे?”

आज इंदिरा गांधी के पति, राजीव गांधी के पिता, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ससुर, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के दादा फिरोज खान गांधी की पुण्यतिथि है। लेकिन आज उनकी मजार सूनी पड़ी हुई है। इलाहाबाद प्रयाग के ममफोर्डगंज इलाके में स्थित पारसी कब्रिस्तान के उनकी मजार पर परिवार से ना कोई सजदा करने पहुंचा, ना ही कोई श्रद्धांजलि अर्पित करने आया। पुण्यतिथि पर फिरोज गांधी की कब्र को परिवार की ओर से एक फूल तक नसीब नहीं हुई। बात-बात पर ट्वीट करने वाले राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने अपने दादा की पुण्यतिथि पर एक भी ट्वीट नहीं किया है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि उनकी कब्र पर फूल चढ़ाने नहीं जाओगे?
फ़िरोज़ वो सांसद थे, जिनके संसद में खड़े होते ही ससुर जवाहर लाल नेहरू के पसीने बहने लगते थे, जबकि सांसद कांग्रेस से ही थे। फिरोज जहांगीर ने भ्रष्टाचार से कभी कोई समझौता नहीं किया। यदि इंदिरा गाँधी से लेकर राहुल और प्रियंका वाड्रा ने फिरोज जहांगीर का अनुसरण किया होता, परिवार की इतनी दुर्गति नहीं होती। लेकिन हैरानी इस बात पर है कि मेनका और वरुण तक अपने ससुर और दादा तक को स्मरण नहीं करते। इन नकली गांधियों द्वारा अपने ससुर एवं दादा को भूल जाने का कारण है, ये नकली गाँधी नहीं चाहते कि इनके मुस्लिम परिवार से होने की बात उजागर हो और हिन्दू बन जनता को पागल बनाकर वोट लेकर अपनी कुर्सी बचाए रखें। सास एवं दादी इंदिरा की समाधि पर फूलों के टोकरे लेकर पहुँच जाते हैं लेकिन दादा एवं ससुर की कब्र पर फूल की एक पत्ती तक नहीं। जो अपने पूर्वजों का नहीं हुआ, किसका होगा? सब बातें संस्कारों की होती हैं, जब मोती लाल ने अपने बाप और जवाहर ने अपने दादा मुग़ल युग में दिल्ली के कोतवाल ग्यासुद्दीन उर्फ़ गंगा धर के नहीं हुए, वही गंदे संस्कार उनकी फुलवारी में भी विराजमान हैं। जो अपने पूर्वजों को अपमानित करेगा/करेगी वही पूर्वज उनको दुनियां में उनको करेंगे, अपनी खुली आँखों से सब देख भी रहे हैं। 

पारसी परिवार से ताल्लुक रखने वाले फिरोज गांधी की शादी 1942 में इंदिरा गांधी से हुई थी।

प्रियंका वाड्रा ने फिर से देश को पप्पू बनाया, मोदी विरोध में रेलवे का नया नामकरण कर दिया

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज मोदी और योगी विरोधियों की हालत इतनी पतली हो गयी है कि अर्थ का अनर्थ करने को तुले हुए हैं।  
सोनिया, प्रियंका और राहुल को कम से कम इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में विपक्ष की भूमिका निभाते सत्तारूढ़ इंदिरा के दिल-ओ-दिमाग में ऐसी जगह बनायी की विषम परिस्थितियों में विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी से जरूर परामर्श करती थी। लेकिन इंदिरा गाँधी और पी.वी.नरसिम्हा राव के बाद से कांग्रेस से राजनीतिक दृष्टि लुप्त होती चली गयी। जिस कारण विपक्ष में आते-आते कांग्रेस में कोई ऐसा नेता नहीं, जिससे सत्तारूढ़ भाजपा के नरेंद्र मोदी विषम परिस्थितियों में किसी भी विपक्षी पार्टी से परामर्श कर सके। 
जिसे देखो दुश्मन देश से गुप्त मंत्रणा कर जनता को मूर्ख बनाकर, मोदी पर एक के बाद दूसरा प्रहार करने से नहीं चूक रहे। कोई मोदी को हराने पाकिस्तान जा रहा है, कोई चीन, क्या ये लोग संविधान की शपथ लेकर संविधान के विरुद्ध काम कर संविधान को अपमानित नहीं कर रहे, क्यों ऐसे नेताओं को मान-सम्मान दिया जाए, यह निर्णय जनता को करना है। भारत के गौरवमयी वास्तविक इतिहास को धूमिल करने वाले भी ये ही लोग हैं। 
लोकतंत्र है विरोध करें या समर्थन ये उनका अपना हक है पर मोदी का विरोध करके आप समर्थन किसका कर रहे हो? ये बडा गंभीर सवाल है इसलिए निर्णय भी गंभीरता पूर्वक ही होना चाहिए। 
इनकी राजनीति नहीं बल्कि सियासत का नमूना देखिए:

क्या मुलायम, लालू, मायावती, सोनिया, राहुल, केजरीवाल, ममता बनर्जी, वामपंथी ये सब क्या नरेन्द्र मोदी से बेहतर है? या इनका रिकॉर्ड बेहतर?
क्या नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्रीकाल की तुलना मे ममता बनर्जी, अखिलेश आदि बेहतर नजर आता है? तुलना करनी है तो देखिए :
राजनीति मे प्रवेश के समय लालू और मुलायम,
दोनों के घर की ऐसी स्थिति थी की, 1 के घर पर साइकिल और एक के घर पर लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे, जाति के नाम पर चलने वाले नेता, आज अरबपति है। 
रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमता है, तो शिवपाल महँगी ऑडी मे कहाँ से आया इतना अकुत धन? क्या ये लोग नरेन्द्र मोदी और योगी से बेहतर है ?
* सोनिया के बेटा-बेटी और दामाद आज सभी अरबपति है, 10 साल का  इनका राज हाल में ही  बीता है, क्या ये नरेन्द्र मोदी और योगी से बेहतर है?
* 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी, नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ?
* 5 साल केजरीवाल, 5 साल केजरीवाल, का विज्ञापन चलाकर दिल्ली के लोगों को चुना लगाने वाला, WIFI, CCTV, 150 कॉलेज, 500 स्कूल, मजहब देखकर सियासत करने वाला क्या ये नरेंद्र मोदी और योगी से बेहतर है?
* जब मायावती राजनीती करने निकली थी, और कांशीराम की साथी थी, तब उसके घर में दिया जलाने का धन नहीं था, साईकल से प्रचार करती थी, आज उसका सैंडल भी प्लेन से आता है, उसके भाई के पास 497 कंपनिया है, क्या मायावती नरेंद्र मोदी और योगी से बेहतर है?
Image may contain: 4 people, text that says 'दादी की नाक के दम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाली प्रियंका का दोगलापन भाजपा सरकार में गैंगस्टर विकास दुबे मारा गया कांग्रेस सरकार में जहरीली शराब पीने से 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई जिन कांग्रेसी सांसदों ने अपनी सरकार पर सवाल उठाए, उन्हें पार्टी से निकालने की तैयारी शुरु कर दी प्रियंका गांधी ने उसकी मौत पर घटिया राजनीति शुरु कर दी लेकिन प्रियंका के मुंह से एक शब्द नहीं फूटा'मोदी और योगी का विरोध करने वालो, विरोध करो, पर समर्थन किसका करना है ये तो तय करो। 
थोड़ा देश का भी सोचो, कितना बर्बाद करवाना है, कितना लूटवाना है? अरे बाहर निकलो जातियो के बंधनो से इसे उबारकर ये लूटेरे जनता को ही लूटते है। 
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सियासत चमकाने का कोई मौका नहीं चूकती। लेकिन इस कोशिश में वह देश को पप्पू बनाने से भी बाज नहीं आती है। जिस तरह से इनके जुमले आ रहे हैं, निश्चित रूप से राहुल गाँधी को बहुत पीछे छोड़ बची-कुची कांग्रेस को एकदम हाशिये से भी नीचे लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। इस दृष्टि से परिवार गुलाम ठीक काम कर रहे हैं कि अध्यक्ष परिवार का ही सदस्य रहेगा, चाहे कांग्रेस गड्ढे में ही क्यों न चली जाए। वैसे गद्दे में जाने से ज्यादा दूर नहीं। 
आज फिर प्रियंका वाड्रा ने ऐसा कुछ किया, जिससे उनके चमचे कुछ ज्यादा ही उछलने लगे। दरअसल मैडम वाड्रा ने अटके हुए रिजल्ट और परीक्षाओं को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने एक ट्वीट किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में रेलवे का नया नामकरण कर दिया।
वाड्रा ने जुमले से बनाया पप्पू
प्रियंका वाड्रा ने कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा के परिणाम घोषित करने और रेलवे की परीक्षा को लेकर छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए ट्वीट किया। प्रियंका ने अपने ट्वीट में लिखा, “SSC और रेलवे ने कई सारी परीक्षाओं के परिणाम सालों से रोक कर रखे हैं। किसी का रिजल्ट अटका हुआ है, किसी की परीक्षा। कब तक सरकार युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेगी, कब तक? युवाओं की बात सुनिए सरकार। युवा को भाषण नहीं नौकरी चाहिए।
रेलवे का नामकरण ‘SSCRaliwaystudents’

इस ट्वीट के साथ मैडम वाड्रा ने #speakupforSSCRaliwaystudents शेयर किया। इसमें रेलवे का एक नया नाम ‘SSCRaliwaystudents’ दिया गया है। इस नाम के सामने आते ही सोशल मीड‍िया पर कांग्रेस के चमचे उछलने लगे। कांग्रेस के जो चमचे कल तक कोरोना काल में JEE और NEET की परीक्षा आयोजित करने का विरोध कर रहे थे, वे अचानक रेलवे की परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया में सक्रिय हो गए। 
प्रियंका के इस ट्वीट पर ट्विटर पर भी बहार आ गयी:





इससे पूर्व, ट्विटर पर आज प्रियंका का #SpeakUpForStudentSaftey ट्रेंड होता देख पूरी दुनिया हैरान-परेशान हो गई कि आखिर ये कौन सा शब्द है। यूजर्स ने पता लगाने की कोशिश कि ये ट्रेंड कहां से हो रहा है तो पता चला कि ये तो वाड्रा भौजी है। असल में नीट और जेईई परीक्षाओं को लेकर राबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक ट्वीट किया। प्रियंका ने ट्वीट के साथ हैशटैग SpeakUpForStudentSaftey इस्तेमाल किया। प्रियंका वाड्रा ने गलत अंग्रेजी लिखकर #SpeakUpForStudentSaftey को ट्रेंड करा पूरे भारतीयों को पप्पू बनाने की किस तरह कोशिश की आप भी देखिए- 



दिल्ली : हिन्दू युवक की मॉब लिंचिंग, मुस्लिम युवकों ने डंडों से पीट-पीट कर मार डाला, सेक्युलर गैंग ने साधी चुप्पी

                                                                    प्रतीकात्मक 
अगर किसी को दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा, #mob lynching, #not in my name, #award vapasi, #intolerance या फिर गंगा-जमुनी तहजीब राग-अलापने वाला गैंग कहीं दिखाई पड़े तो उनको बता दो कि विकासपुरी में डॉ नारंग, लाल कुआँ में मंदिर और घरों में घुसकर हिन्दू महिलाओं को प्रताड़ित करने और पूर्वी दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों के बाद अब पश्चिमी दिल्ली में उनके शांतिदूतों ने एक हिन्दू लड़के की पीट-पीटकर हत्या कर दी। क्योकि अभी तक इन बिकाऊ गैंगस्टरों की कोई आवाज़ नहीं आयी, और पुलिस कार्यवाही पर जितने भी ये साम्प्रदायिक गैंग है, Victim Card खेलने मैदान में उतर आएंगे। कहेंगे कि गरीब है, मजलूम हैं, नासमझ हैं, जवानी के जोश में बहक गए थे, माफ़ कर, मामला ख़त्म करो। वैसे ये घटना अगस्त 28 की है। लेकिन क्षेत्रीय सांसद को चाहिए की, किसी भी हाल में इन गरीब, मजलूम हत्यारों पर कोई नरमी न बढ़ती जाए। मजे की बात, कोई लिबरल गैंग मीडिया भी नहीं बोल रहा, शायद इनके सूचना तंत्र कहीं आने-जाने योग्य नहीं है, इसलिए बिना किसी सबूत के उनकी TRP को संतुलित रखने वालों के खिलाफ बोल भी तो नहीं सकते, सर जी।    
दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल तो इसलिए चुप है कि ये घटनाएं दिल्ली में घटित हो रही हैं, उत्तर प्रदेश या फिर किसी भाजपा शासित राज्य में नहीं, जो इनका मुंह खुले। ये तो बस चुपचाप उपद्रवियों को सुरक्षा कवच देते रहेंगे। जैसाकि जेएनयू, लाल कुआँ, विकासपुरी और पूर्वी दिल्ली में देखने को मिला। दिल्लीवालों ने मुफ्त की रेवड़ियां खाने के चक्कर में कांग्रेस से अधिक विवादित पार्टी के हाथ में सत्ता थमा दी। वैसे केजरीवाल और जितने भी उपरोक्त गैंगस्टर हैं ये सब मजहब देखकर सियासत करने वाले हैं, क्योकि धर्म देख राजनीति करने में इन्हें साम्प्रदायिकता नज़र आने लगती है।    
पश्चिमी दिल्ली के नारायणा में एक हिन्दू युवक की मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया है। शुक्रवार को चार मुस्लिम युवकों ने एक 32 वर्षीय राहुल को मोबाइल चोरी करने के आरोप में पीट-पीट कर मार डाला। लेकिन मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति की मॉब लिंचिंग पर तूफान खड़ा करने वाला तथाकथित सेक्युलर मीडिया इस घटना पर मौन है। इन लोगों को हिंदुओं की हो रही मॉब लिंचिंग दिखाई नहीं देती है। देश में हिंदुओं, दलितों, आदिवासियों के साथ मॉब लिंचिंग की घटनाएं आम हैं, लेकिन हिंदू विरोधी ताकतों को ये दिखाई नहीं देता है।
मॉब लिंचिंग की इस घटना को अंजाम देने वाले चार आरोपितों की पहचान मुश्ताक अहमद, उसके भाई शिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार के रूप में हुई है, जिन्होंने राहुल को एक पेड़ से बांधकर डंडों और लोहे के छड़ों से उसे बेहरहमी से मारा। जिससे उसकी मौत हो गई। 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को चश्मदीद शेष कुमार ने बताया कि सुबह उसके पड़ोसी मुश्ताक अहमद, उसका भाई सिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार (चारो लोहा मंडी के निवासी थे।) पार्क में इस लड़के की बुरी तरह से पिटाई कर रहे थे। उन्होंने लड़के को पेड़ से बाँधा हुआ था। और लाठी डंडों, पाइप और लोहे की रॉड से उसकी पिटाई कर रहे थे। उन लोगों ने उस व्यक्ति को तब तक मारा जब तक उसकी हालत बदतर नहीं हो गई। उसके बाद वे उसे छोड़ कर भाग गए।
डीसीपी दीपक पुरोहित ने बताया 28 अगस्त को पीसीआर कॉल से नारायणा के लोहा मंडी के एमसीडी पार्क में एक शख्स की हत्या की सूचना मिली थी। जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए नारायणा पुलिस स्टेशन की एक टीम घटना स्थल पर पहुँची तो उन्हें 32 साल के लड़के का शव पड़ा हुआ मिला। लड़के के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे।

पुलिस के मुताबिक, चारो आरोपितों को घटना के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया। राहुल और उसके साथियों ने मिलकर शिराज के सेलफोन को उसके ट्रक से चुरा लिया था। जिसके बाद राहुल के दोस्त फ़ोन लेकर भाग गए लेकिन राहुल उन लोगों के हत्थे चढ़ गया। जिस पर चारों आरोपितों ने उसकी इतनी पिटाई की कि उसे जान से हाथ धोना पड़ा।
हैरानी बात यह है कि मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति की मॉब लिंचिंग होने पर मोदी सरकार को कोसने वाला सेक्युलर मीडिया इस घटना को लेकर मैन है। उसे हिन्दू युवक का यह मॉब लिंचिंग दिखाई नहीं दे रहा है। अगर यह घटना किसी मुस्लिम युवक के साथ हुई होती, तो सेक्युलर गैंग टीवी चैनलों में बहस और सोशल मीडिया पर पोस्ट करते नजर आता। दिल्ली से लेकर बॉलीवुड तक सभी के हाथों में प्लेकार्ड और पोस्टर नजर आता। लेकिन आज सभी गायब है।
किसी भी व्यक्ति की हत्या मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देती है, मरने वाला चाहे किसी भी धर्म, जाति या रंग का हो। लेकिन सेक्युलर गैंग और बुद्धिजीवी व्यक्ति के धर्म, जाति और रंग को आधार बनाकर विरोध करते हैं। महज क्षुद्र राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ मॉब लिंचिंग के नाम पर झूठ फैलाने से बाज नहीं आते हैं। सेक्युलर और टुकड़े-टुकड़े गैंग हमेशा पक्षपाती चिंता जाहिर कर अपना हित साधने की कोशिश करता है।  

‘बाबरी विध्वंस’ के लिए प्रियंका पर ओवैसी का कटाक्ष -- खुशी है कि अब नाटक नहीं कर रहे

ओवैसी प्रियंका गाँधी
अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन पाँच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। इस भूमि पूजन से पहले लगातार राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है। लेकिन इस सभी के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बयान जारी करते हुए कहा कि भूमि पूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रियंका के इस ट्वीट को लेकर उनकी खिंचाई की। ओवैसी ने कांग्रेस पार्टी पर उस ‘आंदोलन में योगदान देने का आरोप लगाया जिसने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।’ 
ओवैसी इस बात को भी भूल रहे हैं कि ताला भी कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के कार्यकाल में खुला था, और शिलान्यास भी। क्यों? उस समय ऐसी कौन-सी मजबूरी आ गयी थी, जो ताला खुलवाने से लेकर शिलान्यास तक हो गया? कुछ स्मरण भी आ रहा है कि विरोध का एक भी स्वर नहीं निकला था। ये नाटक क्या था? और आज चीख-चिल्लाट? उस समय शाहबानो के अलावा वो कौन-सा दबाव था, जिसने तब राम विरोधियों की आवाज़ बंद कर दी थी? और उस संगीन मामले के ठंठा होते ही वापस मंदिर मुद्दा कोर्ट में ले गए, ओवैसी साहब दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है, क्यों ठीक कहा ना? क्यों मुस्लिम होकर मुस्लिम के खून की होली खेली जा रही है? दंगे में हिन्दू ही नहीं मुसलमान भी मरता है 
ओवैसी ने प्रियंका गाँधी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “खुशी है कि वे अब और नाटक नहीं कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि वो भी अतिवादी विचारधार को गले से लगा रही हैं। लेकिन भाईचारे के मुद्दे पर वो खोखली बातें क्यों करती हैं। शर्म मत कीजिए, आप इस बात पर गर्व महसूस करिए कि किस तरह से आपकी पार्टी ने उस आंदोलन में योगदान दिया, जिसकी वजह से हमारे बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।”

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।” इसके साथ प्रियंका गाँधी ने अपना वक्तव्य भी शेयर किया है, जिसके अंत में उन्होंने ‘जय सियाराम’ लिखा है।
प्रियंका गाँधी वाड्रा की ओर से ये बयान तब आया, जब कांग्रेस की ओर से राम मंदिर को लेकर अलग-अलग तरह के बयान सामने आ रहे थे। एक तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमि पूजन का समर्थन किया, साथ ही स्वागत भी किया। उन्होंने लोगों को भूमि पूजन की बधाई भी दी। इतना ही नहीं कमलनाथ ने अपने ट्विटर पर प्रोफाइल फोटो भी बदल ली है और भगवा वस्त्र में नज़र आ रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर दिग्विजय सिंह की ओर से भूमि पूजन के वक्त पर सवाल खड़े किए गए थे, उन्होंने कहा था कि अभी शुभ मुहूर्त नहीं है ऐसे में इसे कुछ वक्त के लिए टाल देना चाहिए।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर बनाने की औपचारिक शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र .....
इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने शुभ मुहूर्त ना होने और भाजपा नेताओं को कोरोना होने के कनेक्शन को जोड़ दिया था जिस पर काफी विवाद हुआ था। इन बयानों के बाद ही भाजपा की ओर से आरोप लगाया जा रहा था कि कॉन्ग्रेस एक बार फिर मंदिर निर्माण में अड़ंगा लगा रही है।

राममंदिर भूमि पूजन एकता का कार्यक्रम बनेगा: प्रियंका गाँधी

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर बनाने की औपचारिक शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन में मंदिर की नींव रखने के साथ ही हो जाएगी। इसी क्रम में अब कांग्रेस नेता भी एक-एक कर के रामभक्त बनते जा रहे हैं। जो राम के अस्तित्व को काल्पनिक कहते थे, मन्दिर मुक्ति आंदोलन को साम्प्रदायिकता का नाम दिया जाता था, खुदाई में सबूतों को छुपाकर मंदिर में अवरोध उत्पन्न किये जा रहे थे, आज उसी कांग्रेस जनता की नब्ज को पढ़ हिन्दुओं के आराध्य पुरुषोत्तम श्रीराम को स्वीकार कर रहे हैं। इसमें नया नाम प्रियंका गाँधी का जुड़ा है, जिन्हें राज्य में पार्टी के पुनरुद्धार की कमान सौंपी गई है। प्रियंका गाँधी ने अयोध्या में राम मंदिर बनने के स्वागत किया है।
प्रियंका गाँधी ने कहा कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने। बता दें कि कांग्रेस पर अक्सर आरोप लगते हैं कि उसने सत्ता में रहते राम के अस्तित्व को नकार दिया था।
इतना ही नहीं, प्रियंका गाँधी ने तो यहाँ तक कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है। उन्होंने कहा कि भगवान राम और सीता की गाथा हज़ारों वर्षों से भारत की संस्कृति और इतिहास का हिस्सा रही हैं। उन्होंने नीति, कर्तव्यपरायणता, धर्म, प्रेम, पराक्रम, सेवा और उदात्तता का प्रेरणास्रोत रामायण को ही करार दिया। उन्होंने राम ही नहीं बल्कि श्रीहरि के अन्य रूपों का भी गुणगान किया।

उन्होंने यहाँ तक कहा कि भगवान राम का चरित्र युगों-युगो से लोगों को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने शबरी, सुग्रीव, वाल्मीकि, भास, कम्बन, कबीर, तुलसीदास, रैदास और वारिस अली शाह का जिक्र करते हुए कहा कि राम सबके हैं, सबके दाता हैं। मैथिलीशरण गुप्त और महाप्राण निराला जैसे कवियों का जिक्र करते हुए प्रियंका गाँधी ने राम के लिए उनके द्वारा दिए गए वक्तव्यों को याद किया।
जहाँ एक तरफ दिग्विजय सिंह और प्रमोद कृष्णन सरीखे कांग्रेस नेता बुधवार को होने वाले अयोध्या भूमिपूजन का विरोध करते हुए मुहूर्त पर सवाल उठा रहे हैं, प्रियंका ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि रामलला का ये कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व, सांस्कृतिक समागम का कार्यक्रम बनेगा। प्रियंका गाँधी ने कहा कि चारों दिशाओं में रामकथा अनगिनत रूपों में लोकप्रिय होती आ रही है।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
कर्नाटक के पुजारी विजयेंद्र (इनसेट) को मौत की धमकी! अयोध्या में राममंदिर विरोधी तारीख मिलने से इतने अधिक विचलित हो ....
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ आज 4 अगस्त के दिन एक बड़ा आयोजन कर रहे हैं। 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले वह भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इतना ही नहीं, इस दिन मध्य प्रदेश कांग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं।

कांग्रेस का एक और घोटाला : दलित हॉस्टल की जमीन पर किया कब्जा

Seven Big Scandals Of Congress And Nehru Family - 7 घोटाले ...
लगता है, कांग्रेस और घोटालों का चोली-दामन का साथ है, एक घोटाले से मुक्ति मिल नहीं पाती, दूसरा घोटाला सिर उठा लेता है। गनीमत है, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने तो कांग्रेस की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 घोटालों का पुलंदा ऐसे लिए घूम रहे थे, मानो सत्ता हाथ आते ही सारे घोटाले उड़नछू हो गए। केजरीवाल ने दिल्लीवालों को मुफ्त रेवड़ियों बांटने के चक्कर में राष्ट्र धर्म नहीं निभाया, क्योकि शायद स्वयं घोटाले करने सत्ता में आए हैं। इनके घोटालों की पोटली तो सत्ता परिवर्तन होने पर ही खुलेगी।  
कांग्रेस काल का एक और घोटाला सामने आया है। अंग्रेजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ ने कांग्रेस कार्यकाल में हुए एक और काले कारनामे की पोल खोली है। इसके साथ ही एक बार फिर गांधी परिवार का नाम उभरा है। टाइम्स नाउ रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में गांधी परिवार की ओर से खरीदी गई जमीन में काफी गड़बड़ी है।
सन 1983 में यह जमीन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को दलितों के हॉस्टल बनाने के लिए मिली थी। दलितों के हॉस्टल के लिए आरक्षित 3478 वर्ग मीटर को कमर्शियल प्रॉपर्टी में कन्वर्ट कर दिया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कि 20,000 वर्गफीट पर ही निर्माण करने की अनुमति थी, लेकिन कांग्रेस ने 80,000 वर्ग फुट जमीन पर निर्माण कर लिया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जहां सरकार को कमर्शियल प्रॉपर्टी से 50 प्रतिशत राजस्व प्राप्त होता है, वहीं इस प्रॉपर्टी से सिर्फ 30 प्रतिशत मिला।




टाइम्स नाउ के अनुसार मुंबई के पॉश बांद्रा ईस्ट इलाके की इस जमीन की कीमत सन 2017 के हिसाब से 262 करोड़ रुपए होती है।
देश के आजाद होने के बाद कांग्रेस और गांधी परिवार ने 60 सालों तक देश को जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत हुए घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म ही नहीं होती। सबसे पहला घोटाला जीप घोटाला था, लेकिन उसके बाद से कांग्रेस और इसके नेताओं द्वारा किये घोटालों की सूची पूरी होने को ही नहीं आ रहे। अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम, बोफोर्स घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, जमीन घोटाला… न जाने कितने ऐसे स्कैम हैं, जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हैं। 
सोनिया गांधी क्या वाक़ई 'ब्रिटेन की ...नेशनल हेराल्ड स्कैंडल
गांधी परिवार पर अवैध रूप से नेशनल हेराल्ड की मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति हड़पने का आरोप है। वर्ष 1938 में कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी। यह कंपनी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज नाम से तीन अखबार प्रकाशित करती थी। एक अप्रैल, 2008 को ये अखबार बंद हो गए। मार्च 2011 में सोनिया और राहुल गांधी ने ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ नाम की कंपनी खोली और एजेएल को 90 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन दिया। एजेएल यंग इंडिया कंपनी को लोन नहीं चुका पाई। इस सौदे की वजह से सोनिया और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को एजेएल की संपत्ति का मालिकाना हक मिल गया। इस कंपनी में मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के 12-12 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 76 प्रतिशत शेयर हैं। गांधी परिवार पर अवैध रूप से इस संपत्ति का अधिग्रहण करने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल करने का आरोप लगा। गांधी खानदान के मौजूदा दोनों नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट से जमानत पर हैं। इन दोनों ने अपनी सरकारों के जरिए देश के विभिन्न शहरों में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के नाम पर कई एकड़ जमीन आवंटित करा ली। इसकी प्रॉपर्टी की कीमत करीब 5 हजार करोड़ है।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
वर्ष 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी ‘अगस्ता वेस्टलैंड’ से कमीशन लेने के आरोप लगे। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई। इतालवी कोर्ट ने माना कि इस मामले में भारतीय अफसरों और राजनेताओं को 15 मिलियन डॉलर रिश्वत दी गई। इतालवी कोर्ट ने एक नोट में इशारा किया था कि सोनिया गांधी सौदे में पीछे से अहम भूमिका निभा रही थीं। कोर्ट ने 225 पेज के फैसले में चार बार सोनिया का जिक्र किया।

बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपये दिये थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।

वाड्रा-डीएलएफ घोटाला
वर्ष 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उनपर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीदकर  भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा। रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन लेने का आरोप लगा। बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना मूल उद्देश्य था। यह तथ्य भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई और हिस्सों में भी बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं। इस मामले में हाल ही में हरियाणा सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान के बीकानेर में हुए जमीन घोटालों में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारी एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़ी हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिए जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।

मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। तब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा। 

अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
सचिन पायलट के नर्म पड़ते रुख पर अशोक गहलोत ने खुल कर हमला किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उनके यहाँ उपमुख....