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दिल्ली : नई शराब नीति विरोध में BJP सड़क पर ; केजरीवाल सरकार को कुमार विश्वास ने घेरा, कहा- ‘…500 करोड़ की डील में मामला सेट’

दिल्ली में नई आबकारी नीति लागू हो चुकी है। इस नई नीति के तहत दिल्ली में शराब पीने वालों की उम्र 25 से 21 कर दी गई है। दिल्ली सरकार अपनी इस नीति के लिए विपक्ष के साथ ही अपने कई पुराने साथियों का भी विरोध झेल रही है। 

एक ओर जहाँ आज (3 जनवरी 2022) नई आबकारी नीति के खिलाफ पूरी दिल्ली में भाजपा ने चक्का जाम किया, वहीं पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता व कवि कुमार विश्वास ने भी दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया।

कुमार विश्वास ने ट्वीट करते हुए लिखा, “पीनेवालों की उम्र 21 से 18 करने और 1000 नए ठेके खुलवाने की नीति लागू करने की सिफारिश लेकर 2016 में दिल्ली शराब माफिया, दारू जमाखोर विधायक के साथ मेरे पास आया था। मैंने दुत्कार कर भगाया था और दोनों नेताओं को चेताया था। अब छोटेवाले के साले ने 500 करोड़ की डील में मामला सेट कर लिया है।”

कुमार विश्वास और नरेश बाल्यान का ट्विटर वार

विश्वास के ट्वीट पर आप विधायक नरेश बाल्यान ने भी उन्हें जवाब दिया जिसमें उन्होंने लिखा, “लगता है आज सुबह गलत पदार्थ का सेवन कर लिया है आपने, 2021 तक दिल्ली में शराब पीने की आयु 25 वर्ष थी, नई नीति के बाद 21 वर्ष की गई है, दूसरा तथ्य यह है कि शराब का एक भी ठेका नहीं बढ़ा है, 4 कम हुए है, बाकी हमें पता है कि राज्यसभा का दर्द जीवन भर रहेगा, ऐसे ही झूठ फैलाते रहे!”

 इस पर कुमार विश्वास ने भी जवाब में ट्वीट करते हुए ये खुलासा कर दिया कि वो जिस दारू जमाखोर विधायक की बात कर रहे थे वह बाल्यान ही हैं। कुमार विश्वास ने लिखा, “चोर जो चुप ही लगा जाता तो वो कम पिटता, बाप का नाम बताने की जरूरत क्या थी। मैंने तो बस “दारू जमाखोर विधायक” लिखा था, तुम ही आए थे यह जताने की जरूरत क्या थी बालक?

बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता और भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी नई एक्साइज पॉलिसी को लेकर केजरीवाल सरकार को घेरा।

आदेश गुप्ता ने ट्वीट करते हुए लिखा कि केजरीवाल सरकार की नई शराब नीति के विरोध में भाजपा की लड़ाई जारी रहेगी! हम दिल्ली को शराब की नगरी नहीं बनने देंगे!

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “उप मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि दिल्ली के मुख्यमंत्री क्या बोलते हैं! अरविंद केजरीवाल ने अपनी पुस्तक ‘स्वराज’ में लिखा था कि शराब का एक ठेका खोलने पर नेताओं और अफसरों की जेब भरी जाती है। दिल्ली में हजारों की संख्या में ठेके खोले गए हैं, तो आप की सरकार ने कितनी घूस खाई है?”

दिल्ली में बुधवार (5 जनवरी 2022) से शराब की बिक्री पूरी तरह निजी हाथों में चली जाएगी। नई आबकारी नीति के तहत राजधानी को 32 जोन में बाँट कर 849 लाइसेंस आवंटित किए गए। इसके तहत प्रत्येक जोन में 26-27 दुकानें बुधवार से संचालित होंगी। हर इलाके में आसानी से शराब उपलब्ध हो, इसके लिए दिल्ली के 272 वार्ड को जोन में विभाजित किया गया है।

एक जोन में आठ से नौ वार्ड शामिल हैं और हर वार्ड में अनिवार्य तौर पर तीन से चार दुकानें खुलेंगी। आबकारी विभाग की तरफ से कहा गया है कि सभी दुकानों को खोलने की तैयारी है। लाइसेंस हासिल करने वाली फर्मों ने पूरी तैयारी कर ली है। वहीं दूसरी ओर नई नीति लागू होने के साथ ही शराब आठ से नौ फीसदी महँगी होने का अनुमान है।

‘एक और फ्री सुविधा के लिए बधाई लघुकाय-लंपट जी’: कुमार विश्वास ने कसा केजरीवाल पर तंज

दिल्ली में जब से अरविन्द केजरीवाल की सरकार मुफ्त की रेवड़ियों बांटकर सत्ता में आयी है, हिन्दुओं को अपने त्यौहारों पर किसी न किसी मुसीबत का सामना करना पड़ता है। मुफ्त की रेवड़ी खाने वाले हिन्दुओं अब तो अपनी आंखें खोलो। दीवाली की दस्तक से पहले ही प्रदुषण का रोना शुरू हो जाता है। और अब सूर्य देवता की आराधना पर यमुना नदी के इतने गंदे पानी में खड़े होकर पूजा करने को विवश हिन्दू। यदि यही पर्व ईसाई अथवा इस्लाम में होता, तब भी क्या यमुना नदी की सफाई के लिए ऐसे ही दूसरे राज्यों को आरोपित करते?

केजरीवाल से पूर्व 15 वर्ष शीला दीक्षित की सरकार रही, न किसी का वेतन रुका, न ही प्रदुषण का रोना और न ही छठ पर यमुना का इतना गन्दा पानी। अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए कभी मोदी सरकार, कभी उपराज्यपाल और कभी दूसरे राज्यों पर आरोप लगाकर अपने आपको जनता का हितैषी साबित करने में लगे रहते हैं।  

दिल्ली में छठ पर्व की शुरुआत पर श्रद्धालुओं ने यमुना नदी के जहरीले झाग के बीच खड़े होकर पूजा अर्चना की। इसको लेकर मशहूर कवि कुमार विश्वास ने श्रद्धालुओं की तस्वीर को ट्वीट करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट किया, ”भगीरथ जी स्वर्ग से गंगा, बादलों के जिस मार्ग से उतार कर लाए थे ‘लघुकाय-लंपट’ जी, यमुना जी को उसी रास्ते दिल्ली ले आएँ हैं और वो भी मुफ्त (और हाँ, इस बार वायु-प्रदूषण की जिम्मेदारी हरियाणा के किसानों पर रहेगी, पंजाब वालों पर नहीं, क्योंकि वहाँ कुछ महीनों में चुनाव हैं)।”

दरअसल, बीते कुछ दिनों से यमुना में सफेद-सफेद झाग बड़े पैमाने पर तैरते हुए देखे जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य रहे कुमार विश्वास ने दो दिन पहले यानी 7 नवंबर को समाचार एजेंसी एएनआई के एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा था, ”दिल्ली को एक और ‘फ्री’ सुविधा के लिए बधाई। अब तो यमुना में बादल भी उतार दिए, गली-गली मुफ्त का नरक कोविड के दौरान दिखा ही दिया था। टैक्सपेयर्स के पैसे पर TV में कालनेमि-लाइव देखा ही होगा। अब पंजाब में यही कौशल दिखाने का अवसर दें, स्वराज-शिरोमणि लघुकाय आत्ममुग्ध धूर्तेश्वर’ को।”

कुमार विश्वास का यह तंज केजरीवाल के उन कथित वादों को लेकर है, जो उन्होंने सरकार बनने पर यमुना की सफाई के लिए किए थे। केजरीवाल सरकार के इतने सालों से सत्ता में रहने के बाद भी यमुना नदी की हालत जस की तस है। हर साल छठ पर्व पर श्रद्धालुओं को झाग के बीच खड़े होकर पूजा करनी पड़ती है।

वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने एक बयान जारी कर बीते दिनों कहा था कि हरियाणा से काफी मात्रा में सीवेज और औद्योगिक कचरा छोड़े जाने के चलते दिल्ली के जल शोधन संयत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। 

‘दो पैसे की प्याली गई, पर कुत्ते की जात पहचानी गई’: कुमार विश्वास

                           मुनव्वर राना (बाएँ) और कुमार विश्वास (दाएँ) (फोटो : द डे मीडिया/अमर उजाला)
देश में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो तालिबान का महिमामंडन कर रहे हैं। कोई नई बात नहीं। 1962 में हुई इंडो-चीन युद्ध, 1965 और 1971 में हुए इंडो-पाक युद्ध, याद करो कितने स्लिपर सेल बिलों में से निकल आये थे। कई मुस्लिम धर्मगुरु और नेता तालिबान की प्रशंसा करते फूले नहीं समा रहे हैं, ऐसे में लोकप्रिय कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट करके ऐसे लोगों को लताड़ लगाई है।

विश्वास ने ट्वीट करके कहा, “ज्यादा दिमाग न लगाइए। अगर पड़ोस के घर में मची अफरा-तफरी के कारण, जिंदगी भर आपसे इज्जत पाने वाले और आपके घर में रह रहे, बदबूदार सोच से भरे किसी जाहिल शख्स का पर्दाफाश हो रहा है तो शोक नहीं, शुक्र मनाइए कि दो पैसे की प्याली गई (वो भी पड़ोसियों की), पर कुत्ते की जात पहचानी गई।”

हालाँकि विश्वास ने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन सोशल मीडिया यूजर इसी बहाने शायर मुनव्वर राना को निशाने पर ले रहे हैं। कई यूजर्स का मानना है कि कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए मुनव्वर राना के लिए ही यह बात कही है।

मुनव्वर राना ने कहा था कि तालिबानी आतंकी नहीं हैं बल्कि उन्होंने अपने मुल्क को आजाद कराया था। इस पर गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी अपनी आपत्ति जताई थी और कहा था, “फिर तो आज़ाद कश्मीर की माँग करने और वादी में बेगुनाहों का खून बहाने वाले भी आतंकवादी नहीं हैं। राना साहब, मजबूर कर रहे हैं आप कि मैं अपनी लाइब्रेरी से आपकी किताबें हटा दूँ। बाज़ आ जाइए!”

‘न्यूज नेशन’ चैनल पर दीपक चौरसिया से बात करते हुए राना ने तालिबान का महिमामंडन किया था और कहा था कि तालिबान ने भारतीयों के खिलाफ कोई खराब कदम नहीं उठाया और उन्हें जाने के लिए नहीं कहा, लेकिन हालात बिगड़ने पर लोग आ रहे हैं। मुनव्वर राना ने कहा कि तालिबान के जुल्म को लेकर हमें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन अफगानिस्तान के हजार वर्ष का इतिहास कहता है कि हिंदुस्तान ने उनसे हमेशा मोहब्बत की है। यहाँ तक कि उन्होंने भगवान वाल्मीकि की तुलना तालिबान से कर डाली और कहा कि वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है। इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है।

पंजाब : हिन्दू -सिख को बाँट कर मुख्यमंत्री बनना चाहते थे अरविन्द केजरीवाल

कई वर्ष सोनिया गाँधी की सलाहकार टीम में रहे अरविन्द केजरीवाल ने कांग्रेस की 'फूट डालो और राज करो' नीति पर चल सभी को पागल बना और मुफ्त की रेवड़ियां बांट कोई मंत्रालय तक अपने पास रखे बिना दिल्ली में राज कर रहे हैं। 
पंजाब कांग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट से आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास का एक पुराना वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो अपने पूर्व सहयोगी और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल को लेकर कुछ बड़े खुलासे कर रहे हैं। एक पुराने इंटरव्यू के इस हिस्से में कुमार विश्वास ने बताया कि केजरीवाल ने पंजाब चुनाव के बाद वहाँ का मुख्यमंत्री बनने की पूरी तैयारी कर ली थी और इसके लिए वो मनीष सिसोदिया को दिल्ली की कमान सौंपना चाह रहे थे।

कुमार विश्वास इस इंटरव्यू में कहते हैं, “मैंने कहा ये गलत काम मत करो। आग मत लगाओ। वहाँ भावनाओं को मत भड़काओ। पंजाब में कोई नहीं चाहता है कि वहाँ शांति भंग हो। हिन्दू नहीं चाहते, सिख भी नहीं चाहते। वहाँ के किसी हिन्दू ने नहीं कहा कि हम मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। लुधियाना मंदिर और दरबार साहिब के प्रति श्रद्धा बराबर है वहाँ के हिन्दुओं में। इसको (अरविन्द केजरीवाल) ये लग गया था कि वहाँ 90 सीट आएँगी और वो मुख्यमंत्री बन जाएँगे वहाँ के। मैंने कहा कि पंजाब के लोग आपको स्वीकार नहीं करेंगे।”

अरविन्द केजरीवाल की रणनीति पर बात करते हुए कवि कुमार विश्वास कहते हैं, “मैंने कहा कि पंजाब में लोग बिना पगड़ी वाले आदमी को स्वीकार नहीं करेंगे। पंजाब सूबा नहीं बल्कि वो एक इमोशन है, वो भी पूरी दुनिया के लिए। पूरी दुनिया में जो पंजाबी और सिख फैले हुए हैं उनके लिए पंजाब एक इमोशन है। मैंने अरविंद से पूछा कि कैसे बनेगा कैसे? वह 200% सीएम बनना चाहता था। मैंने पूछा क्या फॉर्मूला है सीएम बनने का? तो उन्होंने (केजरीवाल) बताया कि जब 90 सीटें आ जाएँगी तो हम फुल्का ग्रुप और भगवंत मान ग्रुप में फूट डलवाएँगे।”

इसके आगे कुमार विश्वास कहते हैं, “जब मैंने पूछा कि बनेगा कैसे सीएम तो उसने बोला- वहाँ जब नब्बे सीट आ जाएँगी तो उनको लगेगा कि फुल्का बनेगा तो दूसरी तरफ लगेगा कि भगवंत मान बनेगा। फिर तीन-चार दिन न्यूज चलेगी, झगड़ा होगा। फिर तू (विश्वास) चला जाना, आशुतोष चला जाएगा। तुम दोनों वहाँ जाकर केंद्र के पर्यवेक्षक के तौर पर विधायकों से बात करना और फिर ये कहना कि वो (विधायक) कह रहे हैं कि या तो अरविंद को बनाओ या फिर हमारे कैंडिडेट को बनाओ। मैं भारी मन से दिल्ली को छोड़ दूँगा और मनीष को दिल्ली सौंप के पंजाब चला जाऊँगा। मनीष को लोग पंसद भी कर रहे हैं। फिर धीरे-धीरे वहाँ जमा भी लेंगे।”

केजरीवाल की इस धूर्तता का खुलासा करते हुए विश्वास बताते हैं, “‘मैंने कहा कि ये होगा नहीं। वो बॉर्डर स्टेट है, केंद्र से तु्म्हारी बनती नहीं है वहाँ बहुत मुश्किलें होंगी। और जिन लोगों को तुम तुष्टिकरण कर सीएम बनना चाह रहे हो वो चरस बो देंगे जान की। बहुत बुरा हाल हो जाएगा। इसके बाद उसने कहा कि सर जी आप चुप रहो आपको शपथ ग्रहण में बुलाऊँगा और दोनों भाई साथ चलेंगे। मैंने कहा कि अच्छी बात है और मैं पंजाब नहीं गया।”

दिल्ली : अरविन्द केजरीवाल 10 परिवारों को हॉस्पिटल नहीं मिला, जवाब कौन देगा?

अरविंद केजरीवालदिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे। संक्रमितों के नंबर में इजाफे के साथ इससे निपटने को लेकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के दावे भी बढ़ रहे हैं। लेकिन, हकीकत में केजरीवाल सरकार कितनी तत्पर है और उसने अस्पतालों से लेकर तमाम स्वास्थ्य सुविधाओं की कैसी व्यवस्थाएँ की है, इसकी पोल सोशल मीडिया में लगातार खुल रहे हैं। ये दर्द उन लोगों का है जो गुहार लगाते रहे, लेकिन उन तक मदद नहीं पहुॅंची।
हालात ये है कि दिल्ली में कई मंत्रालयों सहित दिल्ली के एम्स के स्टाफ तक कोरोना वायरस का संक्रमण पहुँच गया है। ऐसे में आम आदमी को जाँच और इलाज को लेकर किस प्रकार की असुविधाएँ हो रही है, इसका अंदाजा सबसे पहले राधिका अग्रवाल के ट्वीट से लगाया जा सकता है।
"हम एक पहले से ही हारी लड़ाई लड़ रहे हैं शायद अब और कुछ भी अपडेट करने की जरुरत बाकी नहीं रह गयी है"
राधिका अग्रवाल नाम की महिला ने ट्विटर पर अपनी व्यथा के बारे में बताया है कि उनकी मामी कोरोना वायरस से संक्रमित थीं। उन्होंने और उनके परिवार ने टेस्टिंग और जरूरी मदद जुटानी चाही लेकिन दिल्ली के किसी भी अस्पताल से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। आखिर में उनकी मामी चल बसी।
ट्विटर पर राधिका अग्रवाल 
दिल्ली में रहने वाली मेरी मामी और उनके परिवार में कुछ लोगों को 2 जून के तीन दिन पहले से ही कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे थे। उनका पूरा परिवार अपने फैमिली डॉक्टर की सलाह पर टेस्टिंग कराने के लिए खेत्रपाल अस्पताल (Khetarpal Hospital) गया, जहाँ बहुत बहस के बाद अस्पताल बस मेरी मामी की टेस्टिंग के लिए तैयार हुआ। जबकि पूरे परिवार में सभी को लक्षण दिख रहे थे।
लेकिन किसी की भी न ही टेस्टिंग की गई न ही उन्हें एडमिट किया गया। दुर्भाग्य से मेरी मामी की उसी दिन घर पर ही रात 11 बजे मौत हो गई। 43 घंटे बाद बृहस्पतिवार की सुबह 10 बजे उनके कोरोना वायरस जाँच का नतीजा पॉजिटिव आया।
अब उनके 15 सदस्यों के परिवार में, जिसमें 2 लोग 80 से ऊपर की उम्र और दो लोग 20 साल से कम उम्र के हैं, हर हेल्पलाइन पर कॉल करे रहे हैं, पुलिस से मदद माँग रहे हैं। वो कई हॉस्पिटल भी जा चुके हैं ताकि उन्हें स्वास्थ्य सुविधा मिल पाए। लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली है और सारे प्रयास व्यर्थ सिद्ध हुए। यहाँ तक कि उनके इलाके को भी अभी तक कंटेन नहीं किया गया है। मैं ट्विटर पर मदद माँग रही हूँ, क्योंकि सभी अथॉरिटीज़ ने ‘हॉस्पिटल भरे हुए हैं’ कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं।

इस ट्वीट के बाद राधिका अग्रवाल ने एक और ट्वीट में बताया कि शाहदरा के विधायक रामनिवास गोयल ने उनसे संपर्क किया है और उत्तम नगर के विधायक नरेश बलियान ने भी उनसे बात की है। राधिका ने लिखा है कि परिवार के सभी लोगों की शुक्रवार तक जाँच कराने का भरोसा दिलाया है।
राधिका अग्रवाल के इस ट्वीट को कुमार विश्वास ने भी रीट्वीट करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए लिखा है कि अब दिल्ली वालों को अपनी मदद खुद करनी होगी और अपना ख्याल खुद रहना होगा।
कुमार विश्वास ने केजरीवाल सरकार द्वारा अखबारों और टीवी पर दिए गए विज्ञापनों को निशाना बनाते हुए अपने ट्वीट में लिखा;
यह तार (Thread) धूरतेश्वर द्वारा चैनलों-अख़बारों को दिए करोड़ों रुपए वाले थोबड़ा-दिखाऊ विज्ञापनों के पीछे छिपी उसकी निकम्मी असलियत को ‘तार-तार’ करता है ! दिल्ली के नागरिकों से प्रार्थना है कि स्वयं ही अपना खूब ख़्याल रखें।

राधिका अग्रवाल ने इस थ्रेड में एक नई जानकारी जोड़ते हुए लिखा है –
और भी परेशान करने वाली खबर- विधायक (शाहदरा) ने उन्हें सीधे दीनदयाल अस्पताल जाने के लिए पास दिया और वहाँ 5 सदस्यों का परीक्षण किया। सभी 4 सदस्य और मेरे मामा वहाँ गए, एक घंटे तक कोरोना की जाँच के लिए इंतजार कर रहे थे और फिर उनसे कहा गया, ‘किट खतम हो गई, कल आना’।
अस्पताल में किट की कमी के चलते शाहदरा विधायक विधायक रामनिवास गोयल द्वारा दिया गया आश्वासन भी राधिका के सम्बन्धियों के किसी काम नहीं आया है।
दूसरे ट्वीट में राधिका ने अस्पताल प्रशासन के साथ अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा है,
“सरकार हमें रोजाना की 50 किट्स ही देती हैं, सो अब कल आना।’
‘कल क्या गारंटी है?’
‘अगर किट्स बची होंगी, तो हो जाएगा’
दोस्तों, हम एक ऐसी फैमिली के बारे में बात कर रहे हैं जिसने पहले ही एक सदस्य को कोरोना वायरस के कारण खो दिया है। मुझे लगता है कि हम एक पहले से ही हारी लड़ाई लड़ रहे हैं। शायद अब और कुछ भी अपडेट करने की जरूरत बाकी नहीं रह गई है।
संक्रमित पाए जाने पर भी सुध नहीं ली जा रही -- जैपलीन पसरीचा
दिल्ली सरकार और इसके मुख्यमंत्री केजरीवाल में से किसी ने भी राधिका अग्रवाल की इस दलील (या आरोप) पर कोई की प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस तरह की मुसीबत का सामना करने वालों में राधिका अकेली नहीं हैं, बल्कि जैपलीन पसरीचा ने भी ट्विटर पर इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे परिवार के कुछ सदस्यों की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव निकलने के बाद भी सरकार द्वारा कोई मदद नहीं की गई।
यही नहीं, पसरीचा ने कहा कि एक लैब ने उसे बताया कि उन्हें दिल्ली सरकार द्वारा सैंपल लेने से मना करने के भी निर्देश दिए गए हैं, और ऐसी अफवाहें थीं कि दिल्ली सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए संख्या नहीं बढ़ाना चाहती है जिस वजह से इस तरह के निर्देश दिए जा रहे हैं।
न टेस्ट होंगे, न मरीज बढ़ेंगे 
 लगता है कि यह सिर्फ एक आरोप नहीं बल्कि दिल्ली सरकार की नई गाइडलाइन का हिस्सा है, जिसमें अब COVID-19 के नमूनों की जाँच में ही कलाकारी दिखाई गई है। यानी इसके अनुसार, दिल्ली सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि अब सिर्फ उन्हीं लोगों का सैंपल लिया जाएगा, जिनमें कोरोना वायरस से संक्रमण के लक्षण दिखते हों।
ऐसे में एक नया सवाल यह उठता है कि जब उनकी सरकार अपनी बात कह पाने में सक्षम और प्रभावशाली लोगों तक को जवाब देना जरूरी नहीं समझती तो ऐसे में उन लोगों का क्या हाल होगा, जिनकी व्यथा को सामने आने तक का भी मौक़ा नहीं मिल पाया है।
हॉस्पिटल से लेकर हेल्पलाइन तक बेहाल 
ऐसा ही एक और केस ‘हफ़िंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट में वर्णित है। संयोगवश, खेत्रपाल अस्पताल दिल्ली सरकार द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची में नहीं है। हालाँकि, अपोलो और गंगाराम अस्पताल हैं, और इस रिपोर्ट के अनुसार 01 जून को उन्होंने मंदीप सिंह नाम के एक व्यक्ति के 67 वर्षीय ससुर को बेड देने से इनकार कर दिया।
अस्पतालों ने मंदीप सिंह से कहा कि उनके पास पर्याप्त बिस्तर नहीं है। हालाँकि, दिल्ली सरकार की वेबसाइट, 4 जून की तारीख के आँकड़ों से पता चलता है कि मंदीप सिंह द्वारा उल्लिखित सभी अस्पताल शायद भरे हुए थे।
दिल्ली सरकार द्वारा जारी खाली बेड की जानकारी का एक हिस्सा
इस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि ये जानने के बाद कि अस्पतालों की मदद अब उन्हें नहीं मिल सकती, किस प्रकार से थक हार कर आखिर में मंदीप सिंह ने जब दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन को कॉल किया और तो वह निरंतर व्यस्त बताती रही और उन्हें कोई भी जवाब नहीं मिला।
वर्तमान में, दिल्ली सरकार ने 8,512 बिस्तर सूचीबद्ध किए हैं, जिनमें से 5,183 बिस्तर खाली हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में कोरोना वायरस के 25,000 से अधिक मामले सामने आए हैं।
हॉस्पिटल में जगह न मिलने से गँवा दी जान 
अमरप्रीत ने ट्विटर पर जून 04 की सुबह 8:05 AM पर अपने पिता को हुए तेज बुखार का जिक्र करते हुए मदद माँगते हुए लिखा;
मेरे पिताजी को तेज बुखार हो रहा है। हमें उन्हें अस्पताल में शिफ्ट करने की आवश्यकता है। मैं LNJP दिल्ली के बाहर हूँ और वे उसे अंदर नहीं ले जा रहे हैं। उन्हें कोरोना, तेज बुखार और साँस लेने में समस्या हो रही है। वह मदद के बिना जीवित नहीं रहेंगे। कृपया  मदद करें।
अमरप्रीत ने इस ट्वीट में तिमारपुर के विधायक के साथ ही मनीष सिसोदिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी टैग किया था।
लेकिन दुर्भाग्यवश 9:08 AM पर अमरप्रीत ने एक और ट्वीट में बताया कि उनके पिता अब नहीं रहे। साथ ही उन्होंने लिखा कि हमारे परिवार की भी जाँच की जाए, लेकिन लैब ऐसा नहीं कर रही है। मेरी माँ, भाई, उनकी पत्नी और दो बच्चे। कृप्या मदद करें।
अमरप्रीत के ट्वीट के जवाब में उनकी मदद की जगह उनसे संवेदना व्यक्त करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। लेकिन वास्तविकता यही है कि उनसे सहानुभूति जताने के अलावा और कोई उपाय भी नहीं है और हर कोई किसी ना किसी तरह से पीड़ित और लाचार ही है।
पूरा परिवार संक्रमित, हॉस्पिटल ने भेज दिया वापस 
अमरप्रीत के इस ट्वीट में ही एक और युवक विनोद कुमार भी अपने मित्र के लिए मदद माँग रहे हैं। विनोद कुमार ने लिखा है कि मयूर विहार में उनके मित्र और उनके पूरे परिवार में कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे हैं। वे अपनी जाँच के लिए यहाँ-वहाँ दौड़ रहे हैं, हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल उन्हें वापस भेज देते हैं।
4 जून को अशोक सिंह ने लिखा 
एक टैक्स पेयर नागरिक होने के बावजूद, मैं हेल्पलेस हूँ, अपने भविष्य को लेकर आशंकित हूँ, डरा हुआ, घबराया, चला गया हूँ। मैं नहीं जानता कि मेरा भविष्य क्या होगा? क्या मुझे इस तरह से बस निराशा में इन्तजार करना चाहिए? इस तरह से घर पर बैठकर इस जानलेवा वायरस की जाँच के बिना ही क्वारंटाइन रहना चाहिए? क्या ये मेरे परिवार के लिए भी सही है? क्या मेरी और अन्य इंसानों की जिन्दगी की कीमत बस इतनी ही है?

दिल्ली में रहने वालों के लिए निर्देश यही है कि तब तक घर पर बैठे रहें जब तक कि लक्षण दिखने शुरू नहीं हो जाते। मैं कोरोना वायरस से पीड़ितों के सम्पर्क में आने के बावजूद और संक्रमण के लक्षणों के बाद भी किसी तरह की मदद नहीं पा रहा हूँ। कोई अस्पताल या लैब मेरे सेम्पल की जाँच के लिए तैयार नहीं है। सरकार ने हमें घर पर बैठे रहने के लिए कहा है, क्या हम किसी महल में रह रहे हैं जिसमें एक व्यक्ति के लिए अलग से कमरा और वाशरूम की सुविधा हो?
संक्रमित भाई के लिए तलाशती रही हॉस्पिटल 
कोरोना वायरस से संक्रमित भाई के लिए प्लाज्मा थेरेपी की माँग कर रही काजल प्रजापति ने ट्विटर ने लिखा है, “हमें तत्काल ऐसे अस्पताल में एक सीट की आवश्यकता है, जहाँ मेरे भाई के लिए प्लाज्मा थेरेपी की जा सकती हो,  वह वर्तमान में गंभीर स्थिति में है और बत्रा अस्पताल में भर्ती है। जिन अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी की जाती है, उनमें से किसी में भी सीट उपलब्ध नहीं है।”
काजल ने इस ट्वीट में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी टैग किया है, लेकिन इसमें भी दिल्ली के मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
कहाँ व्यस्त है अरविन्द केजरीवाल 
इन सभी ट्वीट में और व्यक्तिगत तौर पर संपर्क करने पर मिली जानकारी से यही निष्कर्ष निकला है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की महामारी से लड़ने में अरविंद केजरीवाल और उनका पूरा तन्त्र असमर्थ तो है ही, साथ में वह स्वीकार करने को भी राजी नहीं हैं कि वास्तव में दिल्ली की जनता किस दुविधा में खुद को इतना असहाय और निराश महसूस कर रही है। ना ही उन्हें इन सभी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों से कोई फर्क पड़ता दिख रहा है।

दिल्ली सरकार की रोजाना बदलती गाइडलाइंस और सैंपल ना लेने की नीतियाँ यही साबित करती हैं कि उनके लिए जनता की जान से जायदा मीडिया मैनेजमेंट की चिंता है। मीडिया में अपनी व्यक्तिगत छवि के अलावा केजरीवाल को खासतौर से उस वर्ग की चिंता ज्यादा नजर आती है, जिसने उसे दिल्ली की सत्ता सौंपने के लिए पूरी मेहनत से प्रोपेगेंडा रचा, उसे गोद में बिठाया, और केजरीवाल की जीत के दिन कहा था कि अब दिल्ली हँस, खेल रही है।
अस्पतालों के चक्कर काट रहे लोग, संक्रमण के बावजूद घरों में असहाय बैठे लोग, जाँच से इनकार कर घर भेज दिए गए लोगों को नजरअंदाज कर केजरीवाल यही बेहतर समझते हैं कि ट्विटर पर सागरिका घोष को हेयर कटिंग की शुभकामना दे सकें। शायद उनकी आस्था और संवेदना बस इसी एक वर्ग तक सीमित भी हैं।
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दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2 मई, 2020 को ‘दिल्ली कोरोना’ एप लॉन्च किया। ...
दिल्ली की जनता को असहाय और लाचार छोड़कर केजरीवाल उन मीडियाकारों के सलून की चिंता में डूबे हैं, जिन्होंने उन्हें आज दिल्ली की सत्ता सौंपने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। आज वह लड़का खो गया, जिसने अपनी यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप केजरीवाल के राजनीतिक करियर के लिए दान दे दी थी। साथ ही वह सभी आशाएँ भी धूमिल हो चुकी हैं जो समाज ने केजरीवाल में परिवर्तन की चाह में देखी थी।

जामिया हिंसा: कुमार विश्वास ने AAP पर साधा निशाना

जामिया हिंसा: कुमार विश्वास ने AAP पर साधा निशाना- दिल्ली को आग में झोंकने वाले वक़्त तेरा हिसाब करेगाकवि कुमार विश्वास ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पुलिस-छात्र झड़प के लिए आम आदमी पार्टी पर हमला बोला है. कुमार विश्वास ने ट्वीट कर केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि सत्ता के लिए ये देश-सेना-जनता-सिद्धांत-बच्चे-दोस्त-माँ,बाप कुछ भी दांव पर लगा सकते है. साथ ही उन्होंने लिखा है "आदतन कमीनेपन को लागू करने के लिए फिर एक बार अपने उसी “अमानती गुंडे” का इस्तेमाल? नस-नस से वाक़िफ़ हूं बौने,पता है कि अपनी टुच्ची सी कुर्सी व सत्ता के लिए देश-सेना-जनता-सिद्धांत-बच्चे-दोस्त-मां,बाप कुछ भी दांव पर लगा सकता है! दिल्ली को आग में झोंकने वाले वक़्त तेरा हिसाब करेगा"

भाजपा ने भी रविवार को दक्षिणी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा के लिए आम आदमी पार्टी (आप) को जिम्मेदार ठहराया था और मांग की थी कि वह ‘लोगों को उकसाना' बंद करे. हालांकि, आप ने इससे इनकार किया था दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी ने एक ट्वीट में कहा था कि आप के एक विधायक जनता को ‘उकसा' रहे थे. उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘गद्दार'  बताया था. मनोज तिवारी ने लिखा था, ‘‘अरविंद केजरीवाल के इशारे पर आप का विधायक जनता को भड़का रहा है. भारत का मुसलमान भारत के साथ है, तुम जैसे गद्दारों की बातों में आने वाला नहीं. लोगों को उकसाना बंद करो. दिल्ली की जनता गद्दारों को सबक सिखाएगी. आप का पाप सामने आ रहा है.'' यद्यपि ओखला विधायक अमानतुल्ला खान उनके ऊपर लग रहे आरोपों को गलत बताया था.
दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में नागरिकता क़ानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हो गयी थी जिसके बाद जमकर राजनीतिक बयानवाजी तेज हो गयी है.