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नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की नसीहत की धज्जियां उड़ाईं

कांग्रेस में परिवार के विरुद्ध बोलने या चलने वाले को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू के सोनिया गाँधी की सलाह के विरुद्ध जाने पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर हर कोई हैरान है। 
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद के इस्तीफा देने और फिर नाटकीय तरीके से उसे वापस लेने वाले नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में किसी के काबू में नहीं आ रहे हैं। उन्होंने हाल ही में पार्टी की पूर्णकालिक ‘स्वयंभू’ अध्यक्ष बनीं सोनिया गांधी की नसीहतों की भी धज्जियां उड़ाकर रख दीं।

कांग्रेस के पुनरुद्धार का यह आखिरी मौका

सिद्धू ने मीडिया के जरिए संवाद न करने की सख्त चेतावनी को खुलेआम चैलेंज कर दिया। नवजोत ने सोनिया की सीख को दरकिनार करते हुए न सिर्फ पार्टी अध्यक्ष को चिठ्ठी भेजी, बल्कि इसे ट्वीटर पर साझा भी कर दिया। उन्होंने लगभग चेतावनी भरे लहजे में लिखा है कि पंजाब में कांग्रेस के पुनरुद्धार का यह आखिरी मौका है।

अमरिंदर सिंह के सियासी लड़ाई जारी है

यह पहला मौका नहीं है, जबकि सिद्धू ने नाफरमानी की हो। अपनी मर्जी के मालिक सिद्धू पहले भी ऐसा कर चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर की बात तो वह कई बार काट चुके हैं। अमरिंदर के काफी सियासी लड़ाई के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए सिद्धू कुछ समय बाद ही रूठ गए। हाईकमान को बगैर विश्वास में लिए उन्होंने अचानक अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे डाला। इससे खुद कांग्रेस का थिंक टैंक सकते में आ गया।

एक सप्ताह में ही उड़ा डालीं धज्जियां
काफी लम्बे समय के बाद हाल ही में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में सोनिया गांधी ने पार्टी में आंतरिक अनुशासन बनाने पर जोर दिया और पार्टी में मीडिया प्लेटफार्म के जरिए संवाद न करने की सख्त नसीहत दी। सिद्धू ने एक सप्ताह के अंदर ही इस नसीहत की धज्जियां उड़ा डालीं। सिद्धू ने सोनिया गांधी को भेजी चिठ्ठी जस की तस सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्वीटर पर साझा कर दी।

अब फिर बोला चन्नी सरकार पर हमला
सिद्धू ने अपने 13 सूत्री एजेंडे में फिर चरणजीत सिंह चन्नी सरकार पर हमला बोला है। सिद्धू ने आरोप लगाया कि चन्नी सरकार ने मंत्रिमंडल में पिछड़ी जातियों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अनुसूचित जाति का सीएम बनाने से कुछ नहीं होगा, अनुसूचित जाति को सरकार में बराबर का प्रतिनिधित्व भी मिलना चाहिए।

कैप्टन ने कहा था-सिद्धू स्थिर व्यक्ति नहीं है
सिद्धू को जानने वाले यह जानते हैं कि वह बड़बोले और विवादित व्यक्तित्व के है. विवादों से उनका गहरा नाता है. अपने बयानों, चुटकुलों और अजब-गजब कारनामों से सिद्धू हमेशा चर्चा के केंद्र में रहे हैं. या यह कहा जा सकता है कि सिद्धू चर्चा में रहने का गुर जानते हैं. सिद्धू के इस्तीफा देने पर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनपर हमला बोला था। कैप्टन ने ट्वीट कर कहा कि मैंने तुमसे कहा था…वह स्थिर व्यक्ति नहीं है और पंजाब के सीमावर्ती राज्य के लिए उपयुक्त नहीं है.

  • बयानवीर सिद्धू की फितरत है विवादों में रहना
    नवजोत सिंह सिद्धू 2004 में अमृतसर से लोकसभा पहुंचे थे. उन पर उस वक्त एक पुराना मुक़दमा चल रहा था।
  • उन्होंने कथित तौर पर पाटियाला गुरनाम सिंह को पार्किंग को लेकर हुए विवाद के दौरान पीटा। सिंह की अस्पताल में मौत हो गई।
  • इस मामले में 2006 में सिद्धू को हाईकोर्ट ने तीन साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी। सिद्धू को तब अमृतसर के सांसद पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा।
  • सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे अरुण जेटली ने सिद्धू की ओर से पैरवी की थी और सिद्धू को जमानत मिली थी।
  • 2016 में सिद्धू राज्य सभा के सांसद बनाए गए, लेकिन उन्होंने तीन महीने बाद इस्तीफ़ा दे दिया।
  • सिद्धू आम आदमी पार्टी का दामन थामने वाले थे, इस बीच 2017 के विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पूर्व कांग्रेस का दामन थाम लिया।
  • 2017 में कांग्रेस पंजाब में सत्ता में आयी और सिद्धू कैबिनेट मंत्री बने। कुछ महीनों के बाद उन्होंने अमृतसर के मेयर चुनाव पर नाराज़गी जाहिर कर दी।
  • 2018 में इमरान ख़ान पाक के प्रधानमंत्री बने। कैप्टन अमरिंदर ने सिद्धू से पाकिस्तान नहीं जाने की अपील की। लेकिन सिद्धू पाकिस्तान गए। यही नहीं पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से गले भी मिले।
  •  2019 में कैप्टन सिंह ने कैबिनेट में बदलाव करते हुए सिद्धू का मंत्रिमंडल बदल दिया। इसके विरोध में सिद्धू ने पदभार ग्रहण किए बिना इस्तीफ़ा दे दिया।
  •  सिद्धू ने कई मुद्दों पर सरकार की आलोचना की। इन मामलों को देखने के लिए आलाकमान ने एक समिति बनायी।
  • सिद्धू के कहने पर कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस्तीफा ले लिया।

हमने छठ पर भी संयम रखा, लेकिन दिल्ली को बार-बार बंधक बनाया जा रहा: राष्ट्रपति कोविंद को कपिल मिश्रा का पत्र

साल 2020 की शुरुआत से ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। पहले शाहीन बाग का प्रदर्शन, फिर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे, बाद में कोरोना की मार और अब किसान आंदोलन, दिल्ली की सड़कें यहाँ के निवासियों के लिए आए दिन असुविधा पैदा कर रही हैं।

ऐसे में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि दिल्लीवासियों को बार-बार बंधक बनाया जाना अब बंद हो और यहाँ की सड़कें खोली जाएँ।

कपिल मिश्रा के इस कदम का कहीं समर्थन कहीं विरोध :

भाजपा नेता ने इस पत्र को दिल्ली के लोगों की ओर से लिखने का दावा किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह अत्यंत असहाय होकर इस पत्र को एक आशा की किरण के रूप में लिख रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा है कि दिल्ली के निवासी देश की राजधानी के नागरिक होने के बावजूद अपने मूल अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। यहाँ बार-बार उनसे दफ्तर जाने, दुकान खोलने, इलाज के लिए अस्पताल जाने, जैसे साधारण अधिकार छीने जा रहे हैं। 

पत्र में कपिल मिश्रा ने दिल्ली की वास्तविक स्थिति पर गौर करवाते हुए कहा कि कोरोना महामारी से बचने के लिए दूरी बनाना और भीड़भाड़ को एकत्रित न होने देना बेहद जरूरी है, लेकिन यहाँ इसका सरेआम उल्लंघन चल रहा है।

उन्होंने लिखा कि दिल्ली में स्थिति पहली बार ऐसी नहीं हुई है, बल्कि यहाँ बार-बार ऐसा हो रहा है। साल की शुरुआत में दिल्ली को जगह-जगह शाहीन बाग आंदोलन के नाम पर बंधक बनाया गया और राजधानी में नफरत व हिंसा का माहौल बनाया गया। बाद में स्वंय उच्चतम न्यायालय ने भी इस प्रकार सड़कों को बंद करने को गैर कानूनी घोषित किया। लेकिन, अब पिछले दिनों से कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता दिल्ली को दोबारा बंधक बना रहे हैं, जिससे दिल्ली वासियों की बुनियादी जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

कपिल मिश्रा ने कोरोना महामारी में दिल्ली की स्थिति पर चिंता जाहिर की और राष्ट्रपति को बताया कि यहाँ लगातार सरकार व कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करके बुजुर्ग माता-पिता और छोटे-छोटे बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि दिल्ली वालों ने बहुत संयम का परिचय दे दिया। सरकारी निर्देशों को मानते हुए छठ के त्योहार तक को सार्वजनिक तौर पर नहीं मनाया। मगर, आज दिल्ली वालों को चारों ओर से बंद कर दिया गया है। शहर में बिना टेस्टिंग के भीड़ की इकट्ठा हो रही है और दिल्ली सरकार पोस्टर, बैनर, होर्डिंग लगाकर लोगों को दिल्ली में बुला रही है।

पत्र में उन्होंने कहा है कि दिल्ली वासियों का जीवन भी उतना ही महत्व रखता है, जितना अन्य राज्य के लोगों की जिंदगी। यहाँ के नागरिकों के मूल अधिकारों को भी अन्य राज्यों के लोगों की तरह संविधान का संरक्षण प्राप्त है। लिहाजा दिल्ली वासियों की जिंदगी को इस प्रकार मौत के मुँह में बार-बार फेंके जाने के ख़िलाफ ठोस व निर्णायक निर्णय लिए जाएँ। साथ ही राजनीति के लिए करोड़ों लोगों की जिंदगी से ख़िलवाड़ न किया जाए।

कड़वा सच : ये किसान नहीं दलालों का जमावड़ा है 

आये दिन हमेशा से सुनते आ रहे हैं कि हर प्रांत का किसान कर्जे से आत्महत्या कर लेता है। उसके लिए किसान को आंदोलन करना चाहिए था। और अब जो आंदोलन हो रहा है, उसमे तथाकथित किसानों की बात भी ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए, वह है "हम 6 महीने का राशन साथ लाए हैं।" यह इस बात को भी सिद्ध करती है कि किसान भूखा नहीं मर रहा था, दलालों की वजह से कर्जे में डूब कर आत्महत्या करने को विवश होता है।

निम्न दोनों ट्वीट बहुत कुछ किसानों की आर्थिक स्थिति को उजागर कर रहे हैं:-

लेकिन इस नये कानून पर इतनी हायतौबा विपक्षी दलों के बहकावे मे हो रही है। सबसे पहले और सबसे कीमती तो किसानों की जिंदगी है। कोई भी पार्टी हो और किसी भी राज्य की सरकार हो अगर गरीब किसान किसी राज्य मे दुखी होकर आत्महत्या कर रहा है तो सभी राज्यों की सरकारें गुनहगार हैं।

इसके लिए ये सब दल और नेता क्यों कभी कोई बड़ा आंदोलन नहीं करते? क्योंकि ऐसे मे सभी कटघरे मे खड़े होंगे।

लेकिन इस कृषि कानून पर सिर्फ राजनैतिक रोटियां सेकी जा रही है, अपने अपने एजेंडे के अनुरूप अगर आज सारी पार्टियों को इतनी चिंता और दर्द है किसानों का तो उनको कर्जे लेने की क्या जरूरत?

सब सरकारें किसानों को इतना सक्षम क्यों नहीं बनाती कि उनको कर्ज तले दबना न पड़े।

लेकिन आज इस कृषि क़ानून ने दलालों, बिचौलियों और किसानों के शोषको की दुखती रग पर हाथ रख दिया जिससे किसान कर्जदार होता था। और ये हंगामा मचाने वाले यही चाहते हैं कि किसान उसी हाल मे रहे जैसा था मेहनत वो करे मलाई ये लोग खायें ।

ये किसानों के हमदर्द नहीं सब अपने स्वार्थों के लिए हंगामा कर रहे हैं और सरल भाषा में कहा जाए तो किसानों को बरगला रहे हैं ।

पोस्ट मार्टम तथाकथित किसान आंदोलन का

1― बीज खरीदने के लिए सब्सिडी।

2― कृषि उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी

3― यूरिया (खाद) खरीदने के लिए सब्सिडी

4― ट्रेक्टर ट्रोली खरीदने पर सब्सिडी

5― पशुधन खरीदने पर सब्सिडी

6― खेती पर लगने वाले अन्य खर्च के लिए सब्सिडी युक्त कर्ज

7― किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज

8― जैविक खेती करने पर सब्सिडी

9― खेत में डिग्गी बनाने हेतू सब्सिडी

10― फसल प्रदर्शन हेतू सब्सिडी

11― फसल का बीमा

12― सिंचाई पाईप लाईन हेतू सब्सिडी

13― स्वचालित कृषि पद्धति अपनाने वाले किसानों को सब्सिडी

14― जैव उर्वरक खरीदने पर सब्सिडी

15― नई तरह की खेती करने वालो को फ्री प्रशिक्षण

16― कृषि विषय पर पढ़ने वाले बच्चों को अनुदान

17― सोलर एनर्जी के लिए सब्सिडी

18― बागवानी के लिए सब्सिडी

19― पंप चलाने हेतु डीजल में सब्सिडी

20― खेतो में बिजली उपयोग पर सब्सिडी

इसके अलावा

21― सूखा आए तो मुआवजा।

22― बाढ़ आए तो मुआवजा।

23― टिड्डी-कीट जैसे आपदा पर मुआवजा।

24― सरकार बदलते ही सभी तरह के कर्ज माफी।

25― सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए अनेकों और तरह की योजनाएं बनाई है, जिसमें डेयरी उत्पाद मत्स्य पालन बागवानी फल व सब्जी पर भी अनेकों प्रकार की सब्सिडी दे रही है।

और इसके अलावा

26― इन्हीं से 20 रुपए किलो गेहूं खरीद कर 2 रुपए किलो में इन्हें दिया जा रहा है।

27― पक्के मकान बनाने के लिए 3 लाख रुपए तक सब्सिडी दी जा रही है।

28― शौचालय निर्माण फ्री में किया जा रहा है।

29― घर पर गंदा पानी की निकासी के लिए होद फ्री में बनवाई जा रही है।

30― साफ पीने का पानी फ्री में दिया जा रहा है।

31― बच्चों को पढ़ने खेलने व अन्य तरह के प्रशिक्षण फ्री में करवाए जा रहे हैं।

32― साल के 6000 रुपए खाते में फ्री में आ रहे हैं।

33― तरह-तरह की पेंशन वगैरा आ रही है।

34― मनरेगा में बिना कार्य किए रुपए दिए जा रहे हैं।

अगर उसके बावजूद भी इस देश के किसानों को सरकार से अपना हक नहीं मिल रहा तो शायद कभी नहीं मिलेगा।

एक निगाह उन मजदूरों, छोटे रेहड़ी वालों, छोटे व्यवसायियों, वकीलों, पढ़े-लिखे बेरोजगारों, ड्राईवरों, कचरा बीन कर पेट पालने वालों पर डालो।

रोज नई नई समस्या से जूझते हैं, रोज रोज मरते हैं परन्तु कभी भीड़ इकट्ठी कर देश के कानून को बंधक नहीं बनाते हैं।

किसान नित अपनी कमजोरी के लिए दूसरों पर आश्रित नहीं होते अपनी कमजोरी का रोना रोकर दूसरों के हक नहीं लेते देश की सरकारों से ब्लैकमेलिंग नहीं करते।

सबसे अधिक गेहूँ कहाँ उगता है ? - पंजाब में । 

सबसे अधिक गेहूं कौन खरीदता है ? - FCI 

FCI किससे खरीदता है ? - बड़े बड़े आड़तियों से । 

पंजाब की सबसे बड़ी आड़ती कंपनी कौन है ? - सुखविंदर एग्रो  

सुखविंदर एग्रो किसकी कंपनी है ?- हरप्रीत बादल की। 

सबसे अधिक गेहूं कहाँ सड़ता है ?- FCI के गोडाउन में ।

सड़ा हुआ गेहूं कहाँ काम आता है ? - सड़ा हुआ गेहूँ शराब बनाने में काम आता है । 

सड़ा गेहूँ कौन बेचता है और वह भी सबसे कम दाम पर ? - FCI बेचता है ।

सबसे अधिक शराब की खपत कहाँ होती है ? - पंजाब में । 

हमेशा "खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय" किसके पास रहता है ? - हरप्रीत बादल के पास रहता है। 

किसान प्रदर्शन : अमरिंदर सिंह, केजरीवाल और अकाली दल में तू-तू मैं-मैं, भुगत रहे दिल्लीवासी

कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने पंजाब चुनाव में किसानों को अपनी ओर आकर्षित करने उस आग को हवा दे दी है, जिसकी तपिश से ये ही तीनों पार्टियां बिलबिला रही हैं। देश के प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान होने पर इन तीनों में से किसी एक ने अभी तक न विरोध किया और न ही अपना प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष समर्थन वापस लेने का प्रयास तक नहीं किया। जिस कारण जनता में रोष जड़ कर रहा है, इंदिरा गाँधी और नरेंद्र मोदी दोनों ही भारत के प्रधानमंत्री हैं। और ये सत्ता के भूखे अपनी कुर्सी की खातिर प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने वालों के खड़े हैं। लानत है ऐसी ओछी राजनीती और ओछी राजनीती करने वालों पर, जो अपनी तत्कालीन और वर्तमान प्रमाणमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने वालों के साथ खड़े हैं। देश जानना चाहता है कि जो पार्टी अथवा नेता अपने प्रधानमंत्री के नहीं हो सकते, क्या जनता के हो सकते हैं? अगर थोड़ी भी नैतिकता है, तुरन्त अपना समर्थन वापस लें, आपस में चाहे कुछ भी करो, लेकिन प्रधानमंत्रियों की हत्या का गुणगान करने और उसे समर्थन देने वालों को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।     
नए कृषि कानून को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल सियासी दंगल में कूद पड़े हैं। तीनों दल 2022 में होने वाले पंजाब चुनाव को लेगर एक दूसरे के खिलाफ दांव-पेंच लगा रहे हैं। इनके बीच किसानों का सबसे बड़ा हितैषी और दुश्मन साबित करने की होड़ मची हुई है। लेकिन इन तीनों के सियासी कुश्ती का खामियाजा किसान, दिल्लीवासी और दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।

मोहरा बने किसान और फंस गयी दिल्ली 

ये तीनों दल किसानों को मोहरा बना कर ठंड में सड़कों पर बैठा दिया है। वहीं दिल्लीवासियों को बढ़ते कोरोना का सामना करना पड़ा रहा है। ऐसे में दिल्ली की घेराबंदी से जरूरी चीजों की कमी हो रही है। सब्जियों के दाम बढ़ने शुरू हो गए हैं। साथ ही दिल्ली आने वाले लोगों को जाम की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन तीनों दलों के सियासी तिकड़म का खामियाजा किसान और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

अपना उल्लू साधने में लगे देश-विरोधी 

इन तीनों दलों के सियासी दंगल का फायदा देश विरोधी ताकतें उठा रही हैं, जो किसानों की आड़ में अपना एजेंडा लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदी साफ देखी जा रही है। जो खुलेआम देश विरोधी नारे लगा रहे हैं। कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए लागू करने की मांग की जा रही है। यहां तक कि इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप भी देने की कोशिश की जा रही है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को ठोके जाने का गुणगान किया जा रहा है। 

ये अलग मुद्दा है कि वह किस पार्टी से थीं, असली मुद्दा है कि वह देश की प्रधानमंत्री थीं। और जिस प्रदर्शन में इंदिरा की हत्या का गुणगान किया जा रहा है, यही बात वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए लागु होती है, जिन्हे भी इंदिरा गाँधी की तरह ठोकने का गुणगान किया जा रहा है, उस प्रदर्शन को इन तीनों ही पार्टियों का समर्थन है। तीनों में से किसी भी पार्टी न इस गुणगान का विरोध किया और न ही अपना समर्थन वापस लिया। इसमें कोई शंका नहीं, इस प्रदर्शन पर इन तीनों पार्टियों की बजाए देश-द्रोहियों के कब्जे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जो इस प्रदर्शन से कहीं अधिक गंभीर मसला है। 

अमरिंदर, केजरीवाल और अकाली दल में हो गयी तू-तू मैं-मैं

नए कृषि सुधार कानून पर मचे घमासान के बीच किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच वार्ता का दौर जारी है। वहीं किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर और नोएडा बोर्डर पर जमे हुए हैं, जिससे दिल्ली आने-जाने वालों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच किसानों के प्रदर्शन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अकाली दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। 

दिल्ली और पंजाब मुख्यमंत्रियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू 

पंजाब के पदर्शनकारी किसानों के समर्थन में खड़ी आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला बोला है। अमरिंदर सिंह के परिवार पर ईडी का केस चलने की बात करते हुए केरीवाल ने सवाल किया है कि वह किसके दबाव में दिल्ली सरकार पर केंद्र सरकार के कानूनों को लागू करने का झूठा आरोप लगा रहे हैं, जबकि खुद कैप्टन ने कानून रोकने के कई मौके गवांए हैं।

ओछी राजनीती कर रहे हैं अमरिंदर सिंह --केजरीवाल 

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कानूनी प्रावधान जानने के बावजूद पंजाब के मुख्यमंत्री ने उन पर आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने काले कानून पास कर दिए। इस नाजुक मौके पर भी इस तरह की गिरी हुई राजनीति कैप्टन साहब कैसे कर सकते हैं? केजरीवाल ने सवाल किया कि कैप्टन साहब, आज आपके ऊपर किसका दबाव है, जो झूठे आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी की बोली बोल रहे हो? बीजेपी के साथ यह दोस्ती निभा रहे हो या कोई दबाव है? 

कमेटी में क्यों नहीं रोका गया --केजरीवाल 

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कैप्टन साहब के पास यह बिल रोकने के कई मौके आए थे। आज से डेढ़ साल पहले 2019 में केंद्र सरकार ने यह तीनों काले कानून बनाने के लिए एक कमेटी बनाई थी। उस कमेटी में कौन था? उस कमेटी में कैप्टन साहब थे। उस कमेटी में इन काले कानूनों को क्यों नहीं रोका?

कमेटी में एक बार भी इन कानूनों का विरोध क्यों नहीं किया? बाहर आकर लोगों को क्यों नहीं बताया कि केंद्र सरकार इतने खतरनाक कानून बनाने जा रही हैं। केजरीवाल ने कहा कि कैप्टन के पास एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, इतने सारे मौके आए, जब आप इन बिल को रोक सकते थे। आज पंजाब का किसान आपसे पूछ रहा है कि आपने यह बिल क्यों नहीं रोके?

अमरिंदर सिंह का केजरीवाल पर पलटवार 

केजरीवाल के हमले से आगबबूला हुए अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि वो किसानों के बड़े मुद्दे पर छोटी सियासत कर रहे हैं।कैप्टन ने कहा कि केजरीवाल किसान के हितों की रक्षा करने में असफल रहे हैं और इसे छिपाने के लिए निम्न दर्जे की बेतुकी भाषा बोल रहे हैं। कैप्टन ने सवाल किया कि आप पंजाब की तरह अपने राज्य की विधानसभा में कानून पास कर केंद्र के खिलाफ रुख क्यों नहीं अपनाते हैं।

दोहरे मापदंड अपनाते हैं केजरीवाल --अमरिंदर सिंह 

कैप्टन ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि आप नेता खतरनाक कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ने की कोशिश भी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कानूनों को चुपचाप नोटिफाई करने के बजाय केजरीवाल को इन कानूनों को बेअसर करने की कुछ कोशिशें करनी चाहिए थीं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केजरीवाल के दोहरे मापदंड बार-बार सामने आ रहे हैं। अब इस मुद्दे पर वे पूरी तरह घिर गए हैं।

केजरीवाल एक डरपोक आदमी --अमरिंदर सिंह 

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘डरकर केंद्रीय कानूनों की अधिसूचना जारी करने के बजाय केजरीवाल उनका मुकाबला करने के लिए कोशिश कर सकते थे और किसानों के अधिकारों की रक्षा कर सकते थे।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट हो गया है कि यह ‘डरपोक व्यक्ति’, जिसका दोहरा मापदंड बार-बार बेनकाब हो गया, अब इस मुद्दे पर पूरी तरह घिर गया है।

अकाली दल का केजरीवाल और अमरिंदर सिंह पर हमला 

अरविंद केजरीवाल और अमरिंदर सिंह के बीच चल रही जुबानी जंग में अकाली दल भी कूद पड़ा है। अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। अकाली दल ने कहा कि दोनों मुख्यमंत्री किसानों के मामले में सियासत कर रहे हैं और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। 

केजरीवाल ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा --बादल 

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कृषि कानूनों को लागू करके किसानों की पीठ में छूरा घोंपने का आरोप लगाया। बादल ने एक बयान में कहा, ‘‘यह हद दर्जे की राजनीतिक बेईमानी ही नहीं अपितु सरल हृदय वाले और विश्वास रखने वाले किसानों के साथ अमानवीय विश्वासघात है।’’ उन्होंने कहा कि वह और किसान यह जानकर स्तब्ध हैं कि केजरीवाल ‘किसान विरोधी’ कानूनों को लागू भी कर चुके हैं और उन्होंने इस संबंध में गजट अधिसूचना भी जारी कर दी।

केजरीवाल के घड़ियाली आंसू -- बादल 

सुखबीर सिंह बादल ने केजरीवाल पर हमला करते हुए किसानों के मामले में घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘‘ यहां तक घड़ियाल को भी केजरीवाल से एक या दो बातें सीखने होगी कि नकली आंसू कैसे बहाये जाएं। वाकई, घडि़याली आंसू के बारे में कहावत बदलकर केजरीवाल के आंसू करना होगा।’’

हरसिमत कौर का अमरिंदर पर निशाना 

अकाली दल की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने ट्वीट करके हमला किया है कि जब अध्यादेश पास किया गया तब कैप्टन एक इंच भी नहीं हिले और न ही जब किसान रेल की पटरियों पर बैठे तब और न ही उस समय जब किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस छोड़े गए। वे ठंड में दिल्ली की सड़कों पर बहादुरी से डटे हैं। लेकिन गृह मंत्री उन्हें बुलाते हैं तो वह दौड़कर जाते हैं। लेकिन मिलियन डॉलर का सवाल कि यह किसके हित के लिए है।

कांग्रेस, आप और अकाली दल की लड़ाई में फंस गयी दिल्ली 

नए कृषि कानून को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल सियासी दंगल में कूद पड़े हैं। तीनों दल 2022 में होने वाले पंजाब चुनाव को लेगर एक दूसरे के खिलाफ दांव-पेंच लगा रहे हैं। इनके बीच किसानों का सबसे बड़ा हितैषी और दुश्मन साबित करने की होड़ मची हुई है। लेकिन इन तीनों के सियासी कुश्ती का खामियाजा किसान, दिल्लीवासी और दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।

पंजाब जहरीली शराब कांड: अमरिंदर ने केजरीवाल से कहा- Mind your own business

पंजाब जहरीली शराब कांड
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने रविवार (2 अगस्त, 2020) को राज्य में जहरीली शराब त्रासदी के मामले में सीबीआई जाँच की माँग करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने काम से काम रखना चाहिए। जहरीली शराब कांड में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए अमरिंदर सिंह ने एक बयान में आरोप लगाया कि, इतने सारे लोग मारे गए हैं और अरविंद केजरीवाल को इस घटना से राजनीतिक मुद्दा बनाने में दिलचस्पी है।
कुछ लोगों को किसी के फटे में टांग फंसाने की आदत होती है, और केजरीवाल इस आदत से मजबूर है। फिर चाहे जनता उनकी जितनी भी खिचाई कर ले, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। दिल्ली संभल नहीं रही, मुफ्त की रेवड़ियां लेकर मूर्ख ऐसे आदमी को सत्ता दे रहे हैं, जो मजहब देखकर काम करता है। दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे के बचाने में लगे हुए हैं, उन दोषियों पर कानूनी कार्यवाही में रुकावटें डाली जा रही हैं और चले हैं, दूसरों को चले हैं सीबीआई जाँच की सलाह देने।  

आम आदमी पार्टी पंजाब की प्रमुख विपक्षी पार्टी है। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि इस मामले में बिना देरी किए वे जल्द से जल्द इसकी जाँच करवाएँगे। वह उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ जल्द कड़ी कार्रवाई चाहते हैं, जिनके लालच के कारण राज्य में 100 के करीब जान गई हैं।
केजरीवाल ने रविवार(2 अगस्त, 2020) को ट्वीट कर इस हादसे पर सीबीआई जाँच की माँग की थी। अब देखिए केजरीवाल ने कैप्टेन अमरिंदर को क्या ट्वीट किया, ट्विटर पर चढ़ा दी केजरीवाल की बारात, देखिये:

अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस द्वारा पिछले कुछ महीनों के दौरान अवैध शराब का कोई भी केस हल नहीं किया गया है।
अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जहरीले शराब कांड में मौत हो चुकी है।

इस त्रासदी में तरन तारन सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है। जहाँ 80 से ज्यादा लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया कि इस मामले में 30 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले में पाँच एफआईआर दर्ज किए गए हैं।
इसके अलावा, पुलिस, आबकारी और टैक्सेशन विभाग के 13 अधिकारियों को लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में आगे की जाँच की जा रही है।