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‘मर्यादा पुरुषोत्तम पैगंबर मुहम्मद’: जन्माष्टमी के कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री का ‘ज्ञान’, रामचरितमानस का भी अपमान कर चुके हैं राजद नेता

बिहार के शिक्षा मंत्री और राजद नेता चंद्रशेखर यादव विवादित बयानों के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं। अब उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद को मर्यादा पुरुषोत्तम बताया है। चंद्रशेखर ने कहा कि शैतानों की संख्या अधिक होने के बाद परमात्मा ने पैगंबर मुहम्मद को पैदा किया। चंद्रशेखर के इस बयान को भाजपा ने तुष्टीकरण करार दिया है।

‘राष्ट्रीय जनता दल (RJD)’ के विधायक और शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर बिहार के नालंदा जिले के हिलसा में जन्माष्टमी पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा, “जब शैतानियत बढ़ गई दुनिया में, ईमान खत्म हो गया, बेईमान और शैतान ज्यादा हो गए तो मध्य एशिया के इलाके में ईश्वर ने, प्रभु ने, परमात्मा ने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रोफेट मुहम्मद साहब को पैदा किया। ईमान लाने के लिए। इस्लाम ईमान वालों के लिए आया। इस्लाम बेइमानी और शैतानी के खिलाफ आया। मगर बेईमान भी खुद को मुस्लिम कहते हैं तो इसकी इजाजत खुदा नहीं देता है।”

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी हमलावर है। बिहार बीजेपी के मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कहा है कि चंद्रशेखर का यह बयान तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है। शिक्षा मंत्री ने पहले एक धार्मिक ग्रंथ को लेकर निंदनीय बयान दिया था। अब यह बयान भी समाज को बाँटने वाला है। RJD की यह परंपरा रही है। इस पार्टी ने इसी तरह से समाज को बाँटकर धर्म की राजनीति की है।

दानिश इकबाल ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री ने एक मजहब के वोट बैन के तुष्टीकरण के लिए इस तरह का बयान दिया है। उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। सभी धर्म शांति का संदेश देते हैं। बीजेपी सभी धर्मों का सम्मान करती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ऐसे शिक्षा मंत्री पर कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं भाजपा प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर दिमागी दोष के शिकार हो गए हैं। RJD ने हिंदुओं की है और न ही मुस्लिमों की। यह पार्टी एक परिवार की गुलाम हो कर रह गई है। ये लोग कभी हिंदुओं तो कभी मुस्लिमों और कभी रामायण तो कभी मुहम्मद के बारे में करते हैं। इनका काम लोगों को धर्म और जाति के आधार पर लोगों को लड़ाकर वोट लेने का है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।

रामचरितमानस पर दिया था विवादित बयान

चंद्रशेखर रामचरितमानस पर बयान देकर लंबे समय तक चर्चा में रहे थे। उनके बयान के चलते RJD और JDU की जमकर थू-थू हुई थी। दरअसल, 11 जनवरी, 2023 को चंद्रशेखर ने रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा था कि यह समाज में नफरत फैलानेवाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि दोहे में अधम का अर्थ नीच होता है जिसे उन्होंने जाति से जोड़ते हुए कहा कि इस दोहे के अनुसार नीच जाति अर्थात दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं था।
वहीं, 28 फरवरी, 2023 को दिए एक अन्य बयान में चंद्रशेखर ने कहा था, “मैं अपने पुराने बयान पर कायम हूँ। रामचरितमानस में जो भी कूड़ा-कचरा है, उसकी सफाई होनी चाहिए। अभी तो कुछ ही दोहों पर सवाल किया है, दर्जनों दोहे ऐसे हैं, जिसे बदलने की जरूरत है। मैं रामचरितमानस पर चुप रहने वाला नहीं हूँ। इसमें कई ऐसे दोहे हैं, जिस पर आगे भी सवाल उठाता रहूँगा।”

फ्रांस : हिजाब, नकाब के बाद एक और प्रतिबंध : मुस्लिम लड़कियाँ अबाया पहन कर नहीं जा सकेंगी स्कूल: सरकार ने लगाया बैन

                                                                                                                        साभार: GcShutter
फ्रांस की सरकार ने स्कूल में मुस्लिम लड़कियों के अबाया पहनने पर प्रतिबंध (France to ban muslim abaya dresses in schools) का ऐलान किया। इसको लेकर शिक्षा मंत्री गेब्रियल अट्टल ने रविवार (27 अगस्त, 2023) को कहा है कि किसी भी क्लास रूम में छात्रों को देखकर उनके धर्म की पहचान नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार अबाया पहनना फ्रांस के धर्म निरपेक्ष कानून का उल्लंघन है। फ्रांस में पहले से ही स्कूलों में हेडस्कार्फ और नकाब पहने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

फ्रांस के शिक्षा मंत्री गेब्रियल अट्टल ने टीवी चैनल टीएफ1 को एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा: “मैंने फैसला किया है कि अब स्कूलों में अबाया नहीं पहना जा सकता। जब आप किसी क्लास में जाते हैं तो छात्रों को देखने भर से उनके धर्म की पहचान नहीं होनी चाहिए।”

अट्टल ने यह भी कहा है कि स्कूल में मुस्लिम छात्राओं द्वारा पहने जाने वाले अबाया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। 4 सितंबर से देशभर में क्लास शुरू हो रहे हैं। इससे पहले ही नियम बनाकर स्कूल के प्रमुखों को इस बारे में जानकारी दे देंगे। अट्टल ने अबाया को धार्मिक पहचान बताते हुए कहा है कि इसे पहनने से फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष कानूनों का उल्लंघन होता है।

इससे पहले साल 2004 में फ्रांस सरकार ने स्कूलों की ‘यूनिफॉर्म’ को लेकर एक कानून बनाया था। इस कानून के तहत स्कूलों में ऐसे किसी भी प्रतीक चिह्न या कपड़े पहनने पर रोक लगा दी गई थी, जिससे छात्रों की धार्मिक पहचान का पता चलता हो। सीधे शब्दों में कहें तो फ्रांस ने स्कूलों में बड़े क्रॉस, यहूदी किप्पा या इस्लामी हेडस्कार्फ पहनने पर रोक लगा दी थी।

साल 2010 से फ्रांस में सार्वजनिक रूप से पूरे चेहरे पर नकाब पहनने पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके बाद भी मुस्लिम लड़कियाँ स्कूलों में अबाया पहनकर जाती थीं। इसलिए सरकार ने कदम उठाते हुए इस पर बैन का ऐलान किया।

अबाया मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली एक पोशाक है। आमतौर पर यह ढीला-ढाला सा और काले रंग का होता है। इसे सामान्य कपड़ों के ऊपर ही पहना जाता है। इसमें महिलाओं का शरीर कंधे से पैर तक ढका रहता है। केवल हाथ और पैर की उंगलियों सहित उनका सिर दिखाई देता है। ज्यादातर महिलाएँ अपने बालों को ढँकने के लिए इसके साथ स्कार्फ भी पहनती हैं। 

बिहार शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ही कर रहे बिहारी प्रतिभा का अपमान

आज भारत का गौरवशाली इतिहास बिहार के शिक्षा मंत्री, शायद अल्पशिक्षित, चंद्रशेखर यादव जैसे नेताओं के ही कारण धूमिल हुआ, जो अपनी कुर्सी की खातिर किसी भी नीचता पर जा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों बिहार के शिक्षा मंत्री की शिक्षा का प्रमाण मांगना चाहिए। 
बिहार प्राचीन काल से ज्ञान और विज्ञान का प्रकाश पूरी दुनिया में फैलाता रहा है। इस धरती के सपूत चाणक्य और महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को प्रभावित किया। आधुनिक समय में गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने कम सयम में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्तमान समय में फिजिक्स के प्रोफेसर एचसी वर्मा और सुपर-30 के संचालक व गणित के प्रोफेसर आनंद कुमार बिहारी प्रतिभा की पहचान हैं। उनके संस्थान से शिक्षित बच्चे काफी संख्या में आईआईटी में चयनित हो रहे हैं। वहीं देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा में बिहार के युवा अपना झंडा गाड़ रहे हैं। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव को बिहार की वर्तमान युवा पीढ़ी और उसकी योग्यता पर भरोसा नहीं है। उन्होंने बिहार के युवाओं के गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए अपमानजनक बयान दिया है। इससे बिहार के युवा और शिक्षक अभ्यर्थी खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं।

बिहार के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़

बिहार की नीतीश सरकार बिहार के युवाओं के भविष्य के साथ किस तरह खिलवाड़ कर रही है। इसका ताजा उदाहरण शिक्षक भर्ती नियमावली है। पहले तो सरकार ने नियमावली लाने में वक्त लिया। शिक्षक अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और दबाव के बाद जो नियमावली लाई गई, उसने अभ्यर्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। बीपीएससी के तहत फिर परीक्षा देने के लिए नियमावली में प्रावधान किया गया। इसका अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध किया। इसके बाद नियमावली में बार बार बदलाव कर उसे मजाक बना दिया। डोमिसाइल नीति लागू होने से स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए शिक्षक अभ्यर्थियों को प्रखंड कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा था। इसी बीच शिक्षक भर्ती नियमावली में संशोधन करते हुए डोमिसाइल की अनिवार्यता को ही खत्म कर दिया गया। इसे खत्म करने को लेकर शिक्षा मंत्री ने जो दलील दी, उसने पूरे बिहार के युवाओं की योग्यता पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि बिहार में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ाने वाले योग्य आवेदक कम हैं, इसलिए देश के टैलेंट को बिहार में शिक्षक बनने के लिए आमंत्रित किया गया है।

डोमिसाइल पर तेजस्वी के पुराने बयान हो रहे वायरल

शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बयान और डोमिसाइल नीति में बदलाव ने आग में घी डालने का काम किया है। शिक्षक अभ्यर्थियों में नई शिक्षक भर्ती नियमावली को लेकर पहले से काफी नाराजगी थी। इसी बीच नीतीश सरकार के ताजा फैसले ने उनके आक्रोश को और भड़का दिया है। पूरे बिहार में नए फैसले का विरोध हो रहा है। लोग तेजस्वी यादव को विधानसभा में दिए उनके पुराने बयान याद दिला रहे हैं। विपक्ष में रहने के दौरान उन्होंने डोमिसाइल लगाकर बिहारियों को नौकरी देने का वादा किया था। अब शिक्षक अभ्यर्थी सवाल कर कर रहे हैं कि बेरोजगारों का केंद्र बना है, तेजस्वी यादव ने डोमिसाइल की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि बिहार का पलायन भी रुकेगा और बिहार में बिहार के लोगों को रोजगार भी मिलेगा। लेकिन सरकार ने बिहार शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति हटाकर शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ घोर मजाक किया है।

आरजेडी के घोषणापत्र में बिहार के युवाओं को 85 प्रतिशत कोटा का वादा

यहां तक आरजेडी ने 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी के घोषणापत्र को अपना प्रण बताया था। मेनिफेस्टो में बिहार के बेरोजगार युवाओं के लिए 10 लाख नौकरी का वादा किया था। साथ ही अपने मेनिफेस्टो में बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने का भी वादा किया था। मेनिफेस्टो में कहा गया था कि तेजस्वी सरकार बनने के बाद बिहार में डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी जिसके अंतर्गत राज्य सरकार की नौकरियों में बिहार के युवाओं को 85 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाएगा। आरजेडी के इस प्रण पर बिहार के युवाओं ने भरोसा किया और आरजेडी के पक्ष में जमकर मतदान किया। हालांकि तेजस्वी यादव की सरकार नहीं बनी, लेकिन आरजेडी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद नीतीश कुमार के पलटी मारने से एक बार फिर बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी और तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम बने। बिहार में नीतीश और तेजस्वी के नेतृत्व में सरकार तो बदल गई, लेकिन शिक्षक अभ्यर्थियों का भविष्य नहीं बदला। तेजस्वी यादव ने डोमिसाइल नीति को खत्म कर बिहार के युवाओं के साथ धोखा दिया है।

 

बिहार के शिक्षा मंत्री की शैक्षणिक योग्यता की जांच की मांग

बिहार के युवाओं की योग्तता पर सवाल उठाने वाले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर पर हमला तेज हो गया है। जिस तरह शिक्षक भर्ती नियमावली में 13 दिन में 10 संशोधन किए गए हैं, उससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षा मंत्री की योग्यता पर भी सवाल उठने लगे हैं। आशंका जतायी जा रही है कि यह तो बस शुरुआत है। शिक्षक भर्ती होते होते लगभग 50 संशोधन हो जाएंगे। अब बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव की सबसे पहले डिग्री की जांच करने की मांग की जा रही है। क्योंकि उनके विवादित बयानों और उनके द्वारा किए गए ट्वीट में जो गलतियां पाई गईं है, उससे उनकी शैक्षणिक योग्यता पर संदेह होने लगा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा हॉल में परीक्षा देकर डिग्री हासिल की है या घर में या कहीं और परीक्षा का पेपर लेकर डिग्री लिया है। अब शिक्षा मंत्री पर शिक्षक अभ्यर्थियों और बिहार के युवाओं को अपमानित करने का आरोप लग रहा है।

शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के पुराने ट्वीट में गलतियों की भरमार

सोशल मीडिया में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के पुराने ट्वीट वायरल हो रहे हैं। लोग उनके ट्वीट में की गई गलतियां दिखा कर उनको आईना दिखा रहे हैं। उनके एक ट्वीट में गलतियों का अम्बार है। शिक्षा मंत्री ने फिरंगियों की जगह फिरंगीयों गलत लिखा। जुल्म की जगह जूल्म गलत लिखा। एकलव्य की संतान की जगह एकलव्य के संतान लिखा। जगदेव बाबू की संतान की जगह जगदेव बाबू के संतान लिखा। इनकी चुल्हें हिलाने की जगह चूलें हिलाना लिखा। एक ट्वीट में पांच गलती देखकर क्या कोई इनको हिन्दी का शिक्षक बना जा सकता है ? इस तरह शिक्षा मंत्री ने बिहार पर उंगली उठाकर बड़ी गलती कर दी है। अब लोग नीतीश कुमार और तेजस्वी से सवाल कर रहे हैं कि ऐसे शिक्षा मंत्री से क्या बिहार की शिक्षा व्यवस्था का भला हो सकता है ?

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर का इंडिया गेट पर ज्ञान देखकर दंग रह जाएंगे, आइए देखते हैं किस  व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से शिक्षा लेते हैं….

बिहार के शिक्षा मंत्री और आरजेडी विधायक चंद्रशेखर यादव के रामचरितमानस पर दिए विवादास्पद बयान से पूरे देश में बवाल मचा हुआ था। इस बीच बिहार के शिक्षा मंत्री के पुराने बयान भी सामने आने लगे हैं, जो काफी हैरान करने वाले हैं। जातिवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से अंधे हो चुके शिक्षा मंत्री ने दिल्ली के इंडिया गेट पर जो ज्ञान दिया है, उससे उनकी शिक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। 

इंडिया गेट पर बिहार के शिक्षा मंत्री का फर्जी ज्ञान

दरअसल, चंद्रशेखर यादव का एक पुराना ट्वीट सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने इंडिया गेट पर अंकित शहीद सैनिक के आंकड़े को जाति और धर्म में बांटकर पेश किया है। यह आंकड़ा पूरी तरह फर्जी है। 20 अप्रैल, 2020 में किए गए ट्वीट में उन्होंने लिखा, “संघियों एवं मनुवादियों का देश में योगदान की क्रोनोलॉजी–इंडिया गेट दिल्ली के शिलापट पर फिरंगियों के खिलाफ जंग में आहूति देने वाले 95395 (पंचानवे हजार तीन सौ पंचानवे) अमर शहीदों में- मुसलमान-61395, सिख-8050, पिछड़े-14480, दलित-10777, सवर्ण 598, संघी-00(शून्य)- मनुवादी संघियो को ढूंढें ?”

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से ज्ञान अर्जित करते हैं बिहार के शिक्षा मंत्री

चंद्रशेखर यादव के इस ट्वीट को देखकर लगता है कि वे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के शिक्षा मंत्री और उनके ज्ञान का प्रमुख स्रोत सोशल मीडिया है। चंद्रशेखर यादव ने अपने ट्विटर हैंडल से जो ज्ञान दिया है, दरअसल वो जुलाई 2019 में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुंबई के चांदीवली इलाक़े में 13 जुलाई, 2019 को एक भाषण दिया था जिसके कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए थे। ओवैसी ने रैली में दावा किया था कि इंडिया गेट पर 95,300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत मुसलमान है।

इंडिया गेट पर पर 13,516 भारतीय सैनिकों के नाम

इंडिया गेट एक वॉर मेमोरियल है। इसका निर्माण उन भारतीय सैनिकों की स्मृति में किया गया था जो ब्रिटिश सेना में भर्ती होकर पहले विश्व युद्ध और तीसरे अफगान युद्ध में शहीद हुए थे। दिल्ली में स्थित ‘इंडिया गेट’ साल 1931 में बनकर तैयार हो गया था। यानी भारत की आज़ादी से क़रीब 16 साल पहले। 42 मीटर ऊंचा इस स्मारक को अंग्रेज़ों के शासन के दौरान 1914 से 1919 के बीच ब्रिटिश आर्मी के लिए लड़ते हुए मारे गए भारतीयों की याद में बनाया गया था जिसे पहले ‘ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल’ कहा जाता था। दिल्ली सरकार की वेबसाइट के अनुसार इस स्मारक पर 13,516 भारतीय सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं। इनमें 1919 के अफ़गान युद्ध में मारे गए भारतीय सौनिकों के नाम भी शामिल हैं।  

शिक्षा मंत्री को इस्लाम में मोहब्बत और रामचरितमानस में नफरत दिखाई देती है

इससे पहले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो मोहब्बत का पाठ पढ़ाते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो में चंद्रशेखर यादव को कहते सुना जा सकता है, ‘मोहब्बत और ईमान का पैगाम देने वाला ‘अकेला’ इस्लाम है।’ चंद्रशेखर यादव ने यह बयान मधेपुरा में ईद-उल-फितर 2022 के मौके पर ईद-मिलन के कार्यक्रम में दिया था। शिक्षा मंत्री को इस्लाम में मोहब्बत दिखाई दे रहा है और रामचरितमानस नफरत फैलाने वाली किताब दिखाई देती है। दरअसल चंद्रशेखर यादव ने आरजेडी के मुस्लिम तुष्टिकरण वाली राजनीति के एजेंडे के तहत मुसलमानों को खुश करने के लिए यह बयान दिया था।

 

शिक्षा मंत्री का अंतरराष्ट्रीय ज्ञान देखकर दंग रह जाएंगे

एक अन्य ट्वीट में चंद्रशेखर यादव तुष्टिकरण में अपना अंतरराष्ट्रीय ज्ञान भी प्रदर्शित करते हुए नजर आते हैं। उन्होंने लिखा कि सदियों से वंचितों, बेवसों और गरीबों के रहनुमाओं को अपनी जान से धोना पड़ा है हाथ। सुकरात को जहर और यीशू को चढ़ाया सूली। अंबेडकर एवं लोहिया की हुई साजिशन हत्या, महात्मा फुले, पेरियार, जननायक कर्पूरी को गाली और शहीद जगदेव को गोली। आज उसी रक्तरंजित इतिहास को दोहराते हुए लालू जी को जेल में ही जान मारने की हो रही है तैयारी।

बि​हार के शिक्षा मंत्री पर भड़के परमहंस आचार्य : जीभ काटने वाले को 10 करोड़ रुपए का पुरस्कार

                                बिहार के शिक्षा मंत्री पर भड़के जगद्गुरु परमहंस आचार्य (फोटो साभार: न्यूज 18)
रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला बताकर बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर चौतरफा घिर गए हैं। बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताया है। वहीं अयोध्या के महंत जगतगुरु परमहंस आचार्य ने चंद्रशेखर के जीभ काट कर लाने वाले को 10 करोड़ रुपए देने की बात कही है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा है, “बिहार के शिक्षा मंत्री कहते हैं कि रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रन्थ है। कुछ दिन पहले जगदानंद सिंह ने राम जन्मभूमि को ‘नफरत की जमीन’ बताया था। यह संयोग नहीं यह वोट बैंक का उद्योग है। हिंदू आस्था पर करो चोट ताकि मिले वोट। SIMI और PFI की पैरवी की। हिंदू आस्था पर चोट क्या कार्यवाही होगी?”

पूनावाला ने कहा है, “यह संयोग नहीं, वोट बैंक का सबसे घिनौना उद्योग है। कुछ दिन पहले राजद के बिहार अध्यक्ष ने राम जन्मभूमि को नफरत की जमीन बताया था। प्रभु श्रीराम को लेकर टिप्पणियाँ की थी। अब उन्हीं की देखादेखी बिहार के शिक्षा मंत्री और राजद नेता कहते हैं कि रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। ये वही राजद है जिसे SIMI और PFI में कोई आतंकवादी नजर नहीं आता। ये वही इको सिस्टम है जो बार-बार हिन्दू आस्था पर चोट करता है। राजद नेता बार-बार हिन्दुओं का अपमान करते हैं। क्या राजद के नेता हालिया बयान पर माफी माँगेंगे।”

वहीं अयोध्या के महंत जगतगुरु परमहंस आचार्य ने चंद्रशेखर के बयान पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा है कि बिहार के शिक्षा मंत्री का बयान सनातनियों का घोर अपमान है। मैं माँग करता हूँ कि शिक्षा मंत्री को एक सप्ताह के अंदर उनके पद से हटाया जाए और उन्हें माफी माँगनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो मैं फिर बिहार के शिक्षा मंत्री का जीभ काट कर लाने वाले को 10 करोड़ रुपए का पुरस्कार दूँगा। साथ ही उन्होंने कहा कि रामचरितमानस तोड़ने वाला नहीं, जोड़ने वाला ग्रंथ है।

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बिहार : 'तुलसीदास रचित रामचरितमानस’ पर विष फ़ैलाने वाले ठोंगी हिन्दू चंद्रशेखर का परिवार सहित स

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बिहार : 'तुलसीदास रचित रामचरितमानस’ पर विष फ़ैलाने वाले ठोंगी हिन्दू चंद्रशेखर का परिवार सहित स

उल्लेखनीय है कि ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बता दिया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। संबोधन के बाद मीडिया के सामने भी बिहार के शिक्षा मंत्री अपने बयान पर कायम नजर आए थे।

असम : नवंबर से राज्य के सभी सरकारी मदरसे बंद, केवल धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा : हिमांत विश्व शर्मा

हिमांत विश्व शर्माअसम के शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शिक्षा विभाग पर बोलने के दौरान मदरसों के प्रान्तीयकरण के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सरकार के मदरसे नवंबर से बंद हो रहे हैं, इसलिए नए मदरसों के प्रांतीयकरण करने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि अब से असम सरकार केवल धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देगी।
सरकार धार्मिक तर्ज पर चलने वाले किसी भी शैक्षणिक संस्थानों को संरक्षण नहीं देगी। शिक्षा मंत्री डॉ हिमांत विश्व शर्मा ने प्रदेश के सभी मदरसे और संस्कृत टोल (संस्कृत विद्यालय) को आगामी नवम्बर माह से बंद किया जा रहा है। साथ ही कहा कि अब और अरबी शिक्षकों की नियुक्ति की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी मदरसा पूर्व की तरह चल सकते हैं। सरकार निजी मदरसा में किसी भी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रदान करेगी क्योंकि, हम सदैव सेकुलर शिक्षा देने के पक्षधर हैं।
मंत्री ने पहले घोषणा की थी कि मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और संस्थानों के शिक्षाविदों को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को सौंप दिया जाएगा। संस्कृत के बारे में बात करते हुए शर्मा ने कहा कि संस्कृत सभी आधुनिक भाषाओं की जननी है। असम सरकार ने सभी संस्कृत टोल्स को कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत और प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय (नलबाड़ी में) के तहत लाने का फैसला किया है। वे एक नए रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा, “इस वैकल्पिक उपाय पर एक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।” 
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार राज्य में 150 नए हाई स्कूल स्थापित कर रही है। इसका निर्माण 2 अक्टूबर 2020 से शुरू होगा। इन स्कूलों में अप्रैल 2021 से कक्षाएँ शुरू होंगी। राज्य में पंद्रह सरकारी कॉलेज स्थापित किए जाएँगे, जिसमें नौ कॉलेज लड़कियों के लिए हैं। मंत्री ने कहा कि असम के विशाल चाय सम्पदा में काम करने वाले लोगों की मदद करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
फरवरी 2020 में, एक महत्वपूर्ण निर्णय में, असम सरकार ने घोषणा की थी कि सरकार सभी राज्य संचालित मदरसों और संस्कृत टोल्स को बंद कर रही है। शर्मा ने उस समय कहा था कि धार्मिक उद्देश्यों के लिए धार्मिक शास्त्र, अरबी और अन्य भाषाओं को पढ़ाना सरकार का काम नहीं है। मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि राज्य सरकार के अधीन सभी धार्मिक स्कूल बंद रहेंगे। मस्जिदों द्वारा संचालित मदरसा और गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित संस्कृत स्कूलों पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।