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बंगाल में TMC नेता के घर मिले 626 कारतूस-पिस्टल, ममता के गुंडों को पुलिस ने दबोचा: 1.07 रूपए करोड़ कैश भी बरामद

       TMC नेता ने खेत में दबा रखे थे ₹500 के नोटों से भरे बोरे, तृणमूल जिला परिषद सदस्य के घर से कैश बरामद
पश्चिम बंगाल में ममता के गुंडों और भ्रष्ट नेताओं का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि अब उनके घर शरीफों के रहने लायक नहीं, बल्कि बारूद के ढेर और अवैध संपत्तियों के गोदाम बन चुके हैं। TMC नेताओं के काले कारनामों का एक और खौफनाक सच सामने आया है। पुलिस ने भारी छापेमारी कर जिला परिषद के रसूखदार TMC नेता अजीत साहा और बडुरिया नगर पालिका के चेयरमैन दीपांकर भट्टाचार्य को दबोच लिया है।

शुभेंदु सरकार लगातार अपराधियों पर नकेल कसने का काम कर रही है। इसी कड़ी में तृणमूल कांग्रेस(TMC) के नेताओं के ठिकानों पर अकूत संपत्ति और नकदी मिलने का सिलसिला जारी है। किसी नेता के घर में मोटी रकम पकड़ी गई है तो किसी के फार्म हाउस से बोरों में भरा कैश बरामद किया गया है।

इनके पास से जो मिला, उसे देखकर पूरा बंगाल दहल गया है। TMC नेता अजीत साहा के घर जब पुलिस ने धावा बोला, तो वहाँ का नजारा किसी खूंखार अपराधी के ठिकाने जैसा था। घर के कोने-कोने से 27 लाख रुपए की गद्दी, 1 पिस्टल, 1 एयरगन और भारी मात्रा में 626 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।

इतना ही नहीं, गुंडागर्दी और अय्याशी के सबूत के तौर पर 52 बोतल विदेशी शराब भी जब्त की गई है। यह वही साहा बंधु हैं जिन पर पहले भी हिंसा और जबरन वसूली के संगीन आरोप लग चुके हैं। दूसरी तरफ, ममता के एक और खास नेता दीपांकर भट्टाचार्य के पास से 80 लाख रुपए कैश मिले।

और तो और, TMC दफ्तर के पास जूट के खेत को खोदकर नोटों से भरे बैग और बोरे निकाले गए। इन नेताओं ने बंगाल को पूरी तरह लूट और आतंक का केंद्र बना दिया है। 

खेत में दबा रखे थे 500 रूपए के नोटों से भरे बोरे, खोला तो निकले 2.2 करोड़ रुपए… छापेमारी के बाद गिरफ्तार

TMC नेता और बदुरिया नगर निगम के चेयरमैन दीपांकर भट्टाचार्य की अकूत संपत्ति का खुलासा हुआ है। बुधवार (28 मई 2026) को पुलिस ने उनके खेत की खुदाई में 500 रूपए के नोटों से भरे बोरे और ट्रॉली बैग बरामद किए। तस्वीर सामने आई जिसमें पुलिस कंधों पर इन बोरों को ढोकर अपने वाहन में रख रही है। पुलिस ने बताया कि इसकी कीमत लगभग 2 करोड़ 24 लाख रूपए है। इसके अलावा बोरों में कुछ जरूरी दस्तावेज भी मिले हैं।

पुलिस को यह कामयाबी उनकी गिरफ्तारी के बाद हासिल हुई। पुलिस ने मंगलवार (26 मई 2026) को भट्टाचार्य को 80 लाख रूपए नकदी और 4000 तिरपाल के साथ उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बताया कि इस रकम और सामान सरकारी था जो राहत के लिए लोगों में बाँटा जाना था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने TMC नेता को कोर्ट में पेश कर 6 दिन की रिमांड पर लिया।

TMC नेता भट्टाचार्य से पूछताछ में पुलिस को इस खेत की जानकारी मिली। तभी पुलिस अपने साथ भट्टाचार्य को खेत में ले आई, जहाँ जमीन के नीचे कैश से बरे बोरे बरामद किए गए। इसके अलावा पुलिस ने आसपास के खेतों में भी ड्रोन से तलाशी ली। इसके बाद पुलिस ने भट्टाचार्य के पीए शमीम गाजी को भी गिरफ्तार कर लिया।

उत्तर 24 परगना से TMC नेता और उसके भाई के घर से मोटी रकम मिली

इससे पहले उत्तर 24 परगना के मछलंदपुर में पुलिस ने राशन घोटाले के आरोप में जेल में बंद TMC सरकार में खाद्य मंत्री रहे ज्योतिप्रिय मल्लिक के करीबी TMC जिला परिषद सदस्य अजीत साहा के घर मंगलवार (26 मई 2026) को छापेमारी की। यहाँ पुलिस को 27,80,200 रूपए नकदी, 666 जिंदा कारतूस, 61 खाली कारतूस, एक एयर गन, छर्रों का डिब्बा, एक स्पोर्ट्स शूटिंग राइफल और विदेशी शराब की 52 बोतलें भी पुलिस ने जब्त की। पुलिस ने अजीत साहा और उनके भाई सुजीत उर्फ सुबीर साहा को भी गिरफ्तार किया।

बिहार : ‘लालू के जंगलराज’ का हो गया शंखनाद ; गाँ$ में बाँस कर देंगे, भूरा बाल साफ करो… भू का मतलब भूमिहार, रा का मतलब राजपूत और बा का मतलब ब्राह्मण तथा ल का मतलब लाला (कायस्थ)

              RJD की हरकतों से बिहार में जंगलराज का डर लौट आया है (फोटो साभार: Tejaswi Yadav/FB)
जिस तरह बिहार बंद के दौरान RJD नेता ने "जंगलराज" का शंखनाद किया है उसे राज्यपाल से लेकर चुनाव आयोग को ही गंभीरता से नहीं लेना चाहिए बल्कि जनता को भी अपनी आंखे खोलनी चाहिए और "जंगल राज" लाने वालों को EVM को ढाल बनाकर दफ़न करना होगा। किसी मनभावन लालच से दूर रहना होगा। ऐसी मानसिकता वाले सत्ता के कुछ भी कर सकते हैं। अगर यही बात बीजेपी के किसी भी नेता ने कह दी होती विपक्ष ही नहीं विपक्ष का गुलाम सारा मीडिया चीख-पुकार कर आसमान को सर पर उठा लेते। क्या इसी तरह लोकतंत्र चलेगा और संविधान की रक्षा होगी?      

बिहार में विधानसभा चुनाव को कुछ ही महीने शेष हैं। 2025 का अंत होते-होते नई सरकार बिहार में बन चुकी होगी। इस चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों के साथ ही चुनाव आयोग तेजी से कर रहा है। इसी कड़ी में चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को भी दुरुस्त कर रहा है।

विपक्षी पार्टियों को यह रास नहीं आया है। उन्होंने इसके विरोध में 9 जुलाई, 2025 को बिहार बंद बुलाया था। लेकिन चुनाव आयोग का यह विरोध RJD के गुंडाराज-जंगलराज की तैयारी और ‘भूरा बाल साफ़ करों’ जैसी धमकियों में बदल गया है।

बिहार में चुनाव आयोग की प्रक्रिया को राजद और कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियों ने मुद्दा बनाया जबकि आमजन को कोई परेशानी नहीं थी। जब आम लोग चुनाव आयोग के खिलाफ नहीं हुए तो यह बीड़ा उन्होंने खुद ही उठा लिया और 9 जुलाई के बंद के दौरान हिंसा और धमकियों का दौर चालू कर दिया।

कहीं RJD कार्यकर्ताओं ने एम्बुलेंस रोकी तो कहीं खुले मंच से नरसंहार वाले नारों की धमकियाँ चालू कर दीं। राजद के गुंडों की यह हरकतें वापस जंगलराज की यादें ले आई और साथ ही वह डर भी ले आई, जिसने 40 सालों से बिहारियों के मन में घर बनाया हुआ है।

मंच से ऐलान- भूरा बाल साफ़ करो

इसी 9 जुलाई, 2025 को बिहार में गया जिले में वह नारा गूंजा, जिसने 1990 के दशक में जनता को भयाक्रांत रखा था। यह नारा है- भूरा बाल साफ़ करो। इसमें भू का मतलब भूमिहार, रा का मतलब राजपूत और बा का मतलब ब्राह्मण तथा ल का मतलब लाला (कायस्थ) था। इस नारे का अर्थ था कि इन जातियों के लोगों को खत्म कर दिया जाए।

बिहार के गया जिले में 9 जुलाई, 2025 को ही अतरी विधानसभा क्षेत्र में विधायक रंजीत यादव की मौजूदगी में मुनारिक यादव ने ‘भूरा बाल साफ़ करो’ का नारा बुलंद किया। मुनारिक यादव बोला, “शुरू में हमारे लालू जी बोले थे भूरा बाल साफ़ करो की बात किए थे।”

मुनारिक यादव ने इस नारे को दोहराने की बात की। इस दौरान मंच पर मौजूद नेता खीसें निपोरते रहे। यानी उन्हें इस नारे या उसके वापस आने से कोई दिक्कत नहीं थी। ना मुनारिक यादव को यह बोलने से रोका गया और ना ही इसका कोई खंडन किया गया। यानी कहीं ना कहीं वहाँ की जनता इस बात से राजी थी।

भूरा बाल साफ करो के इस नारे के मंच से ऐलान करना RJD कार्यकर्ताओं के बुलंद हौसलों और उनकी मनोस्थिति बताती है कि वह सत्ता पाकर क्या करना चाहते हैं।

एम्बुलेंस पर बोले- गा@ में बाँस कर देंगे

इसी 9 जुलाई के बंद में दरभंगा के धोई घाट में RJD कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम की और एक एम्बुलेंस का रास्ता ब्लॉक कर दिया। RJD के कार्यकर्ताओं की गुंडई इस दौरान तब चरम पर दिखी जब उन्होंने एम्बुलेंस जाने देने की विनती पर धमकियाँ चालू कर दीं।

RJD के गुंडों ने एम्बुलेंस जाने देने की धमकी पर लड़ाई-झगड़ा किया और कैमरे पर हाथ मारा। एक गुंडे ने कहा, “गाँ#@ में बाँस कर देंगे, 90 वाला लहर आएगा तो नीचे पटक देंगे।” यानी RJD कार्यकर्ताओं को चुनाव चालू होने से पहले ही जंगलराज वाली खुमारी वापस चढ़ गई।

जनता को कीड़ा-मकोड़ा समझना और कुछ कहने पर धमकियाँ देना गुंडई की पहली निशानी है। RJD वालों ने यह साफ़ कर दिया कि उनकी सत्ता में लोगों का नीचे पटका जाना तय है। यह सब गुंडई चुनाव से महीनों पहले हो रही है और कैमरे के सामने हो रही है।

यानी RJD के लोग अगर साथ में हैं तो उन्हें ना क़ानून का डर है और ना ही उन्हें आमजन के साथ सिम्पथी है। अगर उनके राजनीतिक मास्टर ने एजेंडा दे दिया है तो चाहे एम्बुलेंस फँसे या फिर जातीय नरसंहार हो। उनका एजेंडा पूरा होना चाहिए।

मुहर्रम हिंसा भी इसी राजनीति का हिस्सा

बिहार में कटिहार, भागलपुर, दरभंगा समेत कई जगह पर मुहर्रम में हिंसा हुई। हिन्दू घरों और मंदिरों को निशाना बनाया गया। लेकिन यह हिंसा ऐसे समय में हुई जब लगभग 10 दिन पहले ही बिहार में एक रैली का आयोजन राजद और बाकी विपक्षी पार्टियों ने की थी। यह रैली वक्फ कानून का विरोध करने के नाम पर आयोजित की गई थी।

इस रैली में तेजस्वी यादव, पप्पू यादव समेत कॉन्ग्रेस और RJD के कई नेता शामिल हुए थे। इस रैली के दौरान भड़काऊ भाषण दिए गए थे। तेजस्वी यादव ने कहा था कि उनकी सरकार बनी तो वह वक्फ कानून कूड़े में फेंक देंगे और संसद, अदालत से लेकर सड़क तक मुस्लिमों के लिए उतरेंगे।

इस रैली के बहाने कवायद तो वोट बढ़ाने की थी लेकिन हौसलाअफजाई का रिजल्ट 10 दिन बाद ही दिखा और बिहार के कई जिले हिंसा की आग में झुलसे। इस पर भी राजद ने चुप्पी साध ली। ध्यान देने वाली बात है कि यह सब हिंसा चुनाव से ठीक पहले हो रही है।

ये गुंडई कोई खोखली हरकत नहीं

RJD के गुंडों की यह हरकतें कोई शक्ति प्रदर्शन भर नहीं है। भूरा बाल साफ़ करो का आह्वान दिखाता है कि वह भविष्य में क्या करने की इच्छा रखते हैं। इसी भूरा बाल साफ़ करो के नारे ने बिहार को 1980 और 1990 में जातीय हिंसा के नरक में झोक दिया था।

जब बिहार में 1980 और 1990 के दशक में भूरा बाल साफ़ करो का नारा गूंजा था तो बारां, डालेचक और सेनारी जैसे नरसंहार हुए थे। इन नरसंहारों में भूमिहार और राजपूत जातियों के 100 से अधिक लोग मार दिए गए थे। हत्यारे वो नक्सली थे जो कथित ‘सामाजिक न्याय’ चाहते थे।

तब ये सब कुछ भूरा बाल साफ़ करो के नाम पर हुआ था। आज वही नारा बिहार में वापस लगा है और कहा गया है कि ये वापस दुहराया जाएगा। भूरा बाल साफ़ करो के ऐलान और मुहर्रम में हुई हिंसा एक और बात बताती है। यह बताती है कि RJD के समीकरण का का कोर वोटर MY आजकल उत्तेजित है।

और इतिहास रहा है कि जब ये वोटर उत्तेजित हुआ है तो बिहार जंगलराज के दलदल में घुसा है। और जंगलराज अपने साथ पलायन, गरीबी और कुव्यवस्था का दौर लाता है।

भाजपा बोली- जनता हो जाए सावधान

ऑपइंडिया ने बिहार बंद के दौरान जातीय हिंसा के लिए लगाए जाने वाले नारों और जनता को परेशान करने की घटनाओं पर भाजपा OBC मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री निखिल आनंद से बात की। उन्होंने कहा, “आरजेडी का चाल- चरित्र- चेहरा जगजाहिर है। धार्मिक तुष्टिकरण की आड़ में घोर मुस्लिमपरस्ती और जातिवादी कुंठा की अभिव्यक्ति करना ही राजद का मूल राजनीतिक चरित्र है।”

उन्होंने कहा, “बिहार बंद की आड़ में राजद ने जो विभिन्न जगहों पर तांडव किया, महिलाओं को अपमानित किया, बीमार लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई और जातिगत आधार पर लोगों के साथ दबंगई और मारपीट की घटना को अंजाम दिया, उससे बिहार की जनता को सावधान होने की जरूरत है।”

महामंत्री निखिल आनंद ने कहा कि जब राजद का सत्ता के बाहर यह हाल है तो अगर ऐसे लोगों के हाथ में सत्ता आएगी तो किस तरीके से कानून व्यवस्था को ताक पर रखकर इनकी गुंडागर्दी चलेगी, यह समझा जा सकता है।

क्या चुनाव में ज्यादा हिंसा होगी इसका परिणाम?

बिहार ने 1990 से लेकर 2005 तक का वह दौर देखा है जब चुनाव का मतलब हिंसा हो गया था। तब बैलट बॉक्स लूटना, उसमे स्याही डाल देना, लाठी-डंडे और गोलियाँ चलना सामान्य बात सी हो गई थी। लालू प्रसाद यादव इसे ‘बोतल से जिन्न निकलने’ का नाम देते थे।

बिहार में चुनावी धांधली का यह हाल था कि 2005 आते-आते चुनाव आयोग को यहाँ शुचितापूर्ण चुनाव करवाने के लिए विशेष पर्यवेक्षक KJ राव को भेजना पड़ा था। इसके बाद चुनावी हिंसा पर लगाम लग पाई थी। और जैसे ही यह चुनावी हिंसा बंद हुई, वैसे ही बिहार में RJD का बोरिया बिस्तर भी बंध गया था।

तब से कुछ वर्ष को छोड़ दिया जाए तो RJD सत्ता में आने को तरस गई है। लोगों को वही भूरा बाल साफ़ करो और जंगलराज वाले दिन याद आते हैं। अब जब फिर से RJD नेताओं ने यही चालू किया है तो आगामी चुनाव में भी हिंसा के बादल मंडराने लगे हैं।

अवलोकन करें:- 

कर्नाटक : हिन्दुओं जागो और सेकुलरिज्म के नशे को छोड़ो ; जिस पीड़ित हिंदुओं को ही जेल में ठूँसने वा

संभवतः इस बार के चुनाव फिर से एक हिंसक हों। बूथ पर लोगों को जाने ना देने, उनमें डर फ़ैलाने से लेकर कई ऐसी हरकतें हो सकती हैं जो चुनाव प्रभावित करें। चुनाव आयोग को इस बार फिर सतर्क रहना होगा।

उत्तर प्रदेश : कांग्रेस नेता जलालुद्दीन ने दिव्याँग हिंदू की पत्नी को पार्टी ऑफिस में ले जाकर किया रेप, धर्मांतरण का डाला दबाव; घर भी कब्जाया: पहले से दर्ज हैं 1 दर्जन मामले, FIR के बाद गिरफ्तार

           कांग्रेस नेता जलालुद्दीन और पीड़िता की प्रतीकात्मक पोटो (फाइल फोटो, साभार- अमर उजाला, Dall-E)
आगरा में कांग्रेस पार्टी के महानगर उपाध्यक्ष जलालुद्दीन को पुलिस ने गुरुवार (10 जुलाई 2025) को गिरफ्तार किया है। उस पर एक हिंदू महिला के साथ 3 साल तक रेप करने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा है।

पीड़ित महिला ने जलालुद्दीन के खिलाफ रेप, धर्मांतरण और जानलेवा हमला करना के लिए शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित सगीर फातिमा गर्ल्स इंटर कॉलेज परिसर का रहने वाला है। इस समय वह ताजगंज के बगीची बिंदा भगत में रहता है।

पीड़िता ने 4 जुलाई 2025 को आगरा के शाहगंज थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उसने अपने ऊपर हुए चाकू के हमले का वीडियो फुटेज भी दिखलाया है। शिकायत में महिला ने बताया कि पेशे से वकील जलालुद्दीन से उसकी मुलाकात 2019 में दीवानी कोर्ट में हुई थी। जान-पहचान बढ़ाकर मदद के बहाने वह महिला के घर आने लगा। महिला का पति दिव्यांग है।

2019 में ही सितंबर में जलालुद्दीन महिला को दवा दिलाने के लिए लेकर गया। इस दौरान वह उसे एमजी रोड स्थित कांग्रेस कार्यालय लेकर गया। वहाँ उसने महिला के साथ रेप किया। इसके बाद शिकायत करने पर बदनाम करने की धमकी दी और बार-बार उत्पीड़न किया।

यही नहीं, जलालुद्दीन ने महिला पर धर्म बदलने और निकाह करने का दबाव बनाने लगा। पीड़िता ने बताया कि उसकी माँ की मौत के बाद जलालुद्दीन ने उसके घर पर कब्जा कर लिया। घर में रखे पूजा के सामान और देवी-देवताओं के सामान फेंक दिए। उसे नमाज अदा करने और रोजे रखने का दबाव बनाया।

नेता के डर से महिला मार्च में पति के साथ गुजरात के राजकोट चली गई। कांग्रेस नेता ने इसके बाद उस पर ताजगंज थाने में चोरी का मुकदमा लिखवा दिया। मुकदमे की जानकारी मिलने पर महिला वापस आगरा आई।

इसके बाद महिला ने पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से अपनी कहानी बताई और शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने जलालुद्दीन के खिलाप जाँच शुरू की। उसे पुलिस ने गुरुवार को जीआईसी ग्राउंड के पास से गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया कि जलालुद्दीन पर 1 दर्जन से भी अधिक मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं। इनमें 2016 में बंधक बनाकर रेप करने के साथ 1989 में भी चोरी, बलवा, जानलेवा हमला, छेड़छाड़ और डकैती तक के मामले शामिल हैं।

अवलोकन करें:-

‘गजवा-ए-हिंद’ के बारूद से देश में चल रही कितनी हथियार फैक्ट्री, कितने सलाऊद्दीन ‘हकीम’ बन घरों म
‘गजवा-ए-हिंद’ के बारूद से देश में चल रही कितनी हथियार फैक्ट्री, कितने सलाऊद्दीन ‘हकीम’ बन घरों म
 

जलालुद्दीन ने पीड़ित महिला के साथ का अपने निकाहनामा से जुड़े कागज भी वायरल किए हैं। पीड़िता ने इसे फर्जी बताया है। इस मामले में पुलिस ने अपनी जाँच तेज कर दी है। पीड़िता और उसके पति के बयान कोर्ट में दर्ज करवाया जाएगा।

नौकर के साथ मिलकर OBC समाज की बच्ची से रेप करता था सपा नेता, सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी भी है मोईद खान: घर में चल रही थी पुलिस चौकी

बलात्कारी मोईद खान निकला सपा सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान और उनके नौकर राजू पर लगा है। मजदूर परिवार की पीड़िता का अश्लील वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल भी किया गया। मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के मोईद खान और उसके नौकर राजू को गिरफ्तार कर लिया है। जिस सपा नेता मोईद खान पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा है उसी के घर में लगभग 12 साल से पुलिस चौकी चल रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना अयोध्या के थाना क्षेत्र पूराकलंदर की है। यहाँ के चौकी क्षेत्र भदरसा में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान की बेकरी की दुकान है। यहीं पर एक OBC समुदाय की एक मजदूर महिला और उनकी 12 वर्षीया नाबालिग बेटी रहती है। लगभग 75 दिन पहले पीड़िता अपनी माँ के साथ मजदूरी कर के लौट रही थी। तभी रास्ते में मोईद की दुकान में काम करने वाले नौकर राजू खाँ ने पीड़िता को टोस्ट लेने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया। लड़की पहले भी मोईद की दुकान पर आती जाती रही थी इसीलिए वो विश्वास कर के वहाँ चली गई।

बताया जा रहा है कि दुकान में राजू और उसके मालिक मोईद ने पीड़िता से बारी-बारी सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान आरोपितों द्वारा रेप का वीडियो भी बना लिया गया। किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। बाद में इसी वीडियो से डरा-धमका कर पीड़िता से 2 महीने तक दोनों आरोपितों ने गैंगरेप किया। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। लड़की के पेट में दर्द होने पर माँ को शक हुआ। जब यह बात लड़की की माँ को पता चली तो उसने पूरी वजह पूछी। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बता दी। आखिरकार मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ निषाद पार्टी के सदस्य भी थाने पर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। मौके पर पुलिस फोर्स पहुँची और नाराज लोगों को समझा कर शाँत करवाया। जाँच के दौरान यह भी पता चला कि जिस भदरसा पुलिस चौकी क्षेत्र की यह घटना है वह आरोपित मोईद खान की ही प्रॉपर्टी में चल रही थी। रात भर में ही पुलिस चौकी को मोईद खान की प्रॉपर्टी से अलग जगह शिफ्ट किया गया। आरोपित समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद का भी नजदीकी बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि मोईद खान की ही प्रॉपर्टी में एक बैंक भी संचालित हो रहा है। नाराज लोगों का यह भी आरोप है कि घटना की FIR शिकायत देने के 30 घंटे बाद दर्ज हुई है। फिलहाल गैंगरेप के आरोप सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपितों पर गैंगरेप की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मोईद खान के बेकरी की दूकान की वैधता जाँची जा रही है। पीड़िता की माँ का आरोप है कि शिकायत दर्ज करवाने के बाद उन्हें लगातार केस वापस लेने का दबाव दिया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश : ‘जनसेना के मुखिया पवन कल्याण जीते तो बदल लूँगा अपना नाम’: जगन की पार्टी के नेता अब बन गए पद्मनाभ रेड्डी

मुद्रागडा पद्मनाभ (बाएँ) ने पवन कल्याण (दाएँ) के जीतने के बाद अब नाम बदल लिया है (चित्र साभार: Sakshi & Pawan Kalyan/FB)
विधि के विधान कोई नहीं बदल सकता। कई बार इसी ब्लॉग पर फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस द्वारा 1555 में की गयी भविष्यवाणियों के बारे में लिखा जा चूका है। 2014 में एक अधेड़ आयु के सख्त नेता के नेतृत्व में एक नई पार्टी सत्ता में आएगी और उस नेता को हराने वाला कोई नहीं होगा। उसके प्रशंसक भी होंगे तो विरोधी भी कम नहीं होंगे। 
देखिए 2024 लोक सभा चुनाव ने कई लोगों को धूल चटवा दी। नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोकने में लगी विदेशी ताकतों की भीख पर पलता विपक्ष, एक मुश्त मोदी के विरोध में वोट देने वाला मुस्लिम समाज और विशेषकर संघ आदि। इतने वर्षों से संघ का इंद्रेश कुमार के संगठन का नाम देखिए, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच, चल रहा है। इंद्रेश खुद तो पागल बन रहा है संघ को भी बना रहा है और जनता को भी। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आते ही मुसलमानों में मोदी को हराने वोट न देने की मुहीम चल रही थी। अगर इंद्रेश को इस मुहिम की जानकारी नहीं, क्यों नहीं मंच को किया जाता बंद। मोदी को रोकने में विदेशी ताकतों के करोड़ों रूपए स्वाहा हो गया, लेकिन मोदी बन गया तीसरी बार प्रधानमंत्री।  

कालचक्र घूम रहा है। 2024 से 2029 का समय देश को एक नयी ऊंचाई पर लेकर जाएगा। मोदी विरोधी नए-नए षड़यंत्र रचेंगे, उपद्रव करने का प्रयत्न करेंगे, लेकिन सभी चारों खाने चित होंगे। प्रधानमंत्री के निर्भीक निर्णयों से विश्व भी प्रधानमंत्री का लोहा मानने को विवश हो जाएगा। 

आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जनसेना पार्टी के मुखिया कोनिडेला पवन कल्याण के जीतने के कारण एक नेता को अपना नाम बदलना पड़ गया। YSRCP के नेता ने चुनौती दी थी थी कि यदि पवन कल्याण जीत जाते हैं तो वह नाम बदल लेगा, अब आधिकारिक तौर पर उसने ऐसा कर भी लिया है।

YSRCP के नेता ने तो चुनौती को स्वीकारते नाम बदल लिया। लेकिन देश में एक पलटू पार्टी है, जिसके एक नेता सोम भारती ने नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर सिर मुंडवाने की बात कही थी, परन्तु बाद में पलटी मार गया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSRCP के कापू समुदाय से आने वाले नेता मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम बदला है। मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम अब बदल कर पद्मनाभ रेड्डी कर लिया है। उन्होंने इसके लिए बाकायदा अंदर प्रदेश सरकार के सरकारी गजट में अपना नाम बदलवाया है।

मुद्रागडा पद्मनाभ ने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ही जगन रेड्डी की पार्टी YSRCP की सदस्यता ली थी। उन्होंने इस चुनाव प्रचार के दौरान ऐलान किया किया था कि जनसेना के मुखिया पवन कल्याण पिठापुरम विधानसभा क्षेत्र से हार जाएँगे। उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा नहीं होता, तो वह अपना नाम बदल लेंगे।

पद्मनाभ के ऐलान के उलट पवन कल्याण पिठापुरम से भारी मतों से जीते। उन्होंने YSRCP की उम्मीदवार गीता विश्वनाथ को 70,000 वोटों के अंतर से हराया। पवन कल्याण को यहाँ 34 लाख वोट मिले जबकि गीता को मात्र 64,000 वोट ही मिले। पवन कल्यान की जनसेना से भी राज्य में भारी जीत हासिल की।

पवन कल्याण की इस जीत के बाद कापू समुदाय के नेता पद्मनाभ ने अपना नाम बदल लिया। उन्होंने इसके सरकार को आवेदन दिया था जिसके बाद उनके नाम बदलने को मंजूरी मिल गई। उन्होंने नाम बदलने के फैसले पर अमल करने का ऐलान चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन कर दिया था।

आंध्र प्रदेश में NDA गठबंधन ने YSRCP को बुरी तरह हराया है। राज्य में हुए चुनाव में TDP को 135, जनसेना को 21 जबकि भाजपा को 8 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं सत्ताधारी YSRCP 11 सीटों पर सिमट गई और उसका राज्य से सफाया हो गया है।

केरल : बाथरूम में महिलाओं का वीडियो बना रहे कांग्रेस युवा नेता आशिक बदरुद्दीन को पुलिस ने किया गिरफ्तार

                                     आशिक बदरुद्दीन (चित्र साभार: News18 Malayalam)
केरल के कोल्लम में आशिक बदरुद्दीन नाम के एक स्थानीय कांग्रेस युवा नेता को बाथरूम में कैमरा रख महिलाओं के वीडियो बनाने करने आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थेनमाला में टॉयलेट संचालक के रूप में काम करने 
कांग्रेस के युवा नेता आशिक बदरुद्दीन के खिलाफ महिलाओं ने वीडियो बनाने के प्रयास करने की शिकायत की थी। इसके बाद उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

वीडियो बनाने के मामले में गिरफ्तार हुआ आशिक बदरुद्दीन पुनालुर ब्लॉक में यूथ कांग्रेस का महासचिव है। महिलाओं की शिकायत के बाद पुलिस ने बदरुद्दीन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है। साथ ही पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशिक(30) थेनमाला डैम में टॉयलेट ऑपरेटर के तौर पर काम करता है। उसने कथित तौर पर महिलाओं के शौचालय के अंदर एक कैमरा लगा दिया था। 21 मई को तिरुवनंतपुरम से घूमने आई कुछ लड़कियों की नजर कैमरे पर पड़ी और उन्होंने आशिक बदरुद्दीन के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में आशिक को अदालत में पेश किया गया और पुलिस ने हिरासत में भेज दिया गया।

कर्नाटक सेक्स सीडी कांड : कांग्रेस नेता शिवकुमार की पोल खुली, मोदी को बदनाम करने का दिया था टास्क

     सलाखों के पीछे देवराजे गौड़ा, डीके शिवकुमार और प्रज्ज्वल रेवन्ना (साभार: Vartha Bharathi and OpIndia)
बीजेपी नेता और वकील देवराजे गौड़ा ने शुक्रवार (17 मई) को एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी को बदनाम करने के लिए 100 करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। गौड़ा ने कहा कि शिवकुमार ने उन्हें अग्रिम राशि के रूप में 5 करोड़ रुपए भी भेजे थे।

देवराजे गौड़ा का आरोप है कि कांग्रेस नेता शिवकुमार ने पूर्व एमएलसी एमए गोपालस्वामी को उनसे बातचीत करने के लिए नियुक्त किया था। गौरतलब है कि शुक्रवार (17 मई 2024) को जब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा था तो उन्होंने पुलिस वाहन से पत्रकारों से बात करते हुए ये टिप्पणी की। उन्हें लगभग एक सप्ताह पहले यौन शोषण के आरोप में कॉन्ग्रेस सरकार ने गिरफ्तार किया है।

देवराजे गौड़ा ने प्रज्ज्वल रेवन्ना से जुड़े अश्लील वीडियो और यौन शोषण मामले की ओर जनता का ध्यान आकर्षित किया था। गौड़ा के अनुसार, प्रज्ज्वल रेवन्ना मामले से संबंधित घटनाक्रम को सँभालने के लिए एन चेलुवरयास्वामी, कृष्णा बायरे गौड़ा और प्रियांक खड़गे सहित चार मंत्रियों की एक टीम बनाई गई थी।

हासन में अदालत परिसर से ले जाए जाने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए गौड़ा ने कहा, “मुझे एक बयान देने के लिए कहा गया था कि यह एचडी कुमारस्वामी ही थे, जिन्होंने पेन ड्राइव में रखे सेक्स वीडियो प्रसारित किए थे (इसमें कुमारस्वामी के भतीजे प्रज्वल रेवन्ना, पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के पोते भी शामिल हैं)। लेकिन, प्रज्ज्वल रेवन्ना के ड्राइवर कार्तिक गौड़ा से पेन ड्राइव लेकर सारी योजना बनाने वाले शिवकुमार थे।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, एचडी कुमारस्वामी और भाजपा को बदनाम करने के लिए बड़े पैमाने पर योजना बनाई थी। उन्होंने मुझे 100 करोड़ रुपए की पेशकश की और बॉरिंग क्लब के कमरा नंबर 110 में एडवांस के तौर पर 5 करोड़ रुपए भी भेजे। चन्नारायपटना के एक स्थानीय नेता गोपालस्वामी को इस सौदे पर बातचीत करने के लिए भेजा गया था।”

गौड़ा ने आगे कहा, “जब मैंने उनकी योजनाओं का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया तो उन्होंने पहले मुझे एक मामले में फँसाया, लेकिन उसमें कोई सबूत नहीं मिला। बाद में उन्होंने मुझे यौन उत्पीड़न के मामले में फँसा दिया। जब ये चाल भी नाकाम हो गई तो उन्होंने मेरे खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दिया। मुझसे चार दिनों तक पूछताछ की गई, लेकिन उनसे कुछ पता नहीं चल सका।”

देवराजे गौड़ा ने पत्रकारों से बातचीत करते समय जोर देकर कहा, “मेरे पास शिवकुमार की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग है। मैं जेल से बाहर आते ही उसे जारी कर दूँगा और कॉन्ग्रेस की सरकार गिर जाएगी।” इससे पहले 6 मई को गौड़ा ने कहा था कि यौन उत्पीड़न के वीडियो वाली पेन ड्राइव जारी करने के पीछे शिवकुमार का हाथ था। कॉन्ग्रेस पार्टी का मुख्य निशाना प्रधानमंत्री मोदी हैं।

उन्होंने कहा था, “मुझे सेक्स स्कैंडल की जाँच कर रही SIT पर भरोसा नहीं है। मैं सारे सबूत सीबीआई को सौंप दूँगा। मेरे पास मौजूद वीडियो उन वीडियो से अलग हैं, जो जारी किए गए हैं।” बता दें कि 33 वर्षीय प्रज्वल रेवन्ना पर कई महिलाओं के यौन शोषण के आरोप हैं। प्रज्वल जर्मनी के फ्रैंकफर्ट भाग गए हैं। उनके खिलाफ इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है।

‘राहुल गाँधी बड़े नेता नहीं’, मीडिया उन्हें इतना भाव क्यों दे : दिग्विजय सिंह के भाई ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की बताई ‘औकात’,

कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह और राहुल गाँधी (फोटो साभार: नई दुनिया/हिंदुस्तान)
कांग्रेस के नेता हैं लक्ष्मण सिंह। उनके भाई दिग्विजय सिंह केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी। राहुल गाँधी के वो सबसे नजदीकी सलाहकारों में से हैं। राहुल गाँधी ही नहीं, पूरी गाँधी फैमिली उन्हें खूब भाव देती है। लेकिन दिग्विजय सिंह के विधायक रह चुके भाई लक्ष्मण सिंह राहुल गाँधी को कोई भाव देने के मूड में नहीं दिखते। उनका कहना है- “राहुल गाँधी कांग्रेस के एक सामान्य कार्यकर्ता हैं, उन्हें इतना भाव मीडिया क्यों दे? मैं तो उन्हें बड़ा नेता मानता ही नहीं, आप भी मत मानिए।”

लक्ष्मण सिंह अपनी साफगोई के लिए जाने जाते हैं, हालाँकि अपने बयानों की वजह से वो विवादों में भी रहे हैं। इस बार उन्होंने मीडिया से बातचीत में राहुल गाँधी के लिए ऐसी बात कह दी, जो शायद ही किसी कांग्रेसी को पसंद आए। लक्ष्मण सिंह ने कहा, “राहुल गाँधी न तो पार्टी के अध्यक्ष हैं और न ही कोई बड़े नेता। वो सामान्य सांसद हैं, जैसे पार्टी के दूसरे और भी सांसद हैं।”

लक्ष्मण सिंह पहले विधायक थे लेकिन मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में चचौरी में इस बार उन्हें भाजपा प्रत्याशी प्रियंका से हारना पड़ा। इसके बाद वह अब चर्चा में आए। उन्होंने रविवार (31 दिसंबर 2023) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मीडिया ने राहुल गाँधी की उन चिंताओं (जिसमें राहुल संसद में बोलते समय कैमरा घुमा दिए जाने का आरोप लगाते हैं) पर सवाल पूछा था, साथ ही जन्म के आधार पर प्रिविलेज्ड होने के मामले पर भी सवाल पूछा था। इस सवाल के जवाब में लक्ष्मण सिंह ने अपने दिल की बात कही।

लक्ष्मण सिंह बोले, “राहुल गाँधी एक सांसद हैं। वो अध्यक्ष नहीं हैं। और एक कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा राहुल गाँधी कुछ नहीं हैं। राहुल गाँधी को इतना हाईलाइट आप लोग भी इतना मत करिए, न हम करें। राहुल गाँधी एक सांसद हैं, जैसे अन्य सांसद होते हैं। कोई जन्म से नहीं हो जाता, अपने कर्म से होता है। राहुल गाँधी को आप इतना बड़ा नेता मत मानिए, मैं तो नहीं मानता हूँ। साधारण सांसद हैं, उनको हाईलाइट करें या न करें, मुझे कोई समस्या नहीं है।”

दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह अक्सर अपनी अलग राय के लिए जाने जाते हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की बहुत याद आती है। अगर वो पार्टी में होते, तो पार्टी की ये हालत नहीं होती। इसके अलावा इससे पहले वो ये भी कह चुके हैं कि किसानों की कर्जमाफी संभव नहीं है, राहुल गाँधी को वादा ही नहीं करना चाहिए था।

कर्नाटक वीडियो काण्ड : हिंदू लड़कियों की अश्लील वीडियो बनाने वाली शैफ़ा, शबानाज़, आलिया को बेल… सवाल करने पर महिला भाजपा नेता शकुंतला गिरफ्तार

          उडुपी वीडियो कांड में सिद्धारमैया पर ट्वीट (बाएँ) करने वाली भाजपा महिला नेत्री शकुंतला (दाएँ) गिरफ्तार
कर्नाटक पुलिस ने बेंगलुरु से भाजपा की एक महिला नेता को गिरफ्तार किया है। शकुंतला नाम की इस महिला नेता पर ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अपमान का आरोप है। यह गिरफ्तारी उडुपी वीडियो कांड से जुड़ी हुई है। पुलिस का आरोप है कि इस मामले में 25 जुलाई 2023 को भाजपा नेता ने इस घटना से CM सिद्धारमैया की बहू और बीवी को जोड़ने का प्रयास किया।

जिस घटना में साल भर तक हिंदू लड़कियों के वीडियो बनाए गए, कर्नाटक के गृहमंत्री ने उसे एक छोटी सी घटना बताया है। जिस घटना की चर्चा सड़क से संसद तक होनी चाहिए, उससे जुड़ी तीनों अरोपित छात्राओं को कोर्ट से भी जमानत मिल गई है। सवाल करने वाला लेकिन गिरफ्तार कर लिया जाता है।

दरअसल 25 जुलाई को कर्नाटक कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भाजपा पर इस मुद्दे में नमक-मिर्च लगा कर पेश करने का आरोप लगाया था। तब कांग्रेस ने उडुपी कॉलेज में छात्राओं की वीडियो शूटिंग वाली खबर को ‘फर्जी’ करार दिया था। इसी ट्वीट में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की राजनीति का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने भाजपा द्वारा इस खबर में नमक-मिर्च लगा कर परोसने और कर्नाटक पुलिस द्वारा सही जाँच करके विरोधियों के मंसूबे नाकाम करने का दावा किया था।

इसी ट्वीट के जवाब में भाजपा महिला नेता शकुंतला ने 25 जुलाई को ही लिखा, “कांग्रेस के मुताबिक मुस्लिम छात्राओं द्वारा शौचालय में कैमरा लगा कर हिन्दू लड़कियों का वीडियो बनाना बच्चों का खेल है। सिद्धारमैया क्या आप सहमत हैं कि यह बच्चों का खेल है?”

शकुंतला ने ट्वीट में यह भी लिखा कि क्या CM सिद्धारमैया और उनकी पार्टी अपनी बहू और बीवी के साथ समान व्यवहार पर ऐसी ही प्रतिक्रिया देते? उन्होंने अपने ट्वीट में कांग्रेस के स्क्रीनशॉट को अटैच किया था। शकुंतला ने यही जवाब अपने फेसबुक पर भी शेयर किया था।

इस ट्वीट के वायरल होने के बाद कांग्रेस नेता हनुमानथार्या द्वारा बेंगलुरु के हाई ग्राउंड पुलिस स्टेशन में शकुंतला के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने केस दर्ज करके शकुंतला को गिरफ्तार कर लिया है। बाद में शकुंतला को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

अवलोकन करें:-

कर्नाटक बाथरूम वीडियो कांड : ‘1 साल से मुस्लिम लड़कों के साथ शेयर किए जा रहे थे हिन्दू लड़कियों के व

गिरफ्तारी के दौरान शकुंतला भाजपा की महिला मोर्चा के साथ तमकुरु जिले के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय पर प्रदर्शन कर रही थीं। बताते चलें कि 27 जुलाई को भाजपा ने 3 मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिन्दू लड़कियों का शौचालय में वीडियो बनाने के आरोप में राज्यव्यापी प्रदर्शन किया था।