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अमित शाह फर्जी वीडियो केस में ‘'Spirit of Congress'' नाम से हैंडल चलाने वाले अरुण रेड्डी गिरफ्तार होने से क्यों बिलबिलाया मोहम्मद जुबैर?

     तेलंगाना से अरुण रेड्डी के गिरफ्तार (बाएँ) होने से परेशान मोहम्मद जुबैर (फोटो साभार : Hindustan Times/X)

दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने के मामले में कांग्रेस के सोशल मीडिया टीम से जुड़े अरुण रेड्डी को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने अरुण रेड्डी को दिल्ली से ही गिरफ्तार किया और अब वो शनिवार (04 मई 2024) को उसे कोर्ट में पेश कर रिमाँड की माँग करेगी। अरुण रेड्डी पर गृह मंत्री अमित शाह का डीपफेक वीडियो फैलाने और सबूत नष्ट करने के आरोप हैं। दिल्ली पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर जाँच के लिए भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरुण रेड्डी ‘Spirit of Congress’ नाम से से अकाउंट चलाता है। वो कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कॉर्डिनेटर भी है, इसके साथ ही वो तेलंगाना में भी कांग्रेस का सोशल मीडिया देखता है और वो तेलंगाना कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम और नेशनल मीडिया टीम के साथ कोर्डिनेशन का काम भी देखता है।

कौन है अरुण रेड्डी?

अरुण रेड्डी ‘स्पिरिट ऑफ कांग्रेस’ नाम का एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट चलाता है और खुद को कांग्रेस समर्थक बताता है। उसने अपनी प्रोफाइल में भी खुद को कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कोऑर्डिनेटर बताया है। अपनी प्रोफाइल फोटो में उसने राहुल गाँधी के ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के पोस्टर वाली तस्वीर भी लगाई है। जिसमें पोस्टर के सामने वो खुद दिख रहा है।

छटपटाया मोहम्मद जुबैर, एक्स पर लिखी ये बात

कांग्रेस सोशल मीडिया विंग से जुड़े अरुण रेड्डी की गिरफ्तारी से ‘इकोसिस्टम’ का हिस्सा मोहम्मद जुबैर तिलमिला गया है। उसने एक्स पर लिखा, “सिर्फ बीजेपी के सदस्य और समर्थक ही सोशल मीडिया पर बिना किसी डर के गलत सूचना/दुष्प्रचार फैला सकते हैं। उन्हें इसके लिए पार्टी लीडरशिप से सम्मानित भी किया जा सकता है। अन्य लोग ऐसा करने से पहले 100 बार सोच लें। क्योंकि अगर उनके (बीजेपी) नेताओं के विरोध में गलत जानकारी शेयर की, तो वो तुम्हारे पीछे लग जाएँगे। अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने वाले बहुत सारे लोगों के खिलाफ केस हो चुका है/ गिरफ्तार हो चुके हैं। अमित शाह का इंटेंशनली एडिटेड वीडियो एक व्यक्ति ने पोस्ट गिया, जिसे सोशल मीडिया पर बहुत सारे अकाउंट्स ने बिना जाँच के ही शेयर किया। अब, उस वीडियो की जाँच किए बगैर उसे शेयर करने वाले या तो जेल जा रहे हैं, या एफआईआर झेल रहे हैं। सावधान!”
गृह मंत्री अमित शाह का आरक्षण को लेकर एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इस मामले में बीते रविवार को बड़ा एक्शन लिया गया था। फर्जी वीडियो फैलाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर की गई थी। इस फर्जी वीडियो को लेकर ये भ्रम फैलाया जा रहा था कि अमित शाह ने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण हटाने की बात कही, जबकि वास्तविकता में उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।
पूरे मामले पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि विपक्ष की हताशा और निराशा इस स्तर पर पहुंच गई है कि उन्होंने मेरा और कुछ भाजपा नेताओं का फेक वीडियो बनाकर सार्वजनिक किया है। उनके मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष आदि ने भी इस फेक वीडियो फॉरवर्ड करने का काम किया है। शाह ने कहा कि जब से राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली है तब से वह राजनीति के स्तर को नए निचले स्तर पर ले जाने का काम कर रहे हैं।

असम से लेकर हैदराबाद तक एक्शन

जानकारी के अनुसार, यह गिरफ्तारियाँ भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई हैं। इस शिकायत में कहा गया था कि अमित शाह का एडिटेड वीडियो चला कर आरक्षण के संबंध में गलत सूचना फैलाई गई। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम आसमा, गीता, नवीन, शिवा एवं एक अन्य हैं।
इस मामले में देश के अलग-अलग इलाकों से यह फर्जी वीडियो फैलाने के मामले में गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अहमदाबाद से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया था, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है। उसे कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।
डीपफेक वीडियो से जुड़े केस में असम के कांग्रेस कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कांग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।
इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी दिल्ली पुलिस ने समन किया था। हालाँकि, उनकी जगह उनके वकील ने दिल्ली पुलिस को बताया कि मुख्यमंत्री का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। झारखंड के कांग्रेस अध्यक्ष को भी इस मामले में समन जारी किया जा चुका है।

तेलंगाना : पीछे पड़ी थी लिबरल और मुस्लिम कट्टरपंथी गैंग, फिर भी गोशामहल ने चुना हिन्दू शेर राजा सिंह… जीत के बाद बोले – हिन्दू राष्ट्र के लिए लड़ूँगा

हैदराबाद के गोशामहल से तीसरी बार विधायक बने भाजपा के राजा सिंह को अगर तेलंगाना का योगी आदित्यनाथ या बालासाहेब ठाकरे कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जो अकेला सनातन विरोधियों, लिबरल, मुस्लिम कट्टरपंथियों और ओवैसी भाइयों पर भारी है। सिंह में कहीं भी खड़े होकर अपनी बात कहने की हिम्मत है, जबकि ओवैसी भाई केवल अपने ही क्षेत्र में बोल सकते हैं, अपने क्षेत्र से बाहर हिन्दुओं को विभाजित करने जाति कार्ड खेलते हैं। अगर भाजपा ने इन्हें निष्कासित करने की बजाए इनके साथ खड़ी होती, निश्चितरूप से तेलंगाना में भाजपा की ऐसी जबरदस्त हुंकार भर गयी होती जिसकी तेलंगाना से बाहर आंध्र प्रदेश तो क्या दक्षिण के अन्य राज्यों में भी आवाज़ बुलंद हो रही होती। जिस तरह अकबरुद्दीन ओवैसी हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करता है, उसका मुंह तोड़ जवाब उसी के गढ़ में दहाड़ने की हिम्मत राजा सिंह की है।  

टी राजा सिंह, जिन्हे टाइगर राजा सिंह नाम से जाना जाता है – तेलंगाना भाजपा के उन 8 विधायकों में से एक हैं जो 2023 विधानसभा चुनाव में जीत कर विधानसभा पहुँचे हैं। फायरब्रांड कहे जाने वाले राजा सिंह को ‘टाइगर’ की पदवी हिन्दू समाज के लिए संघर्ष करने की वजह से दी गई है। देश भर के वामपंथी, लिबरल और कट्टरपंथियों के निशाने पर लगातार रहे राजा सिंह की भाजपा के टिकट पर यह लगातार तीसरी जीत है। उन्होंने BRS के नंदकिशोर व्यास को 21,457 वोटों से हराया।

मोहम्मद जुबैर और राजदीप भी शामिल थे दुष्प्रचार में

राजा सिंह के खिलाफ विधानसभा चुनावों से काफी पहले ही मार्च 2023 से ही दुष्प्रचार शुरू हो चुका था। इस कुप्रचार की कमान फैक्ट चेकिंग के नाम पर फेक न्यूज़ फैलाने वाले मोहम्मद जुबैर ने सँभाली हुई थी। जुबैर इस्लामी कट्टरपंथियों की करतूतों पर पर्दा डालने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ का को-फाउंडर है। 29 मार्च 2023 को जुबैर ने टी राजा सिंह के खिलाफ ट्वीट की एक श्रृंखला डाली थी। इसमें जुबैर ने राजा सिंह के भाषणों के कुछ हिस्सों को बीच में से काट कर उन्हें मुस्लिम विरोधी साबित करने की भरसक कोशिश की थी।
अपने लक्षित ट्वीट की सीरीज में जुबैर ने राजा सिंह की गिरफ्तारी न होने पर भी सवाल खड़े किए थे। हालाँकि, जुबैर बाद में भी अपने मिशन पर लगा रहा। 2 अक्टूबर, 2023 को एक बार फिर से जुबैर ने राजा सिंह के राजस्थान में दिए गए भाषण के कुछ हिस्से काट कर उनको मुस्लिम विरोधी बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की माँग की।
मोहम्मद जुबैर की ही तरह वाशिंगटन पोस्ट के लिए लेख लिखने वाली तथाकथित पत्रकार राना अय्यूब ने भी राजा सिंह के खिलाफ 8 महीने पहले ही मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने राजा सिंह के महाराष्ट्र में दिए गए भाषण की क्लिप के आधार पर बनी ऑल्टन्यूज़ की आर्टिकल को शेयर किया। इस दौरान उन्होंने राजा सिंह को मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश की।
राजा सिंह के खिलाफ कुप्रचार में वामपंथी पत्रकार राजदीप सरदेसाई भी पीछे नहीं रहे। 31 मार्च, 2023 को उन्होंने हैदराबाद में राजा सिंह द्वारा निकाली गई रामनवमी शोभा यात्रा के कुछ हिस्सों को शेयर किया। राजदीप ने राजा सिंह के भाषण के एक हिस्से को हेट स्पीच करार दिया था।
खुद को मॉब लिंचिंग और भारत में इस्लामोफोबिया पर रिसर्च करने वाला बताते हुए मोहम्मद आसिफ खान ने भी राजा सिंह के खिलाफ चल रहे अभियान में हिस्सेदारी की। 24 मार्च को मोहम्मद आसिफ ने राजस्थान पुलिस को टैग करते हुए राजा सिंह को गिरफ्तार न किए जाने की वजह पूछी थी।
लगातार हिन्दू विरोधी खबरों को शेयर करने वाले X हैंडल ‘हिंदुत्व वाच’ ने भी राजा सिंह के खिलाफ सिलसिलेवार ट्वीट किए। 10 अप्रैल, 2023 को इस हैंडल से राजा सिंह एक बयान के कुछ अंशों को शेयर किया गया था। तब राजा सिंह को एक कार्यक्रम में शामिल होने से रोक दिया गया था। इसके जवाब में राजा सिंह ने अपना एक वीडियो जारी कर के अपनी बात कही थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक महिला ने तो राजा सिंह के मर्डर तक का ऐलान कर दिया था। तब महिला ने राजा सिंह के मोहल्ले से खुद को खड़ा करने की भी अपील की थी।

क्यों हो रहा था विरोध

दरअसल, हिन्दू धर्म के खिलाफ लगातार चुटकुले सुनाने वाले कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी का अगस्त 2023 में एक शो हैदराबाद में प्रस्तावित था। राजा सिंह ने इस शो के आयोजन का विरोध किया। इसी दौरान 22 अगस्त, 2022 को उन्होंने एक वीडियो भी जारी की जिसे मुस्लिम वर्ग ने ईशनिंदा करार दे दिया। राजा सिंह के खिलाफ हैदराबाद में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों को काबू करने पुलिस वालों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। राजा सिंह को गिरफ्तार भी कर लिया गया और जल्द ही उनको जमानत भी मिल गई।
राजा सिंह को मिली जमानत के विरोध में 25 अगस्त, 2023 को एक बार फिर से कई मुस्लिमों ने हैदराबाद में हंगामा किया। तेलंगाना कॉन्ग्रेस के सचिव राशिद खान ने आग लगाने का भी ऐलान कर दिया। कार्रवाई की आशंका को देखते हुए राजा सिंह ने एक वीडियो जारी किया और जल्द ही अपनी गिरफ्तारी होने की भी बात कही। अगस्त 2023 के अंतिम सप्ताह में राजा सिंह को एक बार फिर से पुलिस ने Ph.D एक्ट के तहत उनके आवास से गिरफ्तार किया।
इसी दौरान एक पुलिस अधिकारी को ये कहते सुना गया, “मुहम्मद सिर्फ मुस्लिमों के नहीं, सबके प्रोफेट हैं। हम पुलिस वाले उसको (राजा सिंह की गिरफ्तारी को) ईगो पर ले रहे हैं।”

‘हिन्दुओं ने जिताया, हिन्दू राष्ट्र के लिए करूँगा काम’

राजा सिंह ने सोमवार (4 दिसंबर, 2023) को एक वीडियो जारी कर के अपनी विधानसभा और देश के विभिन्न हिस्सों में अपने सभी समर्थकों को धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “मैं ये जीत पूरे हिन्दू समाज को देता हूँ जिन्होंने पूरे भारत देश से मेरी विधानसभा को निवेदन किया था। मैं हिन्दू होने के नाते हिंदुत्व की बात करता ही रहूँगा। हिन्दू राष्ट्र के लिए लड़ाई लड़ता रहूँगा।”
राजा सिंह ने अपनी जीत का श्रेय हिन्दू समाज को दिया। उन्होंने कहा कि जिस गोशामहल की जनता ने उनको चुनाव जिताया है वो उन सभी की सेवा में हमेशा हाजिर रहेंगे। विधानसभा चुनाव से पहले भी राजा सिंह ने कहा था कि उनको सिर्फ हिन्दुओं के वोट चाहिए।
तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार के दौरान हैदराबाद से कई वीडियो वायरल हुए थे। इन्हीं में से एक वीडियो में वहाँ के एक बुजुर्ग को कहते सुना गया था कि ओवैसी भाइयों का जीजा है टी राजा सिंह, उसका नाम सुन इनका पेशाब निकलता है।

‘नूपुर शर्मा की तरह अब मेरे पीछे पड़ा जिहादी मोहम्मद ज़ुबैर’: एमी मेक, अमेरिका की महिला पत्रकार

हमास आतंकियों के समर्थन के लिए मोहम्मद ज़ुबैर को इजरायली काउंसल जनरल और अमेरिकी पत्रकार ने लताड़ा (फोटो साभार: X/Attia Muhammed/Flash90)
कटा हुआ वीडियो शेयर करने के लिए कुख्यात मोहम्मद ज़ुबैर अब इजरायल-हमास युद्ध को लेकर प्रोपेगंडा फैलाने में लग गया है। सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को अमेरिका स्थित ‘RAIR फाउंडेशन’ की संस्थापक और इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट एमी मेक ने मोहम्मद ज़ुबैर के AltNews द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेगंडा को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि जैसा मोहम्मद ज़ुबैर ने नूपुर शर्मा के साथ किया था, वैसे ही अब वो अब उन्हें निशाना बना रहा है, सिर्फ इसीलिए, क्योंकि उन्होंने हमास जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों की पोल खोली।

उन्होंने भारत में अपने फॉलोवर्स को आगाह करते हुए कहा कि मोहम्मद ज़ुबैर नाम का एक ‘जिहादी’ वामपंथी फेक न्यूज़ पोर्टल चलाता है, जो उन्हें और उनके जैसे कई लोगों को निशाना बना रहा है। उन्होंने उसे हिन्दू घृणा और यहूदी घृणा से सना बताते हुए याद दिलाया कि कैसे उसने नूपुर शर्मा के जीवन को खतरे में डाला था। बता दें कि नूपुर शर्मा का एडिटेड वीडियो शेयर करने के बाद कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे की हत्याएँ हुई थीं। ‘सर तन से जुदा’ गिरोह ने भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा को धमकियाँ दी थीं।

एमी मेक ने याद दिलाया कि कैसे नूपुर शर्मा ने इस्लाम की पुस्तकों से तथ्य उद्धृत किए थे और पैगंबर मुहम्मद की बीवियों में से एक आयशा की उम्र बताई थी जो उस समय मात्र 6 साल की थी। इसके बाद उन्हें हत्या की धमकियाँ मिलने लगीं। अमेरिकी महिला पत्रकार ने कहा कि मोहम्मद ज़ुबैर भारत में गिरफ्तार भी किया गया था और वो एक खतरनाक व्यक्ति लगता है जो अपने समर्थकों को लोगों को प्रताड़ित करने के लिए उकसाता है।

उन्होंने ये सवाल भी दागा कि क्या मोहम्मद ज़ुबैर को अरबपति जॉर्ज सोरोस की ‘ओपन सोसायटी फाउंडेशन’ से पैसे मिलते हैं? जो भारत में रह रहे भारत विरोधी तत्वों की फंडिंग करता है? उन्होंने लोगों से मोहम्मद ज़ुबैर के बारे में और सूचनाएँ साझा करने की अपील की। साथ ही कहा कि उन्होंने सुना है कि वो लोगों की प्राइवेट जानकारियाँ भी खुलेआम शेयर कर देता है। याद दिला दें कि नूपुर शर्मा मामले में ज़ुबैर ने बड़ी चालाकी से उस बहस में शामिल तस्लीम रहमानी का वीडियो काट कर हटा दिया था, जो बार-बार शिवलिंग पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहा था।

मध्य-पश्चिम भारत में इजरायल के काउंसल जनरल कोब्बी शोषनी ने भी मोहम्मद ज़ुबैर की ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “इजरायल को लेकर झूठ खबरें और घृणा फैलाना बंद करो। अगर तुम सच में अपने-आप को फैक्टचेकर बताते हो तो इजरायल जाओ।” मोहम्मद ज़ुबैर लगातार ट्विटर का इस्तेमाल कर के हमास को पीड़ित दिखाने में लगा हुआ है। जबकि हमास एक आतंकवादी संगठन है जिसने इजरायल में नरसंहार किया।

इजरायल इस वक्त कई फ्रंड पर युद्ध लड़ रहा है। न सिर्फ हमास, बल्कि लेबनान का हिज्बुल्ला भी उसके पीछे पड़ा हुआ है। हिज्बुल्ला ने सीमा पर इजरायल की सेना (IDF) के सर्विलांस कैमरों को तबाह करने का दावा किया है। हमास ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव में फिर से रॉकेट्स दागे हैं। इजरायल में 1400 लोग हमास के हमलों में मारे जा चुके हैं। अब तक 3968 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 351 अब भी अस्पताल में हैं।

‘मुझे बोला पोटैशियम ऑक्साइड… रमजान में घर पर पोर्क भेजा’ : AltNews वाले मोहम्मद जुबैर ने 16 ट्विटर यूजर्स पर कराई FIR, शिकायत में अजीत भारती का भी नाम

                                           मोहम्मद जुबैर ने 16 ट्विटर अकॉउंट के खिलाफ की शिकायत
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने बेंगलुरु में 16 ट्विटर अकॉउंट्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। जुबैर का कहना है कि इन ट्विटर अकॉउंट्स के कारण उसे हत्या की धमकियाँ आ रही हैं। इन 16 यूजर्स में से एक अजीत भारती का अकॉउंट भी है।

जुबैर की शिकायत है कि अजीत भारती ने उसे पोटैशियम ऑक्साइड कहा जिसका फॉर्मूला (K2O) होता है। जुबैर के अनुसार ऐसा कहकर उसे मजहब के आधार पर गाली दी गई है। इसका संबंध खतने होता है।

अजीत भारती के अलावा उसने @Cyber_Huntss नाम के ट्विटर यूजर के विरुद्ध शिकायत दी। जुबैर ने कहा कि @Cyber_Huntss ने उसे पेट फूड वेबसाइट (Pet Food Website) के जरिए रमजान के वक्त पोर्क भेजा और उसकी लोकेशन डिस्कलोज की।

दरअसल, 9 अप्रैल को @Cyber_Huntss ने एक ट्वीट किया था जिसमें बताया गया था कि जुबैर के घर पोर्क जाने के लिए डिस्पैच हो गया है। इस ट्वीट से कथिततौर पर जुबैर का अड्रेस रिवील हो रहा था। इसीलिए उस ट्वीट को प्लेटफॉर्ट से बाद में हटा दिया गया। अब जुबैर ट्विटर यूजर पर कार्रवाई चाहता है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जुबैर ने शिकायत कहा, “पोर्क भेजने की हरकत से मेरी पहचान को निशाना बनाना साफ है, ये मुसलमानों के लिए स्वीकार्य नहीं है। विशेष रूप से रमजान के दौरान प्रतिबंधित मीट भेजना मेरी मजहबी पहचान पर हमला और मेरी गरिमा का अपमान है।”

उसने शिकायत में कहा है कि सोशल मीडिया पर उसके बारे में झूठ और फर्जी बातें फैलाकर, उसकी मुस्लिम पहचान पर हमला करके, लोकेशन की जानकारी देकर… केवल भीड़ को उसके खिलाफ उकसाया गया है। उसकी एफआईआर में अजीत भारती समेत कई लोगों के नाम है।

जुबैर ने कहा है कि इन ट्विटर यूजर्स की हरकतें सिर्फ उसका नुकसान नहीं कराएँगी बल्कि दो समुदायों में नफरत भी बढ़ाएँगी। इस केस को डीजे हल्ली पुलिस थाने में 17 अप्रैल को दर्ज कराया गया था। हालाँकि ये मामला प्रकाश में 4 मई को आया है। केस को आईपीसी की धारा 505, 153ए, 506, 504 के तहत दर्ज किया गया है।

जुबैर ने शिकायत में अजीत भारती के 6 मार्च 2023 के एक पोस्ट का उल्लेख किया है। उसने कहा है कि इसमें उसकी मजहबी पहचान को निशाना बनाकर, ‘जिसका कटा हुआ है’ कहा गया। जुबैर के अनुसार वो एक मुस्लिम है और ऐसा कहने से उसकी मजहबी पहचान को ठेस पहुँची है। इतना ही नहीं, उसने यह भी कहा कि उसे जो पोटैशियम ऑक्साइड कहा गया वो भी उसके लिए अपमानजनक है क्योंकि इसका फॉर्मूला K2O होता है जिसका प्रयोग मुस्लिम पुरुषों को गाली देने के लिए प्रयोग किया जाता है।

16 ट्विटर यूजर्स के विरुद्ध शिकायत देने वाला मोहम्मद जुबैर अकसर अपने अकॉउंट पर झूठ बताते और नफरत फैलाते पकड़ा जा चुका है। उसी ने नुपूर शर्मा केस में एक टीवी डिबेट से एक छोटी क्लिप लेकर अपने ट्विटर पर शेयर किया था और उसके बाद देश में कितना बवाल हुआ ये किसी से छिपा नहीं है। कन्हैयालाल से लेकर उमेश कोल्हे को शर्मा का समर्थन करने पर मारा गया। जुबैर एक लोनी के एक मामले पर ट्विटर पर झूठ फैला चुका है।(साभार)

जो पत्रकार नहीं एडिटर्स गिल्ड को उसकी चाहिए रिहाई, जो एडिटर इन चीफ उस पर खानापूर्ति: जुबैर और अर्नब में ऐसे फर्क करता है इकोसिस्टम

नूपुर शर्मा के मुद्दे पर निष्पक्ष रूप से कहा जा रहा है कि हिन्दू नूपुर को इस्लामिक किताब में लिखी बात को बोलने के लिए उकसाने वाले तस्लीम रहमानी, और उसी बात को पैगम्बर का अपमान बताकर देश में हंगामा करवाने वाले altnews के मोहम्मद जुबेर का कोई नाम नहीं लेता, क्यों? चलो देर आये दुरुस्त आये, हिन्दुओं के विरुद्ध घृणा फ़ैलाने वाले मोहम्मद जुबेर को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर उचित न्याय की ओर सही कदम है। ये वही जुबेर है जो एक ही दिन में हिन्दू घृणा वाले 28 ट्वीट डिलीट करता है।  
हिन्दू देवी-देवताओं का खुलेआम अपमान करने वाले मोहम्मद जुबैर की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी पर ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने लंबा-चौड़ा बयान जारी किया है। इसमें AltNews के सह-संस्थापक की गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए कहा गया है कि 2018 के एक ट्वीट को लेकर 27 जून, 2022 को ये कार्रवाई की गई। EGI ने दिल्ली पुलिस से मोहम्मद जुबैर को तुरंत रिहा करने की माँग की है।

गिल्ड ने अपने बयान में कहा, “घटनाओं को विचित्र मोड़ देते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मोहम्मद जुबैर को पूछताछ के लिए बुलाया था। ये 2020 का मामला था, जिसमें उच्च न्यायालय ने उन्हें गिरफ़्तारी से राहत दे रखी है। जब जुबैर ने समन पर प्रतिक्रिया दी तो उन्हें इसी महीने शुरू की गई एक आपराधिक जाँच के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। एक अज्ञात पहचान वाले ट्विटर हैंडल ने उनके 2018 के एक ट्वीट पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया था।” मोहम्मद ज़ुबैर ट्विटर पर कह चुका है कि वो पत्रकार नहीं है, फिर उसके लिए EGI सामने क्यों आया?

इस बयान में कहा गया है कि IPC की धाराओं 153 और 295 लगा कर मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार किया जाना काफी आकुल करने वाला है, क्योंकि उसकी वेबसाइट AltNews ने पिछले कुछ समय में फेक न्यूज़ को चिह्नित करने में ‘उदाहरण पेश करने वाले’ कार्य किए हैं और ‘दुष्प्रचार अभियानों को काटा’ है। EGI का कहना है कि मोहम्मद जुबैर ने ये सब तथ्यात्मक और वस्तुनिष्ठ तरीके से किया है। साथ ही संस्था ने कहा कि टीवी पर सत्ताधारी पार्टी के एक प्रवक्ता के ‘ज़हरीले बयान’ का खुलासा था, जिस कारण पार्टी को बदलाव करना पड़ा।

अर्णब गोस्वामी EGI के लिए पत्रकार होते हुए भी पत्रकार नहीं हैं। मोहम्मद जुबैर खुद को पत्रकार न बताते हुए भी इनके लिए पत्रकार है। तभी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सेलेक्टिव आउटरेज का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है, जहाँ वो खुद चुनता है कि कब किसकी गिरफ़्तारी को छिपाना है और किसे उठाना है। अब संस्था बताए कि क्या वो जुबैर के हिन्दू देवी-देवताओं वाले ट्वीट्स-पोस्ट्स का समर्थन करता है? वो खुद को खुलेआम हिन्दू विरोधी घोषित कर दे फिर।

वहीं अर्णब गोस्वामी को जब उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित करते हुए उद्धव ठाकरे सरकार की मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब EGI ने काफी दबाव के बाद दो पैराग्राफ में बयान जारी कर इतना लिख इतिश्री कर ली थी कि पुलिस उनके साथ अच्छा व्यवहार करे। रिहाई की माँग नहीं की गई थी और जिन आरोपों के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उन्हें हाइलाइट किया गया था। जबकि जुबैर के मामले में उसके अपराधों के बारे में कुछ नहीं बताया गया है और सीधा उसे छोड़ने की माँग की गई है।

वहीं मोहम्मद जुबैर के समय EGI खुद ही जज बन बैठा है और कह रहा है कि AltNews की ‘सतर्क चौकसी’ ने उन लोगों को नाराज़ कर दिया था, जो दुष्प्रचार को एक हथियार बना कर समाज का ध्रुवीकरण करते हैं और राष्ट्रवादी भावनाओं को उकसाते हैं। एक तरह से ऐसा लग रहा है जैसे ये किसी विपक्षी पार्टी का बयान हो, पूर्णतः राजनीतिक। लोकतंत्र को लेकर G7 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता की याद दिलाते हुए एडिटर्स गिल्ड ने ऑफलाइन और ऑनलाइन कंटेंट्स की सुरक्षा की सलाह दी है।

अब सवाल उठता है कि जो खुलेआम खुद को पत्रकार ही नहीं मानता, उसकी रिहाई के लिए ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने क्यों दिन-रात एक किया हुआ है? जबकि जो उस समय भारत के सबसे ज्यादा टीआरपी वाले चैनल का मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ है, उसके लिए सिर्फ खानापूर्ति की गई थी। EGI ने जैसे अर्णब गोस्वामी के समय आत्महत्या के लिए उकसाने वाले आरोप का जिक्र किया था, अब उसने मोहम्मद जुबैर के सारे हिन्दूफोबिया वाले ट्वीट्स का जिक्र क्यों नहीं किया?

अगर ये संस्था पत्रकारों के हितों की बात करती है तो फिर इसे राष्ट्रवाद से क्या दिक्कत? हिन्दू एकता को ध्रुवीकरण का नाम देकर इसे क्यों भला-बुरा कह रहे ये? पत्रकारिता की बात करें ना। सत्ताधारी पार्टी से इनकी क्या दुश्मनी? बंगाल में पत्रकारों पर हमले पर हमले होते हैं, तब ये कहाँ चले जाते हैं? तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या TMC का नाम तो छोड़िए, एक बयान तक नहीं आता। छत्तीसगढ़ और आंध्र में पत्रकार गिरफ्तार किए जाते हैं तब इनकी घिग्घी बँधी रहती है, क्योंकि वहाँ इनके आकाओं की सरकार होती है।

अवलोकन करें:-

‘हनीमून होटल’ को ‘हनुमान होटल’ बताने वाला मोहम्मद जुबेर गिरफ्तार ; राहुल गाँधी ने कहा- ऐसी हजार

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‘हनीमून होटल’ को ‘हनुमान होटल’ बताने वाला मोहम्मद जुबेर गिरफ्तार ; राहुल गाँधी ने कहा- ऐसी हजार

असल में इनका काम पत्रकारिता है ही नहीं। इनका कार्य है कॉन्ग्रेस और TMC जिसे दलों के साथ मिल कर भाजपा विरोधी एजेंडा चलाना और इसी के तहत ये तय करते हैं कि किस पत्रकार को मार भी डाला जाए तो चूँ नहीं करना है और किसे मच्छर भी काट ले तो देश-दुनिया में हंगामा मचाना है। अब इनकी कोशिश होगी कि हर एक घटना के नैरेटिव का उर्दू और अरबी में अनुवाद कर के अपने क़तर के आकाओं को भेजें और उनसे बयान जारी करवाएँ।

‘हनीमून होटल’ को ‘हनुमान होटल’ बताने वाला मोहम्मद जुबेर गिरफ्तार ; राहुल गाँधी ने कहा- ऐसी हजारों आवाज उठेंगी

इस्लामिक किताब में लिखी बात को नूपुर शर्मा द्वारा कहने को मोहम्मद जुबेर ने पैगम्बर का अपमान बता देश में अशांति फैला दी। जुबेर की पत्रकारिता उस समय कहां थी, जब वही बात ज़ाकिर नाइक ने कही थी।और अब नूपुर के समर्थन में उतरे विदेशी मौलाना भी क्या अपने ही पैगम्बर का अपमान कर रहे हैं? अगर जुबेर निष्पक्ष पत्रकार था, फिर एक ही दिन में घृणा वाले 28 ट्वीट क्यों डिलीट किये थे? पुलिस को इसके बैंक खातों की भी जाँच करनी चाहिए। 

जहाँ तक राहुल गाँधी और लिबरल जो जुबेर की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे हैं, इन्ही लोगों ने अयोध्या, मथुरा और काशी को विवादित बनाया। कोर्ट में राम को काल्पनिक कहने वाली कांग्रेस समर्थित यूपीए सरकार ही थी।

धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के लिए स्पेशल सेल ने मजिस्ट्रेट से 4 दिनों का रिमांड माँगा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जाँच के दौरान जुबैर का आचरण संदिग्ध पाया गया था। इसलिए साजिश को उजागर करने के लिए उसे गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ का कहना है कि मोहम्मद जुबैर पुलिस के सवालों से बचता रहा। उसने जाँच के लिए ना ही जरूरी तकनीकी उपकरण मुहैया कराए और न ही जाँच में सहयोग किया। पुलिस का कहना है कि वह पहले भी आपत्तिजनक ट्वीट करके नफरत फैलाने की कोशिश की थी।

पुलिस का कहना है कि पर्याप्त सबूत के आधार पर ही उसे गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, मोहम्मद जुबैर पर मामला ट्विटर पर हनुमान भक्त @balajikijaiin हैंडल के एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया है। इस हैंडल ने मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट “2014 से पहले: हनीमून होटल और 2014 के बाद: हनुमान होटल” पोस्ट के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया था।

पुलिस के अनुसार, ट्वीट की एक तस्वीर में होटल का साइनबोर्ड दिख रहा है। इस पर लिखे ‘हनीमून होटल’ को बदलकर ‘हनुमान होटल’ कर दिया गया है। हनुमान भक्त @balajikijaiin ने ट्वीट किया, “हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है, क्योंकि वे ब्रह्मचारी हैं। कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें।”

दिल्ली पुलिस ने कहा कि मोहम्मद जुबैर के उस पोस्ट में एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ प्रयोग तस्वीर और शब्द अत्यधिक उत्तेजक है और लोगों के बीच नफरत को भड़काने के लिए पर्याप्त है। यह सार्वजनिक शांति के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।

जुबैर के समर्थन में आए विपक्षी दल

भाजपा विरोध से विपक्षी दल इतने ग्रस्त हो चुके हैं कि उन्हें मोहम्मद जुबैर की गैर-कानूनी गतिविधियाँ दिखाई नहीं दे रही हैं। कॉन्ग्रेस, TMC, वामपंथी दल सहित लगभग सभी दलों ने इस गिरफ्तारी को लेकर जुबैर के समर्थन में खड़े हो गए। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी इस गिरफ्तारी का विरोध किया है।
राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा, “सच्चाई की एक आवाज को बंद करोगे तो ऐसी हजारों आवाजें और उठेंगी। भाजपा की नफरत, कट्टरता और झूठ को बेनकाब करने वाला हर व्यक्ति उसके लिए खतरा है। सच्चाई की निरंकुशता पर हमेशा विजय होती है।”
तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद मोईना मित्रा ने जुबैर के कारनामे को भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट किया, “जुबैर को एक मनगढ़ंत केस में गिरफ्तार किया गया है, जबकि मिसेज फ्रिंज शर्मा सुरक्षा के साये में जिंदगी का आनंद उठा रही हैं।”
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प्रोपेगेेंडा फैलाने में माहिर मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी के बाद लिबरल और वामपंथी गिरोह उसके बचाव में उतर आया और अपनी छाती पीट रहा है। इनमें शबनम हाशमी, राना अय्यूब, राजदीप सरदेसाई, शशि थरूर, कविता कृष्णन जैसे लोग शामिल हैं।