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15 अगस्त और क्रिकेट : धोनी के नाम रिकॉर्ड और रिटायरमेंट

15 अगस्त, भारत के लिए गौरव का दिन। ये तारीख, हर हिंदुस्तानी के आज़ाद होने का प्रमाण है। इस दिन अंग्रेजों की बेड़ियों से छूटकर भारत आजाद हुआ था। ये ऐतिहासिक दिन है, लेकिन भारतीय क्रिकेट और क्रिकेट फैन के नजरिये से देखेंगे, तो पता चलता है कि 15 अगस्त का दिन ठीक नहीं रहा है। टीम इंडिया का प्रदर्शन 15 अगस्त को बेहद ही खराब रहा है। न बल्लेबाज चले हैं और न ही टीम ने कोई टेस्ट मुकाबला जीता है.

ये भी बताना जरूरी है कि भारत के महान कप्तान और विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी ने पिछले साल इसी दिन संन्यास की घोषणा की थी। इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर धोनी ने क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कहा था। धोनी का यहां पर जिक्र करना जरूरी है, क्योंकि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सिर्फ ही एक ही भारतीय बल्लेबाज ने टेस्ट में पचासा लगाया है और वो हैं एमएस धोनी। 

धोनी के नाम अनोखा रिकॉर्ड 

धोनी का टेस्ट करियर बतौर बल्लेबाज उतना बेहतर नहीं रहा। बावजूद इसके कई रिकॉर्ड्स उनके नाम आज भी दर्ज है। धोनी ने इंग्लैंड के खिलाफ ‘द ओवल’ टेस्ट में 82 रनों की पारी खेली थी।  साल 2014 का वो इंग्लैंड दौरा था। धोनी टीम के कप्तान थे, और इस सीरीज का आखिरी मुकाबला ओवल में ही खेला गया था। पांच मैचों की इस सीरीज को इंग्लैंड ने 3-1 के अंतर से जीता था और ये 15 अगस्त के दिन ही शुरू हुआ था। 

इंग्लैंड के कप्तान एलेस्टेयर कुक ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था।  भारत की बल्लेबाजी फ्लॉप रही। पहले दिन ही टीम 148 पर लुढ़क गई, जिसमें धोनी ने अकेले सबसे ज्यादा 82 रन बनाए थे। यूं कहिये कि धोनी ने लाज बचा ली थी। लेकिन दूसरी पारी में टीम इंडिया और बुरा खेली, महज 94 रनों पर टीम सिमट गई, इस मैच में अंग्रेजों ने धोनी सेना को पारी और 244 रनों के अंतर से हराया था। 

आंकड़ों की बात की जाए तो 15 अगस्त के दिन भारत ने अब तक पांच टेस्ट मैच खेले हैं।  1936, 1952, 2001, 2014 और 2015, इसमें तीन बार सामना भारत का इंग्लैंड से ही हुआ है, और दो बार टीम इंडिया बुरी तरह से हारी है। 1936 में 9 विकेटों से इंग्लैंड ने पटका,  जबकि 2014 में पारी और 244 रनों के अंतर से। साल 1952 वाला टेस्ट मैच ड्रॉ हुआ था। 

दिलचस्प बात ये है कि तीनों ही मुकाबले द ओवल में खेले गए थे। दूसरी तरफ, 2001 और 2015 में भारत का सामना श्रीलंका से हुआ था। दोनों बार मुकाबला गाले में खेला गया। साल 2001 में श्रीलंका ने दस विकेटों से और 2015 में 63 रनों से भारत को हराया था। 

स्वतंत्रता दिवस के दिन टीम इंडिया का रिकॉर्ड बेहद ही खराब रहा है। इस बार मुकाबला लॉर्ड्स में खेला जा रहा है, और 15 अगस्त के दिन टीम इंडिया बल्लेबाजी कर रही है। उम्मीद यही कर सकते हैं कि न सिर्फ टीम इंडिया मैच जीते, पचासा और शतक लगाकर हिंदुस्तानी फैंस को स्वतंत्रता दिवस का तोहफा दें। 

माही के बेमिसाल क्रिकेट करियर की दिलचस्प बातें


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारतीय क्रिकेट टीम को एक नई पहचान देने वाले, टीम इंडिया को दो बार विश्व चैंपियन और पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाने वाले। दुनिया के सबसे सफल विकेटकीपरों व फिनिशर के रूप में शुमार महेंद्र सिंह धोनी आज पूरे 38 साल के हो गए हैं। एक सामान्य परिवार में पल बढ़कर टीम इंडिया का कप्तान बनने तक का उनका जीवन संघर्षमय रहा है। उन्होंने इस मुकाम को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की। उनके जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और सफलता को देखते हुए उन पर बॉलीवुड में फिल्म भी बनाई गई (MS Dhoni an untold story)। उनके जीवन के कई पल व पहलू ऐसे हैं जिन पर फिल्म में ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। आईए उनके जीवन के कुछ ऐसे ही पहलुओं पर गौर करें जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे। 
भूत बनकर गार्ड्स को डराया 
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी मैदान पर काफी शांत और सहज दिखाई पड़ते हैं लेकिन मैदान से बाहर वह अपने दोस्तों और परिवार के साथ खुलकर मस्ती करते हैं। ऐसा ही एक वाकया उस दौर का है जब वह पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्टेशन पर टीटीई (2001-2003) के रूप में कार्यरत थे। वो दौर मोबाइल फोन और वीडियो का नहीं था लेकिन अपने दोस्तों के साथ वो कई तरह के प्रैंक करते थे। ऐसे में काम और क्रिकेट खेलने के बाद जब वह थक जाते तो रेलवे के दोस्तों के साथ मिलकर रेलवे क्वार्टर्स के आस-पास सफेद चादर ओढ़कर रात के वक्त घूमते और गार्ड्स को बेवकूफ बनाते और डराते कि रात के वक्त वहां भूत घूमते हैं। कुछ दिनों में ये खबर पूरे शहर में फैल गई।
72 लाख में बिका बल्ला 
शायद आपको याद न होःमहेंद्र सिंह धोनी दुनिया में एकमात्र ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने वन-डे में सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शतक जमाए और वह भी पाकिस्तान के खिलाफ दिसंबर 2012 में। महेंद्र सिंह धोनी ने वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ जिस बल्ले से विजयी शॉट खेला था और वह बल्ला 72 लाख रुपए में बिका था।बिहार से अलग होकर नए राज्य के रूप में भारतीय नक्शे पर आने वाले झारखंड की ओर से महेंद्र सिंह धोनी पहले क्रिकेटर बने जिन्हें टीम इंडिया में जगह मिली। 
दिलचस्प बातें 
महेंद्र सिंह धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ वन-डे और टेस्ट करियर में अपना पहला शतक जमाया। 2005-2006 में जमाए इन दोनों प्रारूपों में धोनी ने 148-148 रन बनाए।
पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ इनके लम्बे बालों से इतने अधिक प्रभावित हुए कि धोनी को इन्हे कभी न कटवाने की सलाह तक दे दी थी। 
धोनी की ही कप्तानी में टीम इंडिया ने टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में सबसे ज्यादा रन बनाने का भारतीय रिकॉर्ड बनाया। 2009 में श्रीलंका के भारत दौरे के दौरान टीम इंडिया ने 9 विकेट पर 726 रन (पारी घोषित) बनाए थे।


वो कदम जिसने सबका दिल जीता 
टीम इंडिया के सफलतम कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी को अप्रैल 2011 में टीम इंडिया को दूसरी बार विश्व खिताब दिलाने के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल का मानद पद दिया गया। वह कपिल देव के बाद यह सम्मान पाने वाले दूसरे क्रिकेटर थे। 1 नवंबर 2011 को इन्होंने कर्नल का पद संभाला। इसके बाद वो लगातार सक्रिय रूप से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। उन्होंने टेरिटेरियल आर्मी में पद लेने के बाद आगरा स्थित पैरा रेजीमेंट में एक सैनिक की तरह ट्रेनिंग भी पूरी की। धोनी ने प्रशिक्षण लेने के लिए खुद ही सेना को लिखा था। उन्हें पैरा प्रशिक्षण स्कूल (पीटीएस) में पैराग्लाइडिंग तथा स्काई डाइविंग का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने साल 2015 में ये ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने पांच बार पैराशूट से जंप लगाई। धोनी ने चार बार 1200 फीट और एक बार 1600 फीट की ऊंचाई से जंप लगाने का साहस दिखाया था।
DHONIजब खास अंदाज में लिया पद्म भूषण
जब धोनी को देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया। इस मौके पर वह सेना की वर्दी पहनकर परेड करते हुए मंच तक पहुंचे। पद्म भूषण सम्मान से नवाजा जाना तो बड़ी बात थी ही लेकिन इसे आर्मी की वर्दी में रिसीव करके धोनी ने इस पर चार चांद लगा दिए। धोनी ने ऐसा कर यह बता दिया कि चाहे वर्दी किसी भी रंग की हो वो उसे पहनने में गौरान्वित महसूस करते हैं। 
देवड़ी माता में है अटूट आस्था
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की भगवान में भी आस्था है। धोनी रांची से तकरीबन 80 किमी दूर देवड़ी माता के मंदिर में अक्सर जाया करते हैं। उनकी देवड़ी माता में अटूट आस्था है। वह अपने जीवन के खास दिनों- जैसे जन्मदिन या किसी प्रमुख दौरे या टूर्नामेंट से पहले माता के दरबार में माथा टेकने जरूर जाते हैं।
जब तक धोनी बड़े स्टार नहीं बने थे तब तक इस मंदिर को ज्यादा लोग नहीं जानते थे। धोनी के वहां आने-जाने के बाद इस मंदिर को भी खूब सुर्खियां मिलने लगीं। साल 2011 में धोनी ने इसी मंदिर में विश्व कप विजय की मन्नत मानी थी। 
बाइक्स हैं धोनी का पहला प्यार
महेंद्र सिंह धोनी को बाइक चलाने और बाइक कलेक्शन का शौक है। उनके बाइक्स के जखीरे में तकरीबन 30 बाइक्स हैं। इसमें उनकी पहली बाइक याम्हा वाईएक्स 100 से लेकर हार्ले डेविडसन जैसी बाइक्स शामिल हैं। उन्हें कई बार गृह नगर रांची में बाइक की सवारी करते हुए देखा जाता है। उनके इस कलेक्शन में दुनिया भर की कई जानी मानी सुपरबाइक्स और विंटेज बाइक्स मौजूद हैं।
एमएसडी के बाइक्स के कलेक्शन में कावासाकी निंजा एच 2, डुकाटी 1098, कॉन्फेडरेट एक्स-132 हैलकेट, हार्डले डेविडसन फैट बॉय, निन्जा जेडएक्स-14आर, यामाहा आरडी -350, बीएसए गोल्डस्टार और यामाहा थंडरकैट मौजूद हैं। वह अपनी बाइकिंग का शौक ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्धा फॉर्मूला वन सर्किट में भी पूरा कर चुके हैं। सबसे रोचक बात यह है कि धोनी अपनी बाइक्स की देखरेख और सर्विस खुद ही करते हैं और उन्हें यह काम करने में मजा आता है।
कुत्तों से खास लगाव
धोनी कुत्तों से बेहद प्यार करते हैं। उन्हें अपने पालतू कुत्तों के साथ कई बार मस्ती करते देखा गया है। धोनी के कुछ कुत्तों के नाम सैम, जारा और जोया और लिली थे। जिसमें से सैम की मौत दिसंबर 2012 में हो गई थी। धोनी जब भी अपने घर रांची जाते हैं तो पालतू कुत्तों के साथ जी भर के खेलते हैं और उन्हें ट्रेनिंग भी देते हैं। इसके वीडियो वो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं। धोनी ने एक बार कुत्तों के साथ खेलती बेटी जीवा का भी वीडियो प्रशंसकों के साथ शेयर किया था। वह कई बार मैदान पर पुलिस के कुत्तों के साथ भी खेलते दिख चुके हैं।

धोनी 'बलिदान बैज' मामलाः धोनी की पहचान देश की पहचान है, सेना की पहचान है और यह राजनीति नहीं है। : किरन रिजिजू,खेल मंत्री

MS Dhoni Kiran Rijiju
नवनियुक्त खेल मंत्री किरन रिजिजू ने शुक्रवार(जून 7) को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों पर बने सेना के चिन्ह पर उठे विवाद पर पूर्व कप्तान के साथ खड़े रहना चाहिए। रिजिजू ने यहां संवाददाताओं से कहा, 'मुझे उम्मीद है कि बीसीसीआई इस मुद्दे को आईसीसी के पास ले जाएगी और मुद्दा सुलझा लिया जाएगा। धोनी की पहचान देश की पहचान है, सेना की पहचान है और यह राजनीति नहीं है। बीसीसीआई को धोनी के साथ खड़ा रहना चाहिए।'
रिजिजू ने साथ ही कहा कि सरकार खेल संघों के मामलों में दखल नहीं देगी। उन्होंने कहा, "मैं एक बात साफ कह देना चाहता हूं कि सरकार खेल संघों के मामले दखल नहीं देगी। बीसीसीआई या कोई और संघ, वो स्वतंत्र हैं और अपना काम स्वतंत्र रूप से कर रही हैं।" रिजिजू ने कहा कि आईसीसी से इस मुद्दे पर बात करते वक्त बीसीसीआई को भारतीय नागरिकों का ध्यान भी रखना चाहिए। 
रिजिजू ने कहा, "विश्व कप के दौरान जो मुद्दा उठा वह भारत के सम्मान की बात है। मुझे लगता है कि बीसीसीआई को अपने स्तर पर इस मुद्दे को आईसीसी के पास ले जाना चाहिए और भारतीय नागरिकों की भावना को ध्यान में रखना चाहिए।" उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि बीसीसीआई इस मुद्दे को सलीके से आईसीसी के समक्ष ले जाए और अगर जरूरी हो तो सरकार को खबर करे।" प्रशासकों की समिति (सीओए) ने आईसीसी से अपील की है कि वह धोनी को अपने दस्तानों पर सेना के चिन्ह का उपयोग करने दें।
MS Dhoni
ICC ने ख़ारिज की BCCI की माँग 
महेंद्र सिंह धोनी विकेटकीपिंग के दस्तानों पर कृपाण वाले चिन्ह ने भारतीय क्रिकेट प्रशासकों को आईसीसी के खिलाफ लाकर खड़ा कर दिया क्योंकि बीसीसीआई ने विश्व संस्था के इसे हटाने के अनुरोध को मानने के बजाय इस स्टार खिलाड़ी द्वारा इसे लगाये रखने की अनुमति मांगी है। प्रशासकों की समिति प्रमुख विनोद राय ने कहा कि धोनी इसे लगाना जारी रख सकते हैं क्योंकि यह सेना से जुड़ा नहीं है। हालांकि विश्व संस्था ने बीसीसीआई की मांग को खारिज कर दिया है क्योंकि नियमों के अनुसार विकेटकीपर के दस्ताने पर केवल एक ही प्रायोजक का ‘लोगो’ लगाने की अनुमति दी जाती है। धोनी के मामले में वह पहले ही अपने दस्तानों पर एसजी का लोगो पहनते हैं। उन्हें इस चिन्ह को लगाये रखना ‘उपकरण प्रयोजन उल्लघंन’ होगा।
भारत के दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरुआती मैच के दौरान धोनी के दस्तानों पर कृपाण वाला चिन्ह बना हुआ था जो कि सेना के प्रतीक चिन्ह जैसा लग रहा था। राय ने पीटीआई से कहा, ‘बीसीसीआई पहले ही मंजूरी के लिये आईसीसी को औपचारिक अनुरोध कर चुका है। आईसीसी के नियमों के अनुसार खिलाड़ी कोई व्यावसायिक, धार्मिक या सेना का लोगो नहीं लगा सकता है। हम सभी जानते हैं कि इस मामले में व्यावसायिक या धार्मिक जैसा कोई मामला नहीं है।’
MS Dhoniउन्होंने कहा, ‘‘और यह अर्द्धसैनिक बलों का चिन्ह भी नहीं है और इसलिए धोनी ने आईसीसी के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है।’ उनका यह बयान आईसीसी के बीसीसीआई से किये उस अनुरोध के बाद आया है जिसमें विश्व में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था से धोनी को दस्ताने से चिन्ह हटाने के लिये कहने को कहा था। इस संदर्भ में उसने नियमों का हवाला दिया जो खिलाड़ियों को ‘‘राजनीतिक, धार्मिक या जातीय गतिविधियों या किसी उद्देश्य के लिये संदेश का प्रदर्शन करने से रोकते हैं। ’’
बीसीसीआई के आग्रह के बाद आईसीसी क्रिकेट संचालन टीम इस मसले पर विश्व कप प्रतियोगिता तकनीकी समिति के साथ इस पर चर्चा करेगी। इन दोनों के प्रमुख ज्योफ अलारडाइस हैं। 

बीसीसीआई को यह साबित करना होगा कि धोनी के दस्ताने पर बना कृपाण का चिन्ह सेना का प्रतीक नहीं है और अगर प्रतियोगिता तकनीकी समिति उससे सहमत हो जाती है तो धोनी को आगे भी उसे लगाने की अनुमति मिल जाएगी। धोनी प्रादेशिक सेना की पैराशूट रेजिमेंट के मानद लेफ्टिनेंट हैं और यह चिन्ह उनके प्रतीक चिन्ह का हिस्सा है।
राय ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में भारतीय टीम द्वारा सीआरपीएफ जवानों को श्रृद्धांजलि देने के लिये सेना की टोपी पहनने का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर उन्हें (आईसीसी) लगता है कि तो हम इसकी अनुमति ले लेंगे जैसा हमने पहले किया था। अगर आपको याद हो हमने सेना की कैप वाले मामले में ऐसा किया था। और अगर आईसीसी के कुछ नियम हैं तो हम उनका पालन करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘सीओए ने धोनी से बात नहीं की है।’
राय की साथी सदस्य डायना इडुल्जी ने भी धोनी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘यह कोई मुद्दा है ही नहीं। हमने टीम से बात नहीं की है लेकिन हम धोनी का समर्थन करेंगे, बल्कि हम किसी भी भारतीय खिलाड़ी का समर्थन करेंगे।’ उन्होंने साथ ही कहा, ‘धोनी विवाद पैदा करने वाले व्यक्ति नहीं है, मुझे कोई मुद्दा नहीं दिखता। उन्होंने पहले भी विशेष कैप पहनने की अनुमति दी थी। उम्मीद करते हैं कि मैच से पहले यह सब निपट जायेगा।’ 
सीओए प्रमुख ने इस संदर्भ में कहा कि अर्द्धसैनिक बल के कृपाण वाले चिन्ह में ‘बलिदान’ शब्द लिखा है जबकि धोनी ने जो लोगो लगा रखा उस पर यह शब्द नहीं लिखा है। लेकिन अगर आईसीसी ने कड़ा रवैया अपनाया तो यह तर्क भी नहीं चल पाएगा। सीओए ने यह प्रतिक्रिया आईसीसी की आपत्ति को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद दी है।