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फिर सामने आया कांग्रेस का चीन प्रेम: राहुल के सियासी गुरु पित्रोदा ने कहा- चीन हमारा दुश्मन नहीं, पड़ रही है लताड़; लेकिन राहुल संसद में मोबाइल दिखाकर क्या चीन का विरोध कर रहे थे?

राहुल गाँधी द्वारा संसद में मोबाइल लेकर इसके कलपुर्जों को Made in China बताकर क्या साबित करना चाहा रहे हैं, एक, चीन से व्यापार बंद कर भारत में ही उत्पादन कर चीन का विरोध कर रहे हैं। दो, देश में बिकने वाला हर उत्पाद Made in China नहीं बल्कि Made in India हो। दरअसल सकारात्मक दृष्टि से देखा जाए तो राहुल ने चीन का विरोध किया है। कहते हैं हर बुराई के पीछे कोई अच्छी बात जरूर छिपी होती है। क्या राहुल नहीं चाहते कि चीन से किसी भी तरह का व्यापार किया जाए? लेकिन राहुल के गुरु पित्रोदा ने चीन प्रेम दिखाकर राहुल को बचा लिया। और बाज़ी पलट दी।     

कांग्रेस का चीन प्रेम एक बार फिर खुलकर सामने आया है। इस बार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के सियासी गुरु सैम पित्रोदा ने विवादित बयान देते हुए कहा है कि मुझे चीन से खतरा समझ में नहीं आता। उन्होंने कहा कि भारत को चीन को दुश्मन मानना बंद कर देना चाहिए। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पित्रोदा ने कहा कि मुझे लगता है कि इस मुद्दे को हमेशा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है। हमारा दृष्टिकोण शुरू से टकराव वाला रहा है। ये दुश्मनी पैदा करता है। हमें अपना रवैया बदलना होगा और यह मानना बंद करना होगा कि चीन हमारा दुश्मन है।

सैम के बयान पर सियासी संग्राम शुरू हो गया है। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि ‘जो कुछ कांग्रेस और उनके थिंक टैंक कहे जाने वाले लोग समय-समय पर कहते आ रहे हैं, वो चीजे अब पूरी तरह से जनता के सामने आती जा रही हैं। ओवरसीज कांग्रेस के प्रेसिडेंट सैम पित्रोदा ने चीन को लेकर आज जिस प्रकार का बयान दिया है, उससे यह बात बहुत साफ हो गई है कि कांग्रेस पार्टी के चीन के साथ हुए करार का इजहार वो दिनदहाड़े कर रहे हैं। गंभीर बात ये है कि जिस प्रकार की बात सैम पित्रोदा ने कही है, वो भारत की अस्मिता, कूटनीति और भारत की संप्रभुता पर बहुत गहरा आघात है। उन्होंने कहा है कि चीन के साथ तो किसी प्रकार का विवाद ही नहीं है, यानी भारत ही आक्रामक मुद्रा लिए हुए है। इसी भाव और इसी विचार के अनेक स्टेटमेंट राहुल गांधी भी पहले दे चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अपने विदेश दौरे पर कहा कि चीन ने बेरोजगारी की समस्या को बहुत अच्छे से दूर किया है। गलवान में हमारे 20 सैनिक शहीद हो गए और उसके बाद आपके नेता इस प्रकार की भाषा बोलता हैं तो यह निंदनीय है।’

चीन और कांग्रेस का गुप्त समझौता

राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) और चीन के बीच वित्तीय लेन-देन की जानकारी 2020 में सामने आई थी। ऑपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 के बाद चीनी सरकार ने RGF को 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग दी थी।
2008 में UPA सरकार के दौरान कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के बीच एक समझौता (MoU) हुआ था। इसमें दोनों दलों को “महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श करने का अवसर” देने की बात कही गई थी।
राजीव गाँधी फाउंडेशन में 2005 से ही राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा ट्रस्टी के रूप में जुड़े हुए हैं, जबकि सोनिया गाँधी इसकी चेयरपर्सन हैं।
दिलचस्प बात यह है कि 2017 के डोकलाम विवाद के दौरान राहुल गाँधी ने गुपचुप तरीके से चीन के राजदूत लुओ झाओहुई से मुलाकात की थी। इसके अलावा साल 2018 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान उन्होंने गुपचुप तरीके से चीनी मंत्रियों से भी मुलाकात की थी।
यहाँ ये बात बताना भी जरूरी है कि राहुल गाँधी के परनाना और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा देकर आँख मूँदकर बैठ गए थे और चीन ने 1962 में भारत पर हमला कर दिया था। इस युद्ध में भारत की पराजय हुई थी। इससे सबक लेने की बजाए कांग्रेस लीडरशिप ने भी चीन प्रेम जारी रखा।

पित्रोदा के इस बयान पर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी, जॉर्ज सोरोस और चीन के एजेंट के रूप में काम करते हैं।

बीजेपी प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि जिन्होंने हमारी 40,000 वर्ग किमी जमीन चीन को सौंप दी, उन्हें अब भी ड्रैगन से कोई खतरा नहीं दिख रहा है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि राहुल गांधी चीन से खौफ में हैं और आईएमईईसी की घोषणा से एक दिन पहले बीआरआई की वकालत कर रहे थे। चीन के प्रति कांग्रेस पार्टी के जुनूनी आकर्षण का मूल रहस्य 2008 के कांग्रेस-सीसीपी एमओयू में छिपा है।

आजादी के बाद से ही कांग्रेस चीन के प्रति विशेष लगाव रखती आई है। कांग्रेसी नेता जवाहर लाल नेहरू के चीनी प्रेम के कारण देश को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्थायी सीट उन्हीं के कारण चीन के पास गई थी। भारत-चीन भाई-भाई के नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में ही चीन ने भारत की हजारों किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया था। उसी चीन की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के साथ कांग्रेस ने 2008 में एक गुप्त समझौता किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि कांग्रेस चीन से राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए चंदा भी लेती रही है। इतना ही नहीं 2017 के डोकलाम विवाद के दौरान कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी ने गुपचुप तरीके से चीनी राजदूत से मुलाकात भी की थी। चीनी हमलों के कारण ही गलवान में हमारे कई जवान शहीद हुए थे। ऐसे में चीन के पक्ष में इस बयान से लोग सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के गुरु और पार्टी पर भड़क गए हैं।