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‘घरों पर लेटर लगा बताते थे आज किसकी होगी हत्या’: अब ‘कश्मीर फाइल्स’ की वेब सीरीज, पीड़ित खुद बताएँगे किस बुजुर्ग की टाँगों में डाली कील, कैसे आयरन प्रेस से किया टॉर्चर

वेब सीरीज 'द कश्मीर फाइल्स: अनरिपोर्टेड' के ट्रेलर का एक दृश्य (फोटोशाभर: ZEE5)
जिस जम्मू कश्मीर को कभी धरती का स्वर्ग कहा जाता था, वो अपनी राजनीतिक भूक्षेत्र के कारण एक युद्ध के क्षेत्र में बदल गया। आखिर कश्मीरी पंडितों के पलायन और अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के पीछे क्या-क्या कारण थे? इसी सवाल का जवाब देने ZEE5 नामक OTT प्लेटफॉर्म पर ‘The Kashmir Files: Unreported’ नामक वेब सीरीज आ रही है। ये डॉक्यूमेंट्री की शक्ल में है, जिसमें पीड़ितों और विशेषज्ञों से बात की गई है।

‘The Kashmir Files: Unreported’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ही हैं, जिन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ बनाई थी। ट्रेलर की शुरुआत में एक महिला की आवाज गूँजती है, “कश्मीर में यश चोपड़ा फ़िल्में बना रहे थे, आप ‘शिकारा’ देखते थे। लेकिन, कश्मीर एक और अलग भी था जिसे हम देख रहे थे।” इसके बाद ‘आज़ादी-आज़ादी’ के नारे लगाती हुई भीड़ को दिखाया गया है। बैकग्राउंड में विवेक अग्निहोत्री की आवाज आती है, “ये कैसी पीड़ा थी, जिसे सहते-सहते आप मर भी जाएँ और उसका कुछ नाम ही न हो।”

इसके बाद वो महिला फिर से बताती हैं कि लाउडस्पीकर से जोर-जोर से आवाजें आती थीं – “हम क्या चाहते, आज़ादी।” एक बुजुर्ग महिला भी बताती हैं कि उस माहौल में डर लगता था, कि हम मरने वाले हैं। फिर लोगों ने बताया कि कैसे वो कहते थे कि हमें कश्मीर चाहिए, लेकिन हिन्दू महिलाओं के साथ, बिना हिन्दू मर्दों के। एक महिला ने बताया कि घर के बाहर लेटर्स लगा दिए जाते थे कि आज किसे मारा जाएगा। एक महिला ने बताया कि एक बुजुर्ग की टाँगों में कील डाल दी गई थी।

आतंकी कह रहे थे कि ये बूढ़े हैं, इन पर गोली क्यों खर्च करनी? एक व्यक्ति ने आयरन प्रेस से टॉर्चर किए जाने की बात कही। एक महिला ने बताया कि हम कश्मीरी कुत्ते-बिल्लियों की तरह मर रहे थे। स्क्रीन पर आकर विवेक अग्निहोत्री कहते हैं, “भारत के इतिहास में शायद ऐसा कभी नहीं हुआ।” फिर आतंकी बिट्टा कराटे का इंटरव्यू दिखाया गया है, जिसमें उसने कहा था कि अगर उसके आका उसकी माँ को मारने के लिए कहते तो भी वो मार देता।

बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। एक महिला ने कहा कि हमें इसीलिए मारा गया क्योंकि हमने भारत का प्रतिनिधित्व किया। एक पीड़ित ने बताया कि अपने देश में डर कर रहना पड़ेगा, ये नहीं पता था। विवेक अग्निहोत्री की पत्नी पल्लवी जोशी भी इसमें दिखाई देती हैं। वो कहती हैं, “इन कश्मीरी पंडितों का सत्य आखिर क्या था?” एक कश्मीरी पंडित ने रोते हुए कहा कि वो रोज घर जाना चाहिए हैं, लेकिन होटल नहीं बल्कि अपने घर में।

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि ये इतिहास का वो चैप्टर है जिसे मिटाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन आपका हक़ बनता है कि आप इसे जानें। उन्होंने से सबसे ज्यादा मानवीय टच वाली वेब सीरीज करार दिया। बता दें कि इसे डॉक्यूमेंट्री स्टाइल में बनाया गया है। इस बारे में अधिकतर रिसर्च विवेक अग्निहोत्री और पल्ल्वी जोशी ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ बनाने के दौरान ही कर ली थी। कई कहानियाँ फिल्म में छूट गई थीं, जिन्हें तथ्यों के साथ इसमें दिखाया जाएगा।


तांडव मुद्दा : हिन्दुओं के आराध्यों का अपमान बन गया है कमाई का जरिया: इलाहाबाद हाई कोर्ट

                                तांडव मामले में अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजॉन प्राइम इंडिया की नेशनल हेड अपर्णा पुरोहित को बड़ा झटका लगा है। ‘तांडव’ वेब सीरीज (Tandav Web Series) को लेकर दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने अमेजॉन प्राइम की इंडिया हेड अपर्णा पुरोहित की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अपर्णा पुरोहित पर यूपी पुलिसकर्मियों का गलत चित्रण, हिंदू देवी-देवताओं और प्रधानमंत्री के किरदार को गलत तरह से पेश किए जाने का आरोप लगाया गया है।

पुरोहित की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने 20 पेज के आदेश में कहा, “ऐसे लोग बहुसंख्यक समुदाय के आराध्य देवी देवताओं को गलत तरह से दिखाकर इसके जरिए पैसा कमाना चाहते हैं और देश की उदार और सहिष्णु परंपरा का फायदा उठाना चाहते हैं।”

न्यायाधीश ने आगे कहा कि जब देश के किसी नागरिक द्वारा इस तरह के अपराध किए जाते हैं और इसे प्रदर्शन और सामाजिक विरोध का विषय बना दिया जाता है तो वो देख के हितों के लिए सक्रिय हो जाते हैं। इसके बाद वो इसे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाते हैं और आरोप लगाते हैं कि भारतीय नागरिक असहिष्णु हो गए हैं और ‘भारत’ रहने के लिए असुरक्षित जगह बन गया है।

 

        अपर्णा पुरोहित की जमानत याचिका को खारिज करते हुए इलाहाबाद HC की एकल न्यायाधीश पीठ की टिप्पणी
स्टैंड-अप ‘कॉमेडियन’ मुन्नवर फारुकी, जिसे इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार किया था और शहर में एक शो के दौरान हिंदू देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, का संदर्भ देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि हिंदुओं के आराध्यों का अपमान कमाने के जरिया के स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है।

वेब सीरीज के विवादित दृश्यों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा, “विवादित दृश्यों के कारण कानून व्यवस्था के लिए खतरा फैलाने वाले हैं। हिंदू देवी देवताओं के चित्रण को सही नहीं ठहराया जा सकता है। विदेशी फिल्ममेकर्स ईसा मसीह या हजरत मोहम्मद को गलत तरीके से दिखाने से बचते हैं मगर हिंदी फिल्ममेकर्स लगातार गलत तरह से हिंदू देवी-देवताओं को अभी तक दिखा रहे हैं।”

जज ने इस बात को लेकर चिंता जताई कि हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने का यह ट्रेंड फिल्मों से लेकर कॉमेडी शो तक कैसे चला। आगे कहा गया है कि आवेदक (अपर्णा पुरोहित) ने सतर्कता नहीं बरती और गैर-कानूनी तरीके से उसे आपराधिक कार्यवाही के लिए विवश किया।

अदालत ने कहा, “हमें देखने में आया है कि कई फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं के नाम का उपयोग किया गया है और उन्हें गलत ढंग से दिखाया गया है जैसे ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘पीके’, ‘ओह माई गॉड’ आदि में। यही नहीं, ऐतिहासिक और पौराणिक हस्तियों की छवि भी विकृत करने के प्रयास किए गए हैं। बहुसंख्यक समुदाय की आस्था से जुड़े नामों का उपयोग पैसा कमाने के लिए किया गया है, जैसे कि ‘गोलियों की रासलीला रामलीला।” उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग की यह प्रवृत्ति बढ़ रही है और यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इसके भारतीय सामाजिक, धार्मिक और सांप्रदायिक स्थिति के लिए विध्वंसक परिणाम होंगे।

कोर्ट ने कहा कि उक्त मामलों से पता चलता है कि याचिकाकर्ता और अन्य सह आरोपितों के कृत्य से केवल एक व्यक्ति ही प्रभावित नहीं है, बल्कि देश भर में अनेक लोगों को लगता है कि यह वेब सीरीज उनकी भावना को ठेस पहुँचाती है। इसलिए आवेदक को किसी तरह की राहत देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जो फिल्म बहुसंख्यक समुदाय के मूल अधिकारों का हनन करती है उसे प्रदर्शित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है और याचिकाकर्ता के जीवन की स्वतंत्रता के मूल अधिकार को बचाव का आधार रखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है।

इस याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ ने कहा, एक तरफ तो गलत तरीके से किरदार दिखाने के कारण एक बड़े समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई गई है और दूसरी तरफ सवर्ण और दलित जातियों के बीच दूरी बढ़ाए जाने का काम किया है, जबकि राज्य की जिम्मेदारी समुदायों के बीच की दूसरी को कम कर सामाजिक, सांप्रदायिक और राजनीतिक तौर पर उन्हें एक कर देश को जोड़ने का काम करना है।”

अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अपर्णा पुरोहित की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है। इससे पहले कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखे जाने तक अपर्णा पुरोहित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। 

गौतम बुद्ध नगर जिले में अपर्णा पुरोहित समेत अन्य के खिलाफ तांडव वेब सीरीज के प्रसारण के जरिए हिंदू देवी-देवताओं और हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अपर्णा पुरोहित और अन्य के खिलाफ धारा 153- A (1) (B), 295- A, 505 (1) (B), 505 (2) धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पिछले दिनों अपर्णा का बयान बंद कमरे में दर्ज किया गया। लगभग साढ़े 3 घंटे तक उनका बयान दर्ज किया गया।

हिन्दूफोबिया फैलाने के षड्यंत्र के विविध माध्यम : वेब सीरिज, स्टैंड अप कॉमेडी, पुस्तकें, पेंटिग्स

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आज देश में हिन्दू धर्म, देवी-देवताओं का मजाक करना और हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम बॉलीवूड फिल्म, वेब सीरिज, सोशल मीडिया के माध्यम से धडल्ले से चल रहा है । प्रतिदिन सोशल मीडिया, टीवी और विभिन्न मंचों पर हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं का जो मजाक उड रहा है, उसे हमारे ही कुछ हिन्दू समर्थन देते है, यह दुर्भाग्य की बात है । बुरा भी लगे तो हम सोचते हैं कि इसका विरोध कोई और कर देगा। ठीक उसी शुतुरमुर्गी मुद्रा की तरह, जैसे जब सिर्फ हमारे घर की बिजली जाती है तो हम परेशान होते हैं, लेकिन पूरे मोहल्ले की बिजली जाती है तो निश्चिंत हो जाते हैं कि जो हमसे ज्यादा परेशान होगा, वह इसकी शिकायत करेगा।
धर्मनिरपेक्षता का राग अलापने वाले भी हिन्दू आस्था पर हो रहे आघात को न केवल चुपचाप देखते रहते हैं बल्कि इसमें रस लेते हैं। ऐसे मौके आने पर इसका कानूनी तरीके से विरोध किया जाना चाहिए। स्थानीय पुलिस के साथ संबंधित कंपनी को भी मेल, फोन या पत्र के माध्यम से शिकायत भेजनी चाहिए।
हिंदुओं में संगठन की कमी और धर्मशिक्षा का अभाव इसका मुख्य कारण है। कोई भी कंपनी या संस्था किसी अन्य धर्म के पवित्र चिह्नों को कपड़ों, जूतों पर दिखाने का साहस नहीं करती, क्योंकि उसे पता है कि इसका क्या परिणाम हो सकता है।
आइए देखते है कुछ ऐसे माध्यम जिसके द्वारा यह षड्यंत्र हो रहा है…
वेब सीरीज 
वैसे तो भारतीय सभ्यता को आघात पहुंचाने में बॉलीवुड तो पहले से ही था लेकिन इस मामले में वेब सीरीज ने बॉलीवुड को भी पिछे छोड़ दिया है। सिनेमा वाले जो असभ्यता और अश्लीलता थियेटरो में नहीं दिखा सकते उन्हें वेब सीरीज के माध्यम से आज के युवा तक उनके मोबाइल के माध्यम से पहुंचा देते हैं। आज आप जितने भी वेब सीरीज देख लो अधिकतर या कहे एक दो को छोड़कर बाकि सभी वामपंथ विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले ही मिलेंगे जो या तो राष्ट्रविरोधी होती हैं या हिन्दूफोबीक वैसे राष्ट्रविरोधी और हिन्दूफोबीक में कुछ खास अंतर नहीं हैं। नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राईम, वूट, जी 5 आदि ओटीटी प्लैटफॉर्म्स द्वारा यह हिन्दूफोबिया दिखाया जाता है।
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अभी एकता कपूर की XXX सीरीज को ही देख ले ये एक सेमी पोर्न सीरीज तो है ही लेकिन इसके दूसरे सीजन मे तो भारतीय सेना का, उनकी पत्नी की और उनके वर्दी का अपमान किया गया है।
पाताल लोक में एक हिन्दू पंडित को मंदिर में मांस खाते हुए दिखाया गया है। साथ ही गौमांस के चलते होने वाली लिंचिंग में हिन्दुओं को भगवा आतंकी दिखाने का प्रयास किया गया है।
सेकरेड गेम्स जो की भारत की पहली वेब सीरीज थी वो भी हिन्दूफोबीया से भरी हुई थी उसके पहले सीजन के शुरूआती एपीसोड में ही ये डायलोग है की भगवान को फर्क नहीं पड़ता जो कि काफी अपमानजनक हैं इसमे ये भी बताया गया की रामायण के कारण ही सबसे ज्यादा दंगे हुए हैं इस सीरिज में एक जवान मुस्लिम लड़के का फेक एनकाउंटर भी दिखाया गया हैं। इस सीरिज के दुसरे सीजन में तो हद ही हो गई जिसमें ये बताया गया की भारत ही नहीं पूरे विश्व में जहा भी आतंकवादी संगठन हैं उनकी वत्त पोषण एक हिन्दू संत की आश्रम से की जाती हैं।
उपरोक्त उदाहरणो से हम समझ सकते हैं कि किस तरह ये वेब सीरीज हमारे समाज के लिए घातक हैं और हमारे युवा पीढ़ी को किस दिशा के ओर ले जा रही हैं सेंसर नही होने का पूरा लाभ ये वेब सीरीज वाले उठा रहे हैं।
Stand up Comedy और web series के नाम पर सनातन ...स्टैंड अप कॉमेडी 
स्टैंडअप कॉमेडी के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं और परंपराओं का मजाक उड़ाने का सिलसिला अब सारी हदें पार कर चुका है। ताजा मामला सुरलीन कौर नाम की एक कथित स्टैंड अप कॉमेडियन का है जिसने अपने एक प्रोग्राम में इस्कॉन मंदिर जाने वालों के साथ-साथ खजुराहो के देवी-देवताओं तक पर बेहद भद्दे कमेंट किए हैं । इसे लेकर सोशल मीडिया पर विरोध होने के बाद सुरलीन कौर और शेमारू (Shemaroo) कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है।
हंसी-मजाक के नाम पर स्टैंड अप कॉमेडी के इन कार्यक्रमों में आम तौर पर हिंदू धर्म और देवी-देवताओं को लेकर अश्लील टिप्पणियां की जाती हैं। लेकिन ज्यादातर बार लोग नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अब ये पब्लिसिटी बटोरने और प्रोग्राम को हिट बनाने का फॉर्मूला बन गया है। इस बात की भी पुख्ता जानकारी है कि हिंदुओं को शिकार बनाने वाले ऐसे कलाकारों को ज्यादा पैसे और स्पॉन्सर मिलते हैं।



कुछ दिन पहले मुनव्वर फारुकी नाम का ये जिहादी कॉमेडियन विवादों में आया था जब उसने गोधरा में हिंदुओं की हत्या को मज़ाक़ का विषय बनाया था।
मुनव्वर फारुकी इससे पहले भगवान राम और सीता को लेकर भी अश्लील कमेंट्स कर चुका है। उसके ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
हिन्दू विरोधी पुस्तकें 
हमारे देश में कई ऐसी पुस्तकें लिखी जाती हैं, जिनमें हमारी अपनी ही विरासत का मखौल उड़ाया जाता है। इनमें से एक ‘विश्व बुक्स’ प्रकाशन संस्थान भी है, जिसकी किताबें हिंदुत्व का मजाक बनाने के लिए ही लिखी जाती हैं। ‘विश्व बुक्स’ की अधिकतर पुस्तकें बच्चों और छात्रों के लिए लिखी जाती है। वो लोग ही इसे ज्यादा पढ़ते हैं। कई पुस्तकें वयस्कों के लिए भी हैं। इनमें से अधिकतर हिन्दूघृणा से सनी हुई किताबें हैं।




उदाहरण के लिए इसके एक किताब का शीर्षक देखिए- “धार्मिक कर्मकांड- पंडों का चक्रव्यूह“, जिसमें ब्राह्मणों का मजाक बनाया गया है। इसमें हिन्दू धर्म की पूजा पद्धतियों को नकारते हुए इसे ब्राह्मणों की साजिश बताया गया है। यानी, ब्राह्मणों, साधुओं, हिन्दू धर्म और मंदिरों को बदनाम करने का ‘विश्व बुक्स’ ने बीड़ा उठाया हुआ है। राकेश नाथ द्वारा लिखित इस पुस्तक के कवर पर ही भगवा वस्त्रों में एक ब्राह्मण को कमण्डल लेकर भागते हुए दिखाया गया है।
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जब छात्र व बच्चे इन चीजों को पढ़ते होंगे तो क्या वो अपने ही धर्म और समाज के प्रति हीन भावना से ग्रसित नहीं हो जाते होंगे? ब्राह्मणों को इस तरह से पेश किया गया है जैसे वो समाज के सबसे बड़े विलेन्स हों। इसी तरह इसने जयप्रकाश यादव द्वारा लिखित पुस्तक ‘धर्म: एक धोखा’ नामक पुस्तक का प्रकाशन किया है, जिसमें धर्म को छल-कपट का विषय बताया गया है। इसके कवर पेज पर भी कमंडल लिए एक ब्राह्मण को दिखाया गया है।
हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करती पेंटिंग्स 
जैसा कि हम सभीं जानते है कि चित्रकार म.फि. हुसैन द्वारा निकाले गए चित्रों द्वारा हिन्दू-देवताओं का घोर अपमान किया है । हुसैन द्वारा पेंट की गई हिन्दू देवताओं की नग्न एवं अश्लील चित्र का वर्षों से लिलाव होते आ रहा है । अभी हुसैन जीवित नहीं है, किंतु उनके द्वारा बनाए गई यह पेंटिग्स आज भी कुछ आर्ट गैलरीज में लिलाव के लिए रखी जाती है ।
ऐसे ही एक और चित्रकार है, जिनका नाम है अकरम हुसैन । उन्होंने एक पेंटिंग बनाई है जिसमें दिखाया है कि, कैसे तिरंगे जैसी आकृति में से शराब की बोतलें और अंडरगार्मेंट्स निकल रहे हैं।
इससे पहले अकरम हुसैन ने ‘रासलीला-थीम’ को लेकर बनाई एक पेंटिंग में भगवान कृष्ण को बार में बिकनी पहनी महिलाओं में घिरा दिखाकर धार्मिक संस्थाओं को भड़का दिया था। गुवाहाटी के पुलिस उपायुक्त अमिताव सिन्हा ने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद विवादित पेंटिंग को हटा लिया गया।
साथ ही अब सोशल मीडिया पर कुछ पेंटिंग्स को पोस्ट किया जा रहा है जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं का अनादरात्मक चित्रण किया गया है ।
हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट दिखाई दे रही है जिसमें संकेत देशमुख नाम के व्यक्ति ने वह चित्र पेंट किया है । इस पेंटिंग को कोलकाता कॅन्वास नाम के इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट किया है । साथ ही पेंटिंग के निर्माता संकेत देशमुख के प्राेफाइल पर भी इसे पोस्ट किया गया है । हाल ही में प्रसारित हुई वेब सीरिज बुलबुल के आधार पर इस पेंटिंग में एक महिला को दिखाया है जिसके पिछे मां दुर्गा समान अनेक हाथ दिखाए गए है । उनमें से एक हाथ में महिला ने जलती हुई सिगारेट पकडी है । इस तरह देवी का मानवीकरण कर उसका घोर अपमान किया गया है । इससे करोडों हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई है ।
Instagram पर की गई अनादरात्मक पोस्ट का धर्माभिमानी हिन्दू वैध मार्ग से विरोध कर रहे है…
Post Link 1 : https://www.instagram.com/p/CCBzTQVjHoZ/
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित कर चर्चित होना कुछ साम्प्रदायिक तत्वों का मूलम....
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हिंदुओं की वेशभूषा और उनकी संस्कृति से जुड़े चिह्नों को लेकर अक्सर सवाल जवाब होता रहता है। एक पूरा तबका इस विषय को ....

‘आखिर हिंदुओं को कब तक ये सब झेलना पड़ेगा’: नेटफ्लिक्स की नई फिल्म Krishna & His Leela में धार्मिक भावनाओं का अपमान

कृष्णा एंड हिज लीला सीरिजआर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक 
हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित कर चर्चित होना कुछ साम्प्रदायिक तत्वों का मूलमंत्र रहा है। 80 के दशक में स्मरण कीजिए, पेंटर एम.एफ.हुसैन चर्चित हुआ, हिन्दू देवी-देवताओं की नग्न पेंटिंग्स बनाकर। इतना ही नहीं, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उसे राष्ट्रीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। लेकिन हिन्दू संगठनों ने सख्ती से विरोध नहीं किया, जिस कारण कुछ यूरोपीय उत्पादनों ने अंडरवियर, जूते और चप्पलों पर हिन्दुओं देवी-देवताओं के चित्र बनाने शुरू कर दिए, जो हिन्दुओं द्वारा घोर विरोध करने पर उनको अपने उत्पाद बाजार से वापस लेने पड़े, परन्तु यही नीच काम किसी अन्य धर्म के साथ किया होता, भगवान ही जाने उत्पादकों का क्या हाल होता?
पिताश्री एम.बी.एल.निगम(सीधे हाथ पर)
महादेव ऑडिटोरियम में विशेष अतिथियों के साथ  
स्मरण हो, 70 के दशक में मक्का फिल्म्स ने हज पर आधारित "खाने-खुदा" का निर्माण किया था, जिसे वितरित(रिलीज़) करने से पूर्व मेरे पिताश्री एम.बी.एल.निगम के सहयोग से महादेव ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में विशेष शो आयोजित कर, प्रतिष्ठित इमामों, उलेमाओं और विद्वानों से उनकी प्रतिक्रिया लेने उपरांत ही सिनेमा हॉलों पर प्रदर्शित किया गया था, लेकिन जब फिल्म हॉउसफुल में अपने आठवें सप्ताह में ही थी, कि मेरठ, उत्तर प्रदेश से विरोधी स्वर मुखरित होते ही, फिल्म का प्रदर्शन रोक दिया गया, जो आज तक पुनः प्रदर्शित नहीं हुई। उनका केवल इतना ही कहना था कि फिल्म के पोस्टर और फिल्म घिसने पर इसकी कटिंग कूड़े अथवा पैरों में आएगी, जिस कारण हमारे काबा का अपमान होगा। जबकि उसके बाद कई फिल्में आयीं, जिनमें काबा को फिल्माया गया है।  
लेकिन अब ऑनलाइन सीरीज के जरिए हिन्दू देवी-देवताओं पर घृणित सामग्री प्रसारित करने का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। ताजा कारनामा नेटफ्लिक्स (Netflix) ने अपनी नई सीरीज कृष्णा एंड हिज लीला (Krishna & His Leela) में दर्शाया है।
ओटीटी प्लैटफॉर्म नेटफ्लिक्स एक बार फिर लोगों के निशाने पर है. ट्विटर पर तेजी से #BoycottNetflix ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कृष्ण एंड हिज़ लीला एक तेलुगु फ़िल्म है जिसे रविकांत पेरेपु ने डायरेक्ट किया है। लोगों का कहना है कि भगवान कृष्ण का अपमान किया गया है। इस फिल्म से धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचती है
इस फिल्म पर हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है
आजकल जहां धर्म से जुड़ी छोटी से छोटी बातों को भी मुद्दा बना दिया जाता है। ऐसे में नेटफ्लिक्स का इस फिल्म को रिलीज करना बड़ा किसी प्रमोशन से कम नहीं लगता। आखिर विवाद और फिल्मों का लंबा नाता रहा है। खैर, अब फिल्म को लेकर विवाद काफी बढ़ चुका है
आरोप है कि फ़िल्म में हिंदुओं के भगवान श्री कृष्ण का मज़ाक उड़ाया गया है। उनके नाम वाले एक किरदार को वुमेनाइज़र दिखाया गया है। उनका कहना ये भी है कि नेटफ्लिक्स सेक्सुअल कंटेंट दिखाकर हमारी संस्कृति और धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। वहीं, फिल्म में कृष्णा की एक्स गर्लफ्रेंड का नाम राधा है. इस बात को देखते हुए लोगों का गुस्सा भड़क गया है
कृष्ण एंड हिज़ लीला एक तेलुगु फ़िल्म है, जिसे रविकांत पेरेपु ने डायरेक्ट किया है। 
इस सीरीज में एक कृष्णा नाम के लड़के के कई लड़कियों से शारीरिक संबंध होते है। इनमें से एक लडक़ी का नाम राधा भी होता है

 
अब इसी प्लॉट को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर इस सीरिज की आलोचना हो रही है। इसे बॉयकॉट करने की माँग की जा रही है। लोगो का पूछना है कि आखिर क्यों हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अभद्रता के मामले बढ़ते जा रहे हैं? क्यों हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया जा रहा है? क्या इसका कारण नेटफ्लिक्स का हिंदूफोबिक होना है?
फ़िल्म में सिद्धू जोनलगड्डा और श्रद्धा साईंनाथ मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह कृष्ण नाम के एक युवक की कहानी है, जो प्रेम में उलझा है। फ़िल्म में दो फीमेल किरदारों के नाम सत्यभामा और राधा हैं
इस फिल्म के प्रोड्यूसरों में एक राणा दग्गुबाती भी हैं। उन्हें भी लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है।वहीं, ट्विटर पर मीम्स भी खूब वायरल हो रहे हैं। मजाक उड़ाने वाले लोगों के हिसाब से नेटफ्लिक्स का विवाद में फंसना आम बात है
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, राधा-कृष्ण को हमारे समाज में प्रेम का प्रतीक माना जाता है और भगवान कृष्ण की प्रत्येक लीला भी कोई न कोई जीवन संदेश देती है है। बावजूद इन सभी पहलुओं के जानबूझकर ऐसी सामग्री दर्शकों के बीच लाना इस सीरीज के निर्माताओं की मंशा पर स्वत: ही सवाल उठाता है।
इस सीरीज के अलावा इस समय सोशल मीडिया पर नेटफ्लिक्स और अनुष्का शर्मा दोनों को हिंदूफोबिक सामग्री दर्शाने के लिए नपसंद किया जा रहा है। एक यूजर इन सीरीज के पोस्टर और कुछ क्लिप शेयर करते हुए पूछती हैं कि आखिर हिंदुओं को कब तक ये सब झेलना पड़ेगा? अगर ये सब किसी और मजहब में हुआ होता तो अब तक मूवी को बैन कराने के लिए हल्ला मच गया होता।
पाताललोक को लेकर भी हुआ था विवाद 
अभी इससे पहले अमेज़न प्राइम पर रिलीज हुई वेब सीरीज पाताल लोक भी हिंदू घृणित सामग्री दर्शाने के कारण काफी विवादों का हिस्सा बनी थी।
इस सीरीज के आने के बाद न केवल हिंदूवादी संगठनों ने इसपर अपना आक्रोश दिखाया था, बल्कि सिखों व भाजपा नेता ने भी आरोप लगाया था कि इस सीरीज में उनकी छवि को बिगाड़ने का प्रयास हुआ है। इस फिल्म को लेकर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा इतना ज्यादा फँस गईं थी कि कोर्ट ने भी उनसे पिछले दिनों नोटिस भेजकर जवाब माँगा था।