
मार्कण्डेय काटजू ने इसके पीछे का कारण भी बताया है। उन्होंने कहा कि ये सब चुनावों में मुसलमान वोट बैंक को ध्यान में रखकर किया जाता है। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि इनके सेकुलरिज्म की सच्चाई भी यही है।
उन्होंने इस्लामी कट्टरवादी पत्रकार राणा अयूब का एक वीडियो भी शेयर किया है। बकौल काटजू, इस वीडियो में अयूब ‘सेकुलरिज्म चैंपियन’ हैं और हिन्दू कट्टरवाद का विरोध करती हैं, लेकिन इस्लामी पिछड़ेपन पर कोई बात नहीं करती।
काटजू ने कहा कि 2014 से भारत में जो बहुसंख्यकवाद शुरू हुआ, वो उससे पहले दशकों तक सेकुलर पार्टियों द्वारा की गई हरकतों का नतीजा था। उन्होंने इसके पीछे मुस्लिम वोट बैंक के तुष्टिकरण को कारण बताया।
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मार्कण्डेय काटजू ने इस्लामी कट्टरवादियों को लताड़ |
काटजू ने कहा कि पत्रकार आरफा खानम शेरवानी का सेकुलरिज्म ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर के निर्माण का समर्थन करने तक ही सीमित है। उन्होंने पूछा कि क्या वो मदरसों, मौलानाओं, शरिया और बुर्का का विरोध कर सकती हैं, जिन चीजों ने मुसलमानों को हमेशा पिछड़ा बनाए रखा। उन्होंने कहा कि आरफा और अयूब अगर सच में सेकुलर हैं तो क्या वो इन चीजों को हटाने का समर्थन करते हुए मुसलमानों को आधुनिक बनाने की कोशिश कर सकती हैं।
आरफा ने यह मानने से इनकार कर दिया था कि तबलीगी जमात वाले महिलाओं के साथ बदसलूकी या उनका शोषण कर सकते हैं। उसने कहा था कि जमाती नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोग हैं, जो मजहब/समाज की सेवा के लिए दुनियादारी, यहॉं तक कि अपने परिवार से भी दूर रहते हैं।
#BanBurqua— Major Surendra Poonia (@MajorPoonia) August 9, 2020
Before labelling me Izlamophobe
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इसी तरह राणा अयूब ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया था, जिसमें एक मस्जिद को जलाया जा रहा था। अयूब ने इस वीडियो को दिल्ली का बता कर पेश किया था।
अवलोकन करें:-.
1 comment:
भूत पूर्व न्यायाधीश श्री मार्कण्डेय काटजू ने बाम पंथी सेक्युलरिज्म के बारे में को अपना दृष्टिकोण रखा है उसमे सत्यता प्रतीत होती है। मुस्लिम कुरीतियों के लिए बाम पंथी पार्टियां एवम् मीडिया का चुप रहना मुस्लिम कट्टर समर्थक पार्टियों के लिए चुनावी तुष्टिकरण ही है।
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