बिहार चुनाव : राहुल का भाषण लीक

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। चुनाव प्रचार को लेकर स्टार प्रचारकों की लिस्ट भी बन गई है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी बिहार में 6 रैलियां कर सकते हैं। कांग्रेस नेता राहुल की किस चरण में कितनी रैलियां होंगी यह तरीख तय होने के बाद पता चलेगा, लेकिन हम आपको अभी बता दे रहे हैं कि बिहार चुनाव में राहुल गांधी क्या-क्या झूठ बोलने वाले हैं। बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी का भाषण लीक हो गया है। यानि राहुल अपने सलाहकारों द्वारा दिए दिशा-निर्देश और उनके भ्रमित भाषणों पर बोल अपनी और कांग्रेस को जरुरत से ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसी आधार पर राहुल के अध्यक्ष बनने पर हो रही चर्चाओं पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कटाक्ष करते कहा था कि "जितनी जल्दी हो राहुल बाबा को अध्यक्ष बनाइए।" राहुल बिहार चुनाव में इन तीन मुद्दे को उठाकर मतदाताओं को बरगलाने की कोशिश करेंगे। 

राहुल का पहला झूठ
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लिए 8000 करोड़ का वीवीआईपी बोइंग 777 प्लेन खरीदा है। करदाताओं के आठ हजार करोड़ रुपये से आरामदायक और आलीशान एयर इंडिया का जहाज खरीदा गया है। जबकि सच्चाई यह है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वीवीआईपी के लिए अमरीकी राष्ट्रपति के विशेष विमान एयरफोर्स वन की तर्ज पर मिसाइल हमले से बचने जैसे सिक्यॉरिटी फीचर्स से सुसज्जित दो एयर इंडिया वन (बोइंग 777) विमान तैयार करवाए गए हैं। एक अनुमान है कि इन दोनों विमानों की कीमत करीब 8000 करोड़ रुपये है। इस तरह से एक विमान की कीमत करीब 4000 करोड़ रुपए है। प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति किसी भी पार्टी से चुनकर बनेंगे, इसका इस्तेमाल करेंगे।

दूसरा झूठ
बिहार चुनाव में राहुल गांधी चीन का मुद्दा जरूर उठाएंगे। राहुल गांधी हर रैली में इस बात का जिक्र करेंगे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि हिंदुस्तान की जमीन किसी ने नहीं ली, लेकिन चीन ने हमारी 1000 वर्ग किलोमीटर जमीन हड़प ली है। जबकि राहुल गांधी को मालूम है कि चीन ने भारत के हजारों वर्गकिलोमीटर जमीन पर तब कब्जा किया था जब उसके नाना जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। क्या राहुल यह भूल गए कि 1962 के युद्ध में इसी चीन के हाथों भारत की शर्मनाक पराजय हुई थी और हिन्दी-चीनी भाई-भाई के माओत्से तुंग और नेहरू के नारे के बीच चीन ने हमला कर हजारों वर्गमील भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था।

तीसरा झूठ
इसके साथ ही राहुल अपनी रैली में किसानों से जुड़ा मुद्दा उठाएंगे। राहुल रैली को संबोधित करते हुए कहेंगे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते है कि किसान अपना माल कहीं भी बेच सकता है। जब सड़क नहीं होगी तो कहां जाएगा, कैसे जाएगा किसान? सड़क बनी मंडी टैक्स से और मंडी टैक्स आपने खत्म कर दिया, मतलब सड़कों को आपने खत्म कर दिया। जबकि सच्चाई यह है कि आजादी के 60 साल बाद भी देश के किसान आत्महत्या करने को मजबूर थे और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के कारण उनकी आमदनी में काफी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही सड़क बनाने से मंडी टैक्स को कोई लेना देना नहीं है।

राहुल गांधी पहले भी कई बार झूठ का सहारा ले चुके हैं:-

जीएसटी पर देश से बोला झूठ
यूपीए के दस वर्षों के शासन में कांग्रेस पार्टी जीएसटी को लेकर तमाम राज्यों के बीच आम राय नहीं बना पाई थी, क्योंकि उसका जीएसटी को लेकर कोई साफ रुख नहीं था। 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनी तो उसने नए सिरे से जीएसटी को लेकर कवायद शुरू की और सभी राज्य सरकारों के बीच इसे लेकर सहमति बनाई। हालांकि राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सहमति नहीं दी थी, लेकिन हकीकत ये है कि कांग्रेस की सभी राज्य सरकारों ने जीएसटी का समर्थन किया और संसद के दोनों ही सदनों में कांग्रेस ने जीएसटी पास करवाने के लिए पक्ष में वोटिंग भी की थी।

नोटबंदी पर देश से बोला झूठ
राहुल गांधी ने कहा कि संघ परिवार के एक विचारक ने प्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी का विचार दिया था। राहुल गांधी का यह बयान सरासर झूठा है। सच्चाई यह है कि देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने और कालाधन पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने काफी गहन विचार-विमर्श के बाद नोटबंदी का ऐलान किया था। रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी भी कह चुके हैं कि नोटबंदी का पहला विचार फरवरी 2016 में आया था और सरकार ने विमुद्रीकरण के बारे में रिजर्व बैंक की राय मांगी थी। आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन ने पहले तो सरकार को मौखिक रूप से इस पर राय दी। बाद में एक विस्तृत नोट बनाकर सरकार को भेजा गया जिसमें स्पष्ट तौर पर बताया गया कि नोटबंदी की खामियां और खूबियां क्या-क्या हैं। इसके बाद पूरी तैयारी के साथ 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया गया था।

रायबरेली पर देश से बोला झूठ
राहुल गांधी कहते रहे हैं कि मोदी सरकार आने के बाद से रायबरेली के साथ भेदभाव किया जाता रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि यूपीए के जमाने में राजीव गांधी के नाम पर रायबरेली में जो पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी स्थापित की गई थी उसे पांच वर्षों के दौरान यूपीए सरकार ने महज 1 करोड़ रुपये दिए थे। जबकि मोदी सरकार ने पहले दो वर्षों में इस यूनीवर्सिटी के लिए 360 रुपये देकर इसे एक संस्थान के रूप में विकसित किया। इतना ही नहीं रायबरेली में स्थित इंडियन टेलीकॉम इंडस्ट्रीज नाम का संस्थान बंद होने के कगार पर था और वहां अफसरों को वेतन तक नहीं मिल पा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस संस्थान को 500 करोड़ आवंटित कर जीवनदान दिया और 1100 करोड़ रुपये का आर्डर भी दिलाया।

महंगाई पर देश से बोला झूठ
राहुल ने पिछले वर्ष गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान ट्विटर पर लिखा “जुमलों की बेवफाई मार गई, नोटबंदी की लुटाई मार गई, GST सारी कमाई मार गई बाकी कुछ बचा तो – महंगाई मार गई… बढ़ते दामों से जीना दुश्वार, बस अमीरों की होगी भाजपा सरकार?” राहुल गांधी ने इस सवाल के साथ एक इन्फोग्राफिक्स भी पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने गैस सिलिंडर, प्याज, दाल, टमाटर, दूध और डीजल के दामों का हवाला देकर 2014 और 2017 के दामों की तुलना में सभी चीजों के दामों में वास्तविक दामों से सौ प्रतिशत अधिक की बढ़ोतरी दिखा दी। जैसे ही राहुल गांधी ने ये ट्वीट किया, लोगों ने इस चालाकी को पकड़ लिया और फिर शुरू हो गई राहुल की खिंचाई।

महिला साक्षरता के आंकड़े पर बोला झूठ
राहुल गांधी ने गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पिछले वर्ष 3 दिसंबर को “22 सालों का हिसाब, गुजरात मांगे जवाब” अभियान के तहत प्रधानमंत्री मोदी से महिला सुरक्षा, पोषण और महिला साक्षरता से जुड़ा सवाल पूछा था, लेकिन इस सवाल के साथ राहुल ने जो इन्फोग्राफिक्स पोस्ट किया था उसमें गुजरात की महिला साक्षरता के उल्टे आंकड़े दिखाए थे। इन आंकड़ों में दिखाया गया था कि 2001 से 2011 के बीच गुजरात में महिला साक्षरता दर में 70.73 से गिरकर 57.8 फीसदी हो गई है।

राहुल गांधी ने जो आंकड़े दिखाए थे वे सरासर गलत थे। गुजरात में महिला साक्षरता की सच्चाई इसके उलट है। सही आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में 2001 से 2011 के बीच महिला साक्षरता में 12.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि 1991 से 2001 के बीच हुई 8.9 फीसदी बढ़ोतरी से काफी ज्यादा है। इतना ही नहीं इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर हुई साक्षरता वृद्धि से भी ये काफी ज्यादा है।

लोकसभा सदस्यों की संख्या पर बोला झूठ
वर्ष 2017 के सितंबर में राहुल गांधी जब अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित कर रहे थे, तो उन्होंने लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या ही 546 बता डाली। जबकि सच्चाई यह है कि लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 545 है, इनमें से 543 को जनता चुनती है और दो सदस्य (ऐंग्लो-इंडियन) मनोनित किए जाते हैं। आप ही बताइए जो शख्स इतने वर्षों से लोकसभा का सदस्य है, उसे लोकसभा के सदस्यों की संख्या तक नहीं पता है।

इंदिरा कैंटीन को बताया अम्मा कैंटीन
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में इंदिरा कैंटीन योजना की लॉन्चिंग में भी राहुल गांधी के ज्ञान पर सवाल उठ गए। पहली बार में उन्होंने योजना का नाम ही गलत बता दिया। जबकि यह योजना उनकी दादी यानी इंदिरा गांधी के नाम पर शुरू हो रही थी, लेकिन राहुल गांधी ने उसे तमिलनाडु में जयललिता के नाम पर चलने वाली अम्मा कैंटीन बता दिया। हालांकि, बाद में उन्हें भूल का अंदाजा हुआ और उन्होंने गलती सुधारने की कोशिश की। लेकिन जिस व्यक्ति में सामान्य ज्ञान का इतना अभाव है उससे क्या उम्मीद की जा सकती है?

महाभारत काल पर झूठ


जिस व्यक्ति को जनेऊ पहनने की तमीज ही न हो कि जनेऊ कोट के ऊपर नहीं पहना जाता, उसे क्या मालूम महाभारत को कितना समय हो गया और यह किस युग में हुई थी। इसीलिए राहुल को पप्पू कहा जाता है। हिन्दू नाम रखने से कोई हिन्दू नहीं बन जाता। दादा फ़िरोज़ जहांगीर मुसलमान, दादी इंदिरा गाँधी मुसलमान, इंदिरा का इस्लामिक नाम है मैमुना बेगम। माँ सोनिया गाँधी ईसाई।  

राहुल गांधी की हरकतें बतातीं हैं कि वे झूठे प्रचार के जरिए और निराधार खबरें फैला कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने को आतुर हैं। इसी क्रम में वे कई बार खुद के ‘अज्ञानी’ होने का भी सबूत दे देते हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस ट्वीट को देखिए-

दरअसल अपने ट्वीट में महाभारत काल का उदाहरण दे रहे हैं और इसे 1000 साल पहले की घटना बता रहे हैं। साफ है कि इस ट्वीट से एक बात साबित हो जाती है कि राहुल गांधी न सिर्फ झूठ फैलाते हैं बल्कि वे अज्ञानी भी हैं। कौरव-पांडव की बात करने वाले राहुल को ये भी नहीं पता है कि महाभारत काल पांच हजार वर्ष से अभी अधिक पुराना है। इस ट्वीट से ये भी पता लग जाता है कि लोग उन्हें गंभीरता से क्यों नहीं लेते हैं?

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