कांग्रेस में आंतरिक चुनाव और गैर गांधी अध्यक्ष की मांग को लेकर पार्टी से निष्कासित किए गए पूर्व प्रवक्ता संजय झा ने एक बार फिर कांग्रेस को घेरते हुए किसान बिल पर ‘अवसरवादी राजनीति’ से बचाने की सलाह दी है। उन्होंने बुधवार को ट्वीट करते हुए लिखा कि किसान बिल पर कांग्रेस ने अवसरवादी राजनीति के साथ एक भयानक गलती कर रही है। हमने 2019 के चुनाव घोषणापत्र में किए गए अपने वादे पर पानी फेर दिया है। यह अप्रत्याशित है और अगर हम डील-ब्रेकर हैं तो हमने खुद एमएसपी को लेकर कानून क्यों नहीं बनाया?
The Congress is making an awful mistake with opportunistic politics on Farm Bills.
— Sanjay Jha (@JhaSanjay) December 2, 2020
We have reversed our promise made in the Election Manifesto of 2019. That is unprincipled.
And why didn’t we make MSP into a law ourselves earlier if that is a deal-breaker?
Poor leadership.
पँजाब चुनाव की खातिर
— आत्माराम (@Sachida68400966) December 2, 2020
"काँग्रेस और उसके गुलामो" की मजबूरी तो देखिये साहब...
"इंदिरा ठोक दी" कहने वाले का भी
समर्थन करना पड़ रहा है..🤣
Totally agree. I have seen Kapil Sibal's video so many times & it hurts me to see them misguiding the poor farmers now.
— Krushna (@govindagopala) December 2, 2020
मोदी राज का असर,
— राजदेव सिंह (@rds_singh) December 2, 2020
जो किसान आत्महत्या करता था
वो आज 6 महीने का राशन साथ लेकर आया है
Folks, in our Congress Manifesto for 2019 Lok Sabha elections, we had ourselves proposed abolition of APMC Act and making agricultural produce free from restrictions. This is what Modi government has done in the farmers bills. BJP and Congress are on the same page here.
— Sanjay Jha (@JhaSanjay) September 18, 2020
इससे पहले 18 सितंबर, 2020 को भी संजय झा ने ट्वीट कर कांग्रेस पर हमला बोला था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, ‘साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने भी अपने घोषणापत्र में एपीएमसी अधिनियम को खत्म करने और कृषि उत्पादों को प्रतिबंधों से मुक्त करने की बात कही थी।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जो वादा अपने घोषणापत्र में किया था, वही मोदी सरकार ने पूरा किया है।
कांग्रेस की कार्यशैली पर संजय झा पहले भी प्रश्नचिन्ह लगाते रहे हैं:-
सही कह रहे हो झा जी,
— दलीप पंचोली🇮🇳 (@DalipPancholi) September 18, 2020
कांग्रेस जैसी घटिया, गिरी हुई पार्टी दुनियां में कहीं नहीं मिल सकती, इन्हें केवल विरोध करने के लिए विरोध करना है। जिस काम को करने का वादा इन्होंने अपने घोषणापत्र में किया था अब काम हो रहा है तो भी यह उसका विरोध कर रहे हैं। pic.twitter.com/h5UV8AH7O5
MSP is decided by CACP. That has not been scrapped. It is not even related to all the crops. Why should it be mentioned in the bills? It is a separate mechanism.
— पवन पाण्डेय ।। Pawan Pandey (@pawan_aflatoon) September 18, 2020
Yes, I remember how PM turned around in GST . It’s the same with everyone, you think differently when out of power and when in power!
— Don III (@doniii3) September 18, 2020
सही कह रहे हो झा जी,
— Indian (@iDesindian) September 18, 2020
कांग्रेस जैसी घटिया, गिरी हुई पार्टी दुनियां में कहीं नहीं मिल सकती, इन्हें केवल विरोध करने के लिए विरोध करना है। जिस काम को करने का वादा इन्होंने अपने घोषणापत्र में किया था अब काम हो रहा है तो भी यह उसका विरोध कर रहे हैं।
Congress party only opposes every decision of govt blindly.
— K.R.MANJUNATH (@krmanja123) September 18, 2020
PAN is must for the traders not farmers.
— L GURUMURTHY (@guru592006) September 18, 2020
My policy position is more than a tweet. https://t.co/LBRFA7zX67
— Sanjay Jha (@JhaSanjay) December 2, 2020
Aazaadi k baad nhi. Britishers aane k baad.
— Chuha (@IndiaKaPikachu) December 2, 2020
कांग्रेस ने किसान संगठनों के साथ केंद्र की मोदी सरकार की बातचीत से पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि वह कृषि से संबंधित तीनों ‘काले कानूनों’ को निलंबित करने और प्रदर्शनकारी किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की घोषणा करें। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि सरकार को सभी किसान संगठनों के साथ मन खोलकर बातचीत करना चाहिए और बिना किसी दिखावे और पूर्वाग्रह के मामले का समाधान निकालना चाहिए।
कांग्रेस राज में पुलिस फायरिंग से मरता किसान
अक्टूबर 1988 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसानों के आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 5 किसानों की जान गई थी. तब कांग्रेस के एनडी तिवारी मुख्यमंत्री थे।
मध्य प्रदेश में 19 साल पहले दिग्विजय सिंह राज में पुलिस की गोलियों से मारे गए थे 24 किसान। 12 जनवरी 1998 को मुलताई तहसील के सामने किसानों पर गोली चलाई गई. जिसमें दो दर्जन के लगभग लोग मारे गए थे।
मार्च 2007 में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस फायरिंग हुई थी, जिसमें 14 किसानों की मौत हो गई थी। उस वक्त लेफ्ट के बुद्धदेब भट्टाचार्य सीएम थे।
अगस्त 2010 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के टप्पल में किसानों के प्रदर्शन पर फायरिंग हुई थी, जिसमें तीन किसानों की मौत हुई थी। इसके बाद मई 2011 में भी गौतमबुद्धनगर के भट्टा पारसौल गांव में किसानों के प्रदर्शन पर पुलिस फायरिंग हुई थी, जिसमें 2 किसानों की जान गई थी. दोनों ही घटनाओं के वक्त यूपी की मुख्यमंत्री मायावती थी।
2012 में महाराष्ट्र के सांगली में गन्ना किसानों के आंदोलन पर भी गोली चली थी, जिसमें एक किसान की मौत हुई थी। उस वक्त महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी और पृथ्वीराज चव्हाण सीएम थे।

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